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चाइल्ड पोर्नोग्राफी पड़ताल- पार्ट-2:बच्चों से बिकवाई जा रहीं बच्चों की पोर्न, सोशल मीडिया के जरिए एक फिल्म पहुंचाने पर मिलते हैं 200 रुपए

15 दिन पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर

पोर्न कंटेंट तैयार करना चाइल्ड पोर्नोग्राफी रैकेट का छोटा सा और बिखरा हुआ हिस्सा है, लेकिन तैयार कंटेंट को लोगों तक पहुंचाना, इसके लिए नेटवर्क तैयार करना, कंटेंट बेचकर पैसे कमाना और बार-बार कंटेंट परोसते रहना, चाइल्ड पोर्न रैकेट में ये काम पूरी प्लानिंग और संगठित रूप से किया जाता है। नाबालिग से लेकर वयस्क तक इस पोर्न कंटेंट को सर्कुलेट करते हैं। राजस्थान, MP, UP, बिहार से लेकर तमिलनाडु तक इनका नेटवर्क और लोग फैले हुए हैं।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर पड़ताल की सीरीज की पहली रिपोर्ट में हमने आपको रूह कंपा देने वाली बच्चों की तीन कहानियां बताईं- हैदराबाद की ऐश्वर्या, मुंबई का राहुल, केरल की राधिका (बदले हुए नाम)। इससे आपको समझ आ गया होगा कि चाइल्ड पोर्नोग्राफिक कंटेंट कैसे तैयार किया जाता है। पहली रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें..

दूसरी रिपोर्ट में हम बताएंगे कि इस तैयार पोर्न कंटेंट बेचने के लिए कैसे एक पूरा नेटवर्क काम करता है? जांच एजेंसिंया और पुलिस इन अपराधियों के कैसे पकड़ती है? हालिया CBI छापेमारी में एजेंसी को पोर्न रैकेट के बारे में क्या पता चला है ये भी बताएंगे।

बीते दिनों CBI ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में 14 राज्यों के 77 ठिकानों पर छापेमारी की। पूछताछ के बाद एजेंसी ने दिल्ली, नोएडा, ढेंकनाल, झांसी और तिरुपति जैसी जगहों से 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। CBI की छापेमारी में राजस्थान के नागौर का एक 16 साल के बच्चे का नाम आया है। भास्कर को CBI सूत्रों के हवाले से पता चला कि पोर्नोग्राफी के रैकेट में शामिल अपराधी इसी तरह के बच्चों से मैसेजिंग ऐप्स, सोशल मीडिया साइट्स पर चाइल्ड पोर्नोग्राफिक कंटेंट शेयर करवाते थे। नागौर के इस बच्चे को प्रति वीडियो 200-300 रुपये दिए जाते थे। इस तरह के सैकड़ों ग्रुप्स बनाए गए और लोगों को चाइल्ड पोर्न कंटेंट परोसा गया।

'Only Child Sex Videos' नाम के व्हाट्सएप ग्रुप पर चलता था सिंडिकेट

हाल में हुई छापेमारी के बाद भास्कर को CBI सूत्रों से पता चला कि चाइल्ड पोर्न सर्कुलेट करने में सिंडिकेट एक्टिव था। ये सिंडिकेट मैसेजिंग व्हाट्सएप पर एक्टिव था और इसके इंटरनेशनल लिंक भी थे। इस गिरोह से जुड़े 33 लोग सक्रिय रूप से काम कर रहे थे, उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 'Only Child Sex Videos' नाम के व्हाट्सएप ग्रुप पर ये सभी लोग मेंबर थे। इसी ग्रुप पर ही चाइल्ड पोर्न कंटेंट वीडियो, फोटो, लिंक के रूप में पोस्ट किए जाते थे। सिंडिकेट में सबसे ज्यादा लोग तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हरियाणा में रहकर काम करते थे।

अब तक CBI ने इंटरनेट और डार्क वेब की दुनिया में 300 ऐसे ग्रुप्स की पहचान की है, जिस पर चाइल्ड पोर्न कंटेंट शेयर किया जाता है। ये ग्रुप्स 100 से ज्यादा देशों में फैले हुए हैं। इसमें भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका के साथ ही अमेरिका, नाइजीरिया, अजरबैजान, यमन और मलेशिया जैसे देश शामिल हैं।

ऐसे डिटेक्ट होता है चाइल्ड पोर्न कंटेंट

अमेरिकी नॉन प्रॉफिट संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइडेट चिल्ड्रेन (NCMEC) साइबल टिपलाइन चलाती है, जहां इंटरनेट पर चल रहे चाइल्ड पोर्न कंटेंट के डिजिटल क्लू मिलते हैं। साइबर टिपलाइन इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सर्विलांस के लिए ऑनलाइन चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज के मामले इकट्ठे करती है और दुनियाभर की सरकारों के साथ ऑनलाइन चाइल्ड अब्यूज के मामलों को शेयर किया जाता है। ये आंकड़े भारतीय गृहमंत्रालय के तहत काम करने वाले नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) को दिए जाते हैं और फिर NCRB इन टिप्स को राज्य पुलिस और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों को शेयर करती है।

