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‘पिज्जा किंग’ डॉमिनोज की कहानी:‘30 मिनट में डिलीवरी नहीं तो फ्री’ वाली स्ट्रैटजी से 78% मार्केट पर कब्जा; पिज्जा हट, पापा जोन्स जैसे ब्रांड्स पड़े फीके

3 महीने पहले

‘द पिज्जा डिलीवरी एक्सपर्ट’ ये है डॉमिनोज की पंचलाइन। इसी पंचलाइन में इसकी कामयाबी की कहानी भी छुपी है। 15 साल पहले पिज्जा हट की मार्केट की बादशाहत को डॉमिनोज ने छीन लिया। ‘आधे घंटे के अंदर डिलीवरी नहीं तो पिज्जा फ्री’ की स्ट्रैटजी लोगों के दिमाग में घर कर गई। आज डॉमिनोज पिज्जा भारत के मार्केट में राज कर रहा है। इसका मार्केट शेयर 78% है। आज की तारीख में 282 शहरों में अपनी पहुंच बना चुके इस ब्रांड की बिक्री बाकी पिज्जा चेन के मुकाबले 3 गुना है।

1996 में पहला आउटलेट खोला

भारतीय मार्केट को दुनियाभर की कंपनियों के लिए खोले जाने के बाद डॉमिनोज ने कोका-कोला, मैकडॉनल्ड्स और पिज्जा हट जैसी अमेरिकी कंपनियों के साथ भारत में एंट्री की थी। डॉमिनोज ने भारतीय मार्केट में 1996 में अपना पहला आउटलेट खोला था। डॉमिनोज की शुरुआत इतनी आसान नहीं थी और भारतीयों के स्वाद के हिसाब से खुद को ढालने में उसे बहुत मेहनत करनी पड़ी। लेकिन भारतीय स्वाद का फॉर्मूला हाथ आने के बाद डॉमिनोज बहुत तेजी से देश भर में फैला। फिलहाल देश के 282 शहरों में डॉमिनोज के 1325 आउटलेट हैं और अब भी कई नए आउटलेट खुल रहे हैं। वहीं डॉमिनोज से एक साल पहले भारत में एंट्री मारने वाले पिज्जा हट को पिछले साल ही 325 आउटलेट बंद करने पड़े हैं। अब इसके कुल 430 आउटलेट ही हैं। जो डॉमिनोज के मुकाबले एक-तिहाई हैं।

होम डिलीवरी ने डॉमिनोज को रखा सबसे आगे

पिज्जा हट ने डाइन-इन यानी आउटलेट में आकर खाने की सुविधा पर ज्यादा जोर दिया, इससे उसे नुकसान हुआ। बड़े शहरों में लोग आसानी से घर पर खाना मंगाकर खाना, ज्यादा पसंद करने लगे हैं। लोगों की इस जरूरत को पूरा करने में डॉमिनोज आगे रहा। डॉमिनोज ने ग्राहकों के बीच 30 मिनट में डिलीवरी न होने पर फ्री पिज्जा देने का वादा करके अपनी पहचान बनाई। कई शहरों में तो इसने 20 मिनट में डिलीवरी का ट्रायल भी किया है और बहुत से शहरों में यह पूरी रात डिलीवरी करता है।

इतना ही नहीं हाइपर लोकल होने के क्रम में डॉमिनोज अपना आउटलेट खोलने से पहले शहर के व्यस्त इलाकों का अध्ययन भी करता है। साथ ही छोटे शहरों में इसके आउटलेट में बैठने की ज्यादा जगह होती है क्योंकि यहां लोग पूरे परिवार के साथ खाने के लिए बाहर जाना पसंद करते हैं।

1 डॉलर से कम के पिज्जा ने बनाया पॉपुलर

सबसे बड़ी बात कि डॉमिनोज के पिज्जा का दाम अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले बहुत कम है। आज भी डॉमिनोज का सबसे सस्ता पिज्जा करीब 1 डॉलर में मिल जाता है। एक समय इसका रेट सिर्फ 44 रुपए था। इस सस्ते पिज्जा के लिए डॉमिनोज ने 'पिज्जा मेनिया' नाम का एक ऑफर भी निकाला, जो बेहद सफल रहा। एक ओर इसने आम लोगों के बीच पिज्जा को पॉपुलर बनाना, दूसरी ओर इसने डॉमिनोज की जड़ें भारत में और गहरी करने में भी मदद की।

दक्षिण भारतीयों के लिए लॉन्च किया 'बनाना पिज्जा'

