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कृषि कानून के विरोधी रहे राज्यपाल का इंटरव्यू:सत्यपाल मलिक बोले- मैं खुलकर किसानों के साथ था, PM देर आए पर दुरुस्त आए

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: रवि यादव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह तीनों विवादित कृषि कानून वापस लेने का ऐलान कर दिया। किसानों को तो इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। कृषि कानूनों के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर रहे मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को शायद इसका अंदाजा था। राजनीति के जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार मलिक को सेफ्टी वॉल्व की तरह इस्तेमाल कर रही थी। सरकार कानूनों की वापसी के लिए अपने ही घर से एक रास्ता खुला रखने की रणनीति पर काम कर रही थी। यही वजह है कि कृषि कानूनों पर लगातार सरकार के खिलाफ बयानबाजी के बावजूद वो संवैधानिक पद पर बने रहे।

सत्यपाल मलिक ने अक्टूबर में किसानों के आंदोलन को खत्म करने के लिए MSP गारंटी का फॉर्मूला सुझाया था। उनका कहना था कि सरकार तीनों कानूनों को बना रहने दे, लेकिन MSP गारंटी का कानून बना दे। उन्होंने कहा था कि अगर सरकार ने किसानों की बात नहीं मानी तो उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

कानूनी वापसी के ऐलान के बाद भास्कर रिपोर्टर रवि यादव ने सत्यपाल मलिक से बात की। आइए जानते हैं कि उनका इस बारे में क्या कहना है...

सवाल: प्रधानमंत्री के फैसले पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

जवाब: मैं सबसे पहले प्रधानमंत्री को बधाई देना चाहता हूं। फिर किसानों को बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने इतना लंबा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चलाया। यह अच्छा हो गया। देर आए दुरुस्त आए। यह सबके हित में है।

सरकार समझ गई है कि किसानों के साथ अन्याय हो रहा है, इसको खत्म करना चाहिए। मैं यह नहीं कह सकता कि प्रधानमंत्री ने आज का दिन क्यों चुना। मैं तो पहले दिन से उनसे मिलकर कह चुका हूं कि इसे जल्द से जल्द खत्म करें। इसमें कई किसानों की जान भी चली गई।

सवाल: क्या सरकार ने सत्यपाल मलिक को सेफ्टी वॉल्व के रूप में इस्तेमाल किया?

जवाब: मैं तो खुलकर किसानों के साथ था। मैं कोई अंदर से लीड नहीं करता कभी।

सवाल: कानून वापस लेने में 14 महीने क्यों लग गए?

जवाब: मैं तो यह एक्सप्लेन नहीं कर सकता। ये तो वो बताएंगे जिन्होंने वक्त लगाया।

सवाल: क्या अगले साल होने वाले चुनावों में फायदे के लिए सरकार ने ऐसा किया है?

मुझे इससे कोई मतलब नहीं है। मैं पॉलिटिक्स में नहीं हूं। मैं गवर्नर हूं, मैं अपनी ड्यूटी करता हूं। जो किसानों के लिए महसूस करता हूं, वो कहता हूं।

सवाल: क्या राज्यों के चुनावों पर इसका असर होगा?

जवाब: मुझे यह तो नहीं पता कि इसका क्या असर होगा, लेकिन मैं चौधरी चरण सिंह जी का शिष्य रहा हूं। वे कहते थे कि अपने वर्ग के सवालों पर कभी समझौता मत करो। मैंने तय कर लिया था कि गवर्नर की कुर्सी छोड़ दूंगा, लेकिन किसानों की बात जरूर करूंगा।

सवाल: क्या सत्यपाल मलिक जी यूपी की कमान संभालने वाले हैं?

जवाब: नहीं, नहीं कुछ नहीं। मैं राजनीति में जाऊंगा ही नहीं, कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा। मैं रिटायर होकर कश्मीर पर किताब लिखूंगा।

सवाल: उपचुनाव के नतीजों से भयभीत होकर सरकार ने फैसला लिया है?

जवाब: नहीं, मैं नहीं कह सकता कुछ भी, लेकिन हां, राजस्थान उप-चुनाव के जो नतीजे थे, वो चौंकाने वाले जरूर थे।

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