करिअर फंडाBUDDHISM में हैं EXAM की तैयारी के 6 TIPS:मन को नियंत्रित करें... न अतीत का तनाव लें, न भविष्य की चिंता करें

5 महीने पहले

कोई आदमी महान इसलिए नहीं होता है कि वह असफल नहीं हुआ; बल्कि इसलिए कि असफलता उसे रोक नहीं पाई

- कन्फ्यूशियस (चीनी दार्शनिक)

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भारत अनेकों खूबसूरत दर्शन शास्त्रों का घर रहा है और बौद्ध दर्शन हजारों वर्षों से अपना प्रकाश फैलाते आ रहा है।

जेन (ZEN) दर्शन

बौद्ध जेन (ZEN) फिलॉसफी दरअसल भारतीय महायान बौद्ध धर्म और ताओवाद का मिश्रण है। 'ध्यान' दर्शन चीन पहुंचा, कोरिया और जापान में फैल गया। बीसवीं शताब्दी के मध्य से पश्चिम में बहुत लोकप्रिय हो गया।

जेन मानव दक्षता (एफिशिएंसी), रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) और हमारी क्षमता (कैलिबर) को साकार करने पर भी बहुत कुछ कहता है। यही कारण है कि स्टीव जॉब्स (एप्पल के संस्थापक), एलिसन ओनिजुका (पहले एशियाई-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री), विलियम क्ले फोर्ड जूनियर (फोर्ड मोटर कंपनी के अध्यक्ष), एंजेलिना जोली (हॉलीवुड अभिनेत्री), रोजा पार्क्स (सिविल राइट्स कार्यकर्ता), जैकी चैन (एक्टर), हरमन हेस (लेखक), डेविड बॉवी (पॉप गायक) आदि विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सेलिब्रिटीज भी किसी न किसी रूप में इसे फॉलो करते रहे हैं।

जेन (ZEN) को शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता है, इसे समझने के लिए इसका अनुभव करना होता है। जैसा कि अमेरिकी सिंगर जीनी क्लार्क ने सही ही कहा है कि 'जेन कला नहीं है, ना ही ये कोई रिलिजन है। यह एक अनुभव है।'

चीन में जेन बौद्ध धर्म पारंपरिक रूप से 5वीं शताब्दी से ही है। पहली बार 8वीं शताब्दी की शुरुआत में इसे तब महत्व मिला जब टैंग राजवंश को खत्म कर झोउ राजवंश की वूहोऊ के पास सत्ता आई। झोउ राजवंश ने जेन शिक्षकों को दरबार में जगह दी।
चीन में जेन बौद्ध धर्म पारंपरिक रूप से 5वीं शताब्दी से ही है। पहली बार 8वीं शताब्दी की शुरुआत में इसे तब महत्व मिला जब टैंग राजवंश को खत्म कर झोउ राजवंश की वूहोऊ के पास सत्ता आई। झोउ राजवंश ने जेन शिक्षकों को दरबार में जगह दी।

कॉम्पिटिटिव एग्जाम तैयारी के लिए ZEN BUDDHISM से 6 सीख

आप आज और अभी से ZEN की मूल बातों का प्रयोग कर एग्जाम में बढ़िया परफॉरमेंस की ओर बढ़ सकते हैं-

1) गहन अनुशासन (Intense Discipline): जेन बुद्धिज्म गहन अनुशासन पर बल देता है। विहारों में रह कर इसका अभ्यास करने वाले व्यक्तियों को अपने रात को सोने, सुबह जल्दी उठने से लेकर, पूरी दिनचर्या में, जिसमें खान-पान सभी कुछ शामिल है, अत्यंत डिसिप्लिनड रहना होता है। जिसका ठीक से अभ्यास करने पर, पूर्ण सहजता और परम स्वतंत्रता प्राप्त होती है। इसे प्राकृतिक सहजता के साथ किया जाता है, फोर्सफुली नहीं। डिसिप्लिन का अभ्यास करना कॉम्पिटिटिव एग्जाम में सफलता के लिए भी आवश्यक है।

