करिअर फंडाबायो स्टूडेंट्स के लिए 5 करिअर ऑप्शन:एग्रीकल्चर से लेकर फिजियोथेरेपी में भविष्य बना सकते हैं

2 महीने पहले

जीवविज्ञान (बायोलॉजी) जटिल चीजों का अध्ययन है जिन्हे किसी उद्देश्य के लिए डिजाइन किए जाने का आभास होता है।

- रिचर्ड डॉकिन्स

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बायो से करिअर की खुलती राहें

क्या आप भी कक्षा दसवीं के बाद क्या करिअर ले उससे चिंतित है? क्या आप को भी नहीं पता की विभिन्न विषयों जैसे बायोलॉजी इत्यादि में क्या करिअर ऑप्शंस उपलब्ध है? तो यह आर्टिकल आपको जरूर पढ़ना चाहिए।

बायोलॉजी एक व्यापक विषय है। बायोलॉजी का अर्थ है - जीवन का अध्ययन, जिसमें जीवन प्रक्रियाओं के आणविक अध्ययन से लेकर पशु और पौधों के समुदायों के अध्ययन तक सभी कुछ शामिल है।

बायोलॉजी विषय को आगे दो भागों में बांटा गया है - जूलॉजी (जंतुविज्ञान), और बॉटनी (वनस्पतिविज्ञान)। दोनों क्षेत्रों में कई अच्छे करिअर ऑप्शंस हैं। और समय के साथ, नए ऑप्शंस आते जा रहे हैं।

बायो में स्टूडेंट्स के लिए 5 बड़े ऑप्शंस

1) हेल्थकेयर और मेडिसिन: आज भारत में कक्षा दसवीं में बायोलॉजी सब्जेक्ट लेने वाले लगभग हर स्टूडेंट का सपना और पहली प्राथमिकता हेल्थकेयर और मेडिसिन में करिअर बनाने की होती है।

A) ये अपने आप में एक बड़ा क्षेत्र है जिसमें विभिन्न तरह के डॉक्टर्स जैसे कार्डियोलॉजिस्ट (ह्रदय रोग विशेषज्ञ), न्यूरोलॉजिस्ट (मस्तिष्क विशेषज्ञ), पेडियोलॉजिस्ट (शिशुरोग विशेषज्ञ), गायनेकोलॉजिस्ट (महिला रोग विशेषज्ञ), वेटरनरी डॉक्टर (पशु रोग चिकित्स्क) से लेकर डेंटिस्ट, डेटल हाइजीन एक्सपर्ट, नर्स, एक्स-रे टेक्नीशियन तक आदि कई ऑप्शंस उपलब्ध है।

B) डॉक्टर बनने के लिए आपको एमबीबीएस की डिग्री आवश्यक है जबकी नर्स बनने के लिए आपको नर्सिंग में बीएससी करना होगा।

C) एमबीबीएस के बाद अपनी रुचि के आधार पर विशेषज्ञ बनने के लिए स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की जा सकती है। भारत में दोनों ही प्रोफेशनल्स की कमी है।

D) आप हेल्थकेयर के क्षेत्र में एक साइंटिस्ट के रूप में कार्य करते हुए एड्स, कैंसर, हृदय रोग और कई कम ज्ञात बीमारियों जैसे रोगों के उपचार के लिए रिसर्च भी कर सकते हैं।

E) इनमें से सभी क्षेत्र अपने आप में पूरा यूनिवर्स हैं, जहां बारीक ओपोर्च्यूनिटी तलाशी सकती हैं।

F) उदाहरण के लिए: डेंटल केयर के क्षेत्र में ओरल पैथालॉजी (मुख के रोगों का निदान), पेरियोडोंटिक्स (मसूड़ों की देखभाल) और ऑर्थोडोंटिक्स (दांतों और जबड़ों को सीधा/संरेखित करना) आदि शामिल हैं, जिसमें कोई अपना बीडीएस (बेचलर ऑफ डेंटल साइंस) पूरा करने के बाद विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं।

G) विशेषज्ञता के और भी कई क्षेत्र हैं: एंडोडोंटिक्स, ओरल और मैक्सिलोफेशियल पैथोलॉजी, ओरल सर्जरी, पेडोडोंटिक्स और प्रोस्थोडोंटिक्स।

H) एक और उदाहरण – एक्स-रे तकनीशियन। एक्स-रे प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा भारत में दो वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम है। ठोस संरचनाओं को चित्रित करने के लिए फोटोग्राफिक फिल्म का उपयोग करना, इसमें विद्युत चुम्बकीय विकिरण मानव शरीर में प्रवेश करना शामिल है। न्यूनतम अंकों के साथ न्यूनतम 10+2 या समकक्ष योग्यता आवश्यक है। इस कोर्स में कई व्यवहारिक गतिविधियां हैं।

2) फार्मेसी: भारत विश्व का फामेर्सी हब है। कोविड-19 महामारी में दवाओं के लिए विश्व की भारत पर निर्भरता के मामले मैं हम यह देख चुके हैं।

