दो साल बाद आर्मेनिया-अजरबैजान में फिर लड़ाई:इस बार गैस की वजह से दोनों देश आमने-सामने, दोनों तरफ के 100 सैनिक मारे गए

3 महीने पहलेलेखक: पूनम कौशल

रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन के ताइवान पर हमले की आशंका के बीच एक और बड़े युद्ध का खतरा पैदा हो गया है। अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच सीमा पर जबरदस्त लड़ाई चल रही है। सोवियत संघ का हिस्सा रहे दोनों देश दो साल पहले भी नागोर्नो-काराबाख पर कब्जे के लिए जंग लड़ चुके हैं। इसमें अजरबैजान की जीत हुई थी। अभी चल रही लड़ाई नागोर्नो-काराबाख और आर्मेनिया के बीच सीमाई इलाके में हो रही है।

नागोर्नो काराबाख 4400 वर्ग किलोमीटर में फैला इलाका है। इसे अजरबैजान का हिस्‍सा माना जाता है, लेकिन उस पर आर्मेनिया के सपोर्ट वाले गुटों ने कब्‍जा कर लिया था।
नागोर्नो काराबाख 4400 वर्ग किलोमीटर में फैला इलाका है। इसे अजरबैजान का हिस्‍सा माना जाता है, लेकिन उस पर आर्मेनिया के सपोर्ट वाले गुटों ने कब्‍जा कर लिया था।

अजरबैजान के 50 और आर्मेनिया के 49 सैनिक मारे गए
अजरबैजान ने आर्मेनिया पर बिना उकसावे के हमले करने का आरोप लगाया है। देश के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि सरहदी इलाकों में आर्मेनिया ने हाल के दिनों में भारी गोलीबारी की और बारूदी सुरंगे बिछाई हैं। इन हमलों को रोकने में हमारे 50 जवानों की मौत हुई है। इनमें 42 सैनिक और 8 सीमा सुरक्षा बल के जवान हैं।

इस पर आर्मेनिया ने कहा कि अजरबैजान अंधाधुंध बमबारी कर रहा है। उसके जर्मुक, गोरिस और कापन शहरों पर हमला किया गया है। अजरबैजान आम लोगों को निशाना बना रहा है। प्रधानमंत्री निकोल पाशनियान ने बताया कि हमलों में अब तक 49 सैनिक मारे गए हैं।

आर्मेनिया के गेघारकुनीक प्रांत के गवर्नर के मुताबिक, अजरबैजान की गोलीबारी में 80 लोग घायल हुए हैं। इनमें आम नागरिक भी शामिल हैं।

अजरबैजान का दावा- सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया
अजरबैजान का कहना है कि वह सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। उसने आम नागरिकों पर हमले नहीं किए। जवाब में आर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अजरबैजान का नागरिकों को निशाना न बनाने का दावा गलत है। हमले के सबूत हैं। आर्मेनिया में अजरबैजान के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए हैं।

अगस्त की शुरुआत में भी दोनों देशों के बीच सीमा पर झड़प हुई थी। इसमें दोनों ही देशों ने अपने-अपने सैनिक मारे जाने का दावा किया था। तब से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा था। रह-रहकर झड़पें हो रहीं थीं।

नागोर्नो-काराबाख पर कब्जे के लिए दोनों देशों के बीच 30 साल से दुश्मनी है। 2020 की जंग के बाद इस इलाके पर अजरबैजान का कब्जा हो गया था।- फाइल फोटो
नागोर्नो-काराबाख पर कब्जे के लिए दोनों देशों के बीच 30 साल से दुश्मनी है। 2020 की जंग के बाद इस इलाके पर अजरबैजान का कब्जा हो गया था।- फाइल फोटो

गैस के दम पर आर्मेनिया की मदद रोकने की मंशा
आर्मेनिया का सबसे बड़ा समर्थक देश रूस इस समय यूक्रेन में घिरा है। खार्किव में यूक्रेन की सेना रूस को टक्कर दे रही है। रूस ने पश्चिमी देशों के लिए गैस सप्लाई बंद कर दी है। अजरबैजान बड़ा गैस उत्पादक देश है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अजरबैजान को लगता है कि वह गैस के दम पर यूरोपीय देशों को आर्मेनिया की मदद के लिए आगे आने से रोक सकता है। अजरबैजान दो साल पहले नागोर्नो-काराबाख इलाके को आर्मेनिया से छीन चुका है।

आर्मेनिया ने रूस से मदद मांगी
अजरबैजान से मुकाबले के लिए आर्मेनिया ने रूस से मदद मांगी है। रूस अगर आर्मेनिया को सैन्य मदद देता है, तो इस क्षेत्र में बड़े संघर्ष का खतरा पैदा हो जाएगा। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने खुलकर कहा है कि उनका देश रूस के साथ है। रूस आर्मेनिया के साथ बेहद संभलकर संबंध बनाए हुए है।

