CDS का हेलिकॉप्टर क्रैश:एक दिन भी खाली नहीं रह सकता है रावत का पद, नई नियुक्ति तक वाइस CDS ने संभाली कमान

नई दिल्लीएक वर्ष पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद खाली हुआ पद देश की सुरक्षा के लिहाज से सर्वोच्च है। प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर रक्षा मंत्रालय तक सब शोकाकुल हैं, स्तब्ध हैं। अब इस पद की कमान किसके हाथ होगी? मंथन जारी है, लेकिन नए CDS की नियुक्ति में कम से कम 5-7 दिन तो लगेंगे ही। तो क्या तब तक यह पद खाली रहेगा?

शौर्य चक्र विजेता और रिटायर्ड कर्नल डीपीके पिल्लई से जब यह सवाल पूछा तो वे कहते हैं- 'जैसे पूरे देश में शोक है वैसे ही सेना में भी है, लेकिन सेना की ट्रेनिंग ऐसी होती है कि जहां कुछ भी सोचने से पहले देश की सुरक्षा को तरजीह दी जाती है। लिहाजा यह पद एक दिन भी खाली नहीं रह सकता।

खुद ब खुद CDS हेडक्वार्टर में जनरल बिपिन रावत के बाद के नंबर दो अधिकारी एअर मार्शल बलभद्र राधा कृष्ण के कंधों पर यह जिम्मेदारी आ गई है। नए CDS की नियुक्ति तक वे ही इस पद से जुड़े सभी फैसले लेंगे। इस पद से जुड़े किसी अहम काम को टाला नहीं जा सकता। इस तरह के किसी फैसले में न तो कोई देरी हो रही और न ही कोई हीला हवाली।'

बिपिन रावत जिस पद पर थे, वह पद दो साल से भी कम पुराना है, लेकिन बेहद मंथन के बाद इस पद को गढ़ा गया था। दरअसल, इस पद के गढ़ने के लिए तर्क दिया गया था कि युद्ध जैसी आपातकाल स्थिति में तीनों सेनाओं की कमांड अगर एक संस्था के हाथ होगी तो सेना तीनों मोर्चों पर तालमेल के साथ दुश्मन को घेर सकेगी। इसके लिए इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड की नींव रखी गई। CDS पद का यह प्रमुख मकसद था।

आम बोलचाल में समझें क्या है यह इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड?

CDS रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार दिल्ली में CCS की मीटिंग की। इसमें गृह मंत्री और रक्षा मंत्री भी मौजूद रहे।
CDS रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार दिल्ली में CCS की मीटिंग की। इसमें गृह मंत्री और रक्षा मंत्री भी मौजूद रहे।

रिटायर्ड कर्नल डीपीके पिल्लई बताते हैं कि तीनों जल, थल, वायु सेना के अलग-अलग अधिकारी होते हैं। अलग-अलग उनका रोडमैप होता है। उनके कार्य करने की शैली और मोड भी अलग होते हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का जिम्मा इन तीनों सेनाओं को एक छतरी के नीचे लाना है। इस पर काम तेजी से किया गया है।

इस सिस्टम को समझने के लिए सिनेमा घर या थिएटर को समझना होगा। बिल्कुल वैसे ही जैसे सिनेमाघर में एक स्क्रीन होती है। आप सभी किरदारों को एक साथ देखते हैं। हर किरदार का काम अलग, लेकिन एक फिल्म बने उसके लिए सभी एक दूसरे के अभिनय को समझते हुए एक दूसरे के साथ कोआर्डिनेशन से काम करते हैं। डायरेक्टर समेत एक टीम इस कोआर्डिनेशन पर काम करती है। कुछ ऐसा ही तीनों सेनाओं के बीच जनरल रावत कर रहे थे।

वे तीनों सेनाओं की अलग-अलग क्षमताओं और उनकी भूमिका को एक छतरी के नीचे ला रहे थे, ताकि वे एक बेहतर कोआर्डिनेशन के साथ एकमात्र मकसद देश की सुरक्षा पर फोकस कर सकें। तीनों मोर्चों पर तैनात सेना को अगर पता होगा कि उनके दूसरे पार्टनर किस रणनीति के तहत वार करने वाले हैं तो वे बेहद परफॉर्म कर पाएंगे।

अभी फिलहाल 4 नए थिएटर कमांड पर काम चल रहा है। थल सेना के पास तीन और नौ सेना के पास एक कमांड की जिम्मेदारी है। सेना के अलग अलग अंगों की जरूरतों को देखते हुए उनके लिए अलग-अलग थिएटरों पर काम चल रहा है। जिससे पहले हर सेना के काम को अलग-अलग थिएटर के तहत लाकर एकीकृत किया जाए। फिर उन्हें एक थिएटर यानी एक छतरी के नीचे लाकर एक नजर यानी CDS की नजर से देखा जाए।

हथियारों को अपग्रेड, सेना को मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस करने के लिए बनी थी एक्सपर्ट टीम

पिछले साल 1 जनवरी की रावत को CDS की कमान सौंपी गई थी। उनकी लीडरशिप में अभी कई अहम प्रोजेक्ट पर काम हो रहे थे।
पिछले साल 1 जनवरी की रावत को CDS की कमान सौंपी गई थी। उनकी लीडरशिप में अभी कई अहम प्रोजेक्ट पर काम हो रहे थे।

सेना को अपग्रेड करने और मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस करने के लिए CDS की देखरेख में एक एक्सपर्ट टीम काम कर रही है। यह टीम दुनिया भर में सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पर नजर रखती थी और CDS की इनपुट देने का करती है। एडवांस सर्विलांस सिस्टम से लेकर दुनियाभर में हो रहे साइबर क्षमताओं के विकास पर इस टीम की गहरी नजर है।

आर्मी के हथियारों को अपग्रेड करने के लिए स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल पर प्राइवेट कंपनियों को विदेशी हथियार निर्माताओं के साथ मिलकर फाइटर जेट्स, हेलिकॉप्टर, सबमरीन और टैंकों को साझा तौर पर बनाने का काम चल रहा था। हालांकि, यह बेहद शुरुआती स्तर पर था। सेना के पूरी तरह से आधुनिकीकरण के लिए बिपिन रावत ने करीब 7-8 साल लगने का अनुमान लगाया था। सेना के टैंक, उनके कई हथियार पुराने हो चुके हैं। उन्हें रिप्लेस करना, अपग्रेड करना यह सब काम CDS की निगरानी में चल रहा था।

एडवांस सर्विलांस सिस्टम पर भी जोरों से काम चल रहा था। सेना को आधुनिक करने के लिए इस सिस्टम पर काम को प्राथमिकता के साथ अंजाम दिया जा रहा था। बॉर्डर पर निगरानी, सीमा पार दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखने के लिए नई-नई टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा था। साइबर क्षमताओं को लेकर एक्सपर्ट टीम बनाई गई थी, जो लगातार दुनियाभर में हो रहे अपडेट्स पर नजर रखती थी और उसके हिसाब से भारतीय सेना को अपडेट करने के लिए इनपुट दे रही थी।

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