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आज की पॉजिटिव खबर:कॉलेज ड्रॉपआउट अर्शी ने 25 हजार रु. से शुरू की ऑनलाइन करियर काउंसलिंग; अब सालाना टर्नओवर 75 लाख रु.

भोपाल4 महीने पहलेलेखक: विकास वर्मा
अर्शी खान 25 साल की हैं, उन्होंने तीन साल पहले अपना स्टार्टअप कॉलेज खबरी शुरू किया था। आज उनकी टीम में 25 लोग काम कर रहे हैं।

आज की कहानी 25 साल की यंग एंटरप्रेन्योर अर्शी खान की। अर्शी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हैं। महज 12वीं पास अर्शी ने दिसंबर 2018 में 25 हजार रुपए से कॉलेज खबरी नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरु किया, जहां स्टूडेंट्स को बेहतर करियर विकल्प चुनने में मदद की जाती है। दो लाेगों के साथ शुरु हुए इस स्टार्टअप में आज 25 लोगों की टीम काम कर रही है।

अर्शी का दावा है कि उनकी टीम 25 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को गाइडेंस दे चुकी है। साथ ही, 1500 से ज्यादा स्टूडेंट्स की पेड काउंसलिंग कर चुकी है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में उनका टर्नओवर 30 लाख रुपए था, जो इस साल बढ़कर 75 लाख रुपए तक पहुंच गया।

अर्शी ने स्टार्टअप की शुरुआत अपने दोस्त के साथ की थी, अब उनकी टीम में 25 लाेग हैं।
अर्शी ने स्टार्टअप की शुरुआत अपने दोस्त के साथ की थी, अब उनकी टीम में 25 लाेग हैं।

कैसे काम करता है कॉलेज खबरी

अर्शी बताती हैं, ‘हमारे प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग स्टेप्स में काउंसलिंग की जाती है। इसमें आपके साथ एक एक्सपर्ट होता है, जो आपको अलग-अलग करियर विकल्पों के बारे में बताता है और उसे चुनने में स्टेप बाई स्टेप गाइड करता है। ये काउंसलिंग स्टूडेंट के ग्रेड, इंट्रेस्ट और एप्टीट्यूट टेस्ट पर बेस्ड होती है। इसके आधार पर, हम स्टूडेंट्स को करियर और उसी के लिए सही कॉलेज का चुनाव करने में मदद करते हैं।'

अर्शी बताती हैं, ‘इसके अलावा हम एक वीडियो प्लेटफॉर्म स्टूडेंट खबरी पर अलग-अलग तरह के वीडियोज बनाते हैं और स्टूडेंट को सही करियर का चयन करने में मदद करते हैं।’ वो कहती हैं, 'हॉबी और करियर में फर्क होता है। हम स्टूडेंट को एक सही करियर ढूंढने में मदद करते हैं। जब वो करियर चूज करता है तो उसके लिए बेहतर सरकारी-प्राइवेट कॉलेज, यूनिवर्सिटी का चयन करते हैं और स्टूडेंट के बिहाफ पर उस संस्थान की पूरी काउंसलिंग प्रोसेस को हैंडल करते हैं।'

'हम स्टूडेंट को इनरोल करने में हेल्प करते हैं, स्कॉलरशिप के बारे में बताते हैं। इसके एवज में हम स्टूडेंट से चार्ज करते हैं और यही हमारा रेवेन्यू मॉडल है। अर्शी का स्टार्टअप स्टूडेंट से 1 हजार रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक चार्ज करता है। उनके क्लाइंट 14 से 24 साल की उम्र के स्टूडेंट हैं।'

स्टूडेंट खबरी वीडियो प्लेटफॉर्म पर 1 लाख प्लस सब्सक्राइबर

अर्शी के मुताबिक, इस तरह की अन्य कंपनी कॉलेज के लिए काम करती है, जबकि उनका स्टार्टअप स्टूडेंट के लिए काम करता है। वो कहती हैं कि कोई भी स्टूडेंट आपकी सर्विस इसलिए नहीं लेता है कि उसको आपका चार्ज कम या ज्यादा लगता है। उसको ट्रस्ट चाहिए, कंटेंट से इंफॉर्मेशन तो मिल जाती है लेकिन ट्रस्ट नहीं मिल पाता है। इसे देखते हुए ही स्टूडेंट खबरी नाम का वीडियो प्लेटफॉर्म बनाया था। आज इस प्लेटफॉर्म पर 1 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। हर महीने 1 करोड़ से अधिक व्यूज हैं, और इसके जरिए देश भर से हजारों स्टूडेंट्स की क्वेरी आती हैं।

फोटो में अर्शी (लेफ्ट) अपने पापा और बड़ी बहन के साथ हैं। पापा की डेथ के बाद अर्शी के जीवन में काफी उतार-चढ़ाव आए।
फोटो में अर्शी (लेफ्ट) अपने पापा और बड़ी बहन के साथ हैं। पापा की डेथ के बाद अर्शी के जीवन में काफी उतार-चढ़ाव आए।

पिता की डेथ के बाद पता चला कि लाइफ में कितना स्ट्रगल है

भले ही तीन साल में अर्शी के स्टार्टअप का टर्नओवर 75 लाख रुपए तक पहुंच गया है लेकिन उनका यहां तक तक सफर इतना आसान नहीं था। इस बारे में अर्शी बताती हैं, ‘मैंने 12वीं के बाद वीआईटी वेल्लोर में एडमिशन लिया लेकिन उसी वक्त पापा की तबियत खराब हो गई। मैंने तय किया कि अभी पापा के साथ रहना ठीक होगा, पढ़ाई तो बाद में भी पूरी हो जाएगी। कुछ समय बाद पाप की डेथ हो गई। उनके चले जाने पर मुझे पता चला कि लाइफ में कितना स्ट्रगल है।’

