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राजस्थान के धनखड़ ने ममता से लिया लोहा:बोले- बंगाल में संविधान की रक्षा करने के लिए खून का घूंट पीकर कर रहा हूं काम

नई दिल्ली9 महीने पहलेलेखक: प्रेम प्रताप सिंह

मैं खून का घूंट पीकर काम कर रहा हूं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पूरी मशीनरी, मंत्री और पार्टी मुझे बदनाम करने में लगी हुई है। पश्चिम बंगाल में शासन का आतंक है। यह दर्द है पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ का।

वे दिल्ली दौरे पर हैं, तभी उन्होंने भास्कर के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में तमाम सवालों के बेबाकी से जवाब दिए।

इंटरव्यू लेने के पहले उन्होंने ये भी कहा कि मैं यहां PR बनाने नहीं बैठा हूं, आप जो सवाल करेंगे उनका ईमानदारी से जवाब दूंगा। करीब एक घंटे चले इंटरव्यू में उन्होंने पचास से ज्यादा बार ममता बनर्जी का नाम लिया और उन्हें बंगाल की बर्बादी की वजह बताया। पढ़िए और देखिए ये एक्सक्लूसिव इंटरव्यू।

सवाल : आप जब से राज्यपाल बने हैं, तब से आपकी CM ममता बनर्जी के साथ खटपट चल रही है। चुनाव के पहले कहा जा रहा था कि आप गवर्नर नहीं, बल्कि BJP प्रवक्ता के तौर पर काम कर रहे हैं?

जवाब : मुझे इस अप्रोच पर कड़ी आपत्ति है। राज्यपाल की हैसियत से मेरा टकराव राज्य सरकार से नहीं है। सच्चाई ये है कि राज्य सरकार का टकराव राजभवन से है। राज्य सरकार का टकराव राज्यपाल से है। मेरे मन में पीड़ा होती है। मीडिया में यह नरेटिव गढ़ा जाता है कि राज्यपाल का टकराव ममता सरकार से है। ऐसा नहीं है।

30 जुलाई से आज तक जो कुछ भी बंगाल में ममता सरकार ने किया, वह पूरे देश के इतिहास में कभी नहीं हुआ। 26 जनवरी को CM ने प्रोटोकॉल के मुताबिक राज्यपाल को रिसीव नहीं किया। मैं खुद चलकर CM के पास गया।

15 अगस्त को ‘ऐट होम’ की परंपरा है। उसे अटेंड नहीं किया। CM को आत्मचिंतन करना चाहिए। कठघरे में जिसे होना चाहिए, उसके बजाय किसी दूसरे को रखना गलत है। मेरा पूरा आचरण देखिए। मैंने संविधान की मर्यादा का शत प्रतिशत पालन किया। CM ममता संविधान के दायित्व को निभाने में विफल रही हैं।

सवाल : जिस तरह पश्चिम बंगाल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव की परिपाटी बन रही है, क्या यह बाकी राज्यों के लिए सही है या खराब मॉडल है?

जवाब : राज्यपाल की स्थिति तब विचित्र हो जाती है, जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकार होती हैं। राज्यपाल एक पंचिंग बैग बना दिया जाता है। ये मैसेज जाता है कि राज्यपाल एक सियासी एजेंडा चला रहे हैं।

मैं चुनौती देता हूं कि कोई बताए कि मेरा कौन सा काम कानून या मर्यादा के खिलाफ है। क्या कोई बताएगा कि सरकार ने संविधान की अनदेखी करने में कोई कसर बाकी रखी है? सोचिए कि राज्यपाल पर क्या गुजरती होगी, जब ट्रांसपेरेंसी नहीं होती।

जवाबदेही दूर-दूर तक नजर नहीं आती। गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन का ही उदाहरण लीजिए। 2011 में इसका कानून बना। 2012 में ये लागू हुआ। पहले पांच साल कोई चुनाव नहीं कराए गए। हर साल केंद्र और राज्य सरकार से करोड़ों मिलते हैं। आज तक एक साल का भी ऑडिट नहीं हुआ।

सवाल : आपने अचानक विधानसभा सत्र क्यों स्थगित कर दिया? क्या आपको खतरा लग रहा था कि आपके खिलाफ सदन में प्रस्ताव पास करेगी सरकार? क्या संविधान में ऐसा करने का अधिकार आपके पास है?

जवाब : जमीन से जुड़ा हुआ हूं। किसान परिवार से आता हूं। डरना मेरे स्वभाव में नहीं है। जिसे विरोध करना है, करे। मैं संवैधानिक रास्ते पर ही चलूंगा। मैं संविधान की रक्षा करते हुए जनता की सेवा करूंगा। मैं एक ही जगह से कमांड लेता हूं और वह है भारत का संविधान। ममता सरकार ने संविधान का धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं बाकी रखी।

सवाल : हमारे सवाल का जवाब नहीं आया। विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित क्यों किया?

