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  • Dainik Bhaskar Interview: Indian Virologist Shahid Jameel Said Corona Cases Are Increasing Due To The Negligence Of The Public; Lockdown Is Not A Permanent Solution

भास्कर एक्सक्लूसिव:जनता की लापरवाही के चलते बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले; लॉकडाउन नहीं है स्थायी हल, संक्रमण रोकने के लिए फुल प्रूफ प्लान की सख्त जरूरत

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी
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इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइंस की ताजा रिपोर्ट ने सरकार और 'जनता' के बीच फिर हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के 8 राज्यों में कोविड की R (रिप्रोडक्शन) वैल्यू 1 से ज्यादा है। यानी इन राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों के लगातार गिर रहे ग्राफ ने फिर ऊंचाई पकड़नी शुरू कर दी है। कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख डॉ. वीके पॉल ने भी साफ शब्दों में कहा है कि महामारी का खतरा अभी टला नहीं है। प्रकोप जारी है।

डॉ. पॉल ने कहा, 'हमें यह याद रखना होगा कि R वैल्यू का 0.6 से नीचे आना जरूरी है। अगर कुछ राज्यों में यह बढ़ रहा है, तो वास्तव में चिंता की बात है। यह बताता है कि वायरस फैलना चाहता है। लेकिन, हमें इसे रोकना होगा। मशहूर वायरोलॉजिस्ट और हाल ही में विवादों के बीच केंद्र द्वारा गठित वैज्ञानिक सलाहकार समिति के प्रमुख के पद से इस्तीफा देने वाले डॉ. शाहिद जमील से कोरोना की थर्ड वेव की आशंका और इसे रोकने के उपाय को लेकर दैनिक भास्कर ने विस्तार से बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश...

सवाल: थर्ड वेव का खतरा मंडरा रहा है, सेकंड वेव के मुकाबले यह कितनी खतरनाक साबित हो सकती है?

जवाब: पहली बात थर्ड वेव, फोर्थ वेव...यह सब टेक्निकल टर्म हैं। दरअसल, अभी सेकेंड वेव गई ही नहीं है। हां, उसका पीक जरूर चला गया है। लेकिन, दोबारा केस बढ़ने लगे हैं। तो यह सेकेंड वेव का एक्सटेंशन हैं या फिर थर्ड वेव की शुरुआत बिना इसमें फंसे हुए हमें इसे रोकने का प्रयास करना चाहिए। रही बात यह कितनी खतरनाक साबित हो सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम कोविड प्रोटोकॉल का पालन कितनी सख्ती से करते हैं।

सवाल: क्या, कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन फिर करना चाहिए?

जवाब: लॉकडाउन तो अंतिम उपाय है। पर कब तक लॉकडाउन रख सकते हैं? अभी तक किसी स्टडी में यह सामने नहीं आया कि यह वायरस कब तक रहेगा। लिहाजा लॉकडाउन की जगह लोगों को कोविड प्रोटोकॉल पर सख्ती से ध्यान देना होगा। मेट्रो सिटीज में तो फिर भी लोग थोड़े चौकन्ने हैं पर इसके अलावा लोग अब पुराने ढर्रे पर ही लौट आए हैं। बाजार-हाट, रेस्टोरेंट, पार्टी सब चालू हैं। मैं शुरू से कह रहा हूं कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन ही कोरोना के खिलाफ सबसे धारदार हथियार है।

सवाल: क्या थर्ड वेव या कोरोना के संक्रमण को कोविड प्रोटोकॉल से रोका या कम किया जा सकता है?

जवाब: बिल्कुल। यही मैं कह रहा हूं। अगर लोग सख्ती से कोविड प्रोटोकॉल के नियम मानेंगे तो शायद थर्ड वेव, फोर्थ वेव आए ही नहीं। कोविड प्रोटोकॉल हफ्ते, या महीनेभर नहीं पालन करना बल्कि अब आगे कई सालों के लिए इसे अपनी आदत में लाना है, तभी हम कोरोना को मात दे पाएंगे। नहीं तो यह कभी दबे छिपे तो कभी विकराल रूप रखकर बाहर आता रहेगा।

सवाल: बिना वैक्सीनेशन वाले लोग, एक डोज ले चुके और दो डोज ले चुके लोगों में कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट कितना असर करेगा?

जवाब: वैक्सीनेशन नहीं लेने वाले लोग तो पूरी तरह कोरोना वायरस के घेरे में आ सकते हैं। वैक्सीनेशन ले चुके लोगों में संक्रमण तो होगा पर घातक नहीं होगा। जो एक डोज ले चुका है उसे गंभीर संक्रमण का खतरा तकरीबन 30-35 प्रतिशत तक होगा। दोनों डोज ले चुके लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा 10-15 प्रतिशत तक ही होगा।

सवाल: क्या वैक्सीनेशन के बाद भी कोरोना प्रोटोकॉल फॉलो करना चाहिए ?

जवाब: मैंने ऊपर कहा, खतरा कम होगा। लेकिन, खतरा बना रहेगा। आप खतरे को टालना चाहते हैं तो कोविड प्रोटोकॉल फॉलो कीजिए। अगर किस्मत आजमाना चाहते हैं तो फिर बिना मास्क लगाए वायरस को चैलेंज कीजिए।

सवाल: वैक्सीनेशन की रफ्तार खतरे के मुकाबले कितनी सुस्त है?

