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आज की पॉजिटिव खबर:78 की उम्र में दादी ने शुरू किया खुद का स्टार्टअप, बोलीं- ग्राहक मेरे लिए अपने बच्चों के समान; पोती कर रही मार्केटिंग में मदद

9 दिन पहलेलेखक: निकिता पाटीदार

जब कोई नया काम शुरू करता है तो उस काम की चुनौतियों का सामना करने में उसे दादी-नानी याद आ जाती है। क्या हो अगर ये नया काम खुद दादी शुरू कर रही हों? आज की पॉजिटिव स्टोरी में कहानी दादी-पोती की एक जोड़ी की, जो उम्र की सरहदों को लांघ कर सबके लिए मिसाल बन रही हैं।

78 साल की शीला बजाज एक एंटरप्रेन्योर हैं और अपनी 26 साल की पोती युक्ती बजाज के साथ स्टार्टअप चलाती हैं। पुराने जमाने से चली आ रही बुनाई को वो एक नया अवतार देकर कस्टमाइज प्रोडक्ट बना रही हैं और हर महीने हजारों का बिजनेस कर रही हैं।

पढ़िए दादी-पोती के स्टार्टअप की ये कहानी…

बचपन की स्किल को दिया स्टार्टअप का रूप

युक्ती कहती हैं, ‘भले ही मैं 26 साल की हूं, लेकिन जब तक मां (दादी) से कहानी ना सुन लूं तब तक मुझे नींद नहीं आती। उनके शब्द मुझे सिक्योर फील करवाने के लिए और ये अहसास करवाने के लिए काफी हैं कि सब ठीक हो जाएगा।’ युक्ती ने बचपन में अपने पिता को खो दिया और कुछ समय बाद ही सिर से मां का साया भी छिन गया।

वे कहती हैं, ‘मैं दिल्ली के एक फर्म में बतौर लैंग्वेज एक्सपर्ट काम करती हूं। ऑफिस दूर है तो ट्रैवल करने में टाइम लगता था, लेकिन कोरोना के कारण लॉकडाउन लग गया और वर्क फ्रॉम होम शुरू हुआ। इस दौरान मैंने ध्यान दिया कि मेरी दादी घर पर अकेले ऊब जाती हैं। अपने टाइमपास के लिए वो उन चीजों पर काम करती हैं जो उन्होंने बचपन में सीखी थी। जैसे कि सिलाई-बुनाई। मैंने उनके इस टैलेंट को एक प्लेटफॉर्म मुहैया कराने के बारे में सोचा और इंस्टाग्राम पर एक पेज बनाया।’

अपनी दादी के साथ युक्ती।
अपनी दादी के साथ युक्ती।

फोन पर हुई बातचीत में उनकी दादी शीला बताती हैं, ‘पहले मैं घर के पुराने कपड़ों से ही नई-नई चीजें बनाया करती थी। कभी पुरानी शर्ट को उधेड़ कर नया रूमाल बनाती तो कभी अपने रिश्तेदारों के लिए जुराबें। मैंने अपनी जवानी के दिनों में कई साल एक्सपोर्ट बिजनेस में काम किया। जब परिवार बसा और बच्चे बड़े हुए तो नौकरी छोड़नी पड़ी। फिर घर की चारदीवारी में ही जिन्दगी कटती गई। अब मेरी पोती युक्ती ने मुझे एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा किया है और बुढ़ापे में मेरी रुचि को एक स्टार्टअप का रूप दिया है। मैं आज कई लोगों के लिए अलग-अलग तरह का सामान बनाती हूं, लेकिन ये सब मेरे लिए सिर्फ कस्टमर्स नहीं है बल्कि मेरे बच्चों जैसे ही हैं।’

कोरोना काल में शुरू किया स्टार्टअप

युक्ती ने लॉकडाउन के दौरान नवंबर 2020 में caughtcrafthanded के नाम से पेज बनाया और अलग-अलग प्रोडक्ट की तस्वीरें डालनी शुरू की। बातचीत में युक्ती बताती हैं, ‘इस छोटे से स्टार्टअप ने हम दोनों को और भी ज्यादा करीब ला दिया है। घर से काम करने के साथ अब मैं इंस्टाग्राम पेज भी आसानी से मैनेज कर लेती हूं। शुरुआत में हमें लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला, लेकिन हमने दिल छोटा नहीं किया, क्योंकि ये बिजनेस हमारे लिए सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं था बल्कि इससे हमने खुद को एक बार फिर से नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया।’

दादी-पोती की जोड़ी बुकमार्क, बच्चों के कपड़ों के सेट, स्वेटर, बॉटल से लेकर मग कवर, स्टाइलिश स्कार्फ और हेयरबैंड तक बना रही है।
दादी-पोती की जोड़ी बुकमार्क, बच्चों के कपड़ों के सेट, स्वेटर, बॉटल से लेकर मग कवर, स्टाइलिश स्कार्फ और हेयरबैंड तक बना रही है।

नए ट्रेंड को अपना रहीं शीला

शुरुआत में शीला ने कुशन कवर बनाना जारी रखा। धीरे-धीरे उन्होंने ट्रेंड को जाना और अपने प्रोडक्ट में बदलाव लाना शुरू किया। अब वो बुकमार्क, बच्चों के कपड़ों के सेट, स्वेटर, बॉटल और मग कवर, स्टाइलिश स्कार्फ, हेयरबैंड जैसे कई प्रोडक्ट बना रही हैं। खास बात ये है कि अब वो फोटो देखकर नई डिजाइन और कस्टमाइज प्रोडक्ट भी बना लेती हैं।

हर वर्ग के लिए प्रोडक्ट अवेलबल

वो बताती हैं, ‘हमने घर में रखे ऊन से ही इसकी शुरुआत की थी, क्योंकि उस समय लॉकडाउन के चलते हम ऊन भी कहीं से नहीं खरीद पाए। आज हमारे पास छोटे से लेकर बड़े, हर वर्ग के लिए कोई ना कोई प्रोडक्ट मौजूद है। इनकी रेंज 250 रुपए से लेकर 1500 रुपए तक है। ऑर्डर लेने के बाद ही हम काम शुरू करते हैं। जिससे दादी भी आराम से काम कर सकें और समय पर लोगों को प्रोडक्ट मिल सकें। हर सामान के प्रोसेस में अलग-अलग समय लगता है, क्योंकि हम हर काम मैनुअल कर रहे हैं। कुछ प्रोडक्ट 2 से 3 दिन में बन जाते हैं, कुछ में हफ्ते भर का भी टाइम लग जाता है।’

कैसे करें ऑर्डर?

इसका प्रोसेस बताते हुए युक्ती कहती हैं, ‘बुनाई का सारा काम दादी करती हैं। जैसे ही हमें इंस्टाग्राम पर कोई ऑर्डर मिलता है तो मैं डिजाइन दादी को दिखाती हूं। उनके हां करने पर ऑर्डर अप्रूव करते हैं। इसके बाद मटेरियल मंगवा कर चीजें बनवाई जाती हैं। पेमेंट प्लेस होता है और मैं जाकर ऑर्डर डिलीवर कर देती हूं।’