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आज की पॉजिटिव खबर:लॉकडाउन के दौरान मां के हाथ की बनी रेसिपी पसंद आई तो उसी का स्टार्टअप शुरू किया, 7 महीने में 3 लाख रुपए की कमाई

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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गाजियाबाद के रहने वाले अमन अपनी मां संगीता जैन के साथ मिलकर होममेड आचार और स्नैक्स का स्टार्टअप चला रहे हैं। - Dainik Bhaskar
गाजियाबाद के रहने वाले अमन अपनी मां संगीता जैन के साथ मिलकर होममेड आचार और स्नैक्स का स्टार्टअप चला रहे हैं।

पिछले साल कोरोना के चलते लगा लॉकडाउन कई लोगों के लिए मुसीबत बना तो कई लोगों ने इसे अवसर के रूप में भी तब्दील किया। ऐसी ही कहानी है गाजियाबाद के रहने वाले अमन जैन और उनकी मां संगीता जैन की। अमन MBA ग्रेजुएट हैं। कई बड़ी कंपनियों में काम कर चुके हैं। अभी वे अपनी मां के साथ मिलकर आचार, स्नैक्स और मिठाइयों का स्टार्टअप चला रहे हैं। महज 7 से 8 महीने में उन्होंने अपना बिजनेस अच्छा-खासा जमा लिया है। हर महीने सौ से ज्यादा उनके पास ऑर्डर आते हैं। दिल्ली, मुंबई समेत देश के बड़े शहरों में वे अपना प्रोडक्ट सप्लाई करते हैं। अभी तक उन्होंने 3 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई की है।

31 साल के अमन कोरोना के पहले हैदराबाद में एक कंपनी में बतौर HR काम कर रहे थे। इसी बीच होली की छुट्टियों में वे घर आए। मार्च के अंत में वे जब वापस लौटने का प्लान कर ही रहे थे, तभी लॉकडाउन लग गया और वे फिर हैदराबाद नहीं जा सके। इसके बाद वे घर से ही अपना काम करने लगे। इस दौरान उनकी मां अलग-अलग रेसिपीज बनाकर उन्हें खिलाती थीं। कुछ दिनों तक ऐसे ही वक्त गुजरा।

लॉकडाउन में शुरू किया बिजनेस

अमन ने एक आचार के साथ अपने बिजनेस की शुरुआत की थी, आज उनके पास दो दर्जन से ज्यादा प्रोडक्ट हैं।
अमन ने एक आचार के साथ अपने बिजनेस की शुरुआत की थी, आज उनके पास दो दर्जन से ज्यादा प्रोडक्ट हैं।

अमन कहते हैं कि जुलाई-अगस्त में मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मेरी मां आचार और स्नैक्स बहुत शानदार बनाती हैं। जिसकी तारीफ हमारे रिश्तेदार और मेरे दोस्त भी करते हैं। हालांकि इसे कभी बिजनेस के रूप में तब्दील करने का ख्याल नहीं आया था। जब लॉकडाउन लगा तो दिमाग में कई तरह के प्लान आ रहे थे। उसी दौरान मैंने सोचा कि क्यों न इस खाली समय का फायदा उठाया जाए और मां के हाथ की कारीगरी को बिजनेस का रूप दिया जाए। बस इसके बाद ही हमने इसको लेकर काम करना शुरू कर दिया। मैंने मां से बात की और ट्रायल बेसिस पर 30 किलो आचार तैयार किया।

सोशल मीडिया ने बिजनेस को बढ़ाने में मदद की

वे कहते हैं कि आचार तैयार होने के बाद शुरुआत में मैंने इसे अपने दोस्तों को टेस्ट कराया और उन्हें अपने बिजनेस प्लान के बारे में जानकारी दी। उन लोगों ने इस टेस्ट को दूसरे लोगों तक पहुंचाया। फिर हमने एक वाॅट्सएप ग्रुप बनाया और उसमें लोगों को जोड़ते गए। इस तरह हमारा सफर आगे बढ़ता गया। अब हम सोशल मीडिया के साथ-साथ अपने खुद की वेबसाइट के माध्यम से भी अपने प्रोडक्ट की सप्लाई कर रहे हैं। इसके लिए हमने एक कूरियर कंपनी से टाइअप किया है।

