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खुद्दार कहानियां:आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई की, लेकिन नौकरी के लिए रिज्यूम भी नहीं बनाया, आज ऑर्गेनिक फार्मिंग से सालाना 9 लाख रु कमा रहे

भोपाल8 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
  • तथागत पिछले तीन साल से खेती कर रहे हैं, उन्होंने एक गौशाला भी शुरू की है, जहां अभी 17 गाय हैं, जिनसे दूध और उससे बने प्रोडक्ट वो तैयार करते हैं
  • वे अभी 140 परिवारों तक अपने प्रोडक्ट की सप्लाई और उनके किचन की हर जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, उन्होंने इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है

मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले के कालापीपल तहसील के छापरी गांव के रहने वाले तथागत बारोड़ बतौर डिग्री तो इंजीनियर हैं लेकिन अब प्रोफेशन से किसान बन गए हैं। उन्होंने मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) भोपाल से बीटेक और फिर आईआईटी बॉम्बे से मास्टर्स करने के बाद किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने के बजाय खेती को करियर चुना और ऑर्गेनिक फार्मिंग की शुरुआत की। तथागत बताते हैं कि मास्टर्स करने के बाद तो उन्होंने रिज्यूम भी नहीं बनाया था, क्योंकि उन्होंने पहले से ही तय कर लिया था कि उन्हें खेती ही करना है।

वे पिछले तीन साल से खेती कर रहे हैं। खेती के साथ-साथ वे पशुपालन और जैविक खाद बनाने का भी काम करते हैं। उन्होंने एक गौशाला भी शुरू की है। जहां अभी 17 गाय हैं। जिनसे दूध और उससे बने प्रोडक्ट वो तैयार करते हैं। साथ ही उन्होंने गोबर गैस प्लांट भी लगाया है, जिसके गैस से उनके घर का काम चलता है, खाना पकता है। पशुओं के गोबर और मूत्र से वे तैयार खाद का प्रयोग अपने खेतों में करते हैं, उन्हें बाहर से खाद नहीं खरीदनी पड़ती है।

तथागत बताते हैं कि ग्राहकों से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल करें। फेसबुक, यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म किसानों के लिए काफी कारगर साबित हो रहे हैं।
तथागत बताते हैं कि ग्राहकों से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल करें। फेसबुक, यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म किसानों के लिए काफी कारगर साबित हो रहे हैं।

तथागत के पिता डॉक्टर हैं लेकिन गांव और समाज से जुड़े हैं, उनके चाचा लोग खेती से जुड़े हैं। इसीलिए तथागत का भी रुझान शुरू से खेती की तरफ रहा। उन्होंने मैनिट से 2012 में इंजीनियरिंग करने के बाद एक साल का ब्रेक लिया। वे इसे करियर ड्रॉप बताते हैं। वे कई जगहों पर घूमने गए, गांव के किसानों से मिले और खेती के बारे में सीखा। इस दौरान उन्होंने थोड़ा - बहुत जैविक खेती शुरू किया और ठेले लगाकर सब्जियां भी बेची। इसके बाद उन्हें लगा कि क्यों न इस क्षेत्र में थोड़ा और पढ़ाई की जाए और बेहतर तरीके से फार्मिंग शुरू किया जाए।

फिर उन्होंने गेट की तैयारी की और आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लिया। वहां से उन्होंने टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट इन रूरल एरियास में मास्टर्स किया। यहां से 2016 में पासआउट होने के बाद वे गांव लौट गए।

तथागत ने खेती की शुरुआत थोड़ी सी जमीन पर की थी। आज वे 18 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं।
तथागत ने खेती की शुरुआत थोड़ी सी जमीन पर की थी। आज वे 18 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं।

वे गांव के किसानों को जैविक खेती के बारे में बताते थे। गांव वाले उनकी बात तो सुनते थे लेकिन वैसा करने को वे तैयार नहीं थे। दरअसल वे रिस्क नहीं लेना चाहते थे। फिर उन्होंने तय किया कि ये काम उन्हें ही करना होगा और खेती-किसानी को एक प्रोफेशन की तरह काम करना शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले थोड़ी जमीन पर जैविक गेहूं की खेती शुरू की।

वे बताते हैं कि उत्पादन के बाद मैंने अपने परिचितों को इसके बारे में बताया। जिसके बाद वे मुझसे इसकी डिमांड करने लगे। धीरे- धीरे हमारा दायरा और फसलें बढ़ने लगीं। तथागत ने अब तक करीब 140 परिवारों तक अपनी पहुंच बना ली है। वे उनके घर के लिए प्रोडक्ट तैयार करते हैं। आगे उनका इरादा ज्यादा से ज्यादा परिवारों के किचन तक पहुंचने का है।

वे कहते हैं कि मैं चाहता हूं कि मेरे किसी कस्टमर्स को किसी चीज के लिए कहीं और नहीं जाना पड़े। उनके किचन की सभी जरूरतें, मसाले से लेकर सब्जी राशन सबकुछ, मैं पूरी कर सकूं। इसलिए मैंने माय फेमिली फार्मर नाम से सभी 140 लोगों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। उनकी जरूरत की हर चीजें हम सप्लाई करने की कोशिश करते हैं।

