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बात बराबरी की:पत्नी या प्रेमिका कितनी भी गोरी और सुंदर क्यों न हो, लेकिन उसका कद पुरुष से उन्नीस ही होना चाहिए, वर्ना मर्दों की नाक कट जाएगी

नई दिल्ली3 महीने पहलेलेखक: मृदुलिका झा
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टाइम मैगजीन ने साल 2021 के प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी की। इसके कवर पर प्रिंस हैरी की तस्वीर है, साथ हैं मेगन मर्केल। बेहद हल्के बैकग्राउंड पर प्रिंस और उनकी पत्नी काले-सफेद कपड़ों में किसी म्यूजियम के आर्ट फॉर्म की तरह दिख रहे हैं। प्रेम और हिम्मत से भरा हुआ युवा जोड़ा। आंखें कैमरे पर सीधा ताकती हुईं। सबकुछ सुंदर, लेकिन तस्वीर जैसे किसी हथौड़े की तरह लोगों की कुंद-जहनियत को ठुकठुका रही है। वे हैरी को नामर्द और मेगन को हावी होने वाली औरत कह रहे हैं। यहां तक कि प्रिंस मेगन और प्रिंसेज हैरी भी कहा जा रहा है। तो इस सादी-सी तस्वीर में ऐसा क्या है जो लोगों को ललकार रहा है!

बस इतना कि हैरी अपनी पत्नी के पीछे खड़े हैं और उनके कंधे पर हाथ धरा हुआ है। एक और बात- दोनों कद में लगभग बराबर लग रहे हैं। यानी मियां-बीवी का रिश्ता बराबरी का दिख रहा है। कुछ दिन पहले हैरी 37 साल के हुए। वे काले सूट में थे और खुद से लगभग 3 साल बड़ी पत्नी के कंधे पर हाथ रखा हुआ था। ये हाथ दोनों के दोस्ताना रिश्ते को बताता है। प्रिंस और प्रिंसेज प्यार में पगा चुलबुलाता हुआ जोड़ा नहीं, बल्कि साथी हैं जो दुनिया की जंग मिलकर जीत रहे हैं।

टाइम मैगजीन ने बहुत सोच-समझकर इस जोड़े को कवर में जगह दी, लेकिन यहीं से बवाल शुरू हो गया। सोशल मीडिया के सदाबहार बबूल फटाक से एक्शन में आ गए और कांटे चुभोने लगे।

ट्विटर पर एक ट्रोलर फरमाते हैं- ऐसा लगता है जैसे हैरी मेगन के हेयरड्रेसर हैं, जो बाल संवारने के बाद आईना दिखाते हुए पूछ रहे हैं कि उन्हें हेयरस्टाइल पसंद आई या नहीं। सबसे ज्यादा सवाल प्रिंस के कद पर हो रहे हैं। आखिर 6 फीट से ज्यादा कद वाले हैरी के साथ ऐसा क्या हुआ, जो वे साढ़े 5 फीट की मेगन के बराबर दिखने लगे। क्या मेगन को ऊंचे जूते पहनाए गए थे, या फिर क्या प्रिंस को जान-बूझकर एकाध कदम नीचे खड़ा किया गया!

लोग बेचैन हैं कि पति-पत्नी के जो पैमाने खूब सोच-समझकर बनाए गए थे, वे यहां भरभरा क्यों गए। ब्रिटिश प्रिंस हंस से सफेद हैं। अमेरिकी मेगन पर शाम की सांवली छाया। प्रिंस छोटे हैं। मेगन बड़ी। प्रिंस बोलते हुए कभी-कभार अटक जाते हैं। मेगन कैमरे के सामने ऐसे बोलती हैं, जैसे बचपन की सहेली से मिली हों। ले-देकर कद के मामले में प्रिंस अपनी पत्नी पर भारी थे, लेकिन तस्वीर ने आखिरी खांचा भी तोड़ दिया।

पत्नी या प्रेमिका उजली हो, सुंदर हो, कमनीय हो, लेकिन उसका कद, पुरुष से उन्नीस ही होना चाहिए। ऊंची स्त्रियां मर्दानगी को मानो ललकारती हैं। ये सोच भारत ही नहीं, पश्चिमी देशों में भी है। प्रिंस चा‌र्ल्स और प्रिंसेज डायना की ऊंचाई बराबर थी, लेकिन ब्रिटिश पोस्टकार्ड्स में चा‌र्ल्स डायना से ऊंचे नजर आते हैं। पता है क्यों? क्योंकि फोटोशूट के दौरान वे मोढ़े पर चढ़ा दिए जाते ताकि वे पत्नी से ऊंचे लगें। क्या फर्क पड़ता अगर डायना और चार्ल्स वैसे ही दिखते, जैसे वे थे! या फिर क्या फर्क पड़ जाता अगर सजने-संवरने की शौकीन डायना अपनी हील्स के साथ पति से कुछ ऊंची दिख जातीं!

