पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Db original
  • Facebook Data Leak Explained; How Did It Happen? Delhi Mumbai Kolkata Chennai Users Information Leaked Online

सबसे खतरनाक डेटा लीक:53 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा लीक, यह कई अपराधों की वजह बन सकता है; दिल्ली-मुंबई सबसे ज्यादा प्रभावित

5 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

आप किसी काम में लगे होते हैं, तभी आपके वॉट्सऐप पर एक ऑनलाइन गेम का लिंक आता है या आपके मोबाइल पर किसी रियल इस्टेट कंपनी का घर खरीदने के लिए मैसेज आता है। आम तौर पर आप उसे इग्नोर कर देते हैं, लेकिन ऐसे मैसेज और वॉट्सऐप अगर बंद नहीं होते और लगातार बढ़ते जाते हैं तो ऐसा हो सकता है कि आप भी उन 53.3 करोड़ फेसबुक यूजर्स में शामिल हों, जिनका डेटा लीक हुआ है। दुनिया के 106 देशों में रहने वाले फेसबुक के 53.3 करोड़ यूजर्स का डेटा लीक हो गया है। इस बात की जानकारी साइबर सुरक्षा कंपनी हडसन रॉक के सह-संस्थापक और CTO एलन गाल ने ट्वीट कर दी। उन्होंने बताया कि डेटा लीक के दौरान चोरी किए गए मोबाइल नंबर टेलीग्राम बॉट के जरिए मुफ्त में बेचे जा रहे हैं।

भारत के भी 61.5 लाख लोग ऐसे हैं, जिनका डेटा लीक हुआ है। पहले लीक हुए डेटा के मुकाबले इस बार लीक डेटा इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें यूजर्स के नाम, ईमेल आईडी, फेसबुक आईडी के साथ ही मोबाइल नंबर, घर का पता, जन्मतिथि, वर्कप्लेस की जानकारी और अकाउंट बनाने की तारीख जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी डेटा चोरों को मिल गई हैं। हालांकि इस डेटा में लोगों की वित्तीय जानकारियां और पासवर्ड वगैरह शामिल नहीं हैं।

कैसे लीक हुआ डेटा?
यह डेटा बॉट (एक कंप्यूटराइज्ड रोबोट) की मदद से लीक किया गया। जिसने फेसबुक की सुरक्षा कमी का फायदा उठाते हुए सभी लोगों की प्रोफाइल से जुड़े मोबाइल नंबर और दूसरी जानकारियां हासिल कर लीं। चोरी हुए डेटा में अमेरिका के रिकॉर्ड 3.2 करोड़ लोगों और ब्रिटेन के 1.15 करोड़ लोगों का डेटा भी शामिल है।

लोगों की पर्सनल इन्फॉर्मेशन वाला यह फेसबुक डेटा सबसे पहले डार्कनेट पर डाला गया। यह इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिस तक गूगल, बिंग और सफारी जैसे सामान्य ब्राउजर से नहीं पहुंचा जा सकता। डार्कनेट का इस्तेमाल अपराधी तमाम गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए करते हैं।

फेसबुक की लीपापोती- 'डेटा लीक नहीं हुआ, स्क्रैप किया गया'
फेसबुक के प्रोडक्ट मैनेजमेंट डायरेक्टर माइक क्लार्क ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि डेटा को उसका सिस्टम हैक करके नहीं चुराया गया है बल्कि इसे फेसबुक से स्क्रैप किया गया है।

इस ब्लॉग पोस्ट में यह भी कहा गया कि स्क्रैपिंग एक चालाकी भरा तरीका होता है, जिसमें ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के जरिए इंटरनेट पर मौजूद जानकारी को निकाला जाता है। यह प्रक्रिया गैरकानूनी है।

डेटा लीक दो साल पुरानी बात तो अब बवाल क्यों?
फेसबुक ने खुद डेटा लीक की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है। साथ ही कहा है कि डेटा दो साल पुराना है। यह सही बात है कि लीक फेसबुक डेटा लंबे समय से डार्कनेट पर मौजूद था, लेकिन अगर कोई इसे खरीदना चाहता था तो उसे मोटी फीस चुकानी होती थी।

अब यह डेटा लीक इसलिए बहुत खतरनाक हो गया है क्योंकि एक हैकर ने पर्सनल जानकारियों वाले 53.3 करोड़ लोगों के डेटा को डार्कनेट पर फ्री में सबके लिए पोस्ट कर दिया है। यानी अब अपराधियों और आतंकियों के लिए 53.3 करोड़ लोगों का यह डेटा मुफ्त में उपलब्ध है।

हैकर ने फ्री में क्यों पोस्ट किया करोड़ों का डेटा?

