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आज की पॉजिटिव खबर:जरूरतमंद लोगों के लिए भाई- बहन ने बनाया दानपात्र नाम का ऐप; 4 साल में 11 लाख लोगों की मदद की

6 महीने पहलेलेखक: निकिता पाटीदार

जरूरतमंदों की मदद के लिए इंदौर के भाई-बहन की जोड़ी ने ‘दानपात्र’ नाम का से एक खास तरह का ऐप बनाया है। इस ऐप की मदद से लोग इन्हें कांटेक्ट कर इन्हें अपने पुराने कपड़े, खिलौने, किताबें, जूते, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स, फर्नीचर जैसी कई जरूरत की चीजें देते हैं। जिसे दानपात्र की टीम जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाती है। दानपात्र में 7 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर काम करते हैं, जो ऐप पर रिक्वेस्ट मिलने पर लोगों के घर जाकर सामान कलेक्ट करते हैं। सिर्फ चार सालों में दानपात्र के जरिए करीब 11 लाख लोगों को मदद मिली है। पिछली दिवाली पर दानपात्र की टीम ने एक ही दिन में करीब ढाई लाख जरूरतमंद परिवारों तक कपड़े, किताबें, राशन, बच्चों के लिए खिलौनों सहित कई जरूरत की चीजें पहुंचाया है। इसके लिए दानपात्र का नाम एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।

आज की पॉजिटिव खबर में जानेंगे आकांक्षा गुप्ता और यश गुप्ता की कहानी जिनकी अनोखी पहल से कई लोगों को मदद मिली ...

शादियों में होने वाले वेस्ट फूड से आइडिया आया

29 साल की आकांक्षा गुप्ता पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और खुद का सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी चलाती हैं
29 साल की आकांक्षा गुप्ता पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और खुद का सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी चलाती हैं

29 साल की आकांक्षा गुप्ता पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और खुद की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी चलाती हैं। अपने एक दोस्त की शादी में वेस्ट होने वाले खाने को देख उन्हें कुछ अलग करने का आइडिया आया।

आकांक्षा बताती हैं, "मैं साल 2018 में एक करीबी दोस्त की शादी में गई थी। हम दोस्तों ने वहां सारे प्रोग्राम अटेंड किए। रिसेप्शन के बाद में मैंने देखा फंक्शन से बचा बड़ी मात्रा में खाना वेस्ट हुआ। वो खाना इतना था की 1000 से ज्यादा लोगों का पेट भर सकता था। तब मैंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर जरूरतमंद लोगों तक वो खाना पहुंचाया। इस तरह मुझे लोगों की मदद करने का आइडिया आया।"

इस तरह आकांक्षा ने एक बेहतर पहल की तरफ कदम बढ़ाए और फिर धीरे-धीरे कई लोग उनके साथ जुड़ते गए

इंजीनियरिंग की पढ़ाई लोगों के लिए मददगार साबित हुई

आकांक्षा सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो उनके लिए ऐप डिजाइन करना आसान था
आकांक्षा सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो उनके लिए ऐप डिजाइन करना आसान था

चूंकि आकांक्षा सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो उनके लिए ऐप डिजाइन करना आसान था। उन्होंने ऐसा ऐप तैयार किया जिसके जरिए लोग अपने घर, शादियों या पार्टियों से बचने वाले खाने को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचा सकें। ऐप पर कई लोगों की रिक्वेस्ट आने लगी जिसके बाद आकांक्षा और उनके दोस्त इसे लोगों तक पहुंचाने भी लगे। इस सब के दौरान उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

वो बताती हैं, "हम पूरी कोशिश करते थे कि लोगों तक समय से खाना पहुंच जाए। फिर भी कई बार खाना खराब हो जाता, इसलिए हमने अपने ऐप को अपडेट कर इसमें ड्रायफूड मटेरियल के साथ कपड़े, किताबें, राशन और बच्चों के लिए खिलौनों जैसी कई चीजें शामिल कर लीं। जिसे लोगों तक पहुंचने लगे। इन सभी काम में मेरे भाई यश गुप्ता ने मेरे बहुत मदद की।"

