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सिडनी की सड़कों पर दिल्ली वाली काली-पीली टैक्सी:पुर्जा-पुर्जा जोड़कर तीन साल में तैयार की टैक्सी, घुमाने के अलावा फोटोबूथ और शूटिंग में किया जाता है इसका इस्तेमाल

9 दिन पहलेलेखक: सुनीता सिंह

आपने लोगों में कई तरह की दीवानगी देखी होगी, पर क्या किसी की टैक्सी के लिए दीवानगी देखी है? अगर नहीं, तो आइये मिलते हैं सिडनी के जेमी से, जिनकी भारत और भारत में चलने वाली टैक्सी के लगाव की वजह से सिडनी में अलग पहचान बन गई है।

ऑस्ट्रेलिया के जेमी ने एक कार शो में दिल्ली वाली काली - पीली टैक्सी देखी और उन्हें वो बहुत पसंद आई। इस पसंद को सिडनी के लोगों के साथ साझा करने के लिए जेमी भारत की टैक्सी ऑस्ट्रेलिया ले जाना चाहते थे, लेकिन कानून इसकी इजाजत नहीं दे रहा था।

कई मुश्किलों के बावजूद जेमी भारत की रंग-बिरंगी टैक्सी न सिर्फ सिडनी ले जाने में कामयाब रहे, बल्कि वो इस टैक्सी को सिडनी की सड़कों पर चला भी रहे हैं। जेमी की टैक्सी को सड़कों पर देख लोग रुक जाते हैं, कई बार मुड़ मुड़कर देखते हैं और ऐसी ही टैक्सी लेने की चाहत रखते हैं।

आइये जानते हैं जेमी और जेमी की इस दीवानगी को थोड़ा और करीब से ...

पहली बार BBC की ‘टॉप गियर’ सीरीज में दिल्ली की टैक्सी को देखा

दुल्हन की तरह सजी-धजी टैक्सी को सिडनी की सड़कों पर ड्राइव करते जेमी।
दुल्हन की तरह सजी-धजी टैक्सी को सिडनी की सड़कों पर ड्राइव करते जेमी।

40 वर्षीय जेमी, मूल रूप से ब्रिटेन से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन कुछ साल पहले ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आकर बस गए। जेमी पेशे से एक विजुअल कम्युनिकेशन कंसल्टेंट हैं और टैक्सी चलाना उनका पैशन है। उनके पास पहले से क्लासिक ब्लैक लंदन कैब है, जो लंदन में बहुत पॉपुलर है। इसके अलावा उनके पास दो और टैक्सी भी हैं। जेमी बताते हैं की एक बार वो BBC की सीरीज ‘टॉप गियर’ देख रहे थे। इसमें दुनिया भर की अलग-अलग टैक्सी के बारे में बताया जा रहा था। जेमी कहते हैं, “शो में लंदन, न्यूयॉर्क, मेक्सिको और भारत सहित कई देशों की टैक्सी थीं, जिसमें सबसे रंग बिरंगी और सजी-धजी टैक्सी भारत की थी। मैंने ऐसी टैक्सी पहले कभी नहीं देखी थी, मुझे लगा इस तरह की टैक्सी को ऑस्ट्रेलिया लाना चाहिए।”

टैक्सी को पूरी तरह से तैयार होने में तीन साल लग गए

भारत की टैक्सी को जेमी ऑस्ट्रेलिया ले जाना तो चाहते थे, लेकिन कानून की वजह से इस काम में परेशानी आ रही थी। टैक्सी के लिए भारत में बनने वाली एम्बेसेडर कार चाहिए थी, जिसकी मैन्युफैक्चरिंग 2014 में ही बंद हो गई थी।

इसके बाद उन्होंने दूसरा रास्ता अपनाया। कई शहरों में पता करने के बाद अमृतसर में हिंदुस्तान लैंडमास्टर के कई पार्ट्स मिले। कुछ पार्ट्स ऑस्ट्रेलिया की कार ‘मॉरिस ऑक्सफोर्ड’ के लिए गए, जो एम्बेसेडर जैसी ही दिखती है।

इन दोनों कार के पुर्जों को जोड़कर नई कार बनाई गई। इस पूरी प्रॉसेस में करीब तीन साल लग गए। तीन साल बाद ऑस्ट्रेलिया में जेमी दिल्ली वाली काली-पीली टैक्सी के मालिक बन गए। जेमी बताते हैं इसको भारत की टैक्सी जैसा ही तैयार किया गया है। टैक्सी का रंग काला-पीला है, इसके अलावा टैक्सी की छत प्लास्टिक के फूलों से सजी है। टैक्सी के डैशबोर्ड पर भगवान गणेश और गुरुनानक की तस्वीर लगी है। यहां तक की कार में प्लास्टिक की नींबू-मिर्ची भी लटकाई गई है।

जेमी की टैक्सी को सिडनी की सड़कों पर लोग मुड़-मुड़ कर देखते हैं

सिडनी की सड़कों पर जेमी की टैक्सी को लेकर लोगों में क्रेज है।
सिडनी की सड़कों पर जेमी की टैक्सी को लेकर लोगों में क्रेज है।

जेमी दिसंबर 2020 से दिल्ली वाली टैक्सी को सिडनी में चला रहे हैं। जेमी की टैक्सी सिडनी के लोगों की खास पसंद भी बनती जा रही है। टैक्सी को देख कई बार लोग सड़कों पर रुक जाते हैं, तो कई बार मुड़-मुड़ कर देखते हैं। जेमी के ज्यादातर पैसेंजर एक बार टैक्सी में सफर करने के बाद दोबारा सफर करना चाहते हैं।

