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भास्कर ओरिजिनल:'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के लिए बजट में आधे दर्जन से ज्यादा प्रस्ताव, फिर भी भारत में बिजनेस करना नहीं है आसान

3 महीने पहले
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भारत तेजी से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' रैंकिंग में तरक्की कर रहा है। इसकी वजह पहले के पेचीदे कागजी नियम-कानून के बजाय प्रक्रिया का ऑनलाइन और आसान हो जाना है। ग्लोबल कंसल्टेंसी मैकेंजी की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में भारत की ग्लोबल रैंकिंग 130 थी, जो 2019 में 63वीं रैंक तक पहुंच गई है। दिल्ली में बतौर ट्रेडमार्क अटॉर्नी काम कर रहे शिव मिश्रा कहते हैं, 'कंपनी के रजिस्ट्रेशन से लेकर टैक्स भरने, रिटर्न पाने की प्रक्रिया पारदर्शी और आसान हुई हैं। कंपनी की रजिस्ट्रेशन फीस खत्म कर के, केवल लीगल ड्यूटी और स्टॉम्प ड्यूटी शुल्क ही लिए जाते हैं। माइक्रो स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज (MSME) का सबसे ज्यादा ख्याल रखा जा रहा है। चाहे उन्हें ट्रेडमार्क लेने पर 50% की छूट हो या ऑनलाइन रीफंड और रिटर्न क्लेम करने की सुविधा हो। पहले कंपनियों को कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड (PF) से लेकर ISO सर्टिफिकेट के लिए अलग-विभागों में जाकर लाइन लगानी पड़ती थी। अब ये सब काम घर बैठे ऑनलाइन हो जाते हैं। हालांकि अब भी चार्टर्ड अकाउंटेंट और वकील की सलाह के बिना कंपनी चलाना संभव नहीं है।'

कई इंटरनेशनल क्लाइंट संभालने वाली ई-सॉल्यूशन कंपनी आईड्रीमबिज के को-फाउंडर संचित गोयल बताते हैं, 'मैंने अपना काम 2009 में शुरू किया था। तब एक-एक कागज लेकर मैं इस डिपार्टमेंट से उस डिपार्टमेंट भागता रहता था। कोई ट्रैकिंग सिस्टम नहीं था, ना ही डेडलाइन। छह महीने से ज्यादा सभी अप्रूवल पाने में लग गए थे। पहले हम कंप्यूटर खरीदने पर वैल्यू ऐडेड टैक्स (VAT) चुकाते थे और क्लाइंट से सर्विस टैक्स लेते थे। क्लाइंट को ये टैक्स चुकाने के लिए तैयार कर पाना चुनौती होती थी। अब GST आने के बाद कोई चुनौती नहीं है। GST फॉर्म भी आसान हो गया है। हालांकि अब भी टैक्सेशन की भाषा आसान नहीं है।'

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग कैसे तय की जाती है?
जिन 10 पैमानों के आधार पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग तय की जाती है, उनमें बिजली कनेक्शन लेने में लगने वाला समय, कॉन्ट्रैक्ट लागू करना, बिजनेस शुरू करना, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, दिवालिया होने के मामले सुलझाना, कंस्ट्रक्शन सर्टिफिकेट, लोन लेने में लगने वाला समय, माइनॉरिटी इन्वेस्टर्स के हितों की रक्षा, टैक्स पेमेंट और ट्रेडिंग अक्रॉस बॉर्डर जैसे मापदंड शामिल हैं। एक 11वां पैमाना ‘श्रम बाजार के नियम’ भी होता है।

सोमवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2021 में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने वाली कई घोषणाएं की गई हैं...

10 करोड़ तक टर्नओवर वाली कंपनियों को टैक्स ऑडिट से छूट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि जिन कंपनियों का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ है और जिनका 95% ट्रांजैक्शन डिजिटल मोड में हुआ हो तो उन्हें टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं है। पहले यह लिमिट 5 करोड़ थी। डिजिटल ट्रांजैक्शन का ‌रिकॉर्ड पहले से ही सरकार के पास होता है। ऐसे में ऑडिट कराने और सीए को फीस देने से कंपनियां बच जाएंगी।

एकल मालिकाना वाली कंपनियों को छूट
सरकार ने एकल मालिकाना वाली कंपनी को शेयरधारकों से मिले पैसे और टर्नओवर पर टैक्स में छूट दी है। स्टेक टेक्नोलॉजीस के CEO अतुल राय के मुताबिक, 'स्टार्टअप्स को मिली ये छूट ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देगी।'

बीस करोड़ तक टर्नओवर वाली कंपनी छोटी कहलाएंगी
छोटी कंपनी की परिभाषा बदलने का प्रस्ताव भी बजट में है। अभी तक 50 लाख रुपए तक निवेश और दो करोड़ रुपए तक सालाना टर्नओवर वाली कंपनी छोटी कहलाती थी। अब दो करोड़ तक निवेश और 20 करोड़ तक टर्नओवर वाली कंपनी छोटी कंपनी होगी। इससे उन्हें छोटी कंपनियों के फायदे मिलेंगे, जिसमें ब्याज आदि में छूट मिलेगी। MSME के लिए 15,700 करोड़ रुपए का प्रोविजन किया गया है। यह पिछले साल से दोगुना है।

कई नियम-कानूनों को मिलाकर एक नियम बनाने का ऐलान
सरकार SEBI एक्ट, 1992, सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेग्युलेशन) एक्ट, 1956 और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज एक्ट, 2007 को मिलाकर 'सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड' नाम से एक कानून बनाएगी। रिलायंस सिक्योरिटीज के ED और CEO लव चतुर्वेदी के मुताबिक 'सिंगल सिक्योरिटीज मार्केट कोड भारतीय वित्तीय बाजारों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की संभावना बढ़ाएगा।'