जवाब: देखिए, जितना ज्यादा वैक्सीनेशन होगा उतना कम खतरा होगा। लेकिन, देश के भीतर वैक्सीनेशन की दशा-दुर्दशा हम देख ही रहे हैं। वैक्सीन के लिए सरकार ने समय पर आर्डर नहीं दिया। वैक्सीन की एक लॉट बनने में 4 महीने लगते हैं। इसलिए अब आर्डर हुआ है तो वक्त तो लगेगा ही। करना यह था कि एडवांस में आर्डर देना चाहिए था। लेकिन वैक्सीनेशन तो इसका एक पक्ष है, यह लोगों के बस में नहीं। सरकार ही करेगी जो करना है। पर कोविड प्रोटोकॉल का फॉलो, सरकार को नहीं बल्कि लोगों को करना है।

सवाल: सरकार से कोरोना नियंत्रण में कितनी चूक हुई, क्या वैक्सीनेशन की तेज रफ्तार होती तो थर्ड वेव का खतरा टल जाता?

जवाब: देखिए, कोरोना के खिलाफ हम टूल किट तैयार कर सकते हैं। इसमें वैक्सीन है, कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर और स्वास्थ्य व्यवस्था है। वायरस तो फैलने का प्रयास हर हाल में करेगा। लेकिन वैक्सीन, कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर की शील्ड से हम इसके मंसूबों पर पानी फेर सकते हैं। मामलों के बढ़ने के पीछे सरकार की सुस्ती और जनता की लापरवाही दोनों हैं। सरकार वैक्सीन की रफ्तार तेज नहीं कर पाई तो लोग भी अपना बिहेवियर नियंत्रित नहीं रख पा रहे।

सवाल: वैक्सीनेशन की रफ्तार, खतरे के मुकाबले कितनी धीमी है?

जवाब: इसका जवाब सीधा नहीं दिया जा सकता। वैक्सीन तो ज्यादा से ज्यादा जनसंख्या को लगनी ही चाहिए ताकि वायरस की कोशिशों को मात दी जा सके। वैक्सीनेट हुआ व्यक्ति नॉन वैक्सीनेटेड व्यक्ति के मुकाबले कम जोखिम में हैं। जनसंख्या का जितना प्रतिशत वैक्सीनेट हो चुका है, वह अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित है, इसमें कोई दो राय नहीं।

सवाल: 8 राज्यों में R वैल्यू 1 से ज्यादा है, क्या उन राज्यों में लॉकडाउन हो जाना चाहिए, कोरोना को मात देने का फुल प्रूफ प्लान क्या होना चाहिए?

जवाब: R वैल्यू यानी वायरस की रिप्रोडक्शन क्षमता। एक वायरस कितने लोगों को संक्रमित करता है। अगर यह वैल्यू 1 है तो एक व्यक्ति को वह संक्रमित करेगा। 2 है तो दो को और ऐसे ही आगे भी। लॉकडाउन की जगह कोरोना संक्रमण पर बारीक नजर रखने की रणनीति तैयार करनी चाहिए। पूरे राज्य को बंद करने से बेहतर है कि हम उस पर्टिकुलर जिले को लॉकडाउन करें, जहां संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है या बढ़ चुका है। जिस जिले पर काबू पा लें उसे खोलते जाएं। जहां संक्रमण बढ़े उसे लॉकडाउन कर दें। क्योंकि पूरे राज्य या फिर देश को लॉकडाउन करना कोरोना नियंत्रण के लिए स्थायी हल नहीं है।

सवाल: कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट कितना खतरनाक है, ऐसा भी कहा जा रहा है कि यह युवाओं को ज्यादा संक्रमित कर रहा है?

जवाब: यह संक्रमण ज्यादा फैला रहा है। ऐसा किसी अध्ययन में नहीं कहा गया कि युवाओं को यह ज्यादा संक्रमित कर रहा है। दरअसल, युवाओं का आवागमन ज्यादा होता है। बाजार, पार्टी और भीड़ में ज्यादा शामिल होते हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है कि यह यह वैरिएंट बुजुर्ग को छोड़कर सिर्फ युवाओं पर ही धावा बोल रहा है। मुख्य बात है कोविड प्रोटोकॉल और वैक्सीनेशन।

सवाल: स्कूल और यूनिवर्सिटी कैंपस खुलने शुरू हो गए हैं। उधर कोरोना के मामले भी बढ़ रहे हैं, क्या इस वक्त शिक्षण संस्थान का खुलना महामारी के प्रकोप को दावत देना नहीं है?

जवाब: देखिए, लॉकडाउन और परमानेंट सबकुछ बंद रखना स्थायी हल नहीं है। कब तक स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगे। यह तय करना होगा कि कहां मामले बढ़े हैं और कहां नियंत्रण में हैं। उसी के आधार पर संस्थानों को खोलने का निर्णय लेना होगा। स्कूल के बच्चों का वैक्सीनेशन अभी नहीं हो सकता। लेकिन, कॉलेज में स्टूडेंट्स का ज्यादा से ज्यादा वैक्सीनेशन करवाना चाहिए। स्टाफ को जल्द से जल्द वैक्सीनेट करना चाहिए। कोविड प्रोटोकॉल के साथ ही काम करना चाहिए। और लोकल अथॉरिटी को कोरोना के मामलों के घटने और बढ़ने के आधार पर संस्थानों को बंद करने और खोलने का फैसला लेना चाहिए।

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