तथागत फल और सब्जियां भी उगाते हैं। उनका कहना है कि वे एक आम परिवार के किचन की हर जरूरत को पूरा करना चाहते हैं।
तथागत फल और सब्जियां भी उगाते हैं। उनका कहना है कि वे एक आम परिवार के किचन की हर जरूरत को पूरा करना चाहते हैं।

आज तथागत करीब 18 एकड़ में लगभग 17 फसलें उगा रहे हैं, जिनमें मोरिंगा, आंवला, हल्दी, अदरक, लेमन ग्रास और चना जैसी फसलें शामिल हैं। आमदनी की बात पूछने पर वे बताते हैं कि प्रति एकड़ करीब सालाना 50 हजार रु की कमाई हो जाती है। यानी अभी वे 9 लाख रुपए तक एक साल में कमा रहे हैं।

वे अपनी किसी भी फसल को जैविक के नाम पर बहुत महंगा नहीं बेचते हैं। वे सीधा ग्राहकों तक पहुंचकर अपने उत्पाद को बेचते हैं। उन्होंने बताया कि सब्ज़ी मंडी में धनिया का मूल्य अभी 250 रुपए किलो है। इसी मूल्य पर वे बेच भी रहे हैं। उन्होंने बिचौलियों को हटा दिया है और इससे उनकी मेहनत का पूरा पैसा खुद उन्हें ही मिल रहा है।

आज तथागत करीब 18 एकड़ में लगभग 17 फसलें उगा रहे हैं, जिनमें मोरिंगा, आंवला, हल्दी, अदरक, लेमन ग्रास और चना जैसी फसलें शामिल हैं।
आज तथागत करीब 18 एकड़ में लगभग 17 फसलें उगा रहे हैं, जिनमें मोरिंगा, आंवला, हल्दी, अदरक, लेमन ग्रास और चना जैसी फसलें शामिल हैं।

प्रोडक्ट के उत्पादन के साथ- साथ वे अब इसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का भी काम कर रहे हैं। वे धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, जीरा पाउडर, सौंफ जैसी चीजें पैक कर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। तथागत बताते हैं कि लॉकडाउन लगने के बाद 10-12 लोगों ने उनसे संपर्क किया है। अब वे बाहर जाकर काम नहीं करना चाहते हैं। वे अब गांव में रहकर ही खेती करना चाहते हैं।

अगर कोई ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू करना चाहे तो उसे क्या करना चाहिए

तथागत कहते हैं कि अगर कोई ऑर्गेनिक खेती की करना चाहता है तो पूरी जमीन के बजाए 10 फीसदी जमीन से जैविक खेती की शुरुआत करे और बाकी जमीन पर पारंपरिक खेती करे। ताकि अगर प्रयोग सफल नहीं भी हुआ तो हमारे पास बैक सपोर्ट रहेगा।

वे अपनी किसी भी फसल को जैविक के नाम पर बहुत महंगा नहीं बेचते हैं। बल्कि उन्होंने सीधा ग्राहकों से जुड़ने का मॉडल अपनाया है।
वे अपनी किसी भी फसल को जैविक के नाम पर बहुत महंगा नहीं बेचते हैं। बल्कि उन्होंने सीधा ग्राहकों से जुड़ने का मॉडल अपनाया है।

इसके लिए सबसे पहले जिस एरिया में खेती करनी है वहां सर्वे करना चाहिए कि किस मौसम में कौन- कौन सी फसलें होती हैं और उनकी डिमांड कितनी है। एक चीज हमें याद रखनी चाहिए कि हमारे पास जितनी वैराइटीज होगी, उतनी ही डिमांड बढ़ेगी।

इसलिए हमें हल्दी, अदरक, धनियां जितनी वैराइटीज हो सके उसकी खेती करनी चाहिए। ऐसा करने का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि हमें अपने प्रोडक्ट को खपाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। क्योंकि ये ऐसे प्रोडक्ट हैं जिनकी जरूरत एक आम परिवार को होती ही है। इसके बाद धीरे-धीरे दायरा बढ़ाना चाहिए। जैसे- जैसे डिमांड बढ़ेगी और लोग जुड़ते जाएंगे वैसे- वैसे हमारा मार्केट डेवलप होता जाएगा।

प्रोडक्ट के उत्पादन के साथ- साथ वे अब इसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का भी काम कर रहे हैं। वे धनिया पावडर, हल्दी पावडर, जीरा पावडर, सौंफ जैसी चीजें पैक कर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।
प्रोडक्ट के उत्पादन के साथ- साथ वे अब इसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का भी काम कर रहे हैं। वे धनिया पावडर, हल्दी पावडर, जीरा पावडर, सौंफ जैसी चीजें पैक कर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।

शुरू में किन चीजों की जरूरत होगी

हमें खेती शुरू करने के लिए थोड़ी जमीन चाहिए। अगर अपनी नहीं हो तो किराए पर लिया जा सकता है। साथ ही जैविक फसल के बीज, जैविक खाद और खेती के अन्य उपकरण जैसे ट्रैक्टर, कीटनाशक मशीन और सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।

कस्टमर्स कैसे तैयार करें

वे बताते हैं कि मार्केटिंग के लिए आज के जमाने में सोशल मीडिया सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है। मैंने अपने कस्टमर डेवलप करने के लिए कोई विज्ञापन नहीं दिया। सोशल मीडिया के माध्यम से ही और लोगों से बात कर अपना मार्केट तैयार किया और मुझे रिस्पॉन्स मिलना शुरू हो गया।

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