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सरकार का दावा फेल:टेस्टिंग घटी, कोरोना के मामले नहीं; अभी भी संक्रमण बना हुआ है खतरनाक

एक महीने पहले

बात शुरू करते हैं सरकार के उस ऐलान से, जिसके बाद हमने ये पड़ताल की। सोमवार को सरकार ने घोषणा की थी कि देश के 13 राज्यों में मामले कम होने लगे हैं। लेकिन गुरुवार को ही कोरोना के रिकॉर्ड मामले सामने आ गए। ये कैसी आंकड़ों की बाजीगरी है? आखिर राज्यों में अचानक मामले गिरने कैसे लगे? इन सवालों का जवाब हमारे बीच कोरोना की टेस्टिंग में छुपा है। सिर्फ एक उदाहरण इसको साफ कर देता है। पिछले हफ्ते शनिवार को 19.5 लाख टेस्ट हुए। वहीं, सोमवार को घटकर 15 लाख रह गए। अब टेस्टिंग कम तो कोरोना के मामले भी कम।

13 राज्य और अब उनके हाल
सरकार ने जिन 13 राज्यों में कोरोना के मामले कम होने का दावा किया था, वे हैं- छत्तीसगढ़, दिल्ली, दमन और दीव, गुजरात, झारखंड, लद्दाख, लक्षद्वीप, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड। नए आंकड़ों से यह भी साफ है कि इन राज्यों में भी कोविड संक्रमण के मामले कम नहीं हुए हैं और कई राज्यों में उनमें फिर से बढ़ोतरी होने लगी है।

राज्यों में टेस्टिंग में कमी आने से घटे थे मामले
ऐसे में सवाल यह उठता है कि सरकार को मामले घटने का धोखा कैसे हुआ? ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सरकार ने सिर्फ राज्यों में संक्रमण के नए मामलों पर नजर रखी, उसके मुकाबले टेस्टिंग घटने पर गौर नहीं किया। सरकार की ओर से जिन 13 राज्यों के लिए दावा किया गया, उनमें से उत्तर प्रदेश को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में कोरोना टेस्टिंग में गिरावट आई है।

दिल्ली में 28 अप्रैल को 81 हजार टेस्ट हुए थे, जो 3 मई को घटकर 61 हजार हो गए। इसी के साथ वहां 28 अप्रैल को आए करीब 26 हजार मामले भी 3 मई को घटकर 18 हजार हो गए। ये मामले 5 मई को बढ़कर फिर 21 हजार प्रतिदिन पर पहुंच गए हैं।

टेस्टिंग बढ़ी तो बढ़ गए मामले
जिन राज्यों में टेस्टिंग में बड़ी कमी दर्ज की गई है, वे गुजरात, छत्तीसगढ़, पंजाब और तेलंगाना हैं। यहां टेस्टिंग के हिसाब से मामलों में भी कमी दिखी। यही वजह रही कि जब गुरुवार तक इन राज्यों में फिर से टेस्टिंग बढ़ी तो मामले भी बढ़ गए।

इसी तरह केरल और महाराष्ट्र में सोमवार के मुकाबले मंगलवार और बुधवार को कोविड जांच में तेजी आई। इसके साथ ही यहां एक बार फिर मामले बढ़ने लगे। सोमवार को केरल में 26 हजार कोविड संक्रमण के मामले आए थे, जो बुधवार को बढ़कर करीब 42 हजार हो गए। वहीं महाराष्ट्र में गुरुवार को 57 हजार से ज्यादा संक्रमण के मामले आए हैं, जो सोमवार को 48 हजार थे।

तेजी से बढ़ा पॉजिटिविटी रेट, कोरोना के और खतरनाक होने का इशारा
कोरोना टेस्टिंग का पॉजिटिविटी रेट गुरुवार को 26.77% रहा, जो पिछले हफ्ते सिर्फ 20.44% था। यानी पिछले हफ्ते जहां टेस्टिंग कराने वाले प्रति 100 व्यक्तियों में 20 कोविड संक्रमित पाए जा रहे थे। वहीं गुरुवार को प्रति 100 टेस्टिंग कराने वाले व्यक्तियों में से 26 से ज्यादा संक्रमित पाए गए। यह इस बात का संकेत भी है कि देश में टेस्टिंग को और बढ़ाए जाने की जरूरत है।

टेस्टिंग के डेटा पर भी वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल
इतना ही नहीं, भारत में कोरोना के आंकड़ों की प्रकृति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। जानकार राज्यों की ओर से एंटीजन और RT-PCR टेस्टिंग के आंकड़े अलग-अलग न मुहैया कराए जाने को परेशानी की वजह बताते हैं। कोरोना से जुड़े अन्य आंकड़ों की उपलब्धता भी बहुत कम है। यही वजह है कि 29 अप्रैल को 700 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कोविड-19 टेस्ट रिजल्ट के डेटा और मरीजों के अस्पताल में इलाज के क्लीनिकल डेटा की मांग की थी। उन्होंने बड़े स्तर पर जीनोम सर्विलांसिंग प्रोग्राम किए जाने की बात भी कही थी, ताकि कोरोना के नए वैरियंट की पहचान हो सके।

मशहूर विज्ञान पत्रिका नेचर के मुताबिक इसके बाद सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार कृष्णास्वामी विजयराघवन ने इन गड़बड़ियों को स्वीकार किया था और उन तरीकों के बारे में बताया था, जिन्हें अपनाकर सरकारी वैज्ञानिकों से अलग अन्य वैज्ञानिक कोरोना से जुड़ा डेटा हासिल कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इस कदम की तारीफ की थी, लेकिन उनमें से कई का कहना है कि अभी भी पूरा डेटा कैसे हासिल किया जा सकता है, इसका तरीका साफ नहीं है।

दूसरी लहर का अंत अभी दूर
डेटा को लेकर अस्पष्टता के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि मामलों में थोड़ी सी कमी आने से खुश होना अभी जल्दबाजी होगी। इसके साथ ही उन्होंने टेस्टिंग बढ़ाने की बात भी कही है।

मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर की मैनेजिंग डायरेक्टर अमीरा शाह ने कहा, 'थोड़े से मामले कम होने से खुश होने की जरूरत नहीं है, दूसरी लहर का अंत अभी दूर है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान जैसे ज्यादातर राज्यों में अभी इसका पीक नहीं आया है। ऐसे में हमें बहुत ही चौकन्ना रहने और टेस्टिंग बढ़ाने की जरूरत है।'

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