कहानी देश के पहले कोरोना पॉजिटिव केस की:केरल की वो लड़की बस ये चाहती थी कि उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आए तो उसके पेरेंट्स को नहीं बताएं, कहीं वो डर न जाएं

कोच्चिएक वर्ष पहलेलेखक: बाबू के पीटर
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  • पंचायत के सतर्क रहने के चलते उस पहले केस से एक भी व्यक्ति में संक्रमण नहीं फैला और पंचायत में कोरोना के चलते अब तक एक भी मौत नहीं हुई
  • पंचायत ने क्वारैंटाइन किए लोगों को राशन दिया, जब तक वो क्वारैंटाइन में रहे उनके मोबाइल फोन पर रीचार्ज भी करवाया

कोरोना को देश आए 200 दिन हो गए आज। संक्रमितों की संख्या 25 लाख पार। केरल के त्रिशूर जिले की माथिलाकम ग्राम पंचायत को इस बात का सुकून है कि उन्होंने कोरोना को फैलने से रोक लिया है। बावजूद इसके कि ये वही पंचायत है जहां देश का पहला कोरोना पॉजिटिव केस मिला था।

माथिलाकम ग्राम पंचायत की हेल्थ इंस्पेक्टर शीबा याद करती हैं वो दिन जब उन्हें मालूम हुआ था कि देश का पहला पॉजिटिव केस उनके इलाके में मिला है। शीबा कहती हैं, ‘मैं घबरा गई, बेहद तनाव हो गया जब मालूम हुआ कि वुहान से लौटी जिस स्टूडेंट को हमने ऑब्जर्वेशन में भेजा, उसका टेस्ट पॉजिटिव आया। हालांकि, हेल्थ डिपार्टमेंट ने तैयारी शुरू कर दी थी और हमें अलर्ट रहने को कहा था, लेकिन हमने नहीं सोचा था कि हमारे यहां ही पहला केस आ जाएगा। हमें पता भी नहीं था कि उस परिस्थिति से निपटना कैसे है।’

केरल में अभी 42 हजार से ज्यादा मरीज मिले हैं, इनमें से 27 हजार से अधिक रिकवर हो गए हैं। 146 की मौत हुई है।
केरल में अभी 42 हजार से ज्यादा मरीज मिले हैं, इनमें से 27 हजार से अधिक रिकवर हो गए हैं। 146 की मौत हुई है।

शीबा कहती हैं कि महामारी फैलने और लॉकडाउन लगने की वजह से ही वुहान से जो स्टूडेंट लौटीं, उसने हमें घर आने की जानकारी दी थी। वो कोलकाता के रास्ते 23 जनवरी को लौटी थी। पहले दिन जब वो घर पहुंची तो मैं उसके संपर्क में थी। वो सरकारी अस्पताल टेंपरेचर जांच करवाने पहुंची और हमें उसकी जानकारी दी। मैं दिन में 2 से 3 बार उसे फोन करती थी। शुरुआत में उसमें कोई भी लक्षण नजर नहीं आ रहे थे, लेकिन तीन-चार दिन बाद जब मैंने फोन किया तो उसने बताया कि उसे गले में थोड़ा दर्द हो रहा है।

मैंने तुरंत ये बात जिले की मेडिकल अथॉरिटीज को बताई और उसे अस्पताल ले जाया गया। बाद में उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। वो देश का पहला पॉजिटिव केस था। शीबा कहती हैं, मुझे वो दिन अच्छे से याद है। उस लड़की ने पूरी परिस्थिति का सामना बड़ी बहादुरी से किया। वो ज्यादा डरी नहीं थी, बल्कि बड़े स्थिर मन से उसने इसका सामना किया। चीन से जब लौटी तो उसने खुद जाकर अथॉरिटीज को बताया। सेल्फ क्वारैंटाइन में घर में रही और हेल्थ वर्कर के बताए हर मौके पर उसने पूरा सहयोग किया। बस वो चाहती थी कि अगर उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आए तो तुरंत उसके पेरेंट्स को नहीं बताया जाए, उसे डर था कहीं वो डर न जाएं।

5 मई तक केरल में कोरोना मरीजों की संख्या सिर्फ 500 थी, जो 27 मई को 1000 हो गई। 4 जुलाई को राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या 5000 हो गई।
5 मई तक केरल में कोरोना मरीजों की संख्या सिर्फ 500 थी, जो 27 मई को 1000 हो गई। 4 जुलाई को राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या 5000 हो गई।

शीबा के लिए असली चुनौती तब शुरू हुई जब वुहान से लौटी वो स्टूडेंट अस्पताल पहुंची और उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उस लड़की के चीन से लौटने के दो दिन बाद उसके छोटे भाई ने अपना बर्थडे मनाया था। भाई ने अपने कुछ दोस्तों को ट्रीट देने घर बुलाया था।

जब उसके दोस्त घर आए तो ये लड़की भी घर पर थी, हालांकि वह क्वारैंटाइन थी। उस लड़की ने अपने भाई के किसी दोस्त से बात-मुलाकात नहीं की, लेकिन पंचायत और प्रशासन ने एहतियात बतौर उन बच्चों को प्राइमरी कॉन्टैक्ट माना और परिवार समेत क्वारैंटाइन होने को कहा।

