• Hindi News
  • Db original
  • Ajay And Urvin Of Gujarat Left Traditional Farming And Started Integrated Farming, Now Earning Lakhs, You Know The Whole Process

आज की पॉजिटिव खबर:खेती से कमाई नहीं हो रही तो तरीका बदलिए; इंटीग्रेटेड फार्मिंग से कम वक्त में लाखों कमा सकते हैं, जानिए पूरी प्रोसेस

4 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
उर्विन और अजय। दोनों इंटीग्रेटेड फार्मिंग करते हैं। - Dainik Bhaskar
उर्विन और अजय। दोनों इंटीग्रेटेड फार्मिंग करते हैं।

हमारे देश में बहुत पहले से खेती हो रही है। ज्यादातर लोगों का यह पेशा भी है, लेकिन दिक्कत यह है कि साल भर मेहनत करने के बाद भी किसानों को अच्छी कमाई नहीं हो पाती है। इसी वजह से ज्यादातर लोग खेती छोड़कर दूसरे शहरों में कमाने चले जाते हैं, लेकिन वहां भी उनके मन मुताबिक आमदनी नहीं हो पाती है। कोरोना के बाद तो ऐसे लोगों को और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

आज पॉजिटिव खबर में हम दो ऐसे किसानों की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर मल्टिपल क्रॉपिंग और इंटीग्रेटेड फार्मिंग की राह अपनाई और अब वे लाखों कमा रहे हैं...

पहली कहानी : हर सीजन में 5 से 6 लाख रुपए कमा रहे

गुजरात के राजकोट जिले के रहने वाले अजय हीरपारा का अनुभव भी खेती के लिए कुछ ऐसा ही था। उनका परिवार लंबे समय से पारंपरिक खेती कर रहा था। अच्छी खासी जमीन भी थी, लेकिन कमाई नहीं हो पाती थी। कभी फसल खराब हो जाती, तो कभी अच्छा प्रोडक्शन होने के बाद भी सही दाम नहीं मिल पाता था। सालभर मेहनत करने के बाद भी मुश्किल से घर-परिवार का खर्च निकलता था।

फिर अजय ने नए सिरे से प्लानिंग की और पारंपरिक खेती की बजाय मल्टिपल क्रॉपिंग और इंटीग्रेटेड फार्मिंग में हाथ आजमाया। उन्होंने अपनी 30 बीघा जमीन को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया और अनेक तरह की फसलें लगा दीं। इसका फायदा यह हुआ कि हर सीजन के हिसाब से उनके पास प्लांट हो गए और प्रोडक्शन भी बढ़ गया। आज उनके पास सीजनल सब्जियों के साथ मिर्च, प्याज,लहसुन, गेहूं और चना जैसी फसलें हैं। इससे हर सीजन में वे 5 से 6 लाख रुपए आसानी से कमा लेते हैं।

अजय ने 5 बीघे जमीन में मिर्च की खेती की है। एक सीजन में वे 50 मन (2000 किलोग्राम) से ज्यादा मिर्च का प्रोडक्शन कर लेते हैं।
अजय ने 5 बीघे जमीन में मिर्च की खेती की है। एक सीजन में वे 50 मन (2000 किलोग्राम) से ज्यादा मिर्च का प्रोडक्शन कर लेते हैं।

इतना ही नहीं इस खेती में उनकी लागत भी काफी कम है। उन्हें बाहर से कैमिकल फर्टिलाइजर या दूसरी चीजें नहीं खरीदनी पड़ती हैं। वे खुद ही ऑर्गेनिक खाद तैयार करते हैं। देशी गुड़, चने का आटा, बाजरे का आटा, गोमूत्र, गोबर और छाछ मिलाकर खेतों में डालते हैं और फसलों पर इसका छिड़काव भी करते हैं। इससे प्रोडक्शन भी बढ़िया होता है और प्रोडक्ट की क्वालिटी भी अच्छी होती है।

