आज की पॉजिटिव खबर:पारंपरिक खेती छोड़ दो साल पहले ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू की, आज एक सीजन में 3.5 लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे

भावनगर2 वर्ष पहले

ड्रैगन फ्रूट एक मेडिसिनल प्लांट है। यह इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों से इसकी डिमांड बढ़ी है। खास करके कोविड संक्रमण के बाद से काफी संख्या में लोग इसके प्रोडक्शन के फील्ड में हाथ आजमा रहे हैं। गुजरात के भावनगर के रहने वाले रमेश मकवाना ने दो साल पहले पारंपरिक खेती छोड़कर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की थी। आज वे करीब 2.5 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। उनके पास तीन तरह की वैरायटी हैं। इसकी सप्लाई वे देशभर में कर रहे हैं। इससे इस साल 3.5 लाख से ज्यादा का मुनाफा उन्होंने हासिल किया है।

सोशल मीडिया पर मिली थी जानकारी
रमेश एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वे पहले से पारंपरिक खेती करते आ रहे हैं। हालांकि उसमें कुछ खास आमदनी नहीं होती थी। मुश्किल से परिवार का खर्च निकल पाता था। दो साल पहले उन्हें सोशल मीडिया पर ड्रैगन फ्रूट के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने इसके बारे में और अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश की। यूट्यूब पर इससे रिलेटेड कई वीडियो देखे। कुछ दिनों बाद किसी परिचित से उन्हें पता चला कि जामनगर में इसकी अच्छी खेती होती है। वहां इसके पौधे भी मिल जाएंगे।

रमेश ने करीब 2.5 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती की है। उनके पास 700 ड्रैगन फ्रूट के प्लांट हैं।
रमेश ने करीब 2.5 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती की है। उनके पास 700 ड्रैगन फ्रूट के प्लांट हैं।

इसके बाद रमेश जामनगर गए। वहां के किसानों से मिले और इसकी खेती की प्रोसेस को समझा। फिर वहां से 48 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से 700 प्लांट लाए। रमेश कहते हैं कि मेरे पास खेती की करीब 6 एकड़ जमीन है। इसमें से 2.5 एकड़ जमीन पर मैंने ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू किया। क्योंकि मन में डर भी था कि फसल सही नहीं हुई तो जमीन का नुकसान हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले ही साल अच्छी फसल हुई। करीब 15 महीने बाद इससे फ्रूट निकलने लगे।

गुजरात के बाहर भी करते हैं मार्केटिंग
रमेश बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती के करीब 15 महीने बाद फल निकलने लगता है। हालांकि प्रोडक्शन बहुत ज्यादा नहीं होता है। क्योंकि प्लांट अभी पूरी तरह से मैच्योर नहीं हुए होते हैं। इस साल पहली बार मेरे खेत से फ्रूट निकलना शुरू हुए तो लोकल मार्केट के साथ ही बाहर से भी लोग खरीदारी के लिए आए। एक फ्रूट की कीमत 150-250 रुपए के बीच होती है। फिलहाल मैं सोशल मीडिया के जरिए राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में इसकी मार्केटिंग कर रहा हूं। इस सीजन में करीब 7.5 लाख का बिजनेस मैंने किया है। यानी पहले ही साल 3.5 लाख का सीधा मुनाफा मुझे हुआ है। जो कि पारंपरिक खेती में संभव नहीं हो पाता था।

इन पौधों को लगाने के लिए सीमेंट के खंभों की जरूरत होती है, जैसा कि फोटो में दिख रहा है।
इन पौधों को लगाने के लिए सीमेंट के खंभों की जरूरत होती है, जैसा कि फोटो में दिख रहा है।

रमेश फिलहाल तीन तरह के ड्रैगन फ्रूट उगा रहे हैं। इसमें गुलाबी, सफेद और लाल रंग के प्लांट शामिल हैं। हर प्लांट की खूबसूरती अपने आप में खास होती है। वे कहते हैं कि इसकी खेती में बिजनेस का अच्छा स्कोप है। भावनगर जिले के अवनिया, तलजा, दिहोर, ट्रैपज, सीहोर और पलिताना गांवों में ड्रैगन फ्रूट की खेती की जा रही है। उनके मुताबिक पहले दो से तीन साल ज्यादा कमाई नहीं होती है, लेकिन एक बार जब प्लांट पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं तो प्रोडक्शन अच्छी मात्रा में होता है और भरपूर कमाई होती है। रमेश ने कई स्थानीय किसानों को भी इसकी खेती के जरिए रोजगार से जोड़ा है।

कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की खेती, किन चीजों की होगी जरूरत?
पहले ऐसा माना जाता था कि ड्रैगन फ्रूट की खेती भारत में नहीं हो सकती है। यह अमेरिका, वियतनाम, थाईलैंड जैसे देशों से भारत में आता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से भारत में भी बड़े लेवल पर इसका प्रोडक्शन हो रहा है। गुजरात तो इसका हब है। यहां सरकार ने इसका नाम कमलम रखा है। इसके अलावा यूपी, एमपी, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी इसकी खेती होने लगी है। बरसात को छोड़कर पूरे साल ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए जा सकते हैं। मार्च से जुलाई के बीच प्लांटिंग करना ज्यादा बेहतर होता है।

पौधे अच्छे किस्म के होने चाहिए। ग्राफ्टेड प्लांट हो तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि उसे तैयार होने में समय कम लगता है। प्लांटिंग के बाद नियमित रूप से कल्टीवेशन और ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इसके सहारे के लिए सीमेंट के खंभे की भी जरूरत होती है। एक खंभे के साथ तीन प्लांट लगाए जा सकते हैं। जैसे-जैसे प्लांट बढ़ता है उसे रस्सी से बांधते जाते हैं।

करीब एक सवा साल बाद प्लांट तैयार हो जाता है। दूसरे साल से फ्रूट निकलने लगते हैं। हालांकि तीसरे साल से ही अच्छी मात्रा में फल का प्रोडक्शन होता है। इसके लिए टेम्परेचर 10 डिग्री से कम और 40 डिग्री के बीच हो तो प्रोडक्शन बढ़िया होता है। इसकी खेती के लिए किसी विशेष किस्म की जमीन की जरूरत नहीं होती है। बस हमें इस बात का ध्यान रखना होता है कि पानी या जलजमाव वाली जगह नहीं हो। महीने में एक बार सिंचाई की जरूरत होती है।

कहां से ले सकते हैं ट्रेनिंग?
ड्रैगन फ्रूट की खेती की ट्रेनिंग स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से ली जा सकती है। इसके साथ ही इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) जो देश के कई शहरों में स्थित है, वहां से भी ली जा सकती है। ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसान भी इसकी ट्रेनिंग देते हैं। इसके अलावा इंटरनेट की मदद से भी जानकारी जुटाई जा सकती है। कई सरकारी और प्राइवेट संस्थान सेमिनार और वर्कशॉप भी आयोजित करवाते रहते हैं।

एक फ्रूट की कीमत 100 से 300 रुपए तक होती है। यह लोकेशन और फ्रूट की साइज के हिसाब से होती है।
एक फ्रूट की कीमत 100 से 300 रुपए तक होती है। यह लोकेशन और फ्रूट की साइज के हिसाब से होती है।

सालाना 8 से 10 लाख रुपए तक कर सकते हैं कमाई
चूंकि ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरुआत में थोड़ी महंगी होती है। इसलिए आपको बजट का खास ध्यान रखना होगा। पौधों की कीमत के साथ ही इसकी मेंटेनेंस में भी पैसे लगते हैं। इस लिहाज से अगर बजट कम हो तो कम पौधों के साथ शुरुआत करनी चाहिए। बाद में जब प्रोडक्शन होने लगे तो खेती का दायरा बढ़ाया जा सकता है। एक बार प्लांटिंग करने के बाद करीब 25 साल तक यह फल देता है। यानी कुल मिलाकर जो खर्च लगता है वह शुरुआत में ही लगता है। बाद में सिर्फ मेंटेनेंस का खर्च रह जाता है।

आज कल बड़े-बड़े सुपर मार्केट में ड्रैगन फ्रूट की डिमांड है। कई बड़ी दवा कंपनियां भी थोक में इसकी खरीदारी करती हैं। बड़े शहरों के साथ ही छोटे शहरों में भी लोग इसे अपना रहे हैं। कोरोना में ज्यादातर लोगों ने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करना शुरू किया है। एक फ्रूट की कीमत 100 से 300 रुपए तक होती है। यह लोकेशन और फ्रूट की साइज के हिसाब से होती है। एक एकड़ जमीन पर इसकी खेती से सालाना 10 टन फ्रूट का उत्पादन हो सकता है। जिससे प्रति टन 8-10 लाख रुपए की कमाई की जा सकती है। अगर आप खेती के साथ ही इसकी नर्सरी लगाते हैं और प्रोसेसिंग का काम करते हैं तो और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। आज-कल बड़े लेवल पर इसकी प्रोसेसिंग के बाद सॉस, जूस, आइसक्रीम जैसे प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं।

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