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  • Due To Lack Of Money, He Had To Give Up Studies, Then He Had To Take A Loan If He Had Cancer, Now Business Of 10 Lakh From Dragon Fruit And Vegetable Cultivation.

खुद्दार कहानी:पैसों की कमी के चलते पढ़ाई छोड़नी पड़ी; फिर कैंसर हुआ तो कर्ज लेना पड़ा, अब ड्रैगन फ्रूट और सब्जियों की खेती से 10 लाख का बिजनेस

बाराबंकी8 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
यूपी के बाराबंकी जिले के रहने वाले गया प्रसाद मौर्य अभी पांच एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले गया प्रसाद मौर्य का बचपन तंगहाली में गुजरा। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वे दसवीं भी पास नहीं कर सके कि उन्हें नौकरी के लिए शहर निकलना पड़ा। वे बाराबंकी में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे। जैसे तैसे परिवार का खर्च तो निकल जाता था, लेकिन वे अपने काम से खुश नहीं थे। वे चाहते थे कि कुछ ऐसा काम करें कि आमदनी भी हो और जीवन में थोड़ा सुकून भी हो।

उन्होंने तय किया कि वे खेती करेंगे। उनके पास करीब दो एकड़ पैतृक जमीन थी। गांव लौटने के बाद गया प्रसाद ने पारंपरिक खेती करना शुरू किया। अभी कुछ ही साल हुए थे खेती करते हुए कि वे एक बड़ी मुसीबत से घिर गए। 2011 में उन्हें गले का कैंसर हो गया। उनके परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया। डॉक्टरों ने आधा गाल काटकर निकाल दिया, जान तो बच गई। लेकिन पैसे भी बहुत खर्च हुए, रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ा।

कैंसर से उबरने के बाद फूलों की खेती शुरू की

गया प्रसाद फूलों की खेती के साथ ही गुलाब की पत्तियों को सुखाकर अर्क निकालते हैं और गुलाब जल बनाकर बेचते हैं।
गया प्रसाद फूलों की खेती के साथ ही गुलाब की पत्तियों को सुखाकर अर्क निकालते हैं और गुलाब जल बनाकर बेचते हैं।

कैंसर को हराने के बाद गया प्रसाद के सामने चुनौती बड़ी थी। उनके पास नौकरी थी नहीं और कर्ज की लिस्ट लंबी थी। पारंपरिक खेती के जरिए वापस पटरी पर लौटना आसान नहीं था, लेकिन गया प्रसाद ने हार नहीं मानी। उन्होंने तय किया कि वे फिर से खेती ही करेंगे, लेकिन इस बार नए तरीके से। वे पारंपरिक खेती के बजाय कमर्शियल फार्मिंग करेंगे। इसके बाद उन्होंने गुलाब के फूलों की खेती शुरू की।

वे बताते हैं कि मैं जिस इलाके से आता हूं वहां कुछ दूरी पर धार्मिक स्थल देवा शरीफ है, जहां सूफी संत हाजी वारिश अली शाह की दरगाह है। देवा में वारिश अली शाह की मजार पर गुलाब के फूल बड़ी मात्रा में चढ़ाए जाते हैं। यही सोचकर उन्होंने भी गुलाब की खेती शुरू की। इसका उन्हें फायदा भी हुआ। आज इस मजार पर चढ़ाए जाने वाले गुलाब का बड़ा हिस्सा गया प्रसाद मौर्य के खेतों से आता है। वे अलग-अलग गुलाब के फूलों की वैराइटी उगा रहे हैं। इसके साथ ही वे गुलाब की पत्तियों को सुखाकर अर्क निकालते हैं और गुलाब जल बनाकर बेचते हैं। इससे अच्छी खासी कमाई हो जाती है।

फूलों की खेती में फायदा हुआ तो सब्जियां और फ्रूट्स उगाना शुरू किया

एक एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट्स की खेती से 10 टन उत्पादन होता है। जिससे 6-7 लाख रुपए की कमाई हो जाती है। मार्केट में एक फ्रूट की कीमत 100 रुपए तक है।
एक एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट्स की खेती से 10 टन उत्पादन होता है। जिससे 6-7 लाख रुपए की कमाई हो जाती है। मार्केट में एक फ्रूट की कीमत 100 रुपए तक है।

