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आज की पॉजिटिव खबर:29 साल के आशीष ने जम्मू के ड्राय फ्रूट्स और हैंडीक्राफ्ट आइटम्स की देशभर में होम डिलीवरी शुरू की, पहले ही साल 40 लाख रु. का बिजनेस

नई दिल्ली9 महीने पहले

जम्मू-कश्मीर अपने खानपान और पहनावे के लिए जाना जाता है। खास कर वहां के ड्राय फ्रूट्स की डिमांड देशभर में होती है। जब भी हमारा कोई करीबी जम्मू जाता है या वहां से आता है, तो हम लोग उससे अखरोट और बादाम की डिमांड करते हैं। कई लोगों को वहां की स्पेशल कश्मीरी शॉल भी खूब भाती है, लेकिन असल दिक्कत ये है कि जम्मू के लोकल प्रोडक्ट देश के बाकी हिस्सों में न के बराबर ही मिलते हैं। जरा सोचिए, अगर आपको घर पर ही जम्मू-कश्मीर के प्रोडक्ट मिल जाएं तो कैसा रहेगा? जम्मू के रहने वाले आशीष वर्मा ने इसकी पहल की है। वे जम्मू-कश्मीर के लोकल प्रोडक्ट को अपने स्टार्टअप के जरिए देशभर में पहुंचा रहे हैं।

जम्मू के खास प्रोडक्ट की डिमांड

29 साल के आशीष ने MBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद 4 साल तक गुरुग्राम में नौकरी की। सैलरी और पोजीशन दोनों अच्छी थी। नौकरी छोड़ने या स्टार्टअप लॉन्च करने का उनका पहले से कोई प्लान भी नहीं था। आशीष कहते हैं कि दिल्ली, हरियाणा और दूसरे राज्यों के मेरे दोस्त मुझसे जम्मू के लोकल प्रोडक्ट की डिमांड करते थे। मैं अक्सर उनके लिए जम्मू से प्रोडक्ट भी लेकर जाता था। उधर, जम्मू जाने पर मुझे वहां के लोकल कारोबारियों की दिक्कतें देखने को मिलती थीं। वे अपने प्रोडक्ट देश के दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंचा पाते थे। ये दोनों चीजें मेरे दिमाग में अक्सर घूमती रहती थीं।

आशीष लोकल किसानों और वेंडर्स से उनके प्रोडक्ट कलेक्ट करते हैं। इसके बाद उनकी टीम पैकेजिंग और मार्केटिंग का काम करती है।
आशीष लोकल किसानों और वेंडर्स से उनके प्रोडक्ट कलेक्ट करते हैं। इसके बाद उनकी टीम पैकेजिंग और मार्केटिंग का काम करती है।

साल 2019 में आशीष जम्मू लौटे। वहां के लोकल कारोबारियों से बात की, खास कर के छोटे कारोबारियों से। उनकी दिक्कतों को समझा और मार्केट एनालिसिस की। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वे कुछ ऐसा प्लेटफॉर्म लॉन्च करेंगे जिससे कि जम्मू के लोकल प्रोडक्ट देश के दूसरे हिस्सों में भी लोगों को आसानी से मिल सके। हालांकि, इसकी प्लानिंग करते-करते उन्हें करीब एक साल का वक्त लग गया। इस बीच कोरोना महामारी ने भी उनके काम में दखल दे दिया।

30 हजार रुपए की लागत से की स्टार्टअप की शुरुआत

साल 2020 के अक्टूबर में आखिरकार आशीष ने अपना काम शुरू कर दिया। उन्होंने वॉट्सऐप ग्रुप और सोशल मीडिया के जरिए जम्मू के ड्राय फ्रूट्स और लोकल प्रोडक्ट की मार्केटिंग शुरू की। तब करीब 30 हजार रुपए उनके खर्च हुए। पहले उन्होंने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को प्रोडक्ट भेजे, उसके बाद जम्मू में लोगों को भेजना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके बारे में लोगों को जानकारी होती गई। आशीष कहते हैं कि जम्मू के लोग काम और नौकरी के सिलसिले में देश के दूसरे हिस्सों में रहते हैं, वे कई बार लंबे वक्त तक घर नहीं जा पाते हैं। ऐसे में वे अपने यहां के खास प्रोडक्ट्स को काफी मिस करते हैं। जब इन लोगों को मेरे स्टार्टअप के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने मुझसे कॉन्टैक्ट करना शुरू किया। करीब 6 महीने तक इस तरह काम चलता रहा।

आशीष के पास 50 से ज्यादा वैराइटी के प्रोडक्ट हैं। इसमें ड्राय फ्रूट्स से लेकर किचन के इस्तेमाल के सभी प्रोडक्ट शामिल हैं।
आशीष के पास 50 से ज्यादा वैराइटी के प्रोडक्ट हैं। इसमें ड्राय फ्रूट्स से लेकर किचन के इस्तेमाल के सभी प्रोडक्ट शामिल हैं।

आशीष कहते हैं कि 6 महीने काम करने के बाद मुझे यह फीडबैक मिल गया कि पैन इंडिया लेवल पर इसकी डिमांड है। सोशल मीडिया के जरिए कई लोग हमसे कॉन्टैक्ट भी कर रहे हैं। इसके बाद हमने jammubasket.com नाम से खुद की वेबसाइट तैयार की। उसमें सभी प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग की। कुछ कूरियर कंपनियों से टाइअप किया। इसके बाद जम्मू के बाहर अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग शुरू कर दी। जल्द ही हमें दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर, पटना सहित देशभर से ऑर्डर मिलने लगे।

कैसे करते हैं मार्केटिंग, क्या है बिजनेस मॉडल?