साइबर रिसर्चर डेव वॉकर के मुताबिक जिस हैकर ने डेटा लीक किया, उसने इसे 10 हजार डॉलर में खरीदा था। लेकिन कोई हैकर करोड़ों के डेटा को मुफ्त में क्यों बेचेगा? इस सवाल के जवाब में डेव ने कहा, 'अक्सर डेटा को सस्ते में बेचकर हैकर अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं।'

फेसबुक ने चेतावनी के बाद भी नहीं दिया डेटा सुरक्षा पर ध्यान
यह फेसबुक पर डेटा सुरक्षा में कमी का पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी सोशल मीडिया पर कई ऐसे डेटा लीक चर्चा में आ चुके हैं। सबसे ज्यादा विवादित मामला 2018 में हुआ कैंब्रिज एनालिटिका स्कैंडल था, जिसमें राजनीतिक पार्टियों को सुझाव देने और उनके लिए रणनीति बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक पर एक पर्सनालिटी क्विज ऐप के जरिए करीब 8.7 करोड़ लोगों की पर्सनल जानकारियां हासिल कर ली थीं।

डेव वॉकर ने कहा, 'इस मामले में भी फेसबुक को माफ करना इसलिए मुश्किल है क्योंकि इस गड़बड़ी के बारे में 2017 में ही फेसबुक को आगाह किया गया था। यानी डेटा लीक होने से 2 साल पहले। तब फेसबुक ने इसे नकार दिया था। इस घटना के दो साल बाद ही किसी ने 53.3 करोड़ लोगों का डेटा चुरा लिया।' यानी करीब 20% फेसबुक यूजर्स का डेटा चोरी हुआ है। बता दें कि 31 दिसंबर, 2020 तक दुनियाभर में फेसबुक का इस्तेमाल कर रहे लोगों की संख्या 280 करोड़ थी।

भारत के बड़े शहर रहे निशाने पर
इंडियन एक्सप्रेस ने भारतीयों के लीक डेटा का एनालिसिस किया है, जिसके मुताबिक भारत के बड़े महानगर ज्यादा निशाने पर रहे हैं। दिल्ली में 1.55 लाख, मुंबई में 1.36 लाख, कोलकाता के 96 हजार, चेन्नई के 39 हजार लोगों का डेटा लीक हुआ है। इनके अलावा हैदराबाद के 48 हजार और बेंगलुरु के 50 हजार लोगों के फेसबुक डेटा को भी निशाना बनाया गया है। भारत से जिन लोगों के फेसबुक अकाउंट को निशाना बनाया गया, उनमें 49 लाख पुरुष और 12.5 लाख महिलाएं हैं।

लीक हुआ डेटा का इस्तेमाल करके किए जा सकते हैं कई अपराध
लोगों के फोन नंबर और तमाम जानकारियां आम होने से करोड़ों लोगों की प्राइवेसी खत्म हो गई है। सिक्योरिटी एक्सपर्ट कहते हैं कि लीक हुए डेटा का इस्तेमाल लोगों को झांसा देने, मैसेज में स्पैम भेजने, मार्केटिंग से जुड़े फोन और टारगेटेड एडवरटाइजिंग के लिए किया जा सकता है।

इससे भी ज्यादा खतरनाक बात है कि इन फोन नंबर का इस्तेमाल किसी व्यक्ति/ व्यक्तियों की निशानदेही के लिए किया जा सकता है। ऑनलाइन पेमेंट के साथ ज्यादातर डिजिटल सर्विस के लिए अब फोन नंबर की जरूरत होती है, जिस पर वेरिफिकेशन कोड भेजा जाता है।

डेव वाकर ने कहा कि यह डेटा इंटरनेट की धोखाधड़ी को और आसान बना देगा क्योंकि अपराधी स्पैम वाले मैसेज में से लोगों से जुड़ी सही जानकारी लिखकर खुद को विश्वसनीय साबित कर सकते हैं।

इसके अलावा कई सेलिब्रिटीज की जानकारियां भी लीक हो गई हैं। एक सिक्योरिटी एक्सपर्ट मिको हिपोनेन कहते हैं,’ सबसे ज्यादा नुकसान राजनीतिज्ञों को, सेलिब्रिटीज को, लॉ इन्फोर्समेंट अधिकारियों को, जजों को और उन्हें होगा, जिनका पार्टनर उनका शोषण करता रहा है।’

लीक डेटा के जरिए हैकर भी करते हैं मोटी कमाई
जयपुर पुलिस के साथ काम करने वाले CTO मुकेश चौधरी ने बताया, 'अब तक ज्यादातर लीक के मामलों में यह देखा गया है कि हैकर डेटा को मार्केटिंग की सहूलियत के हिसाब से अलग-अलग भाग में बांट लेते हैं। जैसे चोरी किए गए डेटा को शहरों, उम्र, लिंग और खर्च करने की क्षमता के हिसाब से बांट लिया जाता है और इसके बाद इन्हें कंपनियों या राजनीतिक दलों को बेच दिया जाता है। उन्होंने बताया, 'साइबर अपराधी अक्सर हिट एंड रन प्रोफाइल का इस्तेमाल भी करते हैं। यानी वे मोबाइल नंबर का इस्तेमाल यूजर आईडी या पासवर्ड के तौर पर करके किसी की प्रोफाइल हैक कर लेते हैं और फिर इसे छुड़ाने के लिए फिरौती की मांग करते हैं। कई बार कुछ हैकर VVIP नंबर भी पा जाते हैं, जिन्हें बहुत महंगी कीमतों पर बेचा जाता है।'

खबरें और भी हैं...