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केरल भाजपा उपाध्यक्ष राधाकृष्णन से बातचीत:भाजपा केरल में 10 से 20 सीटें जीतकर हंग असेंबली चाह रही है, ताकि दोबारा चुनाव हो और सरकार बना सके

त्रिशूरएक वर्ष पहलेलेखक: गौरव पांडेय

केरल में भाजपा के उपाध्यक्ष डॉक्टर केएस राधाकृष्णन को हर कोई सर कहकर ही बुलाता है। वे राज्य का जाना-माना चेहरा हैं। राजनीति में आने से पहले राधाकृष्णन श्री शंकराचार्य संस्कृत यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) के चेयरमैन भी रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव में PSC घोटाला सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। राधाकृष्णन इन दिनों पार्टी की विजय रथ यात्रा में जुटे हैं। इस यात्रा के दौरान त्रिशूर जाते वक्त भास्कर की टीम ने उनके साथ ही सफर किया। पढ़िए उनसे विधानसभा चुनावों पर हुए सवाल-जवाब के प्रमुख अंश...

केरल चुनाव में इस बार तीन बड़े मुद्दे क्या हैं? क्या LDF इस बार फिर सत्ता में आएगी?
करप्शन सबसे बड़ा मुद्दा है। दूसरा बड़ा मुद्दा गोल्ड स्मगलिंग और हवाला का है। यह CM के ऑफिस से ही हो रहा था। इसलिए CPM का लौटना बहुत मुश्किल है। 10 साल में केरल के राजनीतिक समीकरण बहुत तेजी से बदले हैं। भाजपा का वोट शेयर 10% बढ़ा है, जबकि UDF का वोट शेयर 7% से 13% तक और LDF 4% से 7% तक घटा है। केरल का युवा नरेंद्र मोदी के विकास को पसंद कर रहा है। पूरी उम्मीद है कि इस चुनाव में हम यहां 20% से ज्यादा वोट ले आएंगे। यदि इतने वोट आ जाएंगे तो हम यहां 10 से 20 सीटें जीत जाएंगे। फिर यहां हंग असेंबली होगी और हम यही चाहते हैं। ताकि फिर अगले चुनाव में हम यहां 30% से 40% सीटें जीतकर सरकार बना सकें।

केरल में हर 5 साल बाद UDF-LDF के बीच ही सरकार बदलती है, भाजपा थर्ड ऑप्शन क्यों नहीं बन पा रही है?

पहली बार केरल के इतिहास में भाजपा ही थर्ड ऑप्शन बन रही है। केरल में 26 पॉलिटिकल आउटफिट्स हैं, जो UDF और LDF में बंटे हैं। लेकिन भाजपा यहां अकेली ऐसी पार्टी है, जिसका सिर्फ एक या दो पार्टियों के साथ ही गठबंधन है। उसके बावजूद हम यहां आगे बढ़े हैं।

केरल लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केएस राधाकृष्णन 17 मार्च 2019 को भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वे कांग्रेस से जुड़े थे।
केरल लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केएस राधाकृष्णन 17 मार्च 2019 को भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले वे कांग्रेस से जुड़े थे।

आप कांग्रेस में एक दशक तक रहे। कांग्रेस और भाजपा में विचारधारा के अलावा चुनावी तैयारियों को लेकर क्या अंतर हैं?
कांग्रेस की स्टेट लीडरशिप कई दशक से बुरे नेताओं के हाथ में है। उन्होंने नेहरू की लीगेसी को बहुत नीचे पहुंचा दिया है। कांग्रेस का यहां आखिरी पड़ाव चल रहा है। भाजपा का स्ट्रॉन्ग पॉइंट इसका ऑर्गेनाइजेशन है, इसीलिए भाजपा आज इतनी बड़ी पार्टी बनी। केरल में कांग्रेस कुछ लोगों का गुट बनकर रह गई है।

आपके भाजपा से जुड़ने की मुख्य वजह क्या रही?
पहली बार भारत के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने आखिरी लाइन में खड़े लोगों के लिए काम किया है। गरीब लोगों के लिए जनधन अकाउंट, उज्ज्वला स्कीम, स्वच्छ भारत स्कीम लेकर आए। केरल में 18 लाख महिलाओं को उज्ज्वला का फायदा हुआ है। नरेंद्र मोदी के इसी डेवलपमेंट मॉडल से प्रभावित होकर मैं भाजपा में आया हूं।

मोदी और अमित शाह बंगाल जितना फोकस केरल पर क्यों नहीं कर रहे हैं?
नहीं, मैं बिल्कुल ऐसा नहीं सोचता हूं। बंगाल में काफी कुछ बदला है, उसी दिशा में केरल भी है। मोदी-शाह केरल को पर्याप्त महत्व दे रहे हैं।

आप केरल पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन भी रहे हैं, आजकल यहां PSC में घोटाले की बहुत चर्चा है, आखिर ये घोटाला है क्या?

यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं केरल पब्लिक सर्विस कमीशन की मौजूदा स्थिति को देखकर बहुत दुखी हूं। इस आयोग की पहले जो ट्रांसपेरेंसी, रिलायबिलिटी, क्रेडिबिलिटी थी, वह देश के किसी स्टेट आयोग से ज्यादा थी, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं है। अब इस आयोग की सर्जरी की जरूरत है। जब मैं आयोग का चेयरमैन था, तब यह दुनिया का बेस्ट कमीशन था, लेकिन पॉलिटिकल प्रभाव के चलते अब इसने सब कुछ खो दिया है।

त्रिशूर में भाजपा की चुनावी सभा को संबोधित करते राज्य के पार्टी उपाध्यक्ष डॉ. राधाकृष्णन।
त्रिशूर में भाजपा की चुनावी सभा को संबोधित करते राज्य के पार्टी उपाध्यक्ष डॉ. राधाकृष्णन।

PSC रैंक होल्डर्स प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं, राहुल गांधी उनसे मिलने भी पहुंचे, भाजपा नेता क्यों नहीं जा रहे वहां?

नहीं, भाजपा के नेता वहां गए हैं। खासकर हमारा यूथ ऑर्गेनाइजेशन वहां रोज की हड़ताल को लीड कर रहा है, लेकिन इसमें राहुल गांधी जब जाते हैं, तो नेशनल न्यूज बनती है। यदि मैं जाता हूं, तो न्यूज नहीं बनती है।

मोदी, शाह, नड्‌डा क्यों नहीं मिलने गए?

यह कैसे संभव है, मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, वे कैसे जा सकते हैं। नड्‌डा और शाह यहां आए ही नहीं, तो जाएंगे कैसे। यह स्टेट का विषय है, स्टेट के हमारे नेता आ-जा रहे हैं।

आप लोग इस चुनाव में किस चेहरे के सहारे चुनाव लड़ने जा रहे हैं? कहा जा रहा है आपके पास लोकल फेस नहीं है, सिर्फ मोदी जी ही हैं?

यह बात बिल्कुल गलत है। मोदी जी नेशनल लीडर हैं। केरल का हर व्यक्ति उनकी तारीफ करता है। हमारा फेस यहां स्टेट प्रेसिडेंट के. सुरेंद्रन हैं, वह युवा और डायनमिक नेता हैं।

डॉ. राधाकृष्णन कहते हैं कि राज्य में एंटी नेशनल ग्रुप लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं, लेकिन इस बारे में LDF और UDF के नेता कुछ नहीं बोलते हैं।
डॉ. राधाकृष्णन कहते हैं कि राज्य में एंटी नेशनल ग्रुप लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं, लेकिन इस बारे में LDF और UDF के नेता कुछ नहीं बोलते हैं।

केरल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की खबरें आती रहती हैं? ऐसा क्यों है, इसके पीछे कौन लोग हैं?

बहुत सारे भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं की हत्या यहां एक्स्ट्रीमिस्ट्स द्वारा की गई है। यहां दो तरह के एक्स्ट्रीमिस्ट ग्रुप हैं। एक पॉलिटिकल और दूसरा रिलीजियस ग्रुप है। हाल ही में हमारे एक 33 साल के कार्यकर्ता की SDPI से जुड़े ऑपरेटर्स ने हत्या कर दी। एक एंटी नेशनल ग्रुप द्वारा हमारे कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी जाती है, लेकिन LDF और UDF के नेता इसके खिलाफ कुछ नहीं बोलते हैं।

भाजपा की कितनी सीटें आ रहीं केरल में?

20 सीट तक जीत सकते हैं। पिछले चुनाव में 45 से ज्यादा सीटों पर हमें 30 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। अगर हम 15 हजार वोट बढ़ाने में सफल रहे, तो हम इतनी सीटें जरूर जीत सकते हैं। पिछले चुनाव में भाजपा 7 सीटों पर रनर-अप रही थी।

राहुल गांधी कह रहे हैं कि दक्षिण भारतीयों की समझ उत्तर भारतीय लोगों से बेहतर होती है, आप क्या सोचते हैं इस बारे में?

यह दुर्भाग्यपूर्ण है। एक लीडर अपने कद से बड़ा होता है, लेकिन राहुल गांधी में ऐसा बिल्कुल नहीं दिखता है, वो नेशनल लीडर हैं। वो इस लेवल तक गिर जाएंगे, मुझे नहीं मालूम था।

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