दिल्ली हज हाउस विवाद:360 गांवों की खाप पंचायत ने कहा- हिंदू बहुल क्षेत्र में हज हाउस स्वीकार नहीं , वक्फ बोर्ड बोला- हज हाउस के साथ सरकार कांवड़ हाउस भी बनाए

नई दिल्ली3 महीने पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी
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दिल्ली में द्वारका के भर्तला गांव में हज हाउस के लिए अलॉट की गई जमीन के विरोध में 360 गांव की खाप पंचायतें उतर आई हैं। खाप पंचायत ने साफ कर दिया है कि हिंदू आबादी के बीच हज हाउस स्वीकार नहीं होगा। खाप पंचायत की मांग को जायज ठहराते हुए दिल्ली भाजपा भी इनके समर्थन में आ गई है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने खाप पंचायत की तरफ से इस पूरे मामले को लेकर आवास एवं शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को ज्ञापन सौंपा है।

उधर, वक्फ बोर्ड ने इसे सियासी एजेंडा करार दिया है। इतना ही नहीं दिल्ली वक्फ बोर्ड के सदस्य हिमाल अख्तर का कहना है कि भले ही खाप पंचायत को हज हाउस स्वीकार न हो, लेकिन हमारे लिए हज में जाने वाले हाजी और कांवड़ उठाने वाले बम भोले एक समान हैं। हम तो कहते हैं कि जगह-जगह कांवड़ हाउस भी बनने चाहिए।

खाप पंचायत में शामिल और 28 गांवों की खाप पंचायत के मुखिया राकेश नंबरदार ने बताया- 'हमने अगस्त में आसपास के सभी गांवों की एक पंचायत की थी। इसमें 10,000 लोग इकट्ठे हुए थे। हमने उस वक्त भी यह मांग रखी थी कि हज हाउस के लिए अलॉट की गई जमीन को रद्द किया जाए, वरना बड़े स्तर पर विरोध के लिए सरकार तैयार रहे, लेकिन दिल्ली सरकार की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता हमारी मदद के लिए सामने आए। हमने इनके माध्यम से केंद्र तक अपनी गुहार लगाई है।'

केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री ने हरदीप सिंह पुरी ने ज्ञापन मिलने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन इस मुद्दे पर फिलहाल कुछ बोलने से मना कर दिया। हालांकि राकेश नंबरदार ने बताया, 'केंद्रीय मंत्री ने हमारी मदद करने का भरोसा दिया है।'

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने क्या कहा?

उधर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा, 'जमीन का अलॉटमेंट बिल्कुल भी उचित तरह से नहीं हुआ है, हिंदू आबादी के बीच में हज हाउस बनाने का कोई तुक नहीं।' उन्होंने कहा, हमने ज्ञापन सौंप दिया है। हमें भरोसा है कि केंद्रीय मंत्री दिल्ली सरकार के इस अनुचित फैसले के खिलाफ जरूर कुछ ठोस कदम उठाएंगे।

वक्फ बोर्ड ने कहा- सियासी लोगों के इशारों पर इसे धर्म का रंग दिया जा रहा है

दिल्ली वक्फ बोर्ड के सदस्य हिमाल अख्तर से हज हाउस की जमीन के विवाद पर बात की गई तो उन्होंने साफ कहा- 'चिंता हिंदू आबादी की नहीं, दरअसल यह चुनावी ध्रुवीकरण का तरीका है। हज हाउस के बनने में भला किसको एतराज होना चाहिए। यह तो व्यवस्था का मसला है। अगर हज हाउस नहीं होगा तो हज करने वाले यात्री जहां तहां रुकेंगे, पूरे राज्य में अव्यवस्था फैलेगी। मेरा तो मशविरा है कि कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाली अव्यवस्था को भी कांवड़ हाउस बनाकर रोका जा सकता है।' वे कहते हैं- कांवड़ ले जाना आस्था का मसला है।

हमें कांवड़ रोकने की जगह उनकी व्यवस्था ऐसी करनी चाहिए कि आम आदमी का जीवन इससे बाधित न हो। हज हाउस भी धर्म से ज्यादा व्यवस्था का मसला है, लेकिन सियासी लोगों के इशारों पर इसे धर्म का रंग दिया जा रहा है।

आखिर क्या है मसला?

जुलाई, साल 2002 में दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने विकास कार्य के नाम पर द्वारका के भरथला गांव की जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन वर्ष 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने DDA की इसी जमीन को लेकर उस पर हज हाउस बनाने की घोषणा कर दी। ग्रामीणों के भारी विरोध की वजह से कांग्रेस की उस समय की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित घोषणा के बाद वहां एक ईंट भी नहीं रखवा पाईं थीं। वह जमीन जस की तस पड़ी है।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने हाल ही में हज हाउस निर्माण के लिए बजट अलॉट किया। जिस पर नाराजगी जताते हुए 'ऑल द्वारका रेजीडेंट फेडरेशन' ने 3 अगस्त 2021 को उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखकर हज हाउस की जमीन के अलॉटमेंट को रद्द करने की मांग की।

लेफ्टिनेंट गवर्नर को लिखी चिट्ठी के मुताबिक द्वारका में इस हज हाउस के निर्माण से वहां सांप्रदायिक साम्प्रदायिक झगड़े बढ़ सकते हैं। इस चिट्ठी में साफ कहा गया है कि अगर हज हाउस बना तो वहां सांप्रदायिक हिंसा बढ़ सकती है। हिंदू आबादी के बीच हज हाउस बनाने का निर्णय बिल्कुल ठीक नहीं।

6 अगस्त को इस मसले को लेकर खाप पंचायत ने विरोध प्रदर्शन किया था। पंचायत ने भर्तला गांव की एक एकड़ जमीन पर हज भवन के निर्माण पर नाराजगी जताई थी। उस वक्त वहां VHP के लोग और भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता भी शामिल थे।

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