50 साल के गया प्रसाद बताते हैं कि जब मुझे फूलों की खेती से ठीक-ठाक कमाई होने लगी तो मैंने सब्जियों की खेती में भी हाथ अजमाया। गोभी, टमाटर, आलू जैसी सब्जियों की खेती शुरू की। लोकल मार्केट में सप्लाई करने लगा। इसी दौरान मुझे ड्रैगन फ्रूट्स के बारे में पता चला। उनके एक परिचित ने बताया कि ड्रैगन फूट की खेती में बढ़िया मुनाफा है और यूपी में बहुत कम लेवल पर ही लोग इसकी खेती करते हैं।

इसके बाद तीन साल पहले मैंने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। शुरुआत में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ड्रैगन फ्रूट के हिसाब से जमीन तैयार करने और उसकी खेती की बारीकियों को समझने में थोड़ा वक्त लग गया। अभी उनके पास तीन हजार से ज्यादा ड्रैगन फ्रूट्स के प्लांट हैं। पिछले साल 20 क्विंटल ड्रैगन फ्रूट्स उन्होंने बेचा है। यूपी के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी वे इसकी सप्लाई कर रहे हैं। कई लोगों ने एडवांस बुकिंग भी की है। अभी वे पांच एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं। इससे सालाना 10 से 12 लाख रुपए का वे बिजनेस कर रहे हैं।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर
गया प्रसाद इंटरक्रॉपिंग और इंटीग्रेटेड फार्मिंग की तकनीक से खेती कर रहे हैं। वे साल में 4 से ज्यादा फसल लेते हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी जमीन को कई भागों में बांट रखा है। जिसमें सीजन के हिसाब से, हाइट के हिसाब से अलग-अलग फसलों को बांट रखा है। अभी उनके पास 3 महीने वाली फसल, 4 महीने वाली फसल और दो साल वाली फसलें हैं। जमीन के एक भाग में उन्होंने लंबे समय की फसल के रूप में ड्रैगन फ्रूट लगा रखा है।

कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की खेती

ड्रैगन फ्रूट को मार्च से जुलाई के बीच कभी भी बोया जा सकता है। मैच्योर होने के बाद यह जुलाई से अक्टूबर तक फल देता है। करीब एक साल में प्लांट तैयार हो जाता है।
ड्रैगन फ्रूट को मार्च से जुलाई के बीच कभी भी बोया जा सकता है। मैच्योर होने के बाद यह जुलाई से अक्टूबर तक फल देता है। करीब एक साल में प्लांट तैयार हो जाता है।

ड्रैगन फ्रूट उगाने के लिए बीज अच्छे किस्म का होना चाहिए। ग्राफ्टेड प्लांट हो तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि उसे तैयार होने में समय कम लगता है। इसे मार्च से जुलाई के बीच कभी भी बोया जा सकता है। प्लांटिंग के बाद नियमित रूप से कल्टीवेशन और ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। करीब एक साल में प्लांट तैयार हो जाता है। मैच्योर होने के बाद यह जुलाई से अक्टूबर तक फल देता है। इसके लिए टेम्परेचर 10 डिग्री से कम और 40 डिग्री से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उसके बीच में किसी भी टेम्परेचर पर इसे उगाया जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष किस्म की जमीन की जरूरत नहीं होती है। किसी भी जमीन पर इसे उगाया जा सकता है।

लागत कम, मुनाफा ज्यादा
गया प्रसाद बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट को पानी की कम ही जरूरत पड़ती है। इसमें चरने या कीड़ेे लगने का जोखिम भी नहीं है। ड्रिप विधि से सिंचाई के चलते इसमें पानी की बहुत बचत होती है। गया प्रसाद के अनुसार एक एकड़ में करीब ढाई से तीन लाख की शुरुआती लागत आती है, लेकिन उसके बाद सिर्फ देखरेख का खर्च होता है, जबकि इससे 25 साल तक फसल मिल सकती है। एक एकड़ जमीन पर इसकी खेती से 10 टन फ्रूट का उत्पादन होता है। जिससे 6-7 लाख रुपए की कमाई हो जाती है।

ड्रैगन फ्रूट के फायदे
इम्युनिटी बढ़ाने के लिए, कॉलेस्ट्रॉल लेवल घटाने के लिए, हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए, हृदय रोग के लिए, स्वस्थ बालों के लिए, स्वस्थ चेहरे के लिए, वेट लॉस और कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने में इसका उपयोग होता है।

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