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  • Beirut Explosion Update, Lebanon News: 6 Deadliest Ammonium Nitrate Blast | Know How Many People Died In Worst Ammonium Nitrate Blast?

अमोनियम नाइट्रेट से हुए 7 बड़े धमाके:जर्मनी में आधे सेकंड में 2 विस्फोट, गूंज 275 किमी तक सुनाई दी थी और चीन में 300 बिल्डिंग और 12 हजार कारें तबाह हो गईं थीं

नई दिल्ली3 महीने पहले
  • 1942 में अमेरिका में इतना जोरदार धमाका हुआ था कि जिस जगह ये हुआ, वहां ऊपर से गुजर रहे दो प्लेन नीचे आ गिरे थे
  • 1921 में जर्मनी के ओपौ के केमिकल प्लांट में भी धमाका हुआ था, इसकी आवाज 275 किमी दूर तक सुनाई दी थी
  • अप्रैल 1995 में अमेरिका के ओक्लाहोमा शहर में आतंकी हमला हुआ था, इसमें भी अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ था

लेबनान की राजधानी बेरूत में जिस धमाके में 135 लोगों की जान गई, उसकी वजह अमोनियम नाइट्रेट है, जो एक वेयरहाउस में पिछले 6 साल से जमा करके रखा था। इसी वेयरहाउस में रखे 2 हजार 750 टन अमोनियम नाइट्रेट में आग लगी और जोरदार धमाका हो गया। ये धमाका इतना भयानक था कि इसकी आवाज 250 किमी दूर तक सुनाई दी।

अमोनियम नाइट्रेट सबसे खतरनाक एक्सप्लोसिव केमिकल होता है, जिसका इस्तेमाल कई कामों में होता है। लेकिन, आमतौर पर इसका इस्तेमाल खेती के लिए फर्टिलाइजर बनाने या फिर बम बनाने के लिए किया जाता है। अगर इसमें जरा सी भी आग लग जाए, तो जोरदार धमाका होता है। साथ ही नाइट्रोजन ऑक्साइड और अमोनिया जैसी खतरनाक गैस भी निकलती हैं।

लेबनान में हुए इस धमाके के बाद अब जांच हो रही है कि आखिर कैसे वेयरहाउस में इतना अमोनियम नाइट्रेट जमा था और वहां आग कैसे लगी?

हालांकि, ये कोई पहली बार नहीं है, जब अमोनियम नाइट्रेट की वजह से इतना बड़ा धमाका हुआ है। इससे पहले भी ऐसी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। उन्हीं में से 7 बड़ी दुर्घटनाएं, जिनमें एक इतनी खतरनाक थी कि नीचे धमाका हुआ और उसके ऊपर से गुजर रहे प्लेन भी नीचे आ गिरे थे।

1. 21 सितंबर 1921 : ओपौ, जर्मनी
कितना खतरनाक : 275 किमी दूर तक सुनाई दी थी धमाके की आवाज
1911 में शुरू हुए इस प्लांट में अमोनियम नाइट्रेट और अमोनियम सल्फेट का साढ़े 4 हजार टन मिक्सचर स्टोर करके रखा गया था। 21 सितंबर की सुबह 7 बजकर 32 मिनट पर महज आधे सेकंड के अंदर दो जोरदार धमाके हुए। इन धमाकों में सिर्फ 450 टन के फर्टिलाइजर में विस्फोट हुआ था। ये धमाका इतना जोरदार था कि इससे प्लांट के अंदर ही 90 मीटर बड़ा गड्ढा हो गया। इस गड्ढे की चौड़ाई 125 मीटर और गहराई 19 मीटर थी।

ये धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज म्यूनिख में भी सुनाई दी थी। म्यूनिख की दूरी इस प्लांट से 275 किमी थी। इतना ही नहीं, इस धमाके में ओपौ की 80% बिल्डिंग्स तबाह हो गई थीं, जबकि साढ़े 6 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे। 25 किमी के दायरे में मौजूद घरों की खिड़कियां टूट गई थीं। ओपौ के 30 किमी के दायरे का ट्रैफिक धमाके की वजह से रुक गया था। धमाके की वजह से कई घरों की छतें उड़ गई थीं।

उस समय इस धमाके से 17 लाख डॉलर का नुकसान हुआ था, जो आज के हिसाब 2.52 करोड़ डॉलर यानी करीब 200 करोड़ रुपए होता है। धमाका होने के 48 घंटे के भीतर ही 500 डेड बॉडीज़ बरामद हुई थीं। आखिर में इस धमाकों में मरने वालों की संख्या 561 तक पहुंची।

धमाके में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार में उस समय के जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रेडरिक एबर्ट और प्रधानमंत्री ह्यूगो लेरचेनफेल्ड समेत 70 हजार जर्मन नागरिक शामिल हुए थे।

इस धमाके में 25 किमी दूर के घरों तक की खिड़कियां टूट गई थीं।
इस धमाके में 25 किमी दूर के घरों तक की खिड़कियां टूट गई थीं।

