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आज की पॉजिटिव खबर:गोविंद एक-एक वार्ड में जाकर मरीजों से मिलते हैं, परिजनों से वीडियो कॉल पर बात कराते हैं; ईरा मुफ्त में संक्रमितों के घर पहुंचा रही हैं खाना

नई दिल्ली2 वर्ष पहले

देश कोरोना के कहर से जूझ रहा है। दिन-ब-दिन मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है। अभी भी ज्यादातर लोगों को ऑक्सीजन और बेड नहीं मिल पा रहा है। कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें वक्त पर भोजन भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में लोग जिंदगी से निराश हो रहे हैं। लोग कोरोना से सहम गए हैं, डर गए हैं। हालांकि इस सब के बीच अलग-अलग शहरों में कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं, जो इस महामारी से ग्रस्त लोगों की जिंदगी बचाने में जुटे हैं। आज की पॉजिटिव खबर में हम ऐसी ही दो कहानियों का जिक्र कर रहे हैं...

पहली कहानी मध्य प्रदेश के रतलाम से : कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों को योग कराते हैं, उन्हें मोटिवेट करते हैं

गोविंद काकानी हर वार्ड में जाकर मरीजों से मिलते हैं, उन्हें योग कराते हैं और उनके अंदर हिम्मत भरने की कोशिश करते हैं।
गोविंद काकानी हर वार्ड में जाकर मरीजों से मिलते हैं, उन्हें योग कराते हैं और उनके अंदर हिम्मत भरने की कोशिश करते हैं।

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के रहने वाले गोविंद काकानी पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर हैं। वे लावारिस पड़े शवों का अंतिम संस्कार करते हैं, सड़कों पर घूमकर मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का इलाज करवाते हैं और उन्हें उनके परिजनों से मिलाने में मदद करते हैं। अब जब देश कोरोना महामारी के दौर से गुजर रहा है तो गोविंद ने एक नई पहल की है। वे अपनी जान की परवाह किए बिना अस्पताल में कोरोना के मरीजों के बीच जाकर, उन्हें मोटिवेट करने का काम कर रहे हैं। उनकी इस पहल से मरीजों को करोना से लड़ाई में मजबूती मिल रही है। रतलाम मेडिकल कॉलेज से एक हजार से ज्यादा मरीज ठीक होकर अपने घर वापस लौट चुके हैं।

अब मोटिवेशन के लिए विदेशों से भी आ रहे कॉल

गोविंद हर दिन शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक मेडिकल कॉलेज के सभी वार्डों में घूम-घूमकर कोरोना के हर एक रोगी से मिलते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं। वे नियमित योग और प्राणयाम कराते हैं। इस दौरान वे वीडियो कॉल के जरिए रोगियों की उनके परिजनों से बात करवाते हैं। ताकि रोगी का मनोबल बना रहे। अब कोविड मरीजों को भी उनके अस्पताल में आने का इंतजार रहता है। अगर उनके आने में देर होती है तो वे इसको लेकर गोविंद से नाराजगी भी जाहिर करते हैं। आलम यह है कि अब गोविंद के पास विदेशों से भी कोविड के मरीज मोटिवेशन के लिए फोन करते हैं।

गोविंद काकानी ने दैनिक भास्कर को बताया कि वर्षों पहले एक मानसिक रोगी सड़क पर मिला था। अस्पताल ले जाकर उसका ट्रीटमेंट कराया और मोटिवेट किया। जिससे वो जल्दी ही ठीक हो गया। बस यहीं से मेरे इस अभियान की शुरुआत हुई। उसके बाद मैंने तय कर लिया कि जो भी खाली वक्त होगा मेरा, वो लोगों की सेवा और उनकी जिंदगियां बचाने में बिताऊंगा। वे कहते हैं कि जब कोरोना काल शुरू हुआ तो पता चला कि मरीज कोरोना से ज्यादा घबराहट के कारण मर रहे हैं। तब डॉक्टर्स से मेरी बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि हम दवा दे रहे हैं, घर वाले दुआ कर रहे हैं, आप उन्हें हौसला और संबल दो। तब से मैंने ये बीड़ा उठाया है।

गोविंद काकानी वीडियो कॉल के माध्यम से मरीजों की उनके परिजनों से बात भी कराते हैं। ताकि वे टेंशन फ्री रहे।
गोविंद काकानी वीडियो कॉल के माध्यम से मरीजों की उनके परिजनों से बात भी कराते हैं। ताकि वे टेंशन फ्री रहे।

डॉक्टर्स भी करते हैं गोविंद के काम की तारीफ

रतलाम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. जितेन्द्र गुप्ता ने बताया कि समाजसेवी गोविंद काकानी शानदार काम कर रहे हैं। इस वक्त कोविड के मरीजों को मोटिवेशन की जरूरत है। वो घर से दूर अकेले हैं, आसपास के माहौल में हो रहीं मौतें उन्हें विचलित कर रही हैं। ऐसे में मरीज को दवा, दुआ के साथ-साथ मोटिवेशन की बहुत जरूरत है। काकानी जी एक-एक बेड पर जाकर मरीज से बात करते हैं, उनकी समस्या समझने की कोशिश करते हैं, उन्हें परिवार जैसा फील कराते हैं। फिर वे हर मरीज की समस्या को कागज पर लिखते हैं और हमसे डिस्कस करते हैं। इसके बाद डॉक्टर्स और नर्स की टीम उसके हिसाब से काम करती है।

