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आज की पॉजिटिव खबर:लॉकडाउन में किचन के मसाले खत्म हुए तो घर पर ही मसाले तैयार करना शुरू किया, अब देशभर में मार्केटिंग, हर महीने लाखों कमा रहीं

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

पिछले करीब 2 साल में आम आदमी की लाइफ को सबसे ज्यादा अगर किसी ने प्रभावित किया है तो वह है कोरोना। इसकी वजह से कई लोगों की जानें गईं, नौकरियां गईं, धंधे चौपट हो गए, लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा, लेकिन इन मुश्किल हालात में भी कई लोगों ने खुद की नई कहानी लिखी। नए धंधे शुरू किए और अब कामयाबी की राह पर हैं।

चंडीगढ़ की रहने वाली मेहेर कैरों भी उनमें से एक हैं। मेहेर लंदन में कॉर्पोरेट लॉयर रही हैं। पिछले करीब एक साल से वे होममेड मसालों का बिजनेस कर रही हैं। देशभर में उनके कस्टमर्स हैं। हर महीने 1500 से ज्यादा ऑर्डर्स उनके पास आ रहे हैं। इससे सालाना लाखों में उनकी कमाई हो रही है।

30 साल की मेहेर की शुरुआती पढ़ाई चंड़ीगढ़ में हुई। इसके बाद अमेरिका से उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और फिर इंग्लैंड की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की। इसके बाद 3 साल तक लंदन में बतौर कॉर्पोरेट लॉयर काम किया और साल 2019 में भारत लौट आईं।

किचन के मसाले खत्म हुए तो आया बिजनेस का आइडिया

30 साल की मेहेर ने इंग्लैंड की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की है। तीन साल तक उन्होंने बतौर कॉरपोरेट लॉयर काम भी किया है।
30 साल की मेहेर ने इंग्लैंड की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की है। तीन साल तक उन्होंने बतौर कॉरपोरेट लॉयर काम भी किया है।

मेहेर बताती हैं कि भारत आने के बाद मैं खुद का कुछ करना चाहती थी, लेकिन उसके पहले कुछ इंडस्ट्री एक्सपीरियंस भी हासिल करना जरूरी था। इसलिए मुंबई में एक कंपनी के साथ जुड़ गई। हालांकि इसके कुछ ही महीने बाद कोरोना की वजह से लॉकडाउन लग गया और मुझे अपने घर चंडीगढ़ आना पड़ा। इस दौरान किचन के काम में मेरी दिलचस्पी बढ़ने लगी। मैं हर दिन कुछ नया बनाने की कोशिश करने लगी। इसी बीच एक दिन कुछ मसाले खत्म हो गए। ये मसाले मेरे पापा केरल से मंगाते थे।

लॉकडाउन की वजह से तब वहां से मसाले मंगाना मुमकिन नहीं था। मैंने मार्केट में तलाश की, कुछ मसाले खरीदे भी, लेकिन वह टेस्ट मुझे नहीं मिला। मेहेर को लगा कि इस तरह की दिक्कतें अभी दूसरे लोगों के साथ भी हो रही होंगी। तो क्यों न इसको लेकर ही कुछ ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जाए, जहां ओरिजिनल सोर्स से तैयार सभी मसाले एक ही जगह पर उपलब्ध हों। किसी को अलग-अलग जगहों पर जाने की जरूरत ही न पड़े।

मसालों के बारे में रिसर्च की फिर घर से ही शुरू किया स्टार्टअप

मेहेर बताती हैं कि हमारे पास किचन में इस्तेमाल होने वाले हर तरह के मसाले उपलब्ध हैं। ये सभी पूरी तरह से होममेड हैं और इसमें कोई केमिकल नहीं मिला है।
मेहेर बताती हैं कि हमारे पास किचन में इस्तेमाल होने वाले हर तरह के मसाले उपलब्ध हैं। ये सभी पूरी तरह से होममेड हैं और इसमें कोई केमिकल नहीं मिला है।

इसके बाद मेहेर ने अपने स्टार्टअप को लेकर प्लानिंग शुरू कर दी। उन्होंने अलग-अलग मसालों को लेकर रिसर्च की, उनके बनने के प्रोसेस और ओरिजिनल सोर्स के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद अपने घर से ही 2020 के अंत में स्टार्टअप की शुरुआत की। उन्होंने अपनी कंपनी का नाम Fairer Foods रखा। बजट को लेकर वे बताती हैं कि शुरुआत में बहुत ज्यादा बजट नहीं लगा था। जैसे-जैसे हमारा काम बढ़ता गया हम बजट भी बढ़ाते गए। यानी जितना अर्न करते थे, उसके हिसाब से इन्वेस्ट भी करते गए।