डॉमिनोज की कोशिश होती है कि वो ऐसे पिज्जा बनाए जो आसानी से सभी जगहों पर बेचे जा सकें। भारत में चिकन सॉसेज और वेजी जैसे पिज्जा भी इसके आउटलेट पर मिलते हैं। भारत में पिज्जा बेचने के लिए इसने स्पेशल प्रयोग भी किए। इसके मेन्यू में चिकन टिक्का पिज्जा, तंदूरी पनीर पिज्जा और रेड पेपरिका पिज्जा भी है। भारत में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला मांस चिकन है इसलिए डॉमिनोज के मेन्यू में 6 तरीके के पिज्जा ऐसे हैं, जिनमें चिकन का इस्तेमाल होता है। डॉमिनोज ने हाइपर लोकल होने की कोशिश भी की। दक्षिण भारत के लोगों का केले के लिए प्यार देखते हुए 2014 में डॉमिनोज ने दक्षिण भारत के लिए स्पाइसी बनाना पिज्जा भी लॉन्च किया।

मोबाइल इंटरनेट ने दिया डॉमिनोज का साथ

डॉमिनोज पिज्जा का भारत में कारोबार संभालने वाली जुबिलांट फूडवर्क्स अपनी वेबसाइट पर दावा करती है कि वह भारत में राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन और मोबाइल ऐप के जरिए ऑर्डर की सुविधा देने वाली पहली कंपनी थी। साल 2020 तक डॉमिनोज पिज्जा ऐप को भारत में 3 करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके थे। एप्पल के ऐप आउटलेट पर भी डॉमिनोज पिज्जा ऐप की रैंकिंग जोमैटो और स्विगी जैसे फूड एग्रीगेटर के बाद तीसरी है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत में लैपटॉप और डेस्कटॉप के बजाय मोबाइल पर इंटरनेट यूज करने का अधिक चलन है, ऐसे में डॉमिनोज को सबसे पहले मोबाइल ऐप लॉन्च करने से फायदा हुआ। साल 2013 में डॉमिनोज को मिलने वाले कुल ऑर्डर के सिर्फ 17% ऑनलाइन होते थे, 2019 तक यह आंकड़ा बढ़कर 75% हो गया था।

डॉमिनोज ने समझी मिलेनियल्स की जरूरतें

भारत में 1980 के बाद पैदा हुए लोगों यानी मिलेनियल्स कुल जनसंख्या का 2/3 हैं। डॉमिनोज को इनसे बहुत फायदा मिला। स्टडी बताती है कि मिलेनियल्स किसी अन्य आयुवर्ग की अपेक्षा रेस्टोरेंट में खाना, टेक्नोलॉजी का यूज करना, यात्राएं करना और नए तरह के खाने को टेस्ट करना ज्यादा पसंद करते हैं। ये लोग रेस्टोरेंट में खाने के लिए किसी और एंटरटेनमेंट के मुकाबले तीन गुना ज्यादा पैसे खर्च करते हैं।

स्टडी के मुताबिक मिलेनियल्स अपने कुल खाने के बजट का 10% रेस्टोरेंट में खाने पर खर्च करते हैं। जबकि 1965 से 1980 के बीच पैदा हुए लोग, जिन्हें जेनरेशन X कहा जाता है, वे अपने कुल खाने के बजट का मात्र 3% ही रेस्टोरेंट में खाने पर खर्च करते हैं। इसलिए जैसे-जैसे भारत में मिलेनियल्स के बीच पिज्जा की पॉपुलैरिटी बढ़ी, वैसे-वैसे डॉमिनोज का मार्केट भी भारत में बढ़ता गया।

अमेरिका के बाद डॉमिनोज का सबसे बड़ा मार्केट भारत

2019 के अंत तक दुनियाभर में भारत, अमेरिका के बाद डॉमिनोज का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन चुका था। हालांकि ऐसा पिज्जा हट की गलतियों की वजह से हुआ, सच सिर्फ यही नहीं है। एक रिसर्च कंपनी फैक्टसेट के मुताबिक जुबिलांट फूडवर्क्स ने 2018 में 3.775 हजार करोड़ का कारोबार किया था। जो 2017 से 18% ज्यादा था। साल 2005 से 2018 के बीच एक साल छोड़कर बाकी 13 सालों में जुबिलांट फूडवर्क्स की बिक्री में 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी।

जुबिलांट फूडवर्क्स भारत में डंकिन डोनट्स और हॉन्ग किचन नाम की फ्रेंचाइजी भी चलाता है, लेकिन इसकी कुल बिक्री में डॉमिनोज पिज्जा की बिक्री का हिस्सा 78% है।

