पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Db original
  • Ever Had To Struggle For A Servant Of Two Thousand Rupees, Today A Millionaire Made Of Bamboo Farming

आज की पॉजिटिव खबर:कभी दो हजार रुपए महीने की नौकरी करते थे, अब बांस की खेती से सालाना टर्नओवर एक करोड़ रुपए से ज्यादा

मुंबई5 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
महाराष्ट्र के रहने वाले राजशेखर पाटिल बांस की खेती करते हैं। महाराष्ट्र समेत दूसरे कई राज्यों से भी लोग उनके यहां बांस खरीदने के लिए आते हैं।

आज की कहानी महाराष्ट्र के उस्मानाबाद के रहने वाले राजशेखर पाटिल की। राजशेखर एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पिता खेती करते थे, उनकी 30 एकड़ जमीन भी थी। लेकिन, पानी की कमी के चलते उपज अच्छी नहीं होती थी। राजशेखर बैचलर की पढ़ाई के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुटे, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। प्राइवेट सेक्टर में भी कोई अच्छी नौकरी नहीं मिली। फिर उन्हें बांस की खेती का आइडिया मिला और ये उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया। आज वे 54 एकड़ जमीन पर बांस की खेती कर रहे हैं। सालाना टर्नओवर एक करोड़ रुपए से ज्यादा है।

50 साल के राजशेखर बताते हैं, 'हमारे यहां तब न तो बिजली थी, न ही हमें सिंचाई के लिए पानी मिल पाता था। इसलिए हमारे गांव का नाम निपानी पड़ गया। मैंने अपनी तरफ से नौकरी की पूरी कोशिश की, लेकिन जब कहीं मौका नहीं मिला तो अन्ना हजारे के पास रालेगण चला गया। उन्हें गांव में काम करने के लिए कुछ युवाओं की जरूरत थी। वहां भी मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ। अन्ना से बहुत मिन्नत की तो मुझे पानी और मिट्टी के संरक्षण का काम दिया गया। दो हजार रुपए महीने की तनख्वाह थी। चार-पांच साल तक वहां काम किया। तनख्वाह कम थी, लेकिन इस दौरान मुझे खेती और जल संरक्षण को लेकर काफी कुछ सीखने को मिला।'

राजशेखर के खेत में लगे बांस के पौधों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
राजशेखर के खेत में लगे बांस के पौधों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

पहले साल में ही 20 लाख पहुंचा टर्नओवर

राजशेखर कहते हैं, 'मैं 30 साल का रहा होऊंगा जब एक दिन खबर मिली कि पिता को पैरालिसिस हो गया है। इसके बाद मैं अपने गांव लौट आया। यहां आकर फिर से खेती करने का प्लान किया। इसी बीच मुझे पता चला कि पास के गांव में एक किसान अपनी बांस की खेती को उजाड़ना चाहता है। उसे बांस की खेती में फायदा नहीं हो रहा था। मैंने वहां से बांस के 10 हजार पौधे उठा लिए और अपने खेत में लगा दिए। तीन साल बाद जब बांस तैयार हुए तो हाथों-हाथ बिक गए। पहले ही साल टर्नओवर 20 लाख रुपए पहुंच गया।'

50 से ज्यादा तरह के बांस की खेती

पहले ही साल अच्छी कमाई होने से राजशेखर का कॉन्फिडेंस बढ़ गया। अगले साल उन्होंने पूरे खेत में बांस के पौधे लगा दिए। सिंचाई के लिए गांव के 10 किलोमीटर लंबे नाले की सफाई करवाई। उसे खोदकर गहरा किया ताकि बारिश का पानी जमा हो सके। इससे उन्हें सिंचाई में भी मदद मिली और गांव को पानी का एक सोर्स भी मिल गया। आज राजशेखर के खेत में लगे बांस के पौधों को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। उनके पड़ोस के लोग बताते हैं कि रोजाना कम से कम 100 लोग उनसे मुलाकात करने और सलाह लेने आते हैं। राजशेखर ने बांस की 50 से ज्यादा किस्में लगा रखी हैं। इनमें कई विदेशी वैराइटी भी हैं। महाराष्ट्र के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी लोग उनके यहां बांस खरीदने आते हैं। उन्होंने एक नर्सरी का सेटअप भी तैयार किया है, जिसमें बांस की पौध तैयार की जाती है।

