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आज की पॉजिटिव खबर:IIT से पढ़े 2 दोस्तों ने 3 साल पहले फूड फॉरेस्ट का स्टार्टअप शुरू किया, अब 15 करोड़ टर्नओवर, 200 से ज्यादा लोगों को नौकरी भी दी

7 महीने पहलेलेखक: सुनीता सिंह

शहर की चमचमाती भाग-दौड़ की जिंदगी सुकून से परे होती है। ज्यादातर वक्त घर से ऑफिस के बीच ही सिमट कर रह जाता है। कई लोग इस तरह की रैट-रेस लाइफ को जीना नहीं चाहते हैं, लेकिन उनके पास गांव या शहर से दूर रह कर अच्छी कमाई का कोई ऑप्शन नहीं होता है।

ऐसे ही लोगों के लिए IIT से पढ़े दोस्तों ने 'बीफॉरेस्ट' नाम से स्टार्टअप शुरू किया है। जहां लोग नेचर में रहने के साथ परमाकल्चर फार्मिंग, यानी एक ही फार्मिंग लैंड पर एक साथ फल, सब्जियां, मसाले और अनाज उगा रहे हैं। इस अनूठे स्टार्टअप से पर्यावरण को तो फायदा हो ही रहा है। साथ ही उनकी अच्छी कमाई भी हो रही है। दोनों दोस्त सालाना 15 करोड़ रुपए का टर्नओवर जेनरेट कर रहे हैं। इतना ही नहीं इस मुहिम के जरिए 200 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

आइए आज की पॉजिटिव खबर में परमाकल्चर और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर आधारित बीफॉरेस्ट के सफर के बारे में जानते हैं...

प्रकृति प्रेम से बीफॉरेस्ट स्टार्ट करने का आइडिया आया

बीफॉरेस्ट के फाउंडर्स शौर्य और सुनीथ। प्रकृति से जुड़ाव होने की वजह से दोनों ने इस स्टार्टअप की शुरुआत की।
बीफॉरेस्ट के फाउंडर्स शौर्य और सुनीथ। प्रकृति से जुड़ाव होने की वजह से दोनों ने इस स्टार्टअप की शुरुआत की।

37 साल के सुनीथ रेड्डी और 39 साल के शौर्य चंद्र हैदराबाद के रहने वाले हैं। सुनीथ ने कंप्यूटर साइंस की पढाई IIT चेन्नई से की और शौर्य ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग IIT रुड़की से करने के बाद IIM अहमदाबाद से मैनेजमेंट किया। इसके बाद दोनों ने इंटरनेशनल कंपनी में काम किया, जहां उनकी अच्छी खासी सैलरी थी, बावजूद इसके उन्होंने कुछ अलग और नया करने का प्लान किया।

शौर्य चंद्र कहते हैं, 'मैं और सुनीथ 13 साल से एक साथ काम कर रहे हैं और हमें शुरू से प्रकृति से बहुत लगाव रहा है। इसलिए हमने सोचा कि एक ऐसा काम शुरू कि जाए जो प्रकृति से जुड़ा हो। इस तरह से बीफारेस्ट स्टार्ट करने का आइडिया आया।'

सुनीथ बताते हैं स्टार्टअप का नाम ‘BeHappy’ शब्द के तर्ज पर ‘Beforest’ रखा। इसके पीछे हम लोगों को मैसेज देना चाहते हैं कि जिस तरह जीने के लिए खुश रहना जरूरी है उसी तरह प्रकृति के लिए जंगल और नेचुरल फार्मिंग भी जरूरी है। अगर प्रकृति से कुछ लेना है तो उसके साथ तालमेल बना कर रखना जरूरी है।

बीफॉरेस्ट में एक साथ एक ही लैंड पर कई तरह के फसलें उगाई जा सकती हैं। यानी फल, सब्जियां, मसाले, अनाज हर तरह की फसलों का लाभ लिया जा सकता है।
बीफॉरेस्ट में एक साथ एक ही लैंड पर कई तरह के फसलें उगाई जा सकती हैं। यानी फल, सब्जियां, मसाले, अनाज हर तरह की फसलों का लाभ लिया जा सकता है।

शौर्य बताते हैं, “हमने स्टार्टअप से पहले रिसर्च किया, जिसमें पता चला बड़े किसानों की तुलना में छोटे किसानों को फार्मिंग से ज्यादा फायदा नहीं हो पता है। उसके कई कारण हैं- जैसे छोटे लैंड पर एक ही तरह की फसलों की फार्मिंग करना या मार्केट में उनकी फसलों का सही कीमत न मिलना। सभी के लिए बड़े लैंड खरीद कर उस पर फार्मिंग करना संभव भी नहीं है। तब हमने छोटे-छोटे किसानों को एक साथ जोड़कर फार्मिंग करना शुरू किया।”

किस तरह कन्वेंशनल फार्मिंग से अलग है ‘परमाकल्चर’

कन्वेंशनल फार्मिंग में एक ही तरह की फसल एक ही फार्मिंग लैंड उगाई जाती है। जहां ज्यादा से ज्यादा उत्पाद के लिए कैमिकल और पेस्टिसाइड्स के का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि ‘परमाकल्चर’ इससे बिलकुल अलग है। परमाकल्च में एक ही साथ एक ही फार्मिंग लैंड पर कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं। इसमें केमिकल और पेस्टिसाइड का इस्तेमाल नहीं होता है।

