मेगा एम्पायरसबसे लग्जरी ब्रांड लुई वितौं:फीफा की ट्रॉफी इसी के बक्से में आती है, कभी भी डिस्काउंट नहीं देने के लिए फेमस

2 महीने पहलेलेखक: आतिश कुमार

लुई वितौं मतलब अमीरी का स्टेटस सिंबल। फ्रेंच फैशन हाउस जो अपनी लग्जरी के लिए मशहूर है। आज भी जिसका हर बैग होता है-- हैंडमेड। लगातार छह वर्षों (2006-2012) तक जो दुनिया का सबसे वैल्यूएबल लग्जरी ब्रांड रह चुका है। ऐसी कंपनी जो कभी भी अपने प्रोडक्ट्स पर छूट नहीं देती। दुनियाभर में जिसके 75 ब्रांड्स और 5 हजार से ज्यादा स्टोर्स हैं। इसकी पहली इंडियन ब्रांड एंबेस्डर दीपिका पादुकोण हैं। फिलहाल लुई वितौं फीफा के दौरान मेसी-रोनाल्डो के फोटोशूट और साथ ही फीफा ट्रॉफी को सुरक्षित रखने वाले 18 कैरेट सोने से बने ट्रंक यानी बक्से की वजह से चर्चा में है।

आज मेगा एम्पायर में जानिए 168 साल पुरानी लुई वितौं की कहानी

लुई वितौं का सफर ट्रंक बनाने से शुरू हुआ

साल था 1821… जब फ्रांस में लुई वितौं नाम के एक शख्स का जन्म हुआ। लुई दस साल के थे, जब उनकी मां का निधन हो गया। गरीबी और सौतेली मां से परेशान होकर लुई ने पेरिस जाने का फैसला किया। पैसे नहीं थे तो 13 साल की उम्र में पैदल चलते हुए दो साल में पेरिस पहुंचे। 1837 में वहां पहुंचकर एक बॉक्स मेकर और पैकर के ट्रेनी बन गए। धीरे-धीरे लुई इस काम में इतने अच्छे हो गए कि में नेपोलियन बोनापार्ट की पत्नी ने उन्हें अपना निजी बॉक्स मेकर एंड पैकर नियुक्त कर लिया। इसके साथ लुई अमीर ग्राहकों के संपर्क में आए और 1854 में नींव रखी लग्जरी ब्रांड लुई वितौं की। शुरुआत में लुई ने ‘Compact Trunk’ बनाकर बेचने शुरू किए। और दो साल के अंदर ही इनके बनाए ट्रंक अमीर लोगों के लिए ‘Must have accessory’ के साथ एक ’Status symbol’ हो गए।

1870 में वॉर के कारण पेरिस के स्टोर्स बंद करने पड़े
जब 1870 में Franco-Prussian War शुरू हुआ तो कंपनी का बिजनेस लगभग ठप हो गया। पेरिस के स्टोर को वॉर के चलते बंद करना पड़ा। लेकिन लुई ने हार नहीं मानी और वॉर की वजह से खाली हो चुके पेरिस में फिर से कंपनी खड़ी की। 1872 में वे नए डिजाइन के साथ ट्रंक लेकर आए। ट्रंक्स से इतनी सफलता मिली कि लोग इसे कॉपी करने लगे।

बेटे ने संभाली कंपनी तो दुनिया को मिला LV लोगो
1892 में लुई की मृत्यु हो गई। उनके जाने के बाद कंपनी की कमान बेटे जॉर्ज ने संभाली। 1896 में जब कंपनी के बनाए ट्रंक की कॉपी होने लगी तो बेटे ने फेमस ‘LV’ लोगो डिजाइन किया। यह लोगो आज भी कंपनी का आइकन बना हुआ है।

बर्नार्ड अर्नाल्ट ने कंपनी को संभाला तो LV बना ग्लोबल ब्रांड
आगे चलकर 1989 में बिजनेसमैन बर्नार्ड अर्नाल्ट ने कंपनी के शेयर खरीदे और कंपनी के स्टोर्स कई देशों में खोले। मौजूदा समय में अरनॉल्ट को मॉडर्न लग्जरी फैशन इंडस्ट्री का गॉडफादर माना जाता है। उन्होंने लुई वितौं ग्रुप को ट्रंक बनाने वाली कंपनी से फैशन, वॉचेज, ज्वेलरी, रिटेल, वाइन, ब्यूटी और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तक पहुंचाया। फिलहाल अर्नाल्ट कंपनी के चेयरमैन और सबसे बड़े शेयरहोल्डर हैं।

हर साल अनसोल्ड प्रोडक्ट को जला देती है कंपनी
LV के प्रोडक्ट्स को कई लोग ‘overpriced’ और ‘overhyped’ का टैग देते है लेकिन कंपनी अपने प्रोडक्ट्स की ‘exclusivity’ को लेकर काफी सीरियस रहती है। अपने प्रोडक्ट को खास बनाए रखने और उसके हाई प्राइज को बरकरार रखने के लिए, कंपनी हर साल अपने अनसोल्ड प्रोडक्ट को जला देती है। कंपनी नहीं चाहती कि पुराने प्रोडक्ट्स की वजह से उसे कोई डिस्काउंट देना पड़े। यही वजह है कि LV अपने प्रोडक्ट्स पर कभी भी किसी तरह की छूट नहीं देती।

फीफा और लुई वितौं का पुराना नाता
लुई वितौं ने फीफा वर्ल्ड कप 2022 की ट्रॉफी के लिए ट्रंक यानी बक्से को डिजाइन किया है। इस बक्से का वजन करीब 6 किलोग्राम है, जिस पर 18-कैरेट सोने और मैलाकाइट की कोटिंग है। दरअसल ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। लुई वितौं 2010 से ही फीफा के लिए ऐसे ट्रंक बनाता आया है। लुई वितौं ऐसा सिर्फ फीफा के लिए नहीं करता। इससे पहले भी इस कंपनी ने मशहूर अमेरिकन नॉवलिस्ट अर्नेस्ट हेमिंग्वे के लिए एक पुस्तकालय और टाइपराइटर ट्रंक बनाया था। बड़ौदा के महाराजा के लिए भी लुई वितौं ने एक पोर्टेबल चाय-सेवा ट्रंक बनाया था। कंपनी हर साल लगभग 450 ऐसे विशेष ऑर्डर तैयार करती है।

माइकल क्लार्क के लिए बनाया ट्रंक, 90 लाख रुपए में हुआ नीलाम

लुई वितौं अपने वीआईपी कस्टमर्स के लिए कस्टम-मेड प्रोडक्ट बनाने के लिए भी मशहूर है। कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया किक्रेट टीम के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क के लिए भी कस्टम-मेड ट्रंक बनाया था। यह ग्रेफाइट कैनवास बैग खासतौर पर क्लार्क के लिए बनाया था। 140 सेमी ऊंचे इस ट्रंक में किक्रेट बैट समेत ब्लेजर, पैंट और बोस साउंड सिस्टम समा जाता है। क्लार्क ने इस बैग को सिडनी में नीलामी के लिए रखा तो यह बैग 90 लाख रुपए में नीलाम हुआ।

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