बिजनेस की अनुमति के लिए AI पर आधारित प्रक्रिया
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर डाटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि बिजनेस और स्टार्टअप को कानूनी अनुमति मिलने में आसानी हो। सरकार ने कहा है कि मंत्रालय MCA-21 में AI आधारित होगा, जब इसका 3.0 वर्जन लॉन्च किया जाएगा। इससे कई अनुमतियां खुद-ब-खुद मिल जाया करेगीं। इस पर अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स जैसे नियामकों, निवेशकों और कंपनियों को महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही जगह मिल जाएंगी।

LLP कंपनियों में गड़बड़ी आपराधिक श्रेणी में नहीं
LLP ऐसी कंपनियां होती हैं, जिनमें एक पार्टनर को किसी दूसरे की गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाता। अब कंपनियों की आर्थ‌िक गड़बड़ियों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाएगा। इससे तेजी से और कंपनियां खुलेंगी।

NRIs को कंपनी खोलने में सुविधा
सरकार ने विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों (NRIs) के वन-पर्सन कंपनी खोलने के लिए देश में रहने की सीमा को 182 दिनों से घटाकर 120 दिन कर दिया है। मतलब 120 दिन देश में रहने वाले व्यापारियों को देशी व्यापारियों जैसी छूट मिलेगी।

वित्त मंत्री की ओर से उठाए गए कदमों की तारीफ करते हुए ट्रांजैक्शन टैक्स, BDO इंडिया के एसोसिएट पार्टनर हैरी पारिख कहते हैं, 'मूलभूत सुविधाओं में निवेश, नियमों में कमी, कानूनों को एक साथ लाने, कई क्षेत्रों में डिजिटलीकरण करने से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में इंडिया की रैंक में सुधार आना चाहिए।

अब भी है भ्रष्टाचार बड़ी समस्या, फंड जुटाना बड़ी चुनौती
रैंकिंग में सुधार और बजट में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़ी कई घोषणाओं के बाद भी भारत में बहुत तेजी से ‌बिजनेस बढ़ेंगे, ऐसा नहीं कह सकते। शिव मिश्रा कहते हैं, 'किसी भी बिजनेस के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है, फंड। फंड के लिए ज्यादातर लोग बैंक की ओर देखते हैं, लेकिन बैंकों से लोन मिलना अब भी आसान नहीं है। कई कंपनियों के को-फाउंडर मुझे वहां होने वाले भ्रष्टाचार के बारे में बताते हैं। इससे जरूरतमंद बिजनेसमैन के बजाय उसको लोन मिलता है जो ज्यादा लालच देता है।'

श‌िव मिश्रा उपाय भी बताते हैं, 'कंपनी रजिस्ट्रेशन के समय जब उद्देश्य बताए जाते हैं, तभी सरकार को कंपनी के लिए जरूरी फंड का इंतजाम बैंक की ओर से करवा दिया जाना चाहिए। छोटे लोन ऑनलाइन ही दिए जा सकते हैं। बिजली, पानी के कनेक्‍शन वगैरह का इंतजाम ऑनलाइन ही होना चाहिए। अभी बिजनेसमैन को इनसे बहुत समस्या होती है।'

कंपनियों की सुविधा के लिए केंद्र-राज्य का एक साथ आना जरूरी
कंपनियां पेमेंट में देरी, आयात-निर्यात में समस्या, केंद्र और राज्य सरकारों के दोहरे नियम या टैक्स आदि का सामना करती ही हैं। डेलोइट की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सरकार दुनिया के अन्य देशों से सबक लेकर सुधार करे तो कई मुश्किलों को आसान किया जा सकता है। उदाहरण के लिए टैक्स फाइल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को मजबूत करना। डेलोइट इंडिया के पार्टनर केआर सेकर का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार को भी एक साथ आना चाहिए जिससे ब्यूरोक्रेसी की वजह से हो रही देरी को कम किया जा सके।

जमीन के मालिकाना हक के ट्रांसफर की प्रक्रिया बहुत लंबी और धीमी
केपीएमजी के पार्टनर विवेक अग्रवाल का कहना है कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती ब्रिटिश राज के सिस्टम से बाहर निकलना है। मसलन भारत में जमीन का मालिकाना हक ट्रांसफर करने की प्रक्रिया बेहद धीमी और लंबी है। जमीन के रिकॉर्ड भी मैनुअली रखे जाते हैं। इनको डिजिटल किए जाने की प्रक्रिया बहुत धीमी है।

भारत तेज सुधार के मामले में चीन, कुवैत, नाइजीरिया से पीछे
टैक्स एक्सपर्ट गौरी चड्ढा कहती हैं, 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की बातें अब भी हवा-हवाई हैं। धरती पर इसकी सच्चाई कुछ और ही है। केवल एक रेस्टोरेंट चलाने के लिए 12 लाइसेंस लेने होते हैं। प्राइवेट लिमिटेड चलाने वालों को तो हर महीने ढेर सारे कागजी काम करने होते हैं, उनकी एक गड़बड़ी पर भारी-भारी पेनाल्टी लगाई जाती है। भले ही वर्ल्ड बैंक की 190 देशों की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिग में भारत 63वें स्‍थान पर आ गया हो, लेकिन अब भी रैंकिंग में सबसे तेज सुधार के मामले में चीन, कुवैत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान जैसा देश भी भारत से आगे हैं।'

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