अर्शी बताती हैं कि वो अपने पापा के कंसल्टिंग बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहती थीं लेकिन परिवारवालों ने इजाजत नहीं दी। इसके बाद उन्होंने तय किया कि उन्हें कुछ अपना करना है लेकिन पैसे नहीं थे। इसलिए होम ट्यूशन लेना और एनजीओ के साथ काम किया। जो पैसे मिलते, उसे अपने बिजनेस के लिए सेव करने लगी।

दोस्त से बातचीत के दौरान आया बिजनेस आइडिया

इन सबके बीच अर्शी के जेहन में दो ख्याल थे, पढ़ाई पूरी करना और अपना बिजनेस करना। तभी उनकी मुलाकात एक पुराने दोस्त रॉथर जैलेस से हुई। जब रॉथर ने अर्शी से पूछा कि तुम तो बाहर पढ़ने गई थीं, तो अर्शी ने बताया कि उन्होंने भोपाल के भी कई कॉलेज में ट्राई किया लेकिन बहुत ज्यादा फीस की वजह से एडमिशन नहीं लिया।

राॅथर ने समझाया कि हर कैटेगरी के लिए बहुत सारी स्कॉलरशिप स्कीम हैं, जिसमें पूरी ट्यूशन फीस माफ हो जाती है। यह सुनकर अर्शी को लगा कि अब वाे अपनी पढ़ाई अपने बलबूते पूरी कर सकती हैं और उन्होंने भोपाल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन भी ले लिया। साथ ही ये भी सोचा कि मेरे जैसे बहुत से स्टूडेंट्स हैं जिनको इन सब चीजों के बारे में पता नहीं है।

अर्शी ने रॉथर से ये आइडिया शेयर किया, कि क्यों न अपने जैसे स्टूडेंट्स की हेल्प करें और इससे रेवेन्यू भी जेनरेट करें। इसके बाद अर्शी ने अपनी सेविंग्स के 25 हजार रुपए लगाकर ऑफिस लिया और बिजनेस शुरू किया। पहले ही साल उन्होंने करीब 300 स्टूडेंट की काउंसलिंग की और अच्छा-खासा रेवेन्यू जेनरेट किया।

कॉलेज खबरी स्टार्टअप का आइडिया अर्शी को उनके दोस्त रॉथर (लेफ्ट, गुलाबी शर्ट में) से बातचीत में आया था। बाद में अविनाश (सफेद शर्ट में) इसमें बतौर सीटीओ जुड़ गए।
कॉलेज खबरी स्टार्टअप का आइडिया अर्शी को उनके दोस्त रॉथर (लेफ्ट, गुलाबी शर्ट में) से बातचीत में आया था। बाद में अविनाश (सफेद शर्ट में) इसमें बतौर सीटीओ जुड़ गए।

दोस्तों ने धोखा दिया तो नए सिरे से शुरू करना पड़ा बिजनेस

अर्शी ने अपने ऑफिस का कुछ हिस्सा अपने दोस्तों को उनके स्टार्टअप के लिए दे दिया। इसके बाद अर्शी अपने बिजनेस को एक्सपेंड करने के सिलसिले में करीब एक महीने पुणे में रही। वापस लौटीं तो देखा उनके ऑफिस का ताला ही बदल गया है। जिन दोस्तों को ऑफिस दिया था, उन्होंने लैंडलॉर्ड के साथ मिलकर ऑफिस का एग्रीमेंट अपने नाम करवा लिया है।

इससे अर्शी को बहुत बड़ा धक्का लगा, उन्हें लगा कि अब दोबारा अपना बिजनेस खड़ा नहीं कर पाएंगी। लेकिन उनके फ्रेंड रॉथर ने सपोर्ट किया और अर्शी ने दोबारा अपना बिजनेस शुरू किया।

अर्शी कहती हैं, ‘साल भर तक काम करने के बाद हमने तय किया कि अब हम भोपाल से बाहर देश भर में काम करेंगे और हम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आए। इस बीच मेरे एग्जाम भी थे, तब मुझे रियलाइज हुआ कि मैं कम्प्यूटर इंजीनियरिंग करके आगे करूंगी क्या? मुझे वो करना चाहिए जिसमें मैं अच्छी हूं, और मुझे बोलना पसंद था, लोगों से इंटरेक्ट करना पसंद था।

इसलिए मैंने दोबारा इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। दिसंबर 2018 में हमने कॉलेज खबरी नाम से प्लेटफॉर्म की शुरुआत की, जहां हम स्टूडेंट्स के लिए बेहतर करियर विकल्प ढूंढने में मदद करने लगे।

अर्शी बताती हैं कि रॉथर फॉर्मेसी बैकग्राउंड से था और वो 12वीं पास। उनके पास टेक्निकल स्किल नहीं था। इस बीच हमारी मुलाकात अविनाश सेठ से हुई, जो कि अपना एक स्टार्टअप चला रहे थे, उन्हें मार्केटिंग की जरूरत थी और अर्शी को टेक्निकल सपोर्ट की। उन्होंने एक-दूसरे की मदद की, और कुछ समय बाद अविनाश भी बतौर सीटीओ (चीफ टेक्निकल ऑफिसर) कॉलेज खबरी के साथ जुड़ गए।

बातचीत के अंत में अर्शी स्टूडेंट्स को एक सलाह देते हुए कहती हैं, 'कभी भी अपने रिश्तेदारों के पूछकर या उनके प्रेशर में आकर करियर चूज मत करो। करियर वो होना चाहिए जो आप करना चाहते हो, जिसे करने में आपको मजा आता हो।'

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