खुद लड़कियों में भी कद को लेकर कुछ कम फितूर नहीं। शादी-ब्याह के विज्ञापनों वाली साइट पर जाइए तो मिचमिचाती आंखें हैरत से चौकोर हो जाएंगी। वहां हर लड़की को अपने से ऊंचा लड़का ही चाहिए। डिग्री या नौकरी भले बराबर हो, उम्र भी उन्नीस-बीस चलेगी, लेकिन लड़के की हाइट ज्यादा ही होनी चाहिए। इसका सीधा रिश्ता मर्दानगी से है। कम ऊंचाई वाले लड़के मुसीबत के वक्त डर जाते हैं। वे दरवाजे की ओट में छिपकर पत्नी को आगे कर देते हैं। वहीं छह-फुट्टा जवान मुसीबत से भिड़कर और हराकर ही दम लेता है। हाइट पर सिर-फुट्टवल करती ये जमात नेपोलियन को भूल जाती है, जिसने साढ़े 5 फीट कद के साथ दुनिया जीत ली।

औरत-मर्द का रिश्ता तो चलिए, पर्सनल चॉइस मानकर भूल भी जाएं, लेकिन ऐसे वोटर्स का क्या कीजिएगा, जो हाइट देखकर वोट देते हैं। जी हां, लीडरशिप क्वार्टरली मैगजीन में अमेरिकी वोटर्स पर बाकायदा रिसर्च आ चुकी है। ये बताती है कि वहां 6 फीट या इससे ज्यादा हाइट वाले कैंडिडेट ही राष्ट्रपति की दावेदारी करते हैं। कम ऊंचाई वाले कैंडिडेट चुनाव में आने की हिम्मत जुटा भी लें, और जनता चाहे उन पर खूब प्यार भी लुटा दे, तो भी वोट तो उन्हें नहीं मिलेगा।

ऊंचा कद अपने-आप में एक काबिलियत है, जैसे अमीर घर में जन्म लेना, या फिर बेहद हसीन-तरीन होना। कॉर्पोरेट भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं। इकोनॉमिक रिकॉर्ड की स्टडी में पता चला कि पुरुष अगर 6 फीट या इससे ऊंचे हों तो वे हर साल कम कद वालों से लगभग 96 हजार रुपए ज्यादा कमाते हैं। ये तब है, जब दोनों की योग्यता और तजुर्बा बराबर हो।

कद को लेकर ये बौराहट भले ही अमेरिकी वोटर, भारतीय शादियों या कॉर्पोरेट में दिखे, लेकिन टाइम मैगजीन के कवर से गायब है। तो भूचाल आना लाजिमी था। कोविड के लक्षणों की तरह ही रुक-रुककर विस्फोट हो रहा है। ट्रोलर्स तस्वीर पर नए-नए कमेंट देते हुए प्रिंस का मजाक बना रहे हैं। मर्द को ऊंचा, मजबूत और ओहदेदार बनाने में जुटे मर्द ये भूल गए कि ये शर्तें खुद उनके साथ भी नाइंसाफी कर जाएंगी। पता नहीं, कितने पुरुष होंगे, जो बेहतर इंसान और बेहतरीन साथी हो सकते थे, लेकिन कभी कम कद तो कभी कम तनख्वाह ने उन्हें रोक दिया।

डियर सोसायटी! त्योहार आ रहे हैं। कोई वॉशिंग मशीन खरीदेगा, कोई जेवर तो कोई कपड़े-लत्ते, कहीं रंग-रोगन होंगे। खुशरंग कपड़े भी खरीदे जाएंगे। क्यों न इस बार नई सोच की भी खरीदारी करें! ताजा और खुशबुओं से भरी सोच, जहां बराबरी, वाकई में बराबर की हो, न दाएं कम, न बाएं ज्यादा।

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