दूसरी कहानी दिल्ली से: कोई मरीज भूखा नहीं रहे, इसलिए सोशल मीडिया पर चला रही हैं कैंपेन

जयपुर की रहने वाली ईरा भार्गव सिंघल एक होम शेफ हैं। अभी वे दिल्ली में सेटल हैं। पिछले महीने उन्होंने कोविड पेशेंट्स को फूड प्रोवाइड कराने के लिए सोशल मीडिया पर किचन ऑफ फ्लेवर्स नाम से एक ग्रुप बनाया। इसमें देशभर से करीब 35 लोग वॉलंटियर्स के रूप में जुड़े हैं। इसके जरिए वे और उनकी टीम कोविड पेशेंट्स को मुफ्त में उनके घर तक खाना पहुंचा रही हैं। अभी दिल्ली, मुंबई, लखनऊ सहित देश के 30 से 35 शहरों में उनकी टीम काम कर रही है।

ईरा सिंघल अपने घर में खाना तैयार करती हुई और दूसरी तस्वीर में कोविड पेशेंट के लिए फूड्स की पैकेजिंग की जा रही है।
ईरा सिंघल अपने घर में खाना तैयार करती हुई और दूसरी तस्वीर में कोविड पेशेंट के लिए फूड्स की पैकेजिंग की जा रही है।

ईरा बताती हैं कि हमने सोशल मीडिया और बैनर, पोस्टर्स के जरिए लोकेशन वाइज अपने नंबर्स शेयर कर रखे हैं। जिसे भी फूड की जरूरत होती है, वो कॉल करके अपनी बुकिंग करवा सकता है। हमारी टीम कोशिश करती है कि उस व्यक्ति तक हम सही वक्त पर खाना पहुंचा दें। ईरा खुद के किचन से दिल्ली के कई इलाकों में फूड भेजवा रही हैं। वे दिनभर में दो बार 50-50 पैकेट्स फूड के डिस्ट्रीब्यूट करती हैं। इसके लिए उन्होंने डिलीवरी ब्वॉय रखा है।

इस काम के लिए ईरा किसी से पैसों की मदद नहीं लेती हैं। वे कहती हैं कि अगर कोई राशन की मदद करना चाहता है तो हम उसका स्वागत करते हैं। वे बताती हैं कि हमारे साथ देश के दूसरे हिस्सों से जो लोग जुड़े हैं, उनमें से ज्यादातर लोग फ्री ऑफ कॉस्ट ये काम कर रहे हैं। कुछ लोग इसके लिए बहुत ही कम चार्ज ले रहे हैं ताकि वे लंबे समय तक इस मुहिम को जारी रख सकें। हम इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि जो कोविड पेशेंट फूड की कीमत देने में सक्षम हैं, उन्हीं से पैसे लेते हैं। जो लोग गरीब हैं, उनसे हमारा कोई भी वॉलंटियर चार्ज नहीं लेता है।

अभी दिल्ली, मुंबई, लखनऊ सहित देश के 30 से 35 शहरों में ईरा की टीम काम कर रही है। ये लोग अपने घरों से खाना तैयार कर मरीजों तक पहुंचाते हैं।
अभी दिल्ली, मुंबई, लखनऊ सहित देश के 30 से 35 शहरों में ईरा की टीम काम कर रही है। ये लोग अपने घरों से खाना तैयार कर मरीजों तक पहुंचाते हैं।

ईरा बताती हैं कि पिछले साल मैं खुद भी संक्रमित हो गई थीं। तब मुझे खाने को लेकर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। वे कहती हैं कि कई लोग शहरों में न्यूक्लियर फैमिली के रूप में तो कई लोग अकेले रहते हैं। अगर वे कोविड का शिकार हो जाएं तो उनके लिए खाने की व्यवस्था करना मुश्किल टास्क हो जाता है। कई ऐसे लोग हैं जिनके पास पैसे हैं, लेकिन कोई उनके घर भोजन पहुंचाने को तैयार नहीं होता है। मैंने इन मुश्किलों को फेस किया था। इसलिए इस साल मैंने इस काम की शुरुआत की ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की हम मदद कर सकें।

डॉक्टरों से चर्चा के बाद तैयार किया मेन्यू

वे बताती हैं कि कोरोना संक्रमित लोगों को किस तरह खाने का ध्यान रखना चाहिए और उन्हें क्या खाना चाहिए, इसकी जानकारी के लिए हमने कुछ डॉक्टरों से बात की है। इसके बाद खाने का एक मेन्यू तैयार किया है। जिसे हमने अपने सभी वॉलंटियर्स के साथ शेयर कर रखा है। हम चावल, सादी रोटी, दाल, सब्जी, थोड़ा ग्रीन सलाद खाने में दे रहे हैं। हम इसे एक पैकेट में भरकर कोरोना संक्रमित मरीजों के घर डिलीवरी करते हैं। दिन में दो बार हम उनके घर खाना पहुंचाते हैं।

इनपुट: राजेश गाबा

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