जवाब : सवाल पर कड़ी आपत्ति है। राज्य सरकार के लिखित में आए अनुरोध पर मैंने सदन स्थगित किया था, लेकिन तमिलनाडु के CM ने ट्वीट कर दिया। यह गलत नरेटिव गढ़ा गया है।

सवाल: बंगाल में इतनी खराब सरकार चल रही है तो आप बड़ा फैसला क्यों नहीं कर रहे हैं। तमाशा क्यों बना रहे हैं?

जवाब : सरकार के साथ काम करना, सरकार को प्रोत्साहित करना, मेरी जिम्मेदारी है। हर बात पर हथौड़ा चलाया जाए, यह भारत के संविधान की मूल भावना नहीं है। मैं लगातार प्रयासरत हूं। उसके नतीजे भी आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल में इतना आतंक है, लोगों के मन में इतना बड़ा डर है कि उस वजह से चर्चा नहीं कर पाते। बंगाल में शासन का आतंक है।

भारत के इतिहास में मानवता इससे ज्यादा कभी कलंकित नहीं हुई है। बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा देखी? तीन दिन तक आगजनी, बलात्कार, कत्ल। मैं पूरे पश्चिम बंगाल में गया। जान और इज्जत बचाने के लिए लोग असम में शरणार्थी बने। जम्मू-कश्मीर के बाद पश्चिम बंगाल दूसरा ऐसा राज्य है, जिसके लोग शरणार्थी बने। मैंने पश्चिम बंगाल की भयावह स्थिति देखी, लेकिन CM के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

सवाल: आप कहते हैं कि बंगाल में कानून का राज नहीं है, तो ममता बनर्जी इतने बड़े बहुमत से कैसे जीतीं? क्या लोग उन्हें पसंद कर रहे हैं?

जवाब : राज्यपाल की हैसियत से मैं राजनीति में स्टेकहोल्डर नहीं हूं। सरकार कानून और संविधान के अनुरूप चले। क्या कभी सुना है कि राज्यपाल के अनुमोदन के बिना राज्य संचालित विश्वविद्यालय में VC की नियुक्ति हो सकती है? बंगाल में 25 VC की नियुक्ति राज्यपाल के बिना अनुमोदन के हुई है। ये अराजकता का चरम है।

लोगों के अंदर भयानक डर बैठा है। मैंने देखा है। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में मत देने की कीमत आपकी मौत हो, तो आलम क्या होगा? अंदाजा लगा सकते हो। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद मैंने देखा। चुनाव बाद चुन-चुनकर लोगों के घरों में आग लगाई गई। कोर्ट के आदेश के बाद एक कमेटी ने जांच की।

उसमें सामने आया कि पश्चिम बंगाल में कानून का नहीं शासक का राज है। इससे खराब कमेंट नहीं हो सकता है। मैं किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं हूं। मुझे हैरानी होती है कि मीडिया क्यों चुप है। पश्चिम बंगाल में इमरजेंसी से ज्यादा भयानक हालात हैं, लेकिन मीडिया चुप रहा।

मैंने विधानसभा को दो बार एड्रेस किया। दोनों बार मेरा भाषण ब्लैक आउट हुआ। ऐसा इमरजेंसी में भी नहीं हुआ। राज्यपाल विधानसभा के स्पीकर को चिट्‌ठी के जरिये सूचना देकर विधानसभा जाता है और दरवाजे बंद मिलते हैं। राज्यपाल चांसलर की हैसियत से कलकत्ता विश्वविद्यालय जाता है, वहां की VC ताला बंद करके चली जाती हैं।

सवाल : CM ने आपको ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया है, इसकी क्या वजह है? क्या आप हर चीज में सरकार को घेरने की कोशिश करते दिखते हैं?

जवाब : आप उनसे पूछिए। उन्होंने ऐसा क्यों किया। मैं एक ओर इशारा करता हूं। कौन कहता है झूठ के पांव नहीं होते। मीडिया के कारण बंगाल में झूठ के पांव देखे हैं। पश्चिम बंगाल के एक सांसद सौगत रॉय ने कहा कि राज्यपाल रोज CM के खिलाफ वॉट्सऐप करते हैं।

मैंने पत्र लिखकर पूछा, लेकिन आज तक जवाब नहीं मिला। CM गोवा जाकर कहती हैं कि राजभवन में राजा बैठता है। यह उन्हें शोभा देता है क्या? मीडिया ने झूठ को बढ़ावा दिया है।

सवाल : आपके और ममता के बीच कड़वाहट इतनी बढ़ गई है कि सरकारी पत्राचार भी सोशल मीडिया पर किया जा रहा है। क्या लगता है आप दोनों के बीच रिश्ते सुधरेंगे?