राजशेखर बताते हैं कि देश में बांस की मांग लगातार बढ़ रही है। अगर सही तरीके से इसकी खेती की जाए तो एक एकड़ में तीन लाख रुपए की कमाई हो सकती है।
राजशेखर बताते हैं कि देश में बांस की मांग लगातार बढ़ रही है। अगर सही तरीके से इसकी खेती की जाए तो एक एकड़ में तीन लाख रुपए की कमाई हो सकती है।

बांस की खेती के साथ-साथ राजशेखर किसानों को इसकी ट्रेनिंग भी देते हैं। कुछ साल पहले उन्हें नागपुर में हुई एग्रो विजन कांफ्रेंस में भी बुलाया गया था। राजशेखर इंडियन बैंबू मिशन के एडवाइजर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्हें कई सम्मान और पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। अभी उनके यहां 100 से ज्यादा लोग काम करते हैं। ये लोग खेती के अलावा मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टेशन का भी काम देखते हैं।

बांस की खेती कैसे करें?

राजशेखर बताते हैं, 'बांस की खेती के लिए किसी खास जमीन की जरूरत नहीं होती है। आप ये समझ लीजिए कि जहां घास उग सकती है, वहां बांस की भी खेती हो सकती है। इसके लिए बहुत देखभाल और सिंचाई की भी जरूरत नहीं होती है। जुलाई में बांस की रोपाई होती है। अमूमन बांस तैयार होने में तीन साल लगते हैं। इसकी खेती के लिए सबसे जरूरी है, उसकी वैराइटी का चयन। अलग-अलग किस्म के बांस का उपयोग और मार्केट रेट अलग होता है। बांस का पौधा तीन-चार मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इसके बीच की जगह पर दूसरी फसल की खेती भी की जा सकती है। बांस की खेती के लिए राष्ट्रीय बैंबू मिशन से भी मदद ली जा सकती है। इसके तहत हर राज्य में मिशन डायरेक्टर बनाए गए हैं।'

राजशेखर 54 एकड़ जमीन पर बांस की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बांस की 50 से ज्यादा किस्में लगा रखी हैं, जिनमें से कई विदेशी हैं।
राजशेखर 54 एकड़ जमीन पर बांस की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बांस की 50 से ज्यादा किस्में लगा रखी हैं, जिनमें से कई विदेशी हैं।

प्रति एकड़ तीन लाख रुपए तक मुनाफा कमा सकते हैं

आजकल मार्केट में बांस की खूब डिमांड है। गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी बांस से बने प्रोडक्ट की मांग है। लोग घर की सजावट और नया लुक देने के लिए बांस से बने प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। बांस से बल्ली, सीढ़ी, टोकरी, चटाई, फर्नीचर, खिलौने तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा कागज बनाने में भी बांस का उपयोग होता है। राजशेखर बताते हैं, 'अभी देश में बांस एक बड़ी इंडस्ट्री के रूप में उभर रहा है। बहुत कम लोग हैं जो बांस की खेती कर रहे हैं। जो कर रहे हैं, वे इसे बिजनेस के लिहाज से नहीं कर रहे हैं। एक एकड़ खेत में बांस लगाने के लिए 10 हजार के आसपास का खर्च आता है। तीन-चार साल बाद इससे प्रति एकड़ तीन लाख रुपए की कमाई हो सकती है। एक बार लगाया हुआ बांस, अगले 30-40 साल तक रहता है। क्वालिटी के मुताबिक एक बांस की कीमत 20 रुपए से लेकर 100 रुपए तक मिल सकती है।'