आज की पॉजिटिव खबर:मजदूरों को पसीने से सना देख मोनिश को आया 'मिट्टी का AC' बनाने का आइडिया, जानें कैसे काम करता है यह

6 महीने पहलेलेखक: नीरज झा

यदि आप गांव-कस्बों के रहने वाले होंगे तो आपने देखा होगा कि 90 के दशक तक गांव में लोग खपरैल घरों में रहते थे। दीवार लड़की या फूस की बनी होती थी। इस पर मिट्टी का लेप लगा होता था।

खपरैल भी मिट्टी से ही बनता है, जिसे हम टेराकोटा भी कहते हैं। खास बात ये है कि गर्मी के दिनों में इस तरह के घरों में गर्मी नहीं लगती है। हालांकि, अब गांव भी बदल चुका है।

शहरीकरण के बाद से अब ये बातें और पुरानी हो चली हैं। अब हम AC वाले कमरे में रहने के आदी हो गए हैं। इससे हमारी सेहत तो बिगड़ती ही है, साथ में पर्यावरण को भारी नुकसान होता है।

ऐसे में हम यदि आपको कहें कि मिट्टी की AC से इन दोनों तरह के नुकसान से बचा जा सकता है तो कैसा लगेगा…? बिल्कुल सही पढ़ा आपने।

दरअसल, दिल्ली के आर्किटेक्ट मोनिश सिरिपिरायु का बना कूलिंग सिस्टम बिना ज्यादा बिजली और पर्यावरण को नुकसान पहुचाए तापमान को ठंडा करने का काम करता है। मोनिश मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं।

आर्किटेक्चर फर्म 'Ant Studio' के मोनिश सिरिपिरायु ने मिट्टी से बना कूलिंग सिस्टम तैयार किया है।
आर्किटेक्चर फर्म 'Ant Studio' के मोनिश सिरिपिरायु ने मिट्टी से बना कूलिंग सिस्टम तैयार किया है।

होता ये है कि हम AC का इस्तेमाल करते हैं तो उससे घर के अंदर का तापमान तो सामान्य हो जाता है, लेकिन बाहर उतना ही इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ता है।

इन समस्याओं को देखते हुए आर्किटेक्चर फर्म 'Ant Studio' के मोनिश सिरिपिरायु ने मिट्टी से बना कूलिंग सिस्टम तैयार किया है। यह किसी भी बिल्डिंग के भीतर का तामपान सामान्य से 7-8 डिग्री कम कर देता है।

इसके लिए मोनिश ने टेराकोटा यानी मिट्टी से बना खपरैल आकार का मटका और पानी का इस्तेमाल कर ‘मिट्टी का AC’ बनाया है।

मोनिश ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) दिल्ली से ग्रेजुएशन और कैटेलोनिया, स्पेन से रोबोटिक्स एप्लिकेशन की पढ़ाई की है। वो अपना ‘एंट स्टूडियो’ नाम से एक फर्म चला रहे हैं।

मोनिश ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) दिल्ली से ग्रेजुएशन और कैटेलोनिया, स्पेन से रोबोटिक्स एप्लिकेशन की पढ़ाई की है।
मोनिश ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) दिल्ली से ग्रेजुएशन और कैटेलोनिया, स्पेन से रोबोटिक्स एप्लिकेशन की पढ़ाई की है।

जानकर आपको हैरानी होगी कि तापमान को कूल बनाए रखने के लिए इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल भारत, सऊदी अरब सहित दुनिया भर के कई देशों में हो रहा है।

मोनिश बताते हैं, साल 2015 में सबसे पहले एक कूलिंग सिस्टम डिजाइन किया था, जिसके बाद 2 साल तक इसे बनाकर छोड़ दिया, लेकिन 2017 में उनके इस डिजाइन की की काफी तारीफ की गई।

दरअसल, इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (ICAP) ने मोनिश द्वारा बनाए गए इस कूल सिस्टम को पर्यावरण के लिए बेहतर बताया है।

मिट्टी की AC बनाने के पीछे आइडिया को लेकर मोनिश बताते हैं, 2015 में नोएडा में एक फैक्ट्री के लिए काम कर रहा था।

एक बार साइट पर गया तो देखा कि अंदर काम करने वाले लोग गर्मी में काम कर रहे हैं। जिसके बाद ऐस कुछ बनाने के बारे में सोचने लगा, ताकि गर्म हवाओं को ठंडी हवा में बदला जा सके।

इसे अपने घरों, कैफे, रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे बिजली की खपत भी कम होती है।
इसे अपने घरों, कैफे, रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे बिजली की खपत भी कम होती है।

इसके बाद मोनिश ने 800 छोटे-छोटे सिलिंडर के आकार के घड़े बनाए, इसे इंस्टॉल करने पर वहां का तामपान 30% तक घट गया।

मोनिश कहते हैं, यह कूलर और मिट्टी के घड़े का एक मिश्रण है। इससे किसी भी बिल्डिंग के अंदर 30% तक एयर को ठंडा किया जा सकता है।

इसे अपने घरों, कैफे, रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे बिजली की खपत भी कम होती है।

मोनिश नोएडा, दिल्ली में इस प्रोजेक्ट पर लगातार काम कर रहे हैं। अब वो हैदराबाद, बेंगलुरु और आगरा समेत कई शहरों में भी इसके अलग-अलग डिजाइन तैयार कर रहे हैं।

दरअसल, मोनिश बताते हैं, बिजली बचाने के साथ-साथ इसका एक और फायदा है। यह स्थानीय रूप से उपलब्ध है। कम बजट में इसे इंस्टॉल किया जा सकता है। खास बात ये है कि यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। इसमें इस्तेमाल किए जा रहे पानी को हम फिर से इस्तेमाल कर सकते हैं।