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भास्कर एक्सक्लूसिव:आनंद गिरि बिना अनुमति गंगा किनारे बनवा रहे लग्जरी आश्रम, यहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमिका चावला के पति और एक मंत्री का भी ठिकाना

एक महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद हिरासत में लिए गए उनके शिष्य आनंद गिरि गंगा किनारे बिना परमिशन के लग्जरी आश्रम बनवा रहे हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमिका चावला के पति और स्पिरिचुअल टीचर भरत ठाकुर और उत्तराखंड के एक मंत्री का आश्रम भी यहीं है। चंद कदमों की दूरी पर हेलीपैड भी है, जहां से चारधाम की यात्रा के लिए हेलिकॉप्टर उड़ान भरते हैं। दैनिक भास्कर की टीम जब मौके पर पहुंची तो कई सच सामने आए। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट...

हरिद्वार से 10 किमी दूर गांव में बन रहा आश्रम

इस आश्रम का निर्माण हरिद्वार से करीब 10 किमी दूर गाजीवाली गांव में किया जा रहा है। गांव की आबादी ढाई से तीन हजार है, लेकिन बीते चार-पांच सालों में यहां जमीन के रेट 600 रुपए स्क्वायर फीट से बढ़कर 1500 रुपए स्क्वायर फीट हो चुके हैं। बड़े-बड़े लोग गंगा किनारे जमीन खरीदकर आश्रम और होटल बनवा रहे हैं। यहीं आनंद गिरि ने भी जमीन खरीदी थी। पिछले साल दिसंबर में इस आश्रम का कंस्ट्रक्शन शुरू हुआ और महज 8 महीने में बुनियादी ढांचा बनकर तैयार हो चुका है।

पिछले कुछ सालों से यहां जमीन की कीमत काफी बढ़ गई है। बड़े-बड़े लोग जमीन खरीद कर बिल्डिंग बनवा रहे हैं। पिछले साल ही इस भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ है।
पिछले कुछ सालों से यहां जमीन की कीमत काफी बढ़ गई है। बड़े-बड़े लोग जमीन खरीद कर बिल्डिंग बनवा रहे हैं। पिछले साल ही इस भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ है।

खास बात ये है कि इस बिल्डिंग को तैयार करने के पहले न ही नक्शा पास करवाया गया और न ही गंगा से 200 मीटर की दूरी बनाई गई। जबकि नियमों के मुताबिक, यह दोनों काम किए बिना भवन बनाया नहीं जा सकता, लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते बिल्डिंग खड़ी कर दी गई। ग्रामीणों ने बताया कि कुंभ और कोरोना के दौरान तेजी से निमार्ण कार्य हुआ। कभी किसी अधिकारी की यहां आने तक की हिम्मत नहीं हुई, क्योंकि सब जानते हैं कि आनंद गिरि जी की पहुंच सरकार तक है और वे महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य हैं।

भास्कर रिपोर्टर के सामने पहुंची विकास प्राधिकरण की टीम, आश्रम को सील किया

बुधवार को भास्कर रिपोर्टर के सामने ही हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की टीम भी आश्रम पर पहुंची। 8 से 10 लोग टीम में शामिल थे। टीम को लीड कर रहे अधिकारी एमएन जोशी ने बताया कि इस आश्रम को तैयार करने से पहले बिल्डिंग परमिशन नहीं ली गई। गंगा से 200 मीटर की दूरी रखना भी जरूरी है, वह भी नहीं रखी गई, इसलिए हम इसे सील कर रहे हैं। आगे की जांच पूरी करने के बाद इसे गिराने की कार्रवाई हो सकती है।

नए भवन के निर्माण के लिए गंगा से 200 मीटर की दूरी मेंटेन रखना अनिवार्य है। इसके बिना किसी को भी भवन बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
नए भवन के निर्माण के लिए गंगा से 200 मीटर की दूरी मेंटेन रखना अनिवार्य है। इसके बिना किसी को भी भवन बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

हमने पूछा, ये कार्रवाई पहले क्यों नहीं की गई? तो बोले, मई में भी हमने आश्रम को सील किया था, लेकिन तब इन्होंने तार तोड़कर फिर से काम शुरू कर दिया था। उस प्रकरण में गुरुवार को FIR दर्ज की जाएगी। हमने आज फिर आश्रम को सील कर दिया है। आश्रम सील करने के बाद आनंद गिरि के तीनों शिष्यों को जरूरी सामान के साथ बाहर कर दिया गया और तीनों एंट्री गेट पर तार कस दिए गए हैं।

अभी हमारा वक्त खराब चल रहा, सच्चाई सामने आते ही सब ठीक हो जाएगा

आश्रम में हमें आनंद गिरि के शिष्य मिले। हालांकि उन्होंने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया। पहले बात भी नहीं कर रहे थे। काफी कहने के बाद बोले कि अभी हमारा वक्त खराब चल रहा है। जैसे ही सच्चाई सबके सामने आएगी, सब ठीक हो जाएगा।

शिष्यों ने ये सवाल भी उठाए कि महंत नरेंद्र गिरि जी को फांसी के फंदे से उतारते हुए वीडियो क्यों नहीं बनाया गया? पोस्टमॉर्टम इतना लेट क्यों किया गया? जिसने सबसे पहले उन्हें लटकते हुए देखा, उसके बारे में क्यों नहीं बताया गया? बलवीर सिंह अपने बयान से पलट क्यों गए? ये सभी सवाल कई तरह की शंका पैदा कर रहे हैं।

फिलहाल आनंद गिरि के इस निर्माणाधीन आश्रम को सील कर दिया गया है। जल्द ही इसे गिराने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
फिलहाल आनंद गिरि के इस निर्माणाधीन आश्रम को सील कर दिया गया है। जल्द ही इसे गिराने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

आठ से दस फीट ऊंची दीवार, अंदर क्या होता है, ग्रामीण नहीं जानते

जब हमने गाजीवाली गांव में आनंद गिरि के आश्रम के बारे में पूछा तो कोई बता नहीं सका, लेकिन जब यह पूछा कि जो संत अभी गिरफ्तार हुए हैं, उनका आश्रम कहां है, तो लोगों ने आश्रम का पता बता दिया। इसी गांव के रहने वाले अभय सिंह ने बताया कि आनंद गिरि को गांव में कोई नहीं जानता। उनके जैसे कई बड़े लोगों ने यहां कारोबार के लिहाज से होटल और आश्रम बना रखे हैं। कई आश्रमों में आठ से दस फीट ऊंची दीवार हैं। वहां टूरिस्ट आते हैं और चले जाते हैं। अंदर कब, कहां, क्या होता है, ये किसी को नहीं मालूम। गांव वाले बोले, ये सब बीते 4-5 सालों में ही हुआ है। कुंभ के बाद से भीड़ कुछ ज्यादा ही बढ़ रही है।

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