मार्केटिंग स्ट्रैटजी को लेकर मेहेर कहती हैं कि पहले तो परिचित लोगों ने हमारे प्रोडक्ट खरीदे। फिर हम वॉट्सऐप ग्रुप से मार्केटिंग करने लगे। इसके कुछ ही दिनों बाद हमने खुद की वेबसाइट भी तैयार कर ली। इसका फायदा यह हुआ कि लोग हमारी वेबसाइट की लिंक एक दूसरे के साथ शेयर करने लगे। इससे हमारे कस्टमर्स की संख्या बढ़ गई।

हालांकि यह सबकुछ लिमिटेड लेवल पर था। इसके बाद हमने डिजिटल मार्केटिंग की स्ट्रैटजी अपनाई। सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के साथ ही हम लोग गूगल पर भी प्रमोशनल ऐड रन करने लगे। इसका बढ़िया रिस्पॉन्स मिला। हमारे प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ गई। धीरे-धीरे देशभर से हमें ऑर्डर आने लगे।

मेहेर बताती हैं कि हम लोग मसाले के लिए रॉ मटेरियल ओरिजिनल सोर्स और फार्म हाउस से ही कलेक्ट करते हैं।
मेहेर बताती हैं कि हम लोग मसाले के लिए रॉ मटेरियल ओरिजिनल सोर्स और फार्म हाउस से ही कलेक्ट करते हैं।

मेहेर कहती हैं कि अभी हमारे स्टार्टअप को एक साल भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन हमारी रफ्तार अच्छी है। दिन-ब-दिन ऑर्डर्स की संख्या बढ़ती जा रही है। फिलहाल हमारे पास हर महीने 1500 तक ऑर्डर आ रहे हैं। कई बार इससे ज्यादा भी डिमांड आती है। फिलहाल हमारे पास दो दर्जन से ज्यादा मसालों की वैराइटी है। इनमें किचन के जरूरत के हर मसाले शामिल हैं।

कैसे तैयार करती हैं मसाले, क्या है काम करने की प्रोसेस?
मेहेर कहती हैं कि हम अलग-अलग मसाले अलग-अलग ओरिजिनल सोर्स से कलेक्ट करते हैं। जैसे मेघालय की हल्दी बेस्ट मानी जाती है, इम्यूनिटी बूस्टर का काम करती है। इसलिए हम मेघालय से हल्दी मंगाते हैं। इसी तरह कुछ मसाले हम केरल से मंगाते हैं तो कुछ मसाले श्रीलंका से भी लाते हैं। यानी जो मसाला जहां सबसे बेहतर मिलता है, वहां से उस मसाले को मंगाते हैं।

मसाले लाने के बाद सबसे पहले उसकी क्वालिटी टेस्ट करते हैं। इसके बाद प्रोसेसिंग का काम करते हैं। हमारी खुद की कोई मशीन नहीं है, इसलिए अभी हम रेंट पर मसाले ग्राइंड कराते हैं। इसके बाद हमारी टीम उसकी पैकेजिंग करती है। इसके लिए 3-4 महिलाओं को उन्होंने काम पर रखा है। इसके अलावा जरूरत के मुताबिक वे एम्प्लॉई हायर करती रहती हैं।

वे बताती हैं कि हम मसाले के पैकेट पर उसकी डिटेल इंफॉर्मेशन ऐड करते हैं। जैसे कि वह मसाला कहां से आया है, उसमें क्या-क्या मिला है, उसे तैयार कैसे किया गया है? ताकि कस्टमर को पता चले कि जो प्रोडक्ट वह यूज कर रहा है, उसका ओरिजिनल सोर्स क्या है और उसमें क्या मिला है। हम अपने प्रोडक्ट में बाहर से कोई भी केमिकल या प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाते हैं।

आप मसालों का स्टार्टअप कैसे शुरू कर सकते हैं?
मसाले हर घर के किचन की जरूरत होते हैं। इस लिहाज से इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है। खास बात यह है कि ज्यादातर मसालों में मिलावट की शिकायत होती है, कुछ मसालों में केमिकल मिले होते हैं। इसलिए अब लोग ऑर्गेनिक और नेचुरल मसालों की तरफ रुख कर रहे हैं। अगर आप भी होममेड मसालों का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो सबसे पहले अलग-अलग मसालों के बारे में स्टडी करनी होगी। कौन से राज्य में किस मसाले की डिमांड है, वहां पहले से कौन-कौन से ब्रांड उपलब्ध हैं, उनकी कीमत क्या है, आप क्या नया करेंगे?

इन सब सवालों को लेकर आपको मास्टर प्लान बनाना होगा। तभी आप बेहतर कर पाएंगे, क्योंकि मार्केट में इस तरह के स्टार्टअप की कमी नहीं है। आप 20 हजार रुपए से भी कम लागत में एक ग्राइंडर मशीन खरीदकर शुरुआत कर सकते हैं। जब काम जम जाए तो आप दायरा बढ़ा सकते हैं।

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