दूसरी कहानी : जमीन दो एकड़, कमाई सालाना 10 लाख

गुजरात के ही सूरत में रहने वाले उर्विन पटेल ने भी ऐसी ही पहल की है। वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर इंटीग्रेटेड फार्मिंग कर रहे हैं। महज 2 एकड़ जमीन पर वे हल्दी, बैंगन, टमाटर सहित 10 तरह की फसलें उगा रहे हैं। इससे सालाना 10 लाख रुपए उनकी कमाई हो रही है।

उर्विन कहते हैं कि हमारे पास जमीन कम थी। नॉर्मल खेती से साल में दो-तीन फसल ही ले पाते थे। इससे उतनी कमाई नहीं हो पाती थी। इसलिए मैंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर काम करना शुरू किया, ताकि कम जमीन में ज्यादा से ज्यादा फसलें लगाई जा सकें और सालों भर प्रोडक्शन हो सके। अब इससे हमें रेगुलर आमदनी भी मिलती है।

उर्विन अपने पिता के साथ मिलकर हल्दी सहित 10 से ज्यादा फसलों की खेती कर रहे हैं।
उर्विन अपने पिता के साथ मिलकर हल्दी सहित 10 से ज्यादा फसलों की खेती कर रहे हैं।

उर्विन बताते हैं कि पहले जहां साल में मुश्किल से एक लाख रुपए भी कमाई नहीं होती थी, वहीं पहले ही साल हमारी कमाई 4-5 लाख रुपए तक पहुंच गई। इसके बाद अगले साल हमने खेती का दायरा बढ़ा दिया। हल्दी-मसालों और सब्जियों के साथ ही फलों की खेती भी हम करने लगे। इससे हमारा प्रोडक्शन बढ़ गया और हमारी कमाई 10 लाख रुपए तक पहुंच गई।

अगर खेती में आपकी दिलचस्पी है तो तीसरी कहानी का किरदार आप खुद बनिए...हम आपको पूरी प्रोसेस समझा रहे हैं...

मल्टिपल क्रॉपिंग फार्मिंग क्या होती है?

आमतौर पर किसान एक सीजन में एक ही फसल की खेती करते हैं। अगर अलग-अलग फसलों की खेती करते भी हैं तो उसके लिए दूसरी जमीन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मल्टिपल क्रॉपिंग में एक साथ एक ही जमीन पर दो या दो से अधिक फसलों की खेती होती है। इसमें सीजन, फसलों की वैराइटी और उनकी ऊंचाई को ध्यान में रखते हुए फसलों का चयन होता है।

किन फसलों को मल्टिपल क्रॉपिंग में आजमा सकते हैं?
मल्टिपल क्रॉपिंग में लगभग सभी फसलों की खेती की जा सकती है। बस उनकी टाइमिंग का खास ध्यान रखना होता है। जैसे सर्दी का सीजन है तो आलू, प्याज जैसी फसलों को आप जमीन के नीचे लगा सकते हैं। मार्च-अप्रैल में हल्दी के बीज भी लगा सकते हैं। अगर मसालों की खेती करनी है तो अदरक और लहसुन भी लगा सकते हैं। इन सभी फसलों का प्रोडक्शन जमीन के नीचे होता है।

इसके बाद आप उन फसलों को शामिल करिए जो जमीन के ऊपर फलती हैं। जैसे, दलहन फसलें, टमाटर, मिर्च और बाकी सब्जियां। इसके अलावा लतर वाली सब्जियां जैसे लौकी, करेला और नेनुआ की भी खेती की जा सकती है। इतना ही नहीं अधिक ऊंचाई वाले प्लांट जैसे पपीता, नींबू, आम, अमरूद की भी खेती की जा सकती है।

मल्टिपल फार्मिंग करने की प्रोसेस क्या है?
सबसे पहले सीजन के हिसाब से, वैराइटी के हिसाब से, टाइमिंग और फसलों की ऊंचाई के हिसाब से फसलों की लिस्ट तैयार कर लीजिए। इसके बाद खेत तैयार कीजिए। उसमें गाय का गोबर और ऑर्गेनिक खाद अच्छी तरह पूरी जमीन पर मिला दीजिए। फिर दो से तीन फीट का गैप रखते हुए अपने खेत में कई मेढ़ तैयार कीजिए। उनमें आलू, लहसुन, अदरक, गाजर, मूली जैसी फसलें लगा दीजिए।