आशीष कहते हैं कि हम अपने सभी प्रोडक्ट लोकल वेंडर से ही लेते हैं। कई प्रोडक्ट हम लोग सीधे किसानों के फार्म हाउस से लेते हैं। इसके बाद उसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम करते हैं। यानी, प्रोडक्ट किसानों और लोकल वेंडर्स का होता है, लेबलिंग हमारी होती है। अभी हमारे साथ 20 से ज्यादा लोकल वेंडर्स जुड़े हैं। प्रॉसेसिंग और पैकेजिंग के बाद लोगों को ऑर्डर्स के मुताबिक प्रोडक्ट की डिलीवरी शुरू हो जाती है। हमारी कोशिश होती है कि एक हफ्ते के भीतर देश के किसी भी हिस्से तक प्रोडक्ट पहुंच जाए।

वे बताते हैं कि फिलहाल हमारे पास हर महीने 500 तक ऑर्डर्स आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर ऑर्डर्स ड्राय फ्रूट्स और ड्राय फूड आइटम्स के होते हैं। इस साल कोरोना के बाद भी हमारा टर्नओवर करीब 40 लाख रुपए रहा है। जिस तरह लोगों का रिस्पॉन्स मिल रहा है, आने वाले दिनों में हमारा आंकड़ा और अधिक बढ़ेगा। फिलहाल हमारे साथ 8 लोगों की टीम है। इसके साथ ही जरूरत और काम के मुताबिक हम लोग पार्ट टाइम एम्प्लॉई भी हायर करते हैं।

हाल ही में आशीष ने फूड प्रोडक्ट्स के साथ ही फैशन और हैंडीक्राफ्ट आइटम्स की मार्केटिंग भी शुरू की है।
हाल ही में आशीष ने फूड प्रोडक्ट्स के साथ ही फैशन और हैंडीक्राफ्ट आइटम्स की मार्केटिंग भी शुरू की है।

मार्केटिंग को लेकर आशीष कहते हैं कि हम लोगों ने शुरुआत सोशल मीडिया से की थी। बाद में हम अपनी वेबसाइट के जरिए प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने लगे। अलग से हमने मार्केटिंग के लिए कोई प्रमोशनल कैंपेनिंग नहीं की है। अभी तक जो भी है, हमारा खुद का ही नेटवर्क है। हर महीने 4 हजार से ज्यादा यूजर्स हमारी वेबसाइट पर आते हैं। इसमें से कई लोग प्रोडक्ट को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाते हैं और कई लोग हमसे कॉन्टैक्ट भी करते हैं।

किन-किन प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हैं?

आशीष बताते हैं कि हमारे पास सभी तरह के फूड आइटम्स है। इसमें सभी प्रोडक्ट जम्मू और कश्मीर के ओरिजिनल प्रोडक्ट हैं। ड्राय फ्रूट आइटम्स की बात करें तो इसमें बादाम, वॉल नट, मिलेट्स, काजू, खजूर जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। इसी तरह अगर किचन आइटम्स की बात करें तो हर तरह के मसाले, नमक, दाल, चावल, ऑयल जैसे आइटम्स हैं। हम यहां के लोकल चाय, पिकल्स, कॉफी जैसे प्रोडक्ट की भी मार्केटिंग करते हैं। हाल ही में हमने ब्यूटी प्रोडक्ट भी लॉन्च किए हैं। इस तरह अब हम धीरे-धीरे ड्रेसेस और हैंडीक्राफ्ट आइटम्स भी शामिल कर रहे हैं। जम्मू के बाहर यहां के लोकल फैशन प्रोडक्ट्स की भी अच्छी डिमांड है।

क्या आप भी ऐसे स्टार्टअप की प्लानिंग कर रहे हैं?

अगर आप भी ऐसे स्टार्टअप की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके मन में कुछ सवाल होंगे। मसलन इसके लिए किन चीजों की जरूरत होगी? बजट कितना चाहिए होगा? प्रोडक्ट कहां मिलेंगे और फिर उसकी मार्केटिंग कैसे होगी? अब एक-एक करके 4 ग्राफिक के जरिए इसे हम समझने की कोशिश करते हैं..

चलते-चलते अपने काम की ये स्टोरी भी पढ़ लीजिए

राजस्थान के पाली जिले के रहने वाले सिद्धार्थ संचेती ने एक पहल की है। वे किसानों के प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग करते हैं। भारत के साथ ही दुनिया के 25 देशों में उनके कस्टमर्स हैं। उन्होंने पिछले 10 साल में देशभर में 40 हजार किसानों का नेटवर्क बनाया है। इससे हर साल वे 50 करोड़ का बिजनेस कर रहे हैं। (पढ़िए पूरी खबर)

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