जेमी बताते हैं, “एक बार उनकी टैक्सी सड़क के किनारे खराब हो गई थी, वे सड़क पर ही उसे ठीक करने की कोशिश कर रहे थे। इतनी देर में वहां एक बुजुर्ग महिला भागते हुए आईं और टैक्सी के बारे में पूछने लगीं, उन्होंने बताया कि इस तरह की टैक्सी को उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में देखा है।”

भारत की इस रंग बिरंगी टैक्सी की वजह से सिडनी की सड़कों पर जेमी की एक अलग पहचान बन गई है। दिल्ली वाली टैक्सी ने न सिर्फ जेमी की लोकप्रियता बढ़ाई है बल्कि टैक्सी की हाई डिमांड की वजह से उनकी अच्छी इनकम भी हो रही है।

वेबसाइट से होती है टैक्सी की बुकिंग

जेमी की टैक्सी को फोटोबूथ की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है। टैक्सी में वेडिंग शूट कराते कपल।
जेमी की टैक्सी को फोटोबूथ की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है। टैक्सी में वेडिंग शूट कराते कपल।

जेमी की टैक्सी की डिमांड दिसंबर से लेकर अब तक काफी बढ़ गई है। डिमांड को देखते हुए जेमी ने टैक्सी बुकिंग के लिए ‘बॉलीवुड कार’ नाम की एक वेबसाइट बनाई है, जिसपर बुकिंग से जुड़ी सभी जानकारियां दी हुई हैं। पैसेंजर्स उन्हें यही से कॉन्टेक्ट कर बुकिंग करते हैं।

वैसे तो जेमी का पेशा विजुअल कम्युनिकेशन कंसल्टेंट का है, लेकिन अपने अनूठे शौक के कारण वो टैक्सी भी चलाते हैं। इसकी वजह से उनकी अच्छी कमाई तो होती ही है, साथ में उन्हें लोगों से जुड़ने का मौका भी मिलता है ।

जेमी बताते हैं पहली बार उनकी टैक्सी को एक क्रिसमस पार्टी में बुलाया गया था और वहां कई लोगों ने पहली बार भारत की टैक्सी देखी। जेमी को उनके शौक के लिए लोग उनकी काफी सराहना करते हैं। इसके अलावा कार को बतौर फोटो बूथ भी इस्तेमाल किया गया है। जेमी की टैक्सी के साथ फोटो लेने के लिए लोग उन्हें पैसे देते हैं। जेमी कहते हैं, “मेरी टैक्सी का क्रेज सिडनी के लोगों में बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि इसे साउथ ऑस्ट्रेलिया की एक शूटिंग में भी इस्तेमाल किया गया है।”

“मैंने सिडनी में ही इंडियन रेस्टोरेंट, ‘मसाला थ्योरी’ के साथ टाई अप किया है। पहले मैं पैसेंजर्स को सिडनी के बेहतरीन जगहों पर घूमाता हूं और अंत में मसाला थ्योरी ले जाता हूं। यहां लोग भारतीय टैक्सी में घूमने के साथ भारत के खाने का भी लुत्फ उठाते हैं।”

जेमी को पसंद है भारतीय कल्चर और खानपान

जेमी का बचपन ब्रिटेन में गुजरा है, जिसकी वजह से बचपन से ही जेमी ने भारत के कई किस्से सुने हैं। उन्हें भारत का खाना भी बहुत पसंद है। भारत से लगाव के कारण ही जेमी अपना 40वां जन्मदिन मनाने भारत आए थे। इस दौरान वे मुंबई, आगरा, दार्जिलिंग, ऋषिकेश और अमृतसर सहित कई और शहरों में घूमने गए थे।

इंडिया की ट्रिप के दौरान ऋषिकेश में साधु बाबा के साथ जेमी।
इंडिया की ट्रिप के दौरान ऋषिकेश में साधु बाबा के साथ जेमी।

जेमी कहते हैं, “मुझे भारत से बहुत प्यार है, भारत के खाने का स्वाद दुनिया में कहीं नहीं मिल सकता है। मुझे यहां का चिकन टिक्का बहुत पसंद है। यहां के लोग और यहां का कल्चर पूरी दुनिया में अनूठा है।”

गिद्धों को बचाने की मुहिम भी चला रहे जेमी

टैक्सी के जरिए जेमी विलुप्त हो रहे गिद्धों के लिए फंड भी इकट्ठा कर रहे हैं।
टैक्सी के जरिए जेमी विलुप्त हो रहे गिद्धों के लिए फंड भी इकट्ठा कर रहे हैं।

जेमी जब भारत आये थे, तब वो मुंबई में पारसियों की कब्रगाह ‘टावर ऑफ साइलेंस’ भी गए थे। जहां उन्हें भारत में विलुप्त हो रहे गिद्धों के बारे में पता चला। ऑस्ट्रेलिया वापस जाने के बाद वो गिद्धों के लिए फंड एकत्रित करने का काम कर रहे हैं। जेमी टैक्सी में बैठने वाले पैसेंजर्स को गिद्धों के बारे में बताते हैं, लोगों को आर्थिक मदद के लिए भी प्रोत्साहित करते हैं। जेमी अब तक हजारों डॉलर्स ‘सेव एशिया वल्चर’ ग्रुप को डोनेट कर चुके हैं।

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