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  • As Soon As They Reach Here, The Pimps Who Tell The Merits Of Girls Fall Behind, Only Sex Workers Live In 7 Out Of 16 Streets.

गंगूबाई काठियावाड़ी वाले रेड लाइट एरिया से रिपोर्ट:यहां की 16 में से 7 गलियों में सिर्फ सेक्स वर्कर्स रहती हैं, गंगूबाई को मां कहती हैं; घरों में उनकी फोटो लगी

मुंबई9 महीने पहलेलेखक: राजेश गाबा

नाम- गंगूबाई काठियावाड़ी

असली नाम- गंगा हरजीवनदास

पता- हाउस नं. 10, रेशमवाली चॉल नंबर 39, ग्राउंड फ्लोर, कमाठीपुरा, 12वीं लेन, मुंबई

जन्मस्थान- काठियावाड़, गुजरात

डेट ऑफ बर्थ- मालूम नहीं

मृत्यु- 1 फरवरी 1980, मुंबई

शुक्रवार, दोपहर के 12 बज रहे हैं। मैं मुंबई में ग्लैमर की चकाचौंध के बीच निकल पड़ा हूं रेड लाइट एरिया कमाठीपुरा के लिए।

लोकल ट्रेन में अंधेरी से ग्रांट रोड स्टेशन उतरे। वहां से टैक्सी से 25 मिनट में कमाठीपुरा पहुंच गए।

दुकानों के ऊपर से झांकती हुई, सेक्स वर्कर्स…
कमाठीपुरा में दुकानें आम बाजार जैसी ही दिख रही हैं, लेकिन दुकानों के ऊपर से सेक्स वर्कर्स झांकती हुई नजर आ रही हैं। थोड़ा और आगे बढ़े तो दुकानों के सामने गलियों में रंग-रोगन की हुई सेक्स वर्कर्स का ग्रुप खड़ा है।

वे खुद को किसी शो केस में रखे शोपीस की तरह पेश कर रही हैं। धूप में भी दुकान के पास लगे शेड के नीचे खड़ी हैं, बस किसी ग्राहक का इंतजार है।

कुछ कदम और आगे बढ़ते हैं तो एक आदमी पास आता है। बोला, ‘सर मेरे पास फ्रेश माल है। आइए, मेरे साथ आइए…’

उस आदमी से जैसे-तैसे पीछा छुड़ाया, तो दूसरा आदमी आ गया। मैं समझ चुका हूं कि ये सब दलाल हैं, जो दलाली के लिए ग्राहकों को कोठे तक ले जाने का काम करते हैं।

तभी एक टोपी लगाया व्यक्ति कहता है, ‘आपको क्या चाहिए?’ मैंने कहा- ‘बस घूमने आए हैं’ तो वो बोला- ‘दाढ़ी सफेद हो गई हमारी यहां, इस इलाके में कोई घूमने नहीं आता। अभी अगली गली में जाकर किसी कोठरी में घुस जाओगे। अच्छी लड़की दिखाऊंगा मेरा नंबर ले जाओ।’

हम आगे बढ़े, क्योंकि हम जिस मकसद से इस रेड लाइट एरिया में आए थे, वह था गंगूबाई काठियावाड़ी की जिंदगी की पड़ताल करना। उनका जीवन इसी रेड लाइट एरिया में बीता।

हम ये जानने आए थे कि जो संजय लीला भंसाली के ट्रेलर में गंगूबाई काठियावाड़ी को दबंग औरत और वेश्या के रूप में दिखाया जा रहा है, हकीकत में वो कौन थीं, कहां रहती थीं, क्या करती थीं। क्या थी उनकी कहानी, यही जानने के लिए हम इस जगह पहुंचे। हमारे इस सफर पर आगे बढ़ने से पहले आप भास्कर पोल में अपनी राय दे सकते हैं...

