करिअर फंडासिख धर्म में हैं लाइफ की प्रॉबलम्स के 6 सॉल्युशन:समस्या से भागे नहीं, बल्कि लड़ें... सादगी बर्बादी से बचाती है

12 दिन पहले

देह सिवा बरु मोहि इहै सुभ करमन ते कबहूं न टरों। न डरों अरि सो जब जाइ लरों निसचै करि अपुनी जीत करों ॥

अरु सिख हों आपने ही मन कौ इह लालच हउ गुन तउ उचरों। जब आव की अउध निदान बनै अति ही रन मै तब जूझ मरों ॥

- गुरु गोविन्द सिंह द्वारा रचित दसम ग्रंथ के चण्डी चरितर में स्थित शबद

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सिखों की फाइटिंग और विनिंग स्पिरिट

यहां गुरु गोविंदसिंह जी ये कहना चाहते हैं कि हे शिवा (परम् पिता परमात्मा)! मुझे यह वर दें कि मैं शुभ कर्मों को करने से कभी भी पीछे न हटूं। जब मैं युद्ध करने जाऊं तो शत्रु से न डरूं और युद्ध में अपनी जीत पक्की करूं। और मैं अपने मन को यह सिखा सकूं कि वह इस बात का लालच करे कि आपके गुणों का बखान करता रहूं। जब अन्तिम समय आय तब मैं रणक्षेत्र में युद्ध करते हुए मरूं।

जीवन में इस प्रकार की 'फाइटिंग एन्ड विनिंग स्पिरिट' देने वाले सिख धर्म की स्थापना श्री गुरु नानक देव जी – जो दस गुरुओं में पहले थे – ने की थी।

क्या आप फंसे हुए हैं - समाधान है

क्या आप जीवन में नकरात्मता से परेशान हैं? क्या आपको बार-बार असफलता के ख्याल परेशान करते हैं? क्या आप दूसरों की सफलता को देख कर जलते हैं? क्या आप के मन में किसी के लिए कोई 'हार्ड फीलिंग' या घृणा है? क्या आप छोटी-छोटी बातों में भी बेईमानी करते हैं?

श्री गुरु नानक देव जी कहते हैं कि पांच बुराईयां हैं जो किसी व्यक्ति के अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते को अवरुद्ध करती हैं – अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और वासना।

उनका दावा है कि इन बुराइयों से पीड़ित व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी खुश नहीं रह पाएगा।

आइए देखते हैं किस प्रकार सिख धर्म की शिक्षाएं आपके मन को शांत कर सफलता प्राप्त करने में आपकी मदद करती है।

सिख धर्म की 6 सीखें

1) ईमानदारी: मेरा मानना है यह सिख धर्म की सबसे बड़ी सीख है, और इसका प्रमाण हमारे समाज में सिखों पर लोगो का भरोसा देख कर ही हो जाता है।

व्यक्ति का ईमानदार होना सफलता की सबसे आवश्यक शर्त है, भ्रष्टाचार से कमाया गया कुछ भी लंबे समय तक नहीं टिकता, और जीवन में कभी न कभी इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

सबसे बड़ा आनंद या खुशी तभी मिल सकती है जब हम पूरी ईमानदारी और सच्चाई से जिएं।

2) संतोष: सिख मानते हैं कि क्योंकि सब कुछ भगवान की इच्छा है, उन्हें वाहेगुरु द्वारा दिए गए जीवन से संतुष्ट होना चाहिए।

उनका मानना है कि उन्हें वाहेगुरु पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न कि भौतिक संपत्ति की इच्छा पर।

उनका मानना है कि संतोष से खुशी मिलती है। सिक्खों के लिए जीवन केवल अपने और अपने लाभ के बारे में सोचने से कहीं अधिक है।

सही भी है, आप जीवन में केवल इस एक गुण को विकसित करके अपार खुशी हासिल कर सकते हैं, क्योंकि फिर आपको 'मजबूरी में कार्य' करने की आवश्यकता नहीं होती, और आप वही काम कर सकते हैं, जो आप वास्तव में चाहते हैं, वहीं रह सकते हैं जहां आप रहना चाहते हैं।

यहां संतोष का अर्थ 'मेहनत नहीं करना’ नहीं किन्तु अधिक सार्थक चीजों के लिए मेहनत करना है।

3) एकता: सिख धर्म में सभी दैनिक प्रार्थनाएं इन पंक्तियों के साथ समाप्त होती हैं - ‘नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला’, जिसका अर्थ है सभी के लिए समृद्धि।

सिख धर्म व्यक्तिवाद के ऊपर पर सब के एक साथ मिलकर चलने को प्राथमिकता देता है। यह पश्चिम से आये मॉडर्न मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स से थोड़ा अलग है लेकिन सही है।

गुरु नानक देव जी ने विश्व बंधुत्व का संदेश दिया। गुरु नानक देव जी द्वारा लिखित गुरबाणी में सार्वभौमिक भाईचारा एक मजबूत विषय है। उद्यमियों के लिए यह जरूरी है कि वे सभी की समृद्धि को ध्यान में रखें। उन्हें अपने निर्णयों के सामाजिक प्रभाव के बारे में भी सोचना चाहिए।

4) जुझारूपन: सिख धर्म हमें अपनी समस्याओं से दूर भागना नहीं बल्कि उनसे जूझना सिखाता है। जीवन में आने वाली चुनौतियों के सामने डटे रहना है। अधिकांश उद्यमियों के लिए, यह एक उपयोगी उपयोग विचार है खास-तौर पर 'स्टार्ट-अप' शुरू करने वालों के लिए।

5) सरलता: जीवन में सरलता ही सब कुछ है। जिन लोगों को जल्दी सफलता मिल जाती है, उन्हें भी यह बात याद रखनी चाहिए। बेवजह की लाइमलाइट और रेड कार्पेट से दूर हो जाना ठीक है।

सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक है जमीन से जुड़े रहना। हमने कई ऐसे लोगों और व्यवसायों को देखा हैं जहां शुरुआती सफलता के बावजूद वे असफल हुए।

सादगी बर्बादी से बचाती है, अर्थव्यवस्था सिखाती है, लालच, भय, साथियों के दबाव और पहचान की झूठी भावना से बचाती है। सरलता से उदारता और साझेदारी बढ़ती है।

6) जीवन में अपना उद्देश्य खोजें: गुरु नानक देव जी के अनुसार, इस दुनिया में हर किसी के जन्म लेने का एक कारण है। जीवन में एक उद्देश्य होना खुशी के मूलभूत कारकों में से एक है।

इसके बिना, आपका जीवन कम केंद्रित, कम कुशल और आप अक्सर बेचैन और तनावपूर्ण रहेगा क्योंकि आप अपने द्वारा की जाने वाली चीजों के साथ संरेखित महसूस नहीं करते हैं। सिख धर्म हमें यह भी शिक्षा देता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का उद्देश्य स्वयं खोजना होगा।

इसके अलावा करुणा, अत्याचार के आगे न झुकना, जीवन में संगीत/कीर्तन का महत्व, महिलाओं का सम्मान करना और जाति विभाजन से दूर रहना कुछ और शिक्षाएं हैं जो सिख धर्म से जीवन में सफलता और शांति के लिए ली जा सकती हैं।

तो आज का संडे मोटिवेशनल करिअर फंडा है कि सर्वधर्म समभाव रखते हुए, हम भले की किसी भी धर्म को मानें, किसी और धर्म की अच्छी बातों को ग्रहण करने से जीवन में भला ही होगा।

कर के दिखाएंगे!

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