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भास्कर ओरिजिनल:अपनी वैक्सीन से करोड़ों कमा रही हैं मॉडेर्ना और फाइजर; वैक्सीन से कोई कमाई नहीं कर रही एस्ट्राजेनेका, फिर भी विवादों में क्यों?

3 महीने पहले
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ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका ने अपने कोरोना वैक्सीन ट्रायल का नया डेटा जारी किया है। कुछ दिन पहले कंपनी की ओर से जारी किया गया डेटा तब विवादों में घिर गया था, जब डॉक्टरों के एक दल ने कंपनी पर पुराना डेटा जारी करने का आरोप लगाया था। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की ओर से जारी 'कोविशील्ड' के नए डेटा में भी पुराने डेटा के मुकाबले बहुत कम बदलाव हुआ है। वैक्सीन के प्रभावी होने की दर में 3% की मामूली गिरावट आई है। यानी पहले के डेटा में 79% प्रभावशाली बताई गई 'कोविशील्ड' नए डेटा में 76% प्रभावी बताई गई है। लेकिन नए डेटा में 65 साल से ज्यादा के लोगों पर वैक्सीन का असर बढ़ने की बात भी सामने आई है। जहां पहले इस आयु वर्ग में वैक्सीन 80% प्रभावी बताई गई थी, नए डेटा में यह 65 साल के ऊपर के 85% लोगों को कोरोना से बचाने में सफल पाई गई है। वहीं यह वैक्सीन लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती होने से बचाने में 100% सफल रही है।

एस्ट्राजेनेका ने कहा है, 'जो नया डेटा जारी किया गया है, वो पिछले डेटा का ही अगला हिस्सा है। इसमें कुल 49 नए मामलों का डेटा जोड़ा गया है। जिससे वैक्सीन के डेटा में कुल वॉलंटियर की संख्या 190 हो गई है। ये सभी वॉलंटियर ऐसे थे, जिन्हें कोरोना इंफेक्शन हुआ और उन्होंने इसके बाद वैक्सीन लगवाई।' लेकिन नया डेटा सामने आने के बाद उन अमेरिकी डॉक्टरों के समूह पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं, जिन्होंने ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के पहले जारी किए गए डेटा पर सवाल उठाए थे।

सबसे ज्यादा विवादों में घिरी रही है ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका
BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी डॉक्टरों के ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पर सवाल उठाने के दुनियाभर में बहुत गलत प्रभाव हुए हैं। इससे दुनिया के कई देशों में लोगों को लगा है कि कंपनी गलत डेटा जारी कर रही है, जिससे इस वैक्सीन को लेकर लोगों के आत्मविश्वास में कमी आई।

इससे पहले ये कंपनी यूरोप के कई देशों से आई एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के चलते खून में थक्के जमने जैसी खबरों के चलते दुनियाभर में छवि खराब होने का खतरा झेल चुकी है। जिसके बाद कई यूरोपीय देशों ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के उपयोग को रोक दिया था। डेनमार्क ने तो अब तक एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के प्रयोग पर रोक लगा रखी है।

यूरोपियन यूनियन ने ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के निर्यात पर प्रतिबंध की बात कही
अब यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने यूरोपीय देशों में मौजूद वैक्सीन निर्माताओं के वैक्सीन निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है। उनका कहना है कि ये निर्माता अब तभी वैक्सीन का निर्यात कर पाएंगे जब वो यूरोपियन यूनियन के देशों से हुए डोज के टारगेट को पूरा कर देंगे। बता दें कि यूरोपियन यूनियन ने इन गर्मियों के अंत तक यूरोप के वैक्सीनेशन लक्ष्य को पूरा करने की प्रतिबद्धता को भी दोहराया है। यूरोपियन यूनियन ने इन गर्मियों के अंत तक अपनी कुल जनसंख्या के 70% लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ कई यूरोपियन यूनियन के नेताओं पर कोरोना वैक्सीन को अनुमति देने के मामले में देर करने को लेकर भी उंगलियां उठ रही हैं।

यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लायन ने वैक्सीन को लेकर रखी गई एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के बाद कहा, 'यूरोपियन यूनियन देशों में अब तक लगाई गई कुल वैक्सीन से 1.5 करोड़ ज्यादा वैक्सीन का निर्यात यूरोपियन यूनियन से बाहर किया जा चुका है। कंपनियों को दूसरे देशों को वैक्सीन का निर्यात करने से पहले यूरोपियन यूनियन के देशों के साथ अपने समझौते का सम्मान करना चाहिए। यह बात खासकर एस्ट्राजेनेका के लिए है। कंपनी के लिए यह बात साफ होनी चाहिए कि वह फिर से वैक्सीन का निर्यात शुरू कर सके, उससे पहले कंपनी को यूरोपियन यूनियन के देशों के साथ अपने समझौते को पूरा करना है।'

प्रतिबंधों को लागू करना आसान नहीं
कॉन्फ्रेंस में वॉन डेर लायन के निर्यात पर प्रतिबंधों का यूरोपियन यूनियन के देशों ने स्वागत किया और इसे स्वीकार करने की बात कही है। हालांकि इसे जमीन पर लागू करना आसान नहीं होगा क्योंकि एक ओर इससे जहां दुनियाभर में वैक्सीन की सप्लाई प्रभावित होगी, वहीं दूसरी ओर जिन देशों को सप्लाई हो रही है, उनके साथ निर्माता देशों के संबंधों में भी तनाव आएगा।

इसका असर खासकर ब्रिटेन पर पड़ेगा, जो अपनी वैक्सीन जरूरत के लिए यूरोप पर निर्भर है। ब्रिटेन में ज्यादातर लोगों को फाइजर वैक्सीन लगाई जा रही है, जिसे वह खुद नहीं बनाता है।

उर्सुला वॉन डेर लायन ने बताया, 'दिसंबर से अब तक यूरोपियन यूनियन से 7.7 करोड़ वैक्सीन डोज का निर्यात किया जा चुका है। यह निर्यात ज्यादातर मध्यम श्रेणी और अमीर श्रेणी में आने वाले देशों को हुआ है। 2 करोड़ वैक्सीन डोज तो सिर्फ ब्रिटेन को निर्यात की गई हैं।'

क्यों अलग है ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका?
BBC रिपोर्ट के मुताबिक एस्ट्राजेनेका ने महामारी के दौरान अपनी वैक्सीन से एक भी रुपए का फायदा न लेने का फैसला लिया है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका ने अपने वैक्सीन फॉर्मूले को भी लाइसेंस फ्री कर दिया है ताकि बड़े उत्पादक इस फॉर्मूले का उपयोग कर तेजी से वैक्सीन निर्माण कर सकें और कोविड-19 के कुचक्र से दुनिया को निकाला जा सके। इसके अलावा एस्ट्राजेनेका WHO के 'कोवैक्स अभियान' के तहत दुनिया के तमाम गरीब देशों को टीके उपलब्ध करा रहा है। इसी फॉर्मूले से भारत का सीरम इंस्टीट्यूट तेजी से वैक्सीन बना रहा है, जिन्हें गरीब अफ्रीकी देशों को मुफ्त भी दिया जा रहा है। जबकि मॉडेर्ना और फाइजर अपनी वैक्सीन से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं और ये 'कोवैक्स अभियान' का हिस्सा भी नहीं हैं।

अपनी तमाम सकारात्मक कोशिशों के बावजूद वैक्सीन को लेकर लगातार हो रहे विवादों से निराश एस्ट्राजेनेका के बड़े अधिकारियों ने BBC से कहा है, 'अगर आगे किसी महामारी की परिस्थिति बनी तो उन्हें सोचना पड़ेगा कि वे कोविड-19 जैसे कदम उठाएं या नहीं?'

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