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भास्कर एक्सक्लूसिव:VVIP विमानों की व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव, CDS रावत के हेलिकॉप्टर क्रैश की रिपोर्ट के बाद सरकार का फैसला

नई दिल्ली16 दिन पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

देश के पहले CDS बिपिन रावत का जो हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ उसे 'मास्टर ग्रीन' कैटेगरी का क्रू उड़ा रहा था। इसके बाद भी हेलिकॉप्टर क्रैश क्यों हुआ? इस सवाल के जवाब का इंतजार केवल सरकार को ही नहीं बल्कि आम जनता को भी था। जांच रिपोर्ट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंप दी गई है। आधिकारिक रूप से यह रिपोर्ट अभी सामने नहीं रखी गई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट के जो हिस्से सामने आए हैं, उससे साफ है कि हेलिकॉप्टर को उड़ाने वाला पायलट और उसका पूरा क्रू अच्छी तरह से ट्रेन था। वह 'मास्टर ग्रीन' कैटेगरी का था। तो फिर यह हादसा क्यों हुआ?

रिपोर्ट में कहा गया है कि पायलट और उसका क्रू मास्टर ग्रीन कैटेगरी का था। उन्हें भरोसा था कि वे हेलिकॉप्टर को खराब मौसम के बावजूद भी बादलों के बीच से निकाल ले जाएंगे। अमूमन ऐसा होता भी है, लेकिन तकनीकी या कहें मानवीय भूल के चलते पायलट का अंदाजा गलत साबित हुआ।

आगे ऐसी घटना न हो इसके लिए रिपोर्ट में कुछ सुझाव दिए गए हैं। रक्षा मंत्रालय सूत्रों की मानें तो रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायु सेना कुछ सुझावों पर गंभीरता से विचार कर रही है।

रिपोर्ट में क्या हैं सुझाव?

भले ही VVIPs के प्लेन/हेलिकॉप्टर को उड़ाने वाला पायलट मास्टर ग्रीन कैटेगरी का पायलट हो, लेकिन खराब वेदर या मुश्किल हालातों में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को उसे सलाह देने का अधिकार होना चाहिए। अगर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को लगता है कि पायलट के उड़ान भरने या लैंड करने के जजमेंट से वह संतुष्ट नहीं है तो वह फाइनल कॉल भी ले सकता है। मास्टर ग्रीन क्रू के साथ कुछ ग्रीन और कुछ व्हाइट कैटेगरी के स्टाफ को क्रू मेंबर के तौर पर रखा जा सकता है, ताकि पायलट के डिसीजन पर वे भी अपनी राय रख सकें।

बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर क्रैश होने के बाद आग लग गई। हेलिकॉप्टर में सवार लोग इस कदर जल गए कि उनकी बॉडी को कवर करके ले जाना पड़ा।
बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर क्रैश होने के बाद आग लग गई। हेलिकॉप्टर में सवार लोग इस कदर जल गए कि उनकी बॉडी को कवर करके ले जाना पड़ा।

अभी तक क्या थी व्यवस्था?

अभी तक मास्टर ग्रीन कैटेगरी के पायलट और क्रू को उड़ान से जुड़े फैसले लेने का एकाधिकार प्राप्त था। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर मास्टर ग्रीन पायलट और क्रू को वेदर संबंधित पूरी जानकारी मुहैया करवाता था, लेकिन वह डिस्ट्रेस कॉल भेजेगा या नहीं इसका फैसला पायलट करता था। बिपिन रावत की हेलिकॉप्टर क्रैश में हुई मौत के बाद आई रिपोर्ट में पायलट के इस एकाधिकार को समाप्त करने का सुझाव दिया गया है।

हालांकि उसके फैसले को तरजीह दी जाएगी पर इसमें दूसरी कैटेगरी के पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की सहमति भी शामिल करने का सुझाव है।

तो क्या हादसे की मुख्य वजह पायलट और उसके क्रू का ओवर कॉन्फिडेंस है

भारतीय वायु सेना के ग्रीन कैटेगरी में शामिल रहे एक पूर्व पायलट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- 'मास्टर ग्रीन कैटेगरी के पायलट इतने ट्रेंड होते हैं कि उनके निर्णय गलत होने के आसार न के बराबर होते हैं। हालांकि, तकनीकी और मानवीय भूल के आसार तो हमेशा ही रहते हैं। अब यह तो रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही पता चलेगा कि आखिर गलती किसकी थी, पायलट की या फिर कोई तकनीकी गड़बड़ी थी। मेरे हिसाब से इसे ओवर कॉन्फिडेंस कहना ठीक नहीं होगा।'

क्या होती है मास्टर ग्रीन कैटेगरी?

