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भास्कर ओरिजिनल:कोविड-19 से परेशान लोगों को अपराधियों ने भी बनाया निशाना, क्राइम करने वाले कई अपराधी लॉकडाउन के दौरान हुए थे बेरोजगार

3 महीने पहले
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पिछले साल लॉकडाउन के बाद घटी एक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर दिया था। बांदा का एक आदमी अपनी पत्नी का सिर काट उसे लेकर पुलिस थाने पहुंच गया था। इस बर्बर घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा, लेकिन महिलाओं के प्रति अपराध की कई अन्य घटनाएं दबी भी रह गईं। अब ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) ने बताया है कि लॉकडाउन के दौरान औरतों के खिलाफ हिंसा और अपराध की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा साइबर क्राइम और फर्जीवाड़े की घटनाएं भी तेजी से बढ़ीं। यानी एक ओर जनता कोरोना से जूझ रही थी तो दूसरी ओर अपराधी भी उसे निशाना बना रहे थे। आश्चर्य की बात ये है कि ORF की रिपोर्ट के मुताबिक इन अपराधों के बढ़ने की वजह है- बेरोजगारी।

कोविड-19 महामारी दुनिया में करीब 11.5 करोड़ लोगों को बदतर गरीबी और बेरोजगारी में धकेल चुकी है। यह संख्या 2021 के अंत तक बढ़कर 15 करोड़ हो जाने का अनुमान है। यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल पल्स इनिशिएटिव की स्टडी में पाया गया है कि दुनिया में पिछले 20 सालों में पहली बार बेहद गरीबी के मामले बढ़े हैं। स्टडी के मुताबिक इन आर्थिक संकेतों का असर अपराधों पर भी देखा गया है। खराब आर्थिक हालात से बढ़ा तनाव इन अपराधों की वजह बना है।

घरेलू हिंसा और आर्थिक अपराध सबसे ज्यादा बढ़े
पिछले साल अप्रैल में बेरोजगारी दर 27% से ज्यादा हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद जिन अपराधों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई वो घरेलू हिंसा, मजदूरी विवाद, राशन और डायरेक्ट बेनिफिट और दिवालिया होने से जुड़े हैं। घरेलू हिंसा के अलावा अन्य सभी अपराध आर्थिक हैं। फिर लॉकडाउन और कोविड नियमों के चलते न्याय व्यवस्था तक लोगों की पहुंच भी सीमित हो गई, जिससे समस्या और गंभीर हो गई।

पहले ही देश के कई महानगरों में महिलाओं के प्रति अपराध की दर बहुत ज्यादा थी। 2019 के NCRB डेटा के मुताबिक महिलाओं के प्रति सबसे ज्यादा अपराध दर वाला शहर जयपुर था। हालांकि दिल्ली, इंदौर, लखनऊ और पटना में भी महिलाओं के प्रति अपराध की दर बहुत ज्यादा थी।

रेड जोन में ऑरेंज और ग्रीन जोन के मुकाबले ज्यादा अपराध
बिहार में लॉकडाउन के दौरान दर्ज की गई FIR को लेकर एक स्टडी हुई। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान संक्रमण के मुताबिक इलाकों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बांटा गया था। इस स्टडी में पाया गया कि गंभीर नियंत्रणों वाले रेड जोन में ऑरेंज और ग्रीन जोन के मुकाबले ज्यादा अपराध हुए। इनमें से ज्यादातर अपराध पैसों के मामले से जुड़े थे। ORF के मुताबिक ये अपराध नौकरियां जाने और बिजनेस बंद होने से जुड़े थे।

घरेलू हिंसा के मामले में मदद मांगने वाली औरतों की संख्या दोगुनी हुई
ORF के मुताबिक कोविड-19 महामारी के दौरान ज्यादातर समय घर में गुजरने के चलते घरेलू हिंसा और बाल यौन शोषण जैसे मामलों में बढ़ोतरी का डर था। इसके अलावा महामारी ने समाज के कमजोर तबकों जैसे LGBTQ लोगों, बुजुर्गों और गरीबी में जी रहे लोगों के खिलाफ हिंसा को भी बढ़ावा दिया। UN ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट, 2020 के मुताबिक गूगल सर्च ट्रेंड में 'घरेलू शोषण' और 'घरेलू हिंसा हेल्पलाइन' जैसे शब्दों के सर्च बहुत ज्यादा बढ़े और 68 दिनों के लॉकडाउन के दौरान ये सर्च अब तक के सबसे ज्यादा सर्च किए गए स्तर पर पहुंचे। इस दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में सुरक्षा गृहों में भेजे जाने की गुहार और मदद मांगने के लिए आने वाले फोन दोगुने हो गए। इस दौरान पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा के मामले दर्ज कराए गए। जबकि देश में घरेलू हिंसा के कुल मामलों के 14.3% ही दर्ज किए जाते हैं।

4 गुना तक बढ़ गए साइबर क्राइम
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने हाल ही में चेतावनी जारी की थी- वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन सेल के चलते एंटी मनी लॉन्ड्रिंग अपराधों में बढ़ोतरी हो सकती है। भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर की ओर से भी कहा गया है कि डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा निर्भरता के चलते आर्थिक धोखाधड़ी में बढ़ोतरी हुई है।

FATF ने साइबर क्राइम में बढ़ोतरी की बात भी कही। उसने बताया कि कोरोना वायरस से बचाव की दवाओं का लालच देकर लोगों का कंप्यूटर हैक किया जा रहा है और उनके डेटा को बचाने के लिए फिरौती मांगी जा रही है। फरवरी और मार्च, 2020 के बीच इंटरपोल ने दुनियाभर में गंभीर खतरों वाली वेबसाइट के बनने में 788% की बढ़ोतरी दर्ज की थी। साइबर सिक्योरिटी कंपनियों ने बताया था कि झांसे वाले ईमेल में 600% की बढ़ोतरी हुई है। भारत में भी ऐसे अपराधों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। 2019 की आखिरी तिमाही में 8,54,782 साइबर अपराध दर्ज किए गए थे, जो लॉकडाउन यानी 2020 की पहली तिमाही के दौरान करीब 4 गुना बढ़कर 22,99,682 हो गए थे।

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का इस्तेमाल स्मगलिंग में किया गया
भारत के कस्टम विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी थी कि लॉकडाउन के दौरान श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का इस्तेमाल करीब 1.64 करोड़ के गैरकानूनी विदेशी तंबाकू की स्मगलिंग के लिए किया गया। हालांकि जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल की ओर से कहा गया कि यातायात के पर्याप्त साधन न होने के चलते सोने की गैरकानूनी स्मगलिंग पर लगाम लगी और इस दौरान हर महीने औसतन 2 टन की दर से ही सोने की स्मगलिंग हो सकी। जबकि 2019 में कुल 120 टन सोने की स्मगलिंग हुई थी।

लॉकडाउन के दौरान गैरकानूनी तरीकों से मास्क और सैनेटाइजर का निर्माण कर फायदा कमाने की खबरें भी सामने आईं। जिनसे भारत के कई शहरों में लोगों के स्वास्थ्य को भी नुकसान हुआ।

ORF ने अपनी रिपोर्ट में डर जताया है कि धीरे-धीरे और सोची-समझी रणनीति के तहत मदद देने के बाद भी गैरकानूनी इकोनॉमी से ऐसे लोगों को हटाना और ये अपराध खत्म करने में बहुत समय लगेगा। खासकर वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति में ऐसा कर पाना और कठिन होगा।

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