2) आत्मज्ञान अंदर है: जेन हमें आत्मज्ञान के लिए अपने अंदर देखने के लिए कहता है। जेन दर्शन कहता है कि उत्तर के लिए स्वयं से बाहर खोजने की कोई आवश्यकता नहीं है; हम उसी स्थान पर उत्तर ढूंढ सकते हैं जहां से हमें प्रश्न मिले थे। कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के क्षेत्र में इसका अनुवाद है कि हमें अपनी सेल्फ स्किल्स और नॉलेज पर काम करना चाहिए ना कि बाहरी चीजों को नियंत्रित करने में अपना समय व्यर्थ करना चाहिए (जैसे कि कुछ लोग सिलेक्शन करवाने के लिए कॉन्टैक्ट ढूंढते हैं या पैसे ऑफर करते हैं)। दलाई लामा ने कहा है 'दूसरों के व्यवहार को अपनी आंतरिक शांति को नष्ट न करने दें।'

3) ध्यान और अन्य तकनीकों के माध्यम से हमारे मन को नियंत्रित करना: जेन दर्शन को फॉलो करने का पहला कदम ध्यान और अन्य तकनीकों के माध्यम से हमारे मन और शरीर को नियंत्रित करना है। इसकी प्रैक्टिस करने से कॉम्पिटिटिव एग्जाम में यह फायदा होगा कि आपका मन अधिक विचलित नहीं होगा और एकाग्र (कॉन्सेंट्रेट) रहेगा। जापानी बुद्धिस्ट लीडर कोन यमादा कहते हैं कि 'जेन का अभ्यास किसी चीज के साथ जुड़ने की क्रिया में स्वयं को भूल जाना है।'

4) प्रेजेंस ऑफ माइंड: प्रसिद्ध बुद्धिस्ट फिलॉस्फर लाओ त्सू (Lao Tzu) कहते हैं कि यदि आप उदास हैं, तो आप अतीत में जी रहे हैं। यदि आप चिंतित हैं, तो आप भविष्य में जी रहे हैं। यदि आप शांति में हैं, तो आप वर्तमान में जी रहे हैं।' जेन दर्शन बस वर्तमान क्षण में पूरी तरह से जीवित होने पर बल देता है। कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी में इसकी प्रैक्टिस चिंता से बचने, एकाग्र, अलर्ट और अवेयर बने रहने में मदद कर सकती है

5) डर से आजादी: जेन मन को किसी भी प्रकार के डर जैसे अंधविश्वास, रूढ़िवाद, अत्याचार आदि से मुक्त करने का प्रयास करता है। जेन अपने सार में स्वयं के होने की प्रकृति को देखने की कला है, और यह बंधन से मुक्ति का मार्ग बताता है। कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में फियरलेस होना, नर्वसनेस, पैनिक अटैक इत्यादि से बचने के लिए आवश्यक है। यहां तक कि जेन आपको नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों सोच से बच कर रियलिस्टिक सोच के लिए प्रेरित करता है।

6) मिनिमलिस्म: गौतम बुद्ध कहा करते थे कि 'जैसे मधुमक्खी नेक्टर इकट्ठा करने में फूल के रंग और सुगंध को नुकसान नहीं पहुंचाती है और न ही उसे बिगाड़ती है; बुद्धिमान लोग उस तरह से इसी तरह संसार में रहते हैं।' कॉम्पिटिटिव एग्जाम के क्षेत्र में यह सीख कम प्रयासों में अधिक रिजल्ट की और इशारा करती है। अर्थात स्मार्ट, एफिशिएंट वर्क। प्रयोग करें, इसके अपने स्वयं के तरीके ढूंढे।

तो आज का करिअर फंडा यह है कि सदियों की जेन बुद्धिज्म विजडम (Zen Buddhist Wisdom) का उपयोग कर कॉम्पिटिटिव एग्जाम में ठोस सफलता हासिल हो सकती है।

कर के दिखाएंगे!

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