यह भयानक हादसा था। हेलिकॉप्टर में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। विंग कमांडर पृथ्वी सिंह एक मात्र जिंदा बचे थे, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी भी मौत हो गई।
यह भयानक हादसा था। हेलिकॉप्टर में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। विंग कमांडर पृथ्वी सिंह एक मात्र जिंदा बचे थे, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी भी मौत हो गई।

मास्टर ग्रीन कैटेगरी में सबसे स्किल्ड और ट्रेंड पायलट होते हैं। ये ग्रीन कैटेगरी में रहने के बाद इसमें आते हैं। मास्टर ग्रीन कैटेगरी के पायलट और क्रू में किसी भी तरह के मौसम में उड़ान भरने की काबिलियत होती है। पायलट उड़ान भरने और लैंड करने का फैसला खुद करता है। इसमें एयर ट्रैफिक कंट्रोलर का कोई रोल नहीं होता। हां, एअर ट्रैफिक कंट्रोलर पायलट को वेदर की महीन से महीन जानकारी भी देता है, लेकिन प्लेन या हेलिकॉप्टर को उड़ाना है या लैंड करना है, इसका फैसला पायलट ही करता है।

दूसरी कैटेगरी के पायलट कैसे होते हैं मास्टर ग्रीन कैटेगरी से अलग?

मास्टर ग्रीन कैटेगरी से पहले ग्रीन कैटेगरी के पायलट होते हैं। ये पायलट हर वेदर में उड़ान नहीं भर सकते, लेकिन कुछ खास तरह के वेदर में उड़ान भरने में इनकी एक्सपर्टीज होती है। जबकि, व्हाइट कैटेगरी के पायलट किसी भी खराब वेदर वाले इलाके में नहीं भेजे जाते। इस कैटेगरी के पायलट डे और नाइट के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। यानी, दिन में उड़ान भरने वाले व्हाइट कैटेगरी के पायलट अलग और रात में उड़ान भरने वाले पायलट अलग होते हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रिपोर्ट में क्या है?

बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर क्रैश की रिपोर्ट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना के Mi-17V5 हेलिकॉप्टर को उस दिन पायलट विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान उड़ा रहे थे। उन्होंने क्रैश से ठीक 8 मिनट पहले सूचना भी भेजी थी कि वह हेलिकॉप्टर को लैंड कराने जा रहे हैं। इसके बाद क्या हुआ, किसी को पता नहीं चला।

क्रैश होने के बाद तत्काल स्थानीय लोग मदद के लिए पहुंचे थे। कुछ देर बाद पुलिस और रावत बचाव दल की टीम भी पहुंच गई।
क्रैश होने के बाद तत्काल स्थानीय लोग मदद के लिए पहुंचे थे। कुछ देर बाद पुलिस और रावत बचाव दल की टीम भी पहुंच गई।

जांच में पता चला है कि उस दिन तमिलनाडु का मौसम खराब था। हेलिकॉप्टर जमीन से करीब 500-600 मीटर की ऊंचाई पर था। रिपोर्ट के मुताबिक Mi-17V5 उस दिन पहाड़ी पर एक रेलवे लाइन के सहारे आगे बढ़ रहा था और तभी चारों तरफ से बादल घिर आए।

ग्राउंड स्टेशन पर क्यों नहीं भेजा डिस्ट्रेस सिग्नल?

जांच दल ने पाया कि इलाके की जानकारी ठीक से होने के चलते क्रू ने तेजी से बादलों के घेरे से निकलने का फैसला किया। जिससे चॉपर एक खड़ी चट्टान से जा टकराया। सूत्रों ने बताया है कि चूंकि पूरा क्रू 'मास्टर ग्रीन' कैटेगरी का था इसलिए उन्हें यह भरोसा था कि वे इस हालात से बाहर निकल जाएंगे और शायद इसीलिए उस दिन ग्राउंड स्टेशन को कोई डिस्ट्रेस कॉल नहीं की गई जिससे इमरजेंसी पता चलती।

क्या होती है डिस्ट्रेस कॉल?

अगर पायलट को लगता है कि वह किसी संकट में है, तो फिर वह एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को कॉल करता है। इसके लिए प्लेन या हेलिकॉप्टर में एक बटन लगी होती है। उसे पुश करते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और सबसे करीब के हवाई अड्डे में यह सूचना अपने आप पहुंच जाती है। इतना ही नहीं आसपास उड़ रहे प्लेन के पायलट को भी यह सूचना मिल जाती है। अगर कोई प्लेन डिस्ट्रेस कॉल भेजने वाले प्लेन के करीब होता है तो वह फौरन उस प्लेन के बचाव के लिए वहां पहुंचता है।