2. 29 अप्रैल 1942 : टेसेंडेर्लो, बेल्जियम
कितना खतरनाक : धमाके में 70 मीटर चौड़ा और 23 मीटर गहरा गड्ढा हो गया
उस समय सेकंड वर्ल्ड वॉर चल रहा था। बेल्जियम पर जर्मनी ने कब्जा कर लिया था। बेल्जियम के टेसेंडेर्लो में एक केमिकल फैक्ट्री थी, जिसको बंद कर दिया गया था। लेकिन, बाद में बेल्जियम के सरेंडर के बाद इस फैक्ट्री को दोबारा शुरू कर दिया गया। 29 अप्रैल को इसी फैक्ट्री में धमाका हुआ था।

जिस दिन धमाका हुआ था, उस दिन हल्की-हल्की ठंड थी और सब अपने काम पर जा रहे थे। सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर फैक्ट्री में रखे 150 टन अमोनियम नाइट्रेट में धमाका हो गया। कुछ ही पल में सैकड़ों मीटर की ऊंचाई तक सिर्फ धुंआ ही धुंआ ही था। धमाके की वजह से 70 मीटर चौड़ा और 23 मीटर गहरा गड्ढा हो गया था।

इस धमाके में 190 लोग मारे गए थे, जबकि 900 लोग घायल हुए थे। मारे गए 190 लोगों में से 119 फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर थे।

इस धमाके में फैक्ट्री के आसपास के सारे गांव तबाह हो गए थे। एक स्कूल भी था, वहां भी नुकसान हुआ था।
इस धमाके में फैक्ट्री के आसपास के सारे गांव तबाह हो गए थे। एक स्कूल भी था, वहां भी नुकसान हुआ था।

3. 16 अप्रैल 1947 : टेक्सास, अमेरिका
कितना खतरनाक : दो प्लेन उड़ते-उड़ते नीचे गिर गए, पूरा जहाज टूटकर हवा में उड़ने लगा
दूसरे वर्ल्ड वॉर में अमेरिकी सेना अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल विस्फोटक के रूप में करती थी। बाद में इसे फर्टिलाइजर के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। 16 अप्रैल 1947 को नेब्रास्का और लोवा में बना अमोनियम नाइट्रेट रेल के जरिए टेक्सास सिटी पहुंचा। उसके बाद इसे जहाज पर लोड किया जा रहा था। इस जहाज में 2300 टन अमोनियम नाइट्रेट के साथ-साथ तंबाकू और गोला-बारूद थे।

सुबह करीब 8 बजे कार्गो से धुंआ उठता दिखाई दिया। इस आग को बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन आग बुझ ही नहीं रही थी। 9 बजकर 12 मिनट पर अमोनियम नाइट्रेट में धमाका हो गया। इससे पूरा पोर्ट तबाह हो गया। इस धमाके से 15 फीट ऊंचा धुंआ उठा था, जो 160 किमी दूर से भी दिखाई दे रहा था।

ये धमाका इतना जोरदार था कि इससे जहाज के छोटे-छोटे टुकड़े हो गए थे और वो टुकड़े हवा में उड़ने लगे थे। इतना ही नहीं टेक्सास के पास ही उड़ान भर रहे दो छोटे प्लेन भी गिरकर नीचे आ गए थे। इस धमाके से हजार से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा था। दो हजार लोग बेघर हो गए थे।

इस धमाके को अमेरिका के इतिहास का सबसे खतरनाक औद्योगिक हादसा माना जाता है। इसमें 581 लोगों की जान गई थी। जबकि, 5 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

टेक्सास में हुए इस धमाके में उस समय 100 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था, जो आज के हिसाब से 1.1 बिलियन डॉलर यानी 8 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होता है।
टेक्सास में हुए इस धमाके में उस समय 100 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था, जो आज के हिसाब से 1.1 बिलियन डॉलर यानी 8 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होता है।

4. 19 अप्रैल 1995 : ओक्लाहोमा, अमेरिका
कितना खतरनाक : सिर्फ 2 टन अमोनियम नाइट्रेट ने 168 की जान ले ली
19 अप्रैल 1995 की सुबह ओक्लाहोमा के लिए सबसे खराब सुबह लेकर आई थी। इस दिन पूर्व सैनिक टिमूथी मैक्वेग ने ओक्लाहोमा शहर में एक सरकारी बिल्डिंग के बाहर किराए से लिया ट्रक खड़ा कर दिया। इस ट्रक में 2 टन अमोनियम नाइट्रेट था।

सुबह 9 बजे से पहले ही मैक्वेग ट्रक लेकर पहुंच गया था। कुछ देर बाद मैक्वेग ट्रक से बाहर निकला और डोर लॉक कर भागना शुरू कर दिया। किसी को कुछ समझ नहीं आया। ठीक 9 बजकर 2 मिनट पर ट्रक में ब्लास्ट हो गया।

पलक झपकते ही बिल्डिंग का एक तिहाई हिस्सा मलबे में बदल गया। आसपास की करीब 300 बिल्डिंग या तो पूरी तरह से तबाह हो गईं या फिर डैमेज हो गईं। सैकड़ों कारों को भी नुकसान पहुंचा।