डॉमिनोज ने कस्बे और गांवों में किया विस्तार

भारत में डॉमिनोज के सफल रहने की एक वजह यह भी रही कि इसने सिर्फ बड़े शहरों पर ही अपना फोकस नहीं किया बल्कि छोटे-छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों की ओर भी विस्तार किया। भारत के बड़े आकार और सांस्कृतिक विविधता के चलते किसी फूड चेन का पूरे भारत में फैलना चुनौतीपूर्ण काम है, लेकिन डॉमिनोज ने ऐसा कर दिखाया।

अमेरिका में डॉमिनोज ने पिज्जा वॉर में जीत अपनी टेक्नोलॉजी और तेज डिलीवरी के दम पर जीती थी, भारत में भी उसकी रणनीति बहुत अलग नहीं रही। चीन के बाद भारत में ही सबसे ज्यादा इंटरनेट यूजर्स हैं और अब भी यह संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां बड़ी संख्या में ऐप यूजर्स भी हैं।

कोरोना काल में भी डॉमिनोज ने मारी बाजी

पिछले साल कोरोना वायरस के चलते किए गए 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन के दौरान डॉमिनोज ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। इस दौरान आउटलेट बंद करने के दौरान डॉमिनोज इंडिया ने जीरो कॉन्टैक्ट डिलीवरी और जीरो कॉन्टेक्ट टेकअवे की लॉन्चिंग की। इसके अलावा हर चौथे घंटे आउटलेट के अंदर सैनिटाइजेशन और हर घंटे कर्मचारियों को 20 मिनट के लिए हाथ धोना होगा, जैसे नियमों के साथ अपने कर्मचारियों और उनके संपर्क में आने वाले खाने और ग्राहकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की। ऐसा ही पिज्जा हट ने भी किया, लेकिन आउटलेट ज्यादा होने और दाम कम होने के चलते डॉमिनोज काे ज्यादा फायदा मिला।

500 शहरों में आउटलेट खोलने की क्षमता रखता है डॉमिनोज

भारत में डॉमिनोज का कारोबार बढ़ने की अभी बहुत संभावना है। यूरोमॉनीटर इंटरनेशनल के सीनियर एनालिस्ट विष्णु वर्धन कहते हैं, 'भारत में अभी भी बहुत संभावनाएं हैं क्योंकि इसकी जनसंख्या बहुत बड़ी है।' रिसर्चर डॉ. स्वप्ना प्रधान के मुताबिक डॉमिनोज की क्षमता भारत में 500 शहरों तक अपना विस्तार करने की है।

वहीं 2017 तक पिज्जा हट के देश में 350 आउटलेट थे। पिज्जा हट का प्लान था कि हर साल 70 आउटलेट खोलते हुए वह 2022 तक देशभर में अपने 350 आउटलेट और खोलेगा। लेकिन डॉमिनोज से मिली कड़ी टक्कर के बाद अब तक पिज्जा हट केवल 80 आउटलेट खोल सका है और 2022 आने में एक साल से भी कम समय बचा है।

आसानी से प्लेस होने वाला ऑर्डर और तेज डिलीवरी है फॉर्मूला

डॉमिनोज के भारत में 6-7 बड़े प्रतिद्वंद्वियों के अलावा कई छोटे प्रतिद्वंद्वी भी हैं। ये हैं अलग-अलग शहरों के छोटे पिज्जा निर्माता और रेस्टोरेंट। अब लगभग हर ठीक-ठाक रेस्टोरेंट में पिज्जा मिलने लगा है, लेकिन कोई भारतीय पिज्जा चेन अभी इतनी बड़ी नहीं है कि राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी पिज्जा निर्माताओं को टक्कर दे सके।

वहीं डॉमिनोज और पिज्जा हट के किसी साधारण पिज्जा में नाममात्र का अंतर होता है, फिर भी पिज्जा हट ऐसा कमाल नहीं कर सकी। अमेरिकी कंपनी पापा जोन्स जो पिज्जा हट और डॉमिनोज के डेढ़ दशक बाद भारतीय बाजार में आई थी, वह 2017 में अपने 66 आउटलेट बंद कर भारत में अपना कारोबार बंद करके भी जा चुकी है। कामयाबी हासिल करने के लिए डॉमिनोज का पिज्जा को भारतीय स्वाद के हिसाब से ढालना ही काफी नहीं था। इसका भारत में भी सक्सेज का राज वही रहा, जो अमेरिका में था। यानी, आसानी से प्लेस होने वाला ऑर्डर और तेज डिलीवरी।

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