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महिंद्रा थार के ब्रांड बनने की कहानी:वर्ल्ड वॉर के लिए तैयार स्पेशल जीप बच गईं तो महिंद्रा उसे भारत लाए; जानिए 7 दशक में कैसे बनी मौजूदा थार

2 महीने पहले

आप सड़क पर चल रहे हैं। बगल से महिंद्रा थार गुजर जाती है। आप पलटकर ऐसे देखते हैं मानो वो कह रही हो- कौन है जिसने थार को मुड़कर नहीं देखा। थार को ये स्वैग एक दिन में हासिल नहीं हुआ। इसकी जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध और अमेरिका तक फैली हुई हैं।

आज की ब्रांड कहानी में हम बता रहे हैं महिंद्रा थार की कहानी। कैसे वर्ल्ड वॉर के दौरान तैयार जीप भारत लाई गई, वक्त से साथ इसमें बदलाव हुए और इंडिया की फेवरेट ऑफ रोड कार बन गई?

द्वितीय विश्व युद्ध और हालात की मांग
द्वितीय विश्व युद्ध की बात है। अमेरिकी सेना को एक ऐसा व्हीकल चाहिए था जो हर तरह के इलाकों में चल सके, जो टैंक या ट्रक जितना हैवी न हो और जिसे एअर ड्रॉप किया जा सके। देशभर की ऑटोमोबाइल कंपनियों से डिजाइन मंगवाए गए। शुरुआती डिजाइन बैंटम कंपनी ने दिया।

अमेरिका को कोई ऐसा सप्लायर चाहिए था, जिसके पास बड़ी संख्या में कार बनाने की क्षमता हो। Willy और Ford कंपनी ने भी अपने डिजाइन पेश किए और उस पर मुहर लग गई। Willy ने 1940 में जीप ट्रेडमार्क रजिस्टर करवाया। वर्ल्ड वार के दौरान करीब 6 लाख कारें बनाईं।

Willy की जीप भारत लाए महिंद्रा
1944 में विश्व युद्ध खत्म हो गया। अमेरिकी सेना ने डिमांड कम कर दी। Willy ने बची हुई गाड़ियां आम लोगों को बेचना शुरू कर दिया। मॉडल का नाम दिया- CJ-2A। इसकी बिक्री अच्छी नहीं हो रही थी। ऐसे में भारत के दो बिजनेस टाइकून जेसी महिंद्रा और केसी महिंद्रा अमेरिका पहुंचे।

उन्होंने Willy की जीप को भारत में इंपोर्ट करने का सौदा पक्का कर लिया। 1949 में महिंद्रा इन जीप को इंपोर्ट करके भारत में बेचने लगा। दूसरी गाड़ियों के मुकाबले जीप भले ही सस्ती थी, लेकिन ये अभी भी भारत के आम लोगों की पहुंच से दूर थी।

महिंद्रा ने खुद बनानी शुरू की जीप
1960 के शुरुआती दिनों में महिंद्रा ने Willy के साथ एक और करार किया और CJ-3A को भारत में बनाने का लाइसेंस हासिल कर लिया। इससे भारत में इसकी कीमत कम हो गई और उस दौर में भारत के 25% कार मार्केट पर इसका कब्जा हो गया।

बदलावः लेफ्ट टु राइट, पेट्रोल टु डीजल
ये जीप अमेरिका से इंपोर्ट होती थी, इसलिए 1968 तक इनकी ड्राइविंग लेफ्ट हैंड होती थी। 1969 में महिंद्रा ने इसे राइट हैंड ड्राइव कार बनाया। शुरुआती दिनों में सिर्फ पेट्रोल इंजन होता था। 1970 के दशक में महिंद्रा ने डीजल इंजन पर फोकस किया। महिंद्रा CJ-3B में B-275 डीजल इंजन लगाया गया। महिंद्रा ने करीब 40 साल तक CJ-3B जीप के अलग-अलग वर्जन का प्रोडक्शन किया।

21वीं सदी और घटता क्रेज
21वीं सदी के शुरुआती सालों में बोलेरो, स्कॉर्पियो की वजह से जीप की पॉपुलैरिटी कहीं खोती जा रही थी। इंडियन आर्मी, जो आजादी के बाद से महिंद्रा जीप की लॉयल कस्टमर थी, वो भी अब जिप्सी की तरफ शिफ्ट हो रहा थी। कार के शौकीनों के लिए भी जीप में वो चार्म नहीं दिखता था। ऐसे में एक 'ऑफ रोड' कार के लिए महिंद्रा को पॉजिटिव डायरेक्शन की जरूरत थी।

महिंद्रा ने लॉन्च की 'खिचड़ी कार' यानी थार
अक्टूबर 2010 में महिंद्रा थार लॉन्च हुई। ये स्कॉर्पियो, मेजर और CJ-5 से इंस्पायर्ड एक 'खिचड़ी कार' थी। इसके लुक एंड फील ने ऑफ रोड ड्राइव के शौकीनों को अपनी तरफ आकर्षित किया।

हालांकि अभी भी ये रोजाना के इस्तेमाल और सेफ्टी इश्यू की वजह से बिक्री में पीछे थे। 2015 में महिंद्रा ने इसे अपडेट करके री-लॉन्च किया। इससे थार ज्यादा आकर्षक बन गई।

कार को लेकर सरकार ने नए नियम जारी किए, जिसमें महिंद्रा थार फिट नहीं बैठती थी। इसलिए 2019 में अंतिम बची 700 कार बेचने के लिए कंपनी ने थार-700 एडिशन निकाला। इसमें आनंद महिंद्रा के सिग्नेचर और स्टिकर लगाकर बेचा गया।

अक्टूबर 2020 में महिंद्रा ने एक बार फिर थार का नया वर्जन लॉन्च किया है। लोग इसे हाथों-हाथ ले रहे हैं। एक साल के अंदर 75 हजार गाड़ियों की बुकिंग हो चुकी है और करीब 1 साल का वेटिंग पीरिएड चल रहा है। महिंद्रा थार 2020 का सीधा मुकाबला मारुती जिम्नी से है, जो जल्द ही लॉन्च होगी।