इस तरह चीजें आपके घर से उनके घर जाती हैं

दानपात्र एक फ्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। जिसे लोगों की जरूरत के हिसाब से डिजाइन किया गया है
दानपात्र एक फ्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। जिसे लोगों की जरूरत के हिसाब से डिजाइन किया गया है

19 साल के यश गुप्ता बताते हैं कि दानपात्र एक फ्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। जिसे लोगों की जरूरत के हिसाब से डिजाइन किया गया है।

"हमारी टीम में 7 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर हैं जो यूजर से रिक्वेस्ट मिलने पर एक हफ्ते के अंदर उनके घर जाकर सामान कलेक्ट करते हैं।" इस तरह दानपात्र और उनकी टीम काम करती है।

  • ऐप पर लोगों की रिक्वेस्ट मिलने पर वॉलेंटियर लोकेशन पर जाते हैं।
  • एरिया के हिसाब से वॉलेंटियर फील्ड से सामान कलेक्ट करते हैं।
  • सामान को सेंटर पर ला कर फिल्टर या रीसाइकल किया जाता है।
  • खराब या इस्तेमाल ना किए जा सकने वाले सामान को हटा दिया जाता है
  • कैटेगरी के हिसाब से सभी सामान को रखा जाता है।
  • इस सामान को जरूरत के हिसाब से लोगों में बांट दिया जाता है।
  • सामान का फोटो, वीडियो "दानपात्र" के सोशल मीडिया पेज पर जाकर अपलोड कर दिया जाता है।
  • जिससे डोनर को भी पता चल सके की उनका दिया सामान सही जगह पहुंच गया है।

अब तक 7 हजार वॉलेंटियर 11 लाख लोगों की मदद कर चुके हैं

आकांक्षा और यश ने वॉलेंटियर को व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए जोड़ रखा है, जो अब तक 11 लाख से ज्यादा लोगों तक सामान पहुंचा चुके हैं
आकांक्षा और यश ने वॉलेंटियर को व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए जोड़ रखा है, जो अब तक 11 लाख से ज्यादा लोगों तक सामान पहुंचा चुके हैं

यश फिलहाल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे। वो बताते हैं, "हमारे साथ इस नेक काम को करने के लिए कई लोग लगातार जुड़ रहे हैं। हमने 4 साल पहले इस मुहिम की शुरुआत की थी। अब तक हमारे साथ 7 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर जुड़ चुके हैं। इनमें स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल इंजीनियर, डॉक्टर, टीचर सहित कई अलग-अलग फील्ड के लोग जुड़े हैं।"

आकांक्षा और यश ने वॉलेंटियर को 15 व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए जोड़ रखा है। जो अब तक 11 लाख से ज्यादा लोगों तक सामान पहुंचा चुके हैं।

देश- विदेश से मदद मिल रही है

बेहतरीन काम के लिए दानपात्र को एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है
बेहतरीन काम के लिए दानपात्र को एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है

आकांक्षा बताती हैं, "हमारे वॉलंटियर्स की टीम फिलहाल इंदौर और इसके 80 किलोमीटर के दायरे में काम करती है। मध्यप्रदेश के कई शहरों में भी हमने टीम बनाई है। इसके अलावा देश-विदेश से भी लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं। दानपात्र की एक पॉलिसी है कि हम कभी भी डोनेशन में किसी से पैसे नहीं लेते। अगर आप दूर कहीं हैं जहां से हमारी टीम सामान नहीं ले सकती तो आप किसी लोकल शॉप या वेंडर से सामान ऑर्डर कर दें। इससे हमें कैश लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन लोगों तक मदद जरूर पहुंच जाएगी।"

पिछली दिवाली पर दानपात्र की टीम ने एक ही दिन में करीब ढाई लाख जरूरतमंद परिवारों तक कपड़े, किताबें, राशन, बच्चों के लिए खिलौनों सहित अन्य सामान पहुंचाया था। इस बेहतरीन काम के लिए दानपात्र का नाम ‘एक्सक्लूसिव वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज हुआ है ।