शीबा कहती हैं वो स्कूल की प्रिंसिपल से मिलीं और इस मसले पर बात की। उन्हें मनाया कि वो बच्चों और उनके परिवारों को क्वारैंटाइन होने के लिए राजी करें। इनमें से कुछ बच्चे गरीब परिवार से थे। मैंने उनसे मुलाकात की और उन्हें पंचायत के जरिए हर जरूरी मदद मुहैया करवाई।

पंचायत ने उन्हें राशन दिया, जब तक वो क्वारैंटाइन में रहे उनके मोबाइल फोन पर रीचार्ज भी करवाया। ये सब फरवरी का वाकया है। मार्च में जब प्रधानमंत्री ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की उसके ठीक एक महीने पहले का। शीबा के लिए ये बेहद तनावपूर्ण वक्त था। वो कहती हैं सबसे ज्यादा जिस बात ने उन्हें परेशान किया वो ये थी उनकी अपनी बेटी की तबीयत, जो खुद भी वुहान में पढ़ाई करती है।

वुहान से लौटी लड़की के संपर्क में आए हर एक व्यक्ति को क्वारैंटाइन होने को कहा गया। इस दौरान पंचायत ने उन्हें हर जरूरी चीज मुहैया करवाई।
वुहान से लौटी लड़की के संपर्क में आए हर एक व्यक्ति को क्वारैंटाइन होने को कहा गया। इस दौरान पंचायत ने उन्हें हर जरूरी चीज मुहैया करवाई।

कहती हैं कि मैं पहले से बेटी की हेल्थ को लेकर घबराई हुई थी। और मैं खुद भी कैंसर की लड़ाई लड़ रही हूं। इसलिए मेरे परिवार और दोस्त नहीं चाहते थे कि मैं घर से बाहर जाऊं। बतौर हेल्थ इंस्पेक्टर मैं चुपचाप खड़ी होकर तमाशा नहीं देख सकती थी। अब मुझे संतोष होता है कि मैं अपनी हद में रहकर जो बेस्ट कर सकती थी, वो कर पाई। गर्व होता है कि मैं उस टीम का हिस्सा बनी जो कोरोना से लड़ने के अपने तरीके के चलते देशभर में बतौर मॉडल अपनाया गया। शीबा की बेटी मई में घर लौटी थी और वो सेफ है।

पंचायत के प्रमुख ईजी सुरेंद्रन कहते हैं, मुझे इस बात का गर्व है कि पहला केस भले मेरी पंचायत में मिला लेकिन हम उसे फैलने से रोक पाए। जो लड़की पहला पॉजिटिव केस थी उसे सही वक्त पर सही इलाज मिला और वो ठीक भी हो गई। सबसे बड़ी बात ये कि उस पहले केस से संक्रमण एक भी व्यक्ति में नहीं फैला और पंचायत में एक भी मौत नहीं हुई। हालांकि हम पंचायत के लोग डर गए थे, जब हमें उस पहले केस के बारे में मालूम हुआ।

पंचायत की तरफ से गरीबों को हर तरह से मदद पहुंचाई जा रही है, उनके सहायता राशि भी दी जा रही है।
पंचायत की तरफ से गरीबों को हर तरह से मदद पहुंचाई जा रही है, उनके सहायता राशि भी दी जा रही है।

केस की जब पहली जानकारी मिली तो हमने पंचायत की एक मीटिंग बुलाई। मेडिकल ऑफिसर और हेल्थ इंस्पेक्टर को इस मीटिंग में आने को कहा। मेडिकल ऑफिसर ने डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटीज के साथ मिलकर बताया कि इस स्थिति से कैसे निपटना होगा। उसके बाद हेल्थ डिपार्टमेंट की बताई हर बात हम मान रहे थे। वुहान से लौटी लड़की के संपर्क में आए हर एक व्यक्ति को क्वारैंटाइन होने को कहा गया।

जब तक वो क्वारैंटाइन में थे पंचायत ने उन्हें हर जरूरी चीज मुहैया करवाई, क्योंकि वो काम-धंधे पर नहीं जा सकते थे। इस सबके बीच पंचायत ने उस लड़की की पहचान को छिपाए रखा।

हालांकि, पहला पॉजिटिव केस इसी पंचायत में मिला था, लेकिन अब तक सिर्फ 50 पॉजिटिव केस आए हैं। और ये सभी केस तब शुरू हुए जब लोग विदेश और बाकी राज्यों से लौटने लगे। पहली बार जब संक्रमण की शुरुआत हुई तो एक भी केस इस पंचायत में नहीं था। खैरियत ये है कि अब तक एक भी मौत नहीं हुई।

देश में कोरोना का पहला केस केरल की इसी पंचायत में मिला था, जब चीन के वुहान से लौटी एक मेडिकल स्टूडेंट संक्रमित पाई गई थी।
देश में कोरोना का पहला केस केरल की इसी पंचायत में मिला था, जब चीन के वुहान से लौटी एक मेडिकल स्टूडेंट संक्रमित पाई गई थी।

इसी पंचायत में रहने वाले टेक्निकल असिस्टेंट श्रीजीत कहते हैं कि वो वक्त बेहद डरावना था। पंचायत और स्वास्थ्य विभाग के लोग इस कोशिश में लगे थे कि कोई अफवाह न फैले, क्योंकि अचानक सोशल मीडिया पर फेक मैसेज वायरल होना शुरू हो गए थे। बाद में इसे लेकर एक महिला की गिरफ्तारी भी हुई। हालांकि, पहली पॉजिटिव मरीज के ठीक होने से लोगों ने राहत की सांस ली।

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