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  • BJP's Vote Share Decreases In The Assembly Compared To Lok Sabha, TMC Increases, But 1.5% Decrease In Voting Is A Matter Of Concern For Didi

बंगाल में वोटिंग पैटर्न क्या कहता है:लोकसभा के मुकाबले विधानसभा में BJP का वोट शेयर घटता है, TMC का बढ़ता है, इसी ट्रेंड के कारण टूटा भाजपा का बंगाल जीत का सपना

नई दिल्ली2 महीने पहले
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बंगाल के नतीजे के रूझान में तृणमूल बड़ी जीत की तरफ आगे बढ़ती दिख रही है। पिछले लोकसभा में 19 सीटें जीतने वाली भाजपा उस प्रदर्शन से पीछे दिख रही है। विधानसभा चुनाव में वोटिंग परसेंटेज और पिछले चुनावों के वोटिंग पैटर्न को देखते हुए कुछ निष्कर्ष निकलते हैं। एक नजर उन पर डालते हैं...

वोटिंग परसेंटेज में थोड़ी कमी, लेकिन TMC को फर्क नहीं पड़ा

राज्य में आठ चरणों में हुए चुनाव में चुनाव आयोग के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, 81.59% वोटिंग हुई है। जबकि 2016 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिश्त का आंकड़ा 83.02% था। 2016 में तृणमूल ने 211 सीट जीतकर बड़ी जीत हासिल की थी।

2021 में 2016 के असेंबली इलेक्शन के मुकाबले वोटिंग परसेंटेज करीब 1.5% कम है। जो टीएमसी के लिए चिंता की बात थी। लेकिन, जाहिर है कि तृणमूल ने वोटिंग में इसी कमी की भरपाई कर ली और उसे कम वोटिंग का फर्क नहीं पड़ा। जो एग्जिट पोल तृणमूल को बहुमत का मार्क छूते दिखा रहे थे, वह भी उसे पिछले चुनाव के मुकाबले 50 से 60 सीटों का नुकसान दिखा रहे थे। लेकिन नतीजों में तृणमूल 2016 के विधानसभा चुनाव से महज आठ-दस सीट पीछे ही दिख रही है।

वोटिंग परसेंटेज का दूसरा पहलू

हालांकि, कुछ चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि ममता सरकार दस साल से बंगाल में है और उसके एंटी इनकैंबेंसी फैक्टर भी है। ऐसे में ज्यादा वोटिंग उन्हें नुकसान भी पहुंचा सकती थी क्योंकि बढ़ा हुआ वोटिंग परसेंटेज ज्यादातर सत्ता के खिलाफ होता है। फिलहाल नतीजों से ऐसा लग रहा है कि वोटिंग में मामूली गिरावट का फायदा भी तृणमूल को मिला।

हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि बंगाल में पिछले कई चुनावों से वोटिंग परसेंटेज एकाध फीसद के अंतर के साथ ऐसा ही रह रहा है, इसलिए इसके सहारे बड़ा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ममता की जीत में वोटिंग परसेंटेज से ज्यादा दूसरे फैक्टर हैं।

लोकसभा और विधानसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न के फर्क से हारी भाजपा

2016 के बंगाल विधानसभा चुनाव में महज तीन सीट जीतने वाली भाजपा 2021 में सत्ता की दौड़ में है। इसकी सबसे बड़ी वजह है, 2019 के लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन। तब भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 40.6 % वोट शेयर के साथ 42 में से 18 लोकसभा सीटें जीत ली थीं। तृणमूल कांग्रेस ने 43.6 % वोट लेकर 22 सीट जीतीं थी। वोट परसेंटेज के लिहाज से बीजेपी तृणमूल से सिर्फ 3 % प्रतिशत पीछे थी। भाजपा को उम्मीद थी वह आक्रामक हिंदुत्व के सहारे इस अंतर को पाट देगी।

2019 लोकसभा चुनाव के विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो ममता बनर्जी की तृणमूल ने 164 सीटों पर और बीजेपी ने 121 सीट पर बढ़त बनाई थी। कांग्रेस सिर्फ 9 सीट पर आगे थी। लेफ्ट किसी भी विधानसभा सीट पर आगे नहीं रहा था। लेकिन, अब 2014 के लोकसभा चुनाव पर आते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी को 17.02 % वोट मिले। लेकिन, 2016 के विधानसभा के चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 10.16 % हो गया।जबकि, तृणमूल का वोट शेयर 2014 लोकसभा चुनावों में 39.79 % था, जो 2016 के विधानसभा चुनावों में बढ़कर 44.91 % हो गया।

यह आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी को 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2016 के विधानसभा चुनावों में करीब 7 फीसद वोट कम मिले। यह पैटर्न यह बताता है कि भाजपा का वोट लोकसभा चुनाव के मुकाबले विधानसभा चुनाव में घटता है। 2014 के लोकसभा और 2016 के विधानसभा का यह पैटर्न 2021 के विधानसभा चुनाव में भी रिपीट होता दिख रहा है। जो भाजपा की हार की बड़ी वजह है। वोटिंग शेयर के अंतिम आंकड़े आने के बाद यह और साफ हो जाएगा कि लोकसभा में 40 फीसदी वोट पाने वाली भाजपा को विधानसभा चुनावों में कितना वोट मिला।

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