जवाब : मैंने CM से कहा कि आपको लगे कि राज्यपाल का कोई कदम संविधान के खिलाफ है, या कानून के खिलाफ है, तो मैं चर्चा करने के लिए तैयार हूं। सुधार करने के लिए तैयार हूं, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं आया। मैंने CM को कई पत्र लिखे हैं, लेकिन ढाई साल में एक भी पत्र का जवाब नहीं दिया। ये ऐसे मुद्दे है, जो आर्थिक प्रकृति के हैं।

इसका गहन अध्ययन करके आपराधिक जांच होनी चाहिए, ताकि दोषियों को घेरा जा सके। ममता बनर्जी ने जानकारी न देकर उन लोगों को संरक्षण दिया है, जिन्होंने कानून को ताक पर रखकर पैसा कमाया है। देरी हो सकती है, लेकिन कानून के शिकंजे से कोई नहीं बच नहीं सकता है। मैं सरकार की किसी स्कीम के विरोध में नहीं हूं, लेकिन जब संविधान के खिलाफ किया जाएगा तो क्या करूंगा।

सवाल : राज्यपाल तो दूसरे राज्यों में भी हैं, वहां भी हैं जहां BJP की सरकार नहीं है, लेकिन कहीं और से ऐसे टकराव और विवाद की खबरें नहीं आतीं। क्यों?

सवाल : क्या आप ऐसा मानते हैं। पिछले दो दिनों से देखिए केरल में क्या हो रहा है। एक नियम से चल रहे हैं तो आप प्रतिक्रिया से प्रभावित नहीं हो सकते। पश्चिम बंगाल की अव्यवस्था केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए चुनौती है। यह एक बॉर्डर स्टेट है। मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल में सरकारी तंत्र का पूरा राजनीतिकरण किया जा चुका है। वहां कर्मचारी सरकारी नहीं, बल्कि राजनीतिक कर्मचारी की तरह काम कर रहे हैं।

सवाल : सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐसी बातें तो ज्योति बसु के शासनकाल से कही जा रही हैं।

जवाब : यदि कोई जख्म पुराना है, तो क्या उसका इलाज नहीं किया जाना चाहिए? पिछले दस साल में जो तांडव देखा गया है, वैसा कभी नहीं देखा गया। बंगाल में किसी को 10 ईंट या एक बोरी सीमेंट खरीदने का अधिकार नहीं है। पश्चिम बंगाल का बुरा हाल कर दिया है। इतना अच्छा प्रदेश, जिसके लोग अच्छे हैं। कल्चर के मामले में पूरी दुनिया में जाना जाता है, वहां की शासन व्यवस्था मानवता को शर्मसार कर रही है। यह मेरे लिए चिंता का विषय है।

सवाल : ममता पहले वामपंथी सरकार से लड़ीं, अब आपसे ?

जवाब : पश्चिम बंगाल में एक बात कही जाती है। राज्य में एक ही पद है। संविधान में CM की जो जिम्मेदारियां राज्यपाल के प्रति हैं, उनमें से एक का भी निर्वहन ममता बनर्जी ने नहीं किया। आज तक ऐसा व्यवहार किसी दूसरे मुख्यमंत्री का नहीं देखा गया है। देश का कोई CM कानून के खिलाफ सड़क पर आकर विरोध करेगा, यह कल्पना नहीं की जा सकती है। उन्होंने देश की संसद से पास सिटिजन अमेंडमेंट एक्ट (CAA) का विरोध किया था।

सवाल : ममता से लगातार टकराव को लेकर क्या कभी ऐसा नहीं लगता कि बस बहुत हो गया। इस विवाद को खत्म किया जाए?

जवाब : मैं खून का घूंट पीकर काम कर रहा हूं। ममता बनर्जी की पूरी मशीनरी, मंत्री और पार्टी मुझे बदनाम करने में लगी हुई है। राज्यपाल को नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। कोई कुछ भी करे, लेकिन ऊपर वाले की कृपा उस पर रहती है, जो ईमानदारी से काम करता है।

सवाल : क्या आप पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे?

जवाब : हां, पांच साल का कार्यकाल पूरा करूंगा। यह टनल बहुत लंबी है और अंधेरे से भरी हुई है, लेकिन इस सुरंग का अंत होगा। इसके बाद रोशनी दिखाई देगी। थोड़ी बहुत चिंगारी भी दिखाई दे रही है। शासन व्यवस्था ठीक न होने से जो राज्य कभी पहले नंबर पर था, वहां से लोग लगातार पलायन कर रहे हैं। प्रदेश से व्यापार, उद्योग बाहर जा रहा है। यह चिंता का विषय है। हालात बदलेंगे।