इसके बाद मेढ़ों के बीच जो गैप हैं, उनमें गेहूं और दलहन फसलें लगा दीजिए। इसी तरह कुछ हिस्से में दूसरी सब्जियां यानी टमाटर, बैगन, गोभी लगाइए। बीच-बीच में अधिक ऊंचाई वाले प्लांट लगा दीजिए। इसके अलावा जमीन से 8-10 फीट ऊपर मचान बनाकर लौकी, करेला जैसी फसलों की खेती की जा सकती है। बस ध्यान रखना होगा कि नीचे की फसलों को धूप मिल रही हो। इतना ही नहीं कई लोग तो मेढ़ों के ऊपर भी कम ऊंचाई वाली फसलें लगा देते हैं।

अब बात इंटीग्रेडेट फार्मिंग की
इंटीग्रेटेड फार्मिंग मल्टिपल फार्मिंग का एडवांस रूप है। अगर आप खेती को बिजनेस के लिहाज से करना चाहते हैं तो यह सबसे बेहतर विकल्प है। इसमें एक ही समय में न सिर्फ कई फसलों का लाभ लिया जाता है, बल्कि खेती से जुड़ी और एक-दूसरे की पूरक चीजों को भी इसमें शामिल किया जाता है। इसमें नर्सरी, बागवानी गोपालन, डेयरी फार्मिंग, मछली पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती जैसी चीजें शामिल होती हैं यानी एक ऐसा सिस्टम, जो हमारी लाइफ की बुनियादी जरूरतों को कवर कर सके।

अब इसकी प्रोसेस भी समझ लीजिए
मान लीजिए आपके पास 4 एकड़ जमीन है, तो सबसे पहले उसे चार से पांच भागों में बांट दीजिए। एक हिस्से में खेती करिए। इसमें सीजन और वैराइटी के हिसाब से मल्टिपल फार्मिंग करिए। दूसरे हिस्से में डेयरी फार्मिंग करिए, अपने बजट के हिसाब से गाय-भैंस पालिए। तीसरे हिस्से की जमीन पर तालाब खुदवा लीजिए। इसमें मछली पालन करिए। फिर बाकी जमीन पर मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन करिए।

इंटीग्रेडेट फार्मिंग मुनाफे का सौदा क्यों है?
पहली बात तो मल्टिपल क्रॉपिंग की तरह एक ही वक्त में एक ही जमीन से कई फसलों का लाभ ले पाएंगे। दूसरी बात दूध, घी, शहद, अंडे, मछली, फ्रूट्स जैसे प्रोडक्ट भी आपके पास होंगे। जाहिर है इससे मुनाफा काफी ज्यादा होगा। सबसे अहम बात कि ये सभी एक-दूसरे के पूरक हैं यानी आपकी फसल के लिए पानी और खाद बाहर से नहीं लाना पड़ेगा। आपके तालाब और गाय-भैंस इसकी जरूरत पूरी कर देंगे।

इसी तरह पशुओं के चारे के लिए आपको कहीं से कुछ आउट सोर्स नहीं करना पड़ेगा। आपके खेत की फसलों से उनका चारा निकल जाएगा। इसी तरह तालाब में आप मछली पालन कर सकेंगे और उनके लिए भोजन की व्यवस्था मुर्गियों के वेस्ट से हो जाएगी। इसी तरह मधुमक्खी पालन करते हैं तो उन्हें हर तरह के प्लांट के फूल आसानी से मिल जाएंगे।

अगर आप इसे और अधिक एडवांस लेवल पर ले जाना चाहते हैं तो तालाब में मछली पालन के साथ ही मोतियों की खेती भी करिए। इसमें न के बराबर अतिरिक्त खर्च आएगा कमाई भरपूर होगी। इससे आगे बढ़कर आप गोबर गैस और वर्मीकम्पोस्ट का काम भी शुरू कर सकते हैं।