इस हमले में 168 लोगों की जान गई थी, जिनमें 19 छोटे बच्चे भी शामिल थे। सैकड़ों घायल हुए थे। इसकी गिनती सबसे खतरनाक आतंकी हमले में होती है।

इस बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर चाइल्ड केयर भी था, जहां छोटे-छोटे बच्चे थे। धमाके में 19 बच्चों की मौत हुई थी।
इस बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर चाइल्ड केयर भी था, जहां छोटे-छोटे बच्चे थे। धमाके में 19 बच्चों की मौत हुई थी।

5. 22 अप्रैल 2004 : रयोंगचोंन, उत्तर कोरिया
कितना खतरनाक : दो ट्रेनें टकराईं, तो 1850 घर तबाह हो गए
22 अप्रैल 2004 को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से 50 किमी दूर रयोंगचोंन स्टेशन पर दो ट्रेनें टकरा गई थीं। इन दोनों ही ट्रेनों में विस्फोटक सामग्री थी। ट्रेनों के टकराने से खतरनाक धमाका हुआ था।

दो दिन तक तो उत्तर कोरिया ने इस धमाके के पीछे की वजह ही नहीं बताई थी। धमाके के 48 घंटे बाद उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने इस धमाके के पीछे की वजह अमोनियम नाइट्रेट को बताया था। उसने कहा था कि किसी एक ट्रेन से अमोनियम नाइट्रेट लीक हुआ और उससे धमाका हो गया।

उत्तर कोरिया तो इस धमाके में मरने वाले लोगों की संख्या भी 54 ही बताता है। लेकिन, मौके पर पहुंची रेडक्रॉस की टीम ने बताया था कि धमाके से स्टेशन के आसपास के 1850 घर तबाह हो गए हैं। इस धमाके में 160 लोगों की मौत हुई है, जबकि साढ़े 6 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

उत्तर कोरिया में दो ट्रेन की टक्कर में हुए इस धमाके में 160 लोग मारे गए थे, लेकिन उत्तर कोरिया 54 मौतों की बात ही मानता है।
उत्तर कोरिया में दो ट्रेन की टक्कर में हुए इस धमाके में 160 लोग मारे गए थे, लेकिन उत्तर कोरिया 54 मौतों की बात ही मानता है।

6. 12 अगस्त 2015 : तियानजिन, चीन
कितना खतरनाक : 9 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था, 300 से ज्यादा बिल्डिंग तबाह हुई थीं

12 अगस्त 2015 को चीन के तियानजिन शहर के बंदरगाह में एक कंटेनर में एक के बाद एक कई धमाके हुए थे। पहले दो धमाके 30 सेकंड के अंदर ही हो गए थे। पहला धमाका 12 अगस्त की रात साढ़े 11 बजे हुआ था और दूसरा उसके 30 सेकंड के अंदर।

दूसरा धमाका बहुत खतरनाक था, जिसमें 800 टन अमोनियम नाइट्रेट में विस्फोट हो गया था। इन दो धमाकों से लगी आग की वजह से ही 15 अगस्त को 8 छोटे-छोटे धमाके हुए थे। इन धमाकों में 173 लोगों की जान गई थी और 797 लोग घायल हुए थे।

ये धमाके इतने जोरदार थे कि इनकी वजह से आसपास के 304 बिल्डिंग, 12 हजार 438 कारें और 7 हजार 533 कंटेनर पूरी तरह डैमेज हो गए थे। इन धमाकों से उस समय 9 अरब डॉलर (आज के हिसाब से 67,500 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ था।

ये तस्वीर तियानजिन शहर के एक पार्किंग लॉट की है। धमाके में यहां खड़ी सारी गाड़ियां जलकर खाक हो गई थीं।
ये तस्वीर तियानजिन शहर के एक पार्किंग लॉट की है। धमाके में यहां खड़ी सारी गाड़ियां जलकर खाक हो गई थीं।

7. 4 अगस्त 2020 : बेरूत, लेबनान
कितना खतरनाक : 9 किमी दूर बने एयरपोर्ट के शीशे तक टूट गए
लेबनान की राजधानी बेरूत में परमाणु धमाके जैसे दो धमाके हुए। एक हल्का और दूसरा ऐसा कि पूरा शहर थर्रा गया। अभी तक यही पता चला है कि बेरूत पोर्ट पर हैंगर में स्टोर करके रखे गए 2 हजार 750 टन अमोनियम नाइट्रेट में ये धमाके हुए।

धमाका इतना जबर्दस्त था कि 250 किमी दूर तक इसकी आवाज सुनाई दी। जबकि, 9 किमी दूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पैसेंजर टर्मिनल में शीशे टूट गए। इस धमाके में अब तक 135 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 5 हजार से ज्यादा घायल हुए हैं।

इस धमाके से 3 लाख लोग बेघर हो गए। करीब आधे शहर में ही 22.5 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

बेरूत में हुआ धमाका इतना खतरनाक था कि आसपास का 10 किमी का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया।
बेरूत में हुआ धमाका इतना खतरनाक था कि आसपास का 10 किमी का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया।

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