आर्मेनिया में रूस का सैन्य अड्डा भी है। रूस तेल और गैस के मामले में समृद्ध अजरबैजान के साथ भी बेहतर संबंध बनाए रखना चाहता है।
आर्मेनिया में रूस का सैन्य अड्डा भी है। रूस तेल और गैस के मामले में समृद्ध अजरबैजान के साथ भी बेहतर संबंध बनाए रखना चाहता है।

अजरबैजान का तुर्की के साथ सैन्य समझौता
अजरबैजान का तुर्की के साथ सैन्य समझौता है और तुर्की अपनी सैन्य ताकत के दम पर आर्मेनिया को बहुत कम समय में भारी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में आर्मेनिया को रूस से मदद मिलने की संभावना कम ही है। पिछली लड़ाई में भी रूस ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता तो की थी, लेकिन आर्मेनिया के साथ खुलकर सामने नहीं आया।

इसी बीच रूस के नेतृत्व वाले सुरक्षा सहयोग संगठन कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन ( CSTO) ने मंगलवार को मास्को में आर्मेनिया के कहने पर इमरजेंसी मीटिंग की है। CSTO नाटो की तरह ही है। इसके संविधान के तहत एक देश पर हमला सभी देशों पर हमला माना जाता है।

आर्मेनिया इसका सदस्य देश है और अजरबैजान इस संगठन को छोड़ चुका है। मास्को में मीटिंग के दौरान संकट दूर करने के लिए CSTO की प्रक्रिया के इस्तेमाल पर भी बात की गई।

अमेरिका ने दोनों देशों से बात की, तनाव कम करने की अपील
अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव ने मंगलवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप अर्दोआन से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने आर्मेनिया के साथ छिड़ी लड़ाई से बने हालात पर चर्चा की। तुर्की अजरबैजान का समर्थक है और एक तरह से उसके बड़े भाई की भूमिका में रहता है। अजरबैजान ने 2020 का युद्ध तुर्की के हथियारों के दम पर ही जीता था।

इसी बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन ने भी अजरबैजान के राष्ट्रपति से बात की है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री ने मौजूदा हालात पर चिंता जताई। ब्लिंकन ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने और तनाव कम करने की अपील की। अजरबैजान के राष्ट्रपति ने उन्हें बताया कि लड़ाई आर्मेनिया की उकसावे की वजह से छिड़ी है।

ब्लिंकन ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री से भी बात कर तनाव कम करने की अपील की। अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि हम अजरबैजान-आर्मेनिया के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

अजरबैजान की सेना अपने सरहदी जिले लाचिन में भारी हथियारों के साथ गश्त कर रही है।
अजरबैजान की सेना अपने सरहदी जिले लाचिन में भारी हथियारों के साथ गश्त कर रही है।

तुर्की के हथियारों ने अजरबैजान को ताकतवर बनाया
अजरबैजान को तुर्की का खुला समर्थन और सैन्य सहयोग मिलता है। दो साल पहले तुर्की के हथियारों और ड्रोन के दम पर ही अजरबैजान ने आर्मेनिया की सेना को तबाह किया था। अजरबैजान दुनिया का अकेला देश है, जिसकी सीमा रूस और ईरान से लगती है।

ईरान से सीमा सटी होने की वजह से अजरबैजान को इजराइल से भी सैन्य मदद मिलती रही है। इजराइल अजरबैजान के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखना चाहता है, ताकि जरूरत पड़ने पर ईरान से सटे उसके इलाके का इस्तेमाल कर सके।

2020 में 6 महीने चला था युद्ध
2020 में करीब छह महीने चले युद्ध के बाद अजरबैजान की एकतरफा जीत हुई थी। इस युद्ध में दोनों देशों के 6,500 से ज्यादा लोग मारे गए थे। युद्ध के बाद नागोर्नो-काराबाख पर अजरबैजान का कब्जा हो गया था। दोनों देशों के बीच इस इलाके को लेकर 30 साल तक युद्ध चला।

नागोर्नो काराबाख 4400 वर्ग किलोमीटर में फैला इलाका है। इसे अजरबैजान का हिस्‍सा माना जाता है, लेकिन उस पर आर्मेनिया के सपोर्ट वाले गुटों का कब्‍जा है। 1991 में यहां के लोगों ने अजरबैजान से आजादी और खुद को आर्मेनिया का हिस्सा घोषित कर दिया था। 1994 में नागोर्नो-काराबाख पर आर्मेनिया का नियंत्रण हो गया था। 2020 में अजरबैजान ने फिर इस इलाके को जीत लिया।

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