सुनीथ बताते हैं, “परमाकल्चर का सबसे बड़ा फायदा ये है कि एक फसल का बाई- प्रोडेक्ट दूसरी फसल को जल्दी उगाने में मदद करता है। इस तरह की फार्मिंग में फसलों को बाहर से न ही किसी तरह के केमिकल की जरूरत होती है और न ही मिट्टी का पोषण खत्म होता है। जैसे पेड़-पौधे प्रकृति से पोषण लेकर खुद ही बढ़ते हैं, वैसा ही परमाकल्चर में भी होता है।”

इस स्टार्टअप में दोनों फाउंडर्स के साथ ही कई लोग जुड़े हैं। इसमें सभी का बराबर शेयर होता है।
इस स्टार्टअप में दोनों फाउंडर्स के साथ ही कई लोग जुड़े हैं। इसमें सभी का बराबर शेयर होता है।

इसमें बहुत ही कम लागत में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन किया जा सकता है। यहां कम संसाधन में प्राकृतिक रूप से फसल उगाया जा सकता है। सबसे अच्छी बात है कि साल भरा फार्मिंग लैंड पर किसी न किसी फसल का उत्पादन होता रहता है।

कैसे करते हैं काम?

बीफारेस्ट में कई लोग जुड़ कर एक बड़ा फार्मिंग लैंड खरीदते हैं। फिर एक साथ बहुत ही कम लागत में ज्यादा से ज्यादा फसलों का उत्पादन किया जाता है। बीफारेस्ट का लैंड दिखने में किसी फारेस्ट की तरह ही दिखेगा। एक फूड फारेस्ट जहां जामुन, कटहल, संतरा, चेरी, कॉटन सिल्क, काली मिर्च और कॉफी सहित कई और फैसले उगाई गई होंगी। इस मुहिम से कोई भी जुड़ सकता है। सभी को शेयर भी बराबर का मिलता है।

फिलहाल बीफॉरेस्ट के चार प्रोजेक्ट हैदराबाद , मुंबई , कूर्ग और चिकमंगलूर में तकरीबन 500 एकड़ जमीन पर चल रहा है।
फिलहाल बीफॉरेस्ट के चार प्रोजेक्ट हैदराबाद , मुंबई , कूर्ग और चिकमंगलूर में तकरीबन 500 एकड़ जमीन पर चल रहा है।

सुनीथ बताते हैं,“पहले प्रोजेक्ट में शौर्य के अलावा, कुछ और लोग बीफॉरेस्ट से जुड़े थे। फार्मिंग के लिए हैदराबाद से पास किसी गांव में जमीन तलाशना शुरू कर दिया। हम सभी ने एक साथ जमीन के छोटे-छोटे हिस्सों पर काम करना शुरु कर दिया। पहले प्रोजेक्ट का रिजल्ट अच्छा रहा तो हमने अपने काम को और बढ़ाया। एक साल में हमारे प्रोजेक्ट में से काफी लोग जुड़ गए और धीरे-धीरे काम बढ़ता ही जा रहा है। फिलहाल बीफॉरेस्ट के चार प्रोजेक्ट हैदराबाद, मुंबई, कूर्ग और चिकमंगलूर में तकरीबन 500 एकड़ जमीन पर चल रहा है। जिसमें सुनीथ और शौर्य के साथ हर प्रोजेक्ट में अलग अलग पार्टनर हैं।

नेचर में रह कर नेचुरल रिसोर्स की मदद से फार्मिंग होती है

ऐसे कई लोग हैं जो शहर की लाइफ छोड़, नेचर के नजदीक रहना चाहते हैं। यह स्टार्टअप उन्हें जंगल में रहने के साथ साथ कमाई करने में भी मदद मदद करता है। यहां पेड़-पौधे और फसल तो हैं हीं इसके अलावा घर भी ट्रेडिशनल तरीके से बने हैं जो पूरी तरह इको- फ्रेंडली होते हैं।

शौर्य ने कहते हैं, 'हम यहां लोकल लोगों के साथ मिलकर काम करते हैं। इसलिए जो भी पार्टनर्स गांव में आकर रहना या काम करना चाहता है, वो इस बात का ध्यान रखता है कि यहां के लोग और उनके कल्चर को बढ़ावा मिले।'

सब एक साथ मिलजुल कर काम करते हैं

शौर्य बताते हैं कि हमारे साथ जो भी किसान जुड़े हैं, उनकी खेती की सही कीमत दिलाने के साथ ही उसे मार्केट में पहुंचाने में हम मदद करते हैं।
शौर्य बताते हैं कि हमारे साथ जो भी किसान जुड़े हैं, उनकी खेती की सही कीमत दिलाने के साथ ही उसे मार्केट में पहुंचाने में हम मदद करते हैं।

बीफॉरेस्ट में जमीन किसी एक व्यक्ति के पास न होकर प्रोजेक्ट में शामिल सभी पार्टनर की होती है। सभी ग्रुप में मिलजुल कर काम करते हैं। एक ग्रुप के जरिए सभी किसानों को कैसे और क्या करना है, इसकी जानकारी दी जाती है। साथ ही खेती से होने वाली कमाई को कैसे आपस में बांटना है ये भी तय किया जाता है। शौर्य बताते हैं, “बीफारेस्ट लोकल फार्मर को उनकी खेती की सही कीमत दिलाने और उन्हें सही मार्केट में ले जाने में भी मदद करता है।'

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