A) ‘फार्मासिस्ट’ वह होता है जो फार्मेसी चलाता है या उसमें काम करता है। वे डॉक्टर के पर्चे के आधार पर दवाएं प्रदान करने से लेकर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में सीनियर केमिस्ट के पद तक कार्य कर सकता है।

B) फार्मासिस्ट बनने के लिए आपके पास बी.फार्मा की डिग्री होनी चाहिए, आगे पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेस भी उपलब्ध है।

C) बड़ी फार्मा कंपनियां जैसे ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन, ल्यूपिन, अलेम्बिक, रैनबैक्सी, डॉ. रेड्डी'स लैब, डाबर इत्यादि जगहों पर इन प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होती है।

D) अब तो वैक्सीन बनाने के लिए सुपरकम्प्युटर से प्रोटीन स्ट्रक्चर पता कर, सीधे मॉलिक्यूलर लेवल पर ड्रग डिजाइन हो रहा है।

3) फिजियोथेरेपी: बायोलॉजी क्षेत्र से जुड़ा यह एक उभरता हुआ करियर ऑप्शन है। फिजियोथेरेपी का लक्ष्य ट्रेनिंग तकनीकों और उपचारों द्वारा रोगियों की गतिशीलता को बहाल करना होता है।

A) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, प्रत्येक 10,000 लोगों पर एक फिजियोथेरेपिस्ट उपलब्ध होना चाहिए। इस पैमाने पर भारत में इनकी भरी कमी है।

B) 12वीं के बाद फिजियोथेरेपी कोर्स में बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी), बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (बीओटी) और डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी शामिल हैं।

C) फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रमों में छात्रों को कक्षा 10-12 में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिकी का अध्ययन करने और न्यूनतम 50% अर्जित करने की आवश्यकता होती है।

D) फिजियोथेरेपी का उपयोग स्पोर्ट्स में परफॉर्मेंस बढ़ाने और चोटों से उबरने के लिए भी किया जाता है। स्पोर्ट्स फील्ड में भी करिअर बन सकता है।

4) एग्रीकल्चर: बायोलॉजी विषय लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए यह एक बड़ी करिअर फील्ड है।

A) आप B.Sc. एग्रीकल्चर या बॉटनी कर सकते हैं और फिर पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम्स।

B) भारत सरकार एग्रीकल्चर साइंटिस्ट से लेकर कई अन्य पदों पर एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स/पोस्टग्रेजुएट्स का रिक्रूटमेंट करती हैं, जिनके बारे में हम आगे आने वाले आर्टिकल्स में और अधिक विवरण में पढ़ेंगे।

C) निजी क्षेत्र में भी कई अवसर उपलब्ध हैं। एग्रीकल्चर में ग्रेजुएशन के बाद रूरल मैनेजमेंट में डिग्री ली जा सकती है। बड़ी खाद्य कंपनियों जैसे पिल्सबरी, पार्ले, मोनसैंटो, नेस्ले इत्यादि सभी जगह ऐसे प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होती है।

D) खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में शोधकर्ता और वैज्ञानिक खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण और सुरक्षा का अध्ययन और अनुसंधान करते हैं। छात्र स्नातक की डिग्री के रूप में खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विज्ञान स्नातक कर सकते हैं।

E) FSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण) और ISI (भारतीय मानक संस्थान) खाद्य वैज्ञानिकों को नियुक्त करते हैं। डेरी टेक्नोलॉजी इस क्षेत्र की एक और उभरती हुई फील्ड है।

5) बायोटेक्नोलॉजिस्ट: एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट दवाओं को विकसित करने के लिए माइक्रोब्स का उपयोग करता है, जबकि एक बायोटेक्नोलॉजिस्ट दवाओं में रिसर्च से लेकर 'लेदर' जैसे पशु उत्पादों को विकसित करने में अपने ज्ञान का उपयोग करता है।

A) इस क्षेत्र में करियर के लिए बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त करनी होगी। इस तरह के प्रोफेशनल्स की आवश्यकता सरकारी एजेंसियों, फार्मा और खाद्य कंपनियों को होती है।

B) एक बिलकुल नइ फील्ड है - बायोटेक, इंफोटेक और नैनोटेक का मिश्रण - जिससे बन रही है ‘सिंथेटिक बायोलॉजी’ की नई फील्ड

उम्मीद करता हूं बायोलॉजी क्षेत्र में मेरे द्वारा बताये गए करियर ऑप्शंस ने आपकी अवेयरनेस को बढ़ाया होगा।

आज का करिअर फंडा यह है कि मैथ्स और इंजीनियरिंग ही अच्छे करियर ऑप्शंस का अंत नहीं होते, बल्कि बायोलॉजी लेने वाले भी मल्टीपल एरिया में कमाल कर सकते हैं।

कर के दिखाएंगे!

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