केरल पुलिस का ऑपरेशन पी हंट

केरल पुलिस की साइबर अपराध शाखा साइबरडोम ने चाइल्ड पोर्न से जुड़े मामलों के लिए काउंटर चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉएटेशन (CCSE) यूनिट का गठन किया है। पिछले करीब 4 साल से CCSE ADG मनोज अब्राहम की अगुआई में करीब 100 लोगों की खास टीम चाइल्ड पोर्न कंटेंट को डिटेक्ट करने पर काम करती है। कोरोना महामारी के दौर में जब ऑनलाइन चाइल्ड अब्यूज के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई तब केरल पुलिस ने ऑपरेशन पी हंट चलाया, जिसके तहत 1007 केस दर्ज किए गए और 465 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि छापेमारी के दौरान आरोपियों से जो मोबाइल, लैपटॉप, पेनड्राइव बरमाद की गईं, उसमें CSAM कंटेंट पाया गया।

केरल पुलिस की काउंटर चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉएटेशन (CCSE) यूनिट का दफ्तर
केरल पुलिस की काउंटर चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉएटेशन (CCSE) यूनिट का दफ्तर

डार्क वेब में क्रिप्टो के जरिए होती है पोर्न की खरीद-फरोख्त

पुलिस की तहकीकात में पता चला कि कोविड के दौरान व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप पर चाइल्ड पोर्न कंटेंट से जुड़े ग्रुप्स की तादाद में उछाल आया। रैकेट में शामिल लोग इसी तरह के चैनल्स के जरिए चाइल्ड पोर्न कंटेंट लोगों तक पहुंचाते हैं। डार्क वेब में इस तरह के कंटेंट की खरीद फरोख्त होती है और क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट किया जाता है। कंटेंट खरीदने वाले और बेचने वाले दोनों एक दूसरे को जानते तक नहीं हैं। पुलिस इस तरह के कंटेंट और इसकी खरीद-फरोख्त को पकड़ने के लिए स्पेशल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती है।

केरल पुलिस के इस पूरे ऑपरेशन को लीड करने वाले ADG मनोज अब्राहम ने बताया- ‘भारत समेत दुनियाभार में बड़ी तादाद में लोग चाइल्ड पोर्न से एडिक्टेड हैं और ऐसे लोग चाइल्ड पोर्न ही देखना पसंद करते हैं। ये लोग ही चाइल्ड पोर्न कंटेट के मार्केट में कंज्यूमर होते हैं।

महाराष्ट्र पुलिस का ऑपरेशन ब्लैकफेस

महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल ने दिसंबर 2019 को ऑपरेशन ब्लैकफेस लॉन्च किया, जिसके तहत चाइल्ड पोर्न रैकेट में शामिल लोगों को दबोचने की कवायद शुरू की गई। जुलाई 2021 तक इस ऑपरेशन के तहत 213 FIR दर्ज की गईं और महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों से 105 लोगों की गिरफ्तारी की गई। पुलिस NCRB से पता लगा कि 2019 के बाद से सिर्फ महाराष्ट्र से 15,255 चाइल्ड पोर्न कंटेंट अपलोड किए गए। महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे से सबसे ज्यादा कंटेंट अपलोड किया गया।

महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल प्रमुख संजय शिंत्रे ने बताया कि- ‘अमेरिकी एजेंसी NCMEC भारतीय संस्था NCRB के साथ चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों में लीड्स शेयर करती हैं। इसके बाद NCRB ये डेटा राज्यों के साथ शेयर करते हैं और फिर हम इन मामलों में खोजबीन शुरू करते हैं। जिलों के SP को हम ये मामले इन्वेस्टिगेशन के लिए भेजते हैं, फिर वो केस रजिस्टर करके कार्रवाई करते हैं।’

मुंबई के जॉइंट पुलिस कमिश्नर (क्राइम) मिलिंद भारंबे बताते हैं कि ‘चाइल्ड पोर्न के मामलों में अब तक हमें जो लीड्स मिले हैं उनमें दो तरह के केस होते हैं- एक तो चाइल्ड पोर्न की शेयरिंग से जुड़े मामले और दूसरा चाइल्ड पोर्न बनाने के मामले।’

क्या है चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर कानून-

भारतीय कानून के मुताबिक चाइल्ड पोर्नोग्राफी शूट करना, प्रोड्यूस करना और शेयर करना तो अपराध है ही। साथ ही चाइल्ड पोर्न कंटेंट रखना और देखना भी अपराध है। POSCO एक्ट 2012 के सेक्शन 14 और 15 के तहत किसी भी बच्चे का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी के लिए करने पर 5 साल की कैद और 10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके साथ ही IT एक्ट की धारा 67B में भी किसी भी तरह के चाइल्ड न्यूड कंटेंट को रखना, ब्राउज, डाउनलोड, एडवर्टाइज, प्रमोट, शेयर करना अपराध है।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर पड़ताल के तीसरे पार्ट में हम चाइल्ड पोर्न देखने की बीमारी पीडोफीलिया की तह में जाएगे। इससे आपको समझ आएगा कि चाइल्ड पोर्न देखने की लत क्यों लगती है? कैसे लोग चाइल्ड पोर्न कंटेंट देखने के लिए मोटा पैसा देने के लिए तैयार हो जाते हैं? इसके अलावा हम चाइल्ड पोर्न के शिकार बच्चों की काउंसलिंग के बारे में भी बात करेंगे।