कोने की दुकान वाला आपको पता बता देगा…

गंगूबाई के घर का पता पूछते हुए आगे बढ़े तो वहां मिले एक शख्स ने कहा, ‘सर आगे 12 नंबर गली में कोने पर दुकान वाला है वो आपको बता देगा।’

दुकानवाले ने बताया कि ‘गंगूजी ने बहुत सारे बच्चों को गोद लिया था। जो उसके साथ घर में ही रहते थे। इसी 12 नंबर गली में गंगूजी की गोद ली बेटी बबीता रहती है। बाकी लोग मुंबई में अलग-अलग जगह रहते हैं।

उनके साथ के बहुत से लोग अभी इस दुनिया में भी नहीं हैं। गंगूबाई का 1980 में दमा की बीमारी के चलते निधन हो गया था। बबीता से आपको सब जानकारी मिलेगी।’ हम उस संकरी गलियों में आगे बढ़ गए, जहां छोटी-छोटी कोठरियां थीं।

जो कारखाना है, वो गंगूबाई का आशियाना था…

वहां हमें टेलर की दुकान पर काम करने वाले ने बताया कि ‘सर ये सामने जो कारखाना है, यही था गंगूबाई का आशियाना। जो आप पता बता रहे हो हाउस नं. 10 रेशमवाली चॉल, नंबर 39, ग्राउंड फ्लोर, कमाठीपुरा 12वीं लेन यही है। अब यहां कारखाना चलता है। यहीं उनका दरबार लगता था। यहीं से वे कमाठीपुरा में वेश्यावृत्ति में लिप्त महिलाओं और दूसरे लोगों की मदद करती थीं। उनकी बेहतरी के लिए काम करती थी।’

आगे कमाठीपुरा की कईं गलियों में हमें इसी तरह तैयार लड़कियां दुकान के और घर के बाहर दिखीं। वहीं कुछ बूढ़ी औरतें खाट पर बैठी दिखीं। फिर हम बबीता के घर 12वीं गली में पहुंचे। एक छोटे से कमरे में एक कोने पर भगवान का छोटा सा मंदिर और वहीं पास में गंगूबाई की फोटो रखी है।

छोटे से कद की महिला बबीता और उनके बैंक में काम करने वाले बेटे विकास गौड़ा से मुलाकात हुई। बबीता कहती हैं, ‘गंगूबाई ने पालन पोषण किया, शादी की। मेरे लिए वह मां थी और हमारे बच्चों की नानी। हम जब छोटे थे तब से उनसे जुड़े थे। बच्चे, बड़े, लड़कियां सब मिलाकर 20 से 30 लोग घर में रहते थे। कमाठीपुरा की लड़कियों को जब भी कोई तकलीफ होती थी तो गंगू मां ही थाने में जाकर उनको छुड़ाती थीं। वह बहुत ही सादी सिम्पल सफेद साड़ी और ब्लाउज पहनती थीं, बिंदी नहीं लगाती थीं। गुरुवार को फकीर को पैसा बांटती थीं। रविवार को रेस में जाती थीं। उन्हें पत्ते खेलने का भी शौक था।’

अब तीन किस्सों में बताते हैं गंगूबाई की रियल स्टोरी

पहला किस्सा: वो हीरोइन बनने के लिए मुंबई आईं थीं…

गंगूबाई को अपनी नानी कहने वाले विकास चंद्र गौड़ा के मुताबिक, ‘वे हीरोईन बनने के लिए मुंबई आई थीं। जबकि हुसैन जैदी की किताब और फिल्म में दिखा रहे हैं कि रमणीक लाल ने उन्हें 500 रुपए में कोठे में बेचा, यह गलत है। रियल स्टोरी यह है कि गंगू मां जब मुंबई में हीरोइन बनने आईं थीं, तो उस बीच में उनके साथ कुछ प्रॉब्लम हुई, वो फंस गईं, लेकिन वो पढ़ी-लिखी थीं। उस वक्त नौंवी तक पढ़ी थीं।

तब उन्होंने सोचा कि मेरी जिंदगी तो खराब हो गई है, लेकिन अब मैं सबके लिए जिऊंगी। उन्होंने गरीब अनाथों के लिए काम शुरू किया। प्रॉस्टिट्यूशन में जिसको शादी करनी थी, उनकी शादी करवा दी। रेड लाइट एरिया में इन सब लड़कियों की वो मां बन गईं।’