एक आचार से शुरुआत, आज दो दर्जन से ज्यादा प्रोडक्ट

अमन अपने प्रोडक्ट लोकल मार्केट के साथ ही सोशल मीडिया और खुद की वेबसाइट के जरिए सप्लाई करते हैं।
अमन अपने प्रोडक्ट लोकल मार्केट के साथ ही सोशल मीडिया और खुद की वेबसाइट के जरिए सप्लाई करते हैं।

अमन बताते हैं कि हमने जब पहली बार आचार तैयार किया तो दो-ढाई हजार रुपए का खर्च आया था। और सिर्फ एक आचार से शुरुआत की थी। फिर जैसे-जैसे ऑर्डर बढ़े, हमने अपना मेन्यू बढ़ाया। अभी हम दो दर्जन के करीब प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं। इनमें आचार, स्नैक्स और मिठाइयां शामिल हैं। अभी हर महीने 100 से ज्यादा ऑर्डर मिल जाते हैं। त्योहारों के सीजन में डिमांड और अधिक हो जाती है। तब तो एक हफ्ते में 400 से ज्यादा ऑर्डर मिल जाते हैं। आने वाले दिनों में हम इसे और आगे ले जाने का प्लान कर रहे हैं।

अमन ने अपना स्टार्टअप का नाम भी यूनीक रखा है। उनके स्टार्टअप का नाम पापी पेट है। यह उनका फैमिली बिजनेस है, जिसमें परिवार के लोग ही काम करते हैं। अमन का काम आचार के लिए लगने वाली सामग्री को जुटाना, फिर ऑर्डर और मार्केटिंग को देखना है। उनकी मां रेसिपीज तैयार करती हैं। जबकि उनकी बहन और परिवार के बाकी लोग आचार तैयार करने में मदद करते हैं। अमन कहते हैं कि हमारे प्रोडक्ट पूरी तरह होम मेड हैं। हम इसमें ऐसी कोई चीज नहीं मिलाते हैं, जो नुकसानदायक हो।

नए स्टार्टअप के लिए क्या करें?

कोई भी बिजनेस शुरू करने से पहले मार्केट रिसर्च बहुत जरूरी है। अलग-अलग लोकेशन के लिए अलग-अलग जरूरतें हो सकती हैं। इसलिए पहले हमें ये पता करना होगा कि हम जहां रहते हैं या जहां बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, वहां किस चीज की कितनी डिमांड है।

अमन का यह बिजनेस पूरी तरह फैमिली स्टार्टअप है। इसमें उनके परिवार के ही लोग आचार तैयार करने का काम करते हैं।
अमन का यह बिजनेस पूरी तरह फैमिली स्टार्टअप है। इसमें उनके परिवार के ही लोग आचार तैयार करने का काम करते हैं।

दूसरी बात कि हमें अपना प्रोडक्ट खास रखना होगा, ताकि बाहर उसके कम्पेयर के प्रोडक्ट न हों। यानी कोई न कोई ऐसी वजह होनी चाहिए जिससे लोग मार्केट का प्रोडक्ट न खरीदकर हमारा बनाया प्रोडक्ट खरीदें। ये वजह क्वालिटी से लेकर क्वांटिटी और प्राइस तक हो सकती है। इसलिए रिसर्च सबसे अहम पार्ट है।

तीसरी अहम बात यह है कि हमें कस्टमर्स ओरिएंटेड प्रोडक्ट बनाने होंगे। तभी हमारे बिजनेस की ग्रोथ होगी। कस्टमर के फीडबैक के मुताबिक हमें अपना प्रोडक्ट अपग्रेड करना चाहिए। साथ ही टाइम और ट्रेंड के साथ अलग-अलग वैरायटी लॉन्च करना चाहिए।

मार्केटिंग के लिए क्या करें?

हम अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग की शुरुआत सोशल मीडिया से कर सकते हैं। इसके अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अपने पेज बनाएं और उनमें अपने प्रोडक्ट की तस्वीरें अपलोड करते जाएं। बेहतर होगा कि हम अपने इलाके के सोशल मीडिया ग्रुप्स से खुद को जोड़ें, ताकि लोग हम पर आसानी से भरोसा कर सकें और हमें उन्हें प्रोडक्ट भेजने में भी सहूलियत हो। इसके बाद वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन मार्केटिंग की जा सकती है। इसके लिए सबसे जरूरी बात है कि हमें खुद के प्रोडक्ट के साथ-साथ अपने सोशल मीडिया पेज को भी लगातार अपडेट करते रहना होगा, ताकि कस्टमर्स को कुछ नया मिल सके।

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