दूसरा किस्सा: करीम लाला ने उन्हें बहन माना था…

पिक्चर में दिखाया जा रहा है कि गंगू मां के साथ डॉन करीम लाला के लोगों ने गलत काम किया, जबकि यह झूठ है। वे करीम लाला से इसलिए मिली थीं कि उनके लोग आकर यहां की लड़कियों को परेशान करते थे। इसी बात को लेकर गंगू मां करीम लाला के पास गईं और उन्हें अपनी प्रॉब्लम बताई। उन दोनों की इतनी जमी कि लाला ने गंगूबाई को अपनी बहन बना लिया।

तब लाला ने कहा कि अब आगे कोई परेशान करे तो मुझे बताना, मैं हूं। उनको यह बैक सपोर्ट था। गंगू मां ने इस सपोर्ट के जरिए ही रेड लाइट कई लड़कियों की शादी करवाई। आज वो अच्छी जिंदगी जी रही हैं।

तीसरा किस्सा: नेहरू से पूछा था, आप मुझसे शादी करेंगे तो ये सब छोड़ देंगे

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा वाकया यह है कि उस वक्त आंदोलन चला था कि कमाठीपुरा से प्रॉस्टिट्यूशन हटा दो। तब सारी लड़कियां गंगू मां के पास आईं। तब गंगू मां ने आजाद मैदान में भाषण दिया। रेड लाइट एरिया की लड़कियों के लिए खड़ी हुईं। दो बार दिल्ली से फोन आया।

कई लड़कियों के साथ गंगू मां उस वक्त के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी से मिलने गईं। तब नेहरू जी ने गंगू मां से कहा था कि वो शादी कर लें और इस गंदी जगह से चली जाएं। तब गंगू मां ने उनसे कहा था कि आप मुझे पत्नी के रूप में स्वीकार करने को तैयार हैं तो वह ये सब हमेशा के लिए छोड़ देंगी।

इस बात से नेहरू दंग रह गए और उन्होंने गंगूबाई के बयान से असहमति जताई। तब गंगूबाई ने कहा था कि प्रधानमंत्री जी, नाराज मत होइए। मैं सिर्फ अपनी बात साबित करना चाहती थी। उपदेश देना आसान है, लेकिन उसे खुद अपनाना मुश्किल है। मुलाकात खत्म होने पर नेहरू ने गंगूबाई से वादा किया कि वो उनकी मांगों पर ध्यान देंगे। प्रधानमंत्री ने जब खुद इस पर हस्तक्षेप किया तो कमाठीपुरा से वेश्याओं को हटाने का काम कभी नहीं हो पाया। अब तक कमाठीपुरा में रेड लाइट एरिया है।

फिल्म में गलत तरीके से दिखाया जा रहा…

बबीता कहती हैं, ‘यह जो फिल्म आ रही है गंगूबाई, उसमें मां को गलत तरीके से दिखा रहे हैं। पैसा कमाने के लिए वो लोग कुछ भी दिखा रहे हैं। हमसे कोई नहीं मिला। जब किताब छापी थी, तब वो किताब वाले आए थे। संजय लीला भंसाली नहीं मिले। मेरी मां समाज सेविका थीं। पूरी जिंदगी कमाठीपुरा के लोगों के लिए ही काम किया। उसे वे बदनाम करने के लिए फिल्म बना रहे हैं।’

फिल्म शुरू होने के बाद से फैमिली परेशानी में…

गंगूबाई की दत्तक पोती भारती कहती हैं कि यह फिल्म शुरू होने के बाद से हमें यहां से घर बदलना पड़ रहा है। हम फंक्शन्स में नहीं जा पा रहे। हमें अपने नंबर बदलने पड़ रहे हैं।

गंगूबाई की दत्तक पुत्री सुशीला शिवराम रेड्‌डी ने बताया कि गंगूबाई ने हमें गोद लिया था। वो मेरी मां हैं। अपनी मां को कोई डाकन नहीं बोलता। जो फिल्म आ रही है उसमें उन्होंने मेरी मां को डाकन और वेश्या बनाकर पेश किया है। ये गलत किया है।

कमाठीपुरा में दो हजार लड़कियां सेक्स वर्कर…

कमाठीपुरा में काम करने वाले एक NGO से पता चला कि आज भी कमाठीपुरा में दो हजार लड़कियां और औरतें देह व्यापार में एक्टिव हैं।

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