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भास्कर ओरिजिनल:इन 7 सुझावों को मानकर अर्थव्यवस्था को और गति दे सकता है ‘केंद्रीय बजट 2021’

3 महीने पहले
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फिलहाल देश में सभी की आंखें 1 फरवरी को आने वाले बजट पर टिकी हुई हैं। सरकार के सामने ग्रोथ और राजकोषीय घाटे दोनों को ही साधने की चुनौती है। कोरोना महामारी ने दुनियाभर की सरकारों और व्यापारियों को अपने तौर-तरीकों में बदलाव के लिए मजबूर किया है।

अब तेजी से वैक्सीनेशन के साथ भारत एक बार फिर विकास के रास्ते पर वापसी कर रहा है। ऐसे में ग्राहक, बिजनेस और उद्योग केंद्रीय बजट 2021 से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि महामारी के दौर में उन्हें हुए नुकसान की भरपाई की जा सके और आने वाले दिनों में उन्हें तरक्की के मौके मिल सकें। इसलिए हम उन 7 मुद्दों के बारे में बता रहे हैं, जिन पर फोकस करके सरकार ट्रैक पर लौटती भारत की ग्रोथ को तेज कर सकती है-

1. इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से साकार होगा 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना

कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने 'आत्मनिर्भर भारत' का मंत्र दिया था। आत्मनिर्भरता का सपना मैनुफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से ही साकार हो सकता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ के लिहाज से पिछले बजट में नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) की घोषणा की गई थी। इसके तहत 2020 से 2025 के बीच करीब 7300 परियोजनाओं पर 111 लाख करोड़ रुपये खर्च होने हैं लेकिन इन परियोजनाओं के बारे में और स्पष्टता की जरूरत है। ऐसे में केंद्रीय बजट 2021 में NIP को लागू करने का रोडमैप पेश किया जाना चाहिए।

फॉर्चून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि पिछले साल सरकार ने कोरोना वायरस महामारी से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए 20 लाख करोड़ के भारी भरकम राहत पैकेज का ऐलान किया था। केंद्रीय बजट 2021 में इसे आगे बढ़ाने का प्रावधान होना चाहिए।

सरकार ग्लोबल इनवेस्टर्स को आकर्षित करने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में तेजी लाए। साथ ही टियर-2 और टियर-3 शहरों को इकोनॉमिक हब के रूप में विकसित करने पर फोकस करे।

2. एग्रीकल्चर और रियल एस्टेट से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

कोरोना प्रसार के बावजूद एग्रीकल्चर सेक्टर ने शानदार वृद्धि की है। देश में सबसे ज्यादा लोग इसी सेक्टर में काम करते हैं। इस बजट में सरकार को कृषि निर्यात को प्रोत्साहन देना चाहिए। एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए योजनाओं और छूट की घोषणा की जानी चाहिए। आर्थिक जानकार भुवन भास्कर के मुताबिक कृषि की ग्रोथ मजबूत होने का सीधा असर रोजमर्रा की जरूरत के सामानों, ऑटो और FMCG सेक्टर पर पड़ता है।

वहीं बात रियल एस्टेट की करें तो 2020 में ज्यादातर समय सुस्त पड़े रहने के बाद अब सीमेंट, स्टील और पेंट जैसे सेक्टर में भी तेजी आने की उम्मीद है। इसलिए रियल स्टेट इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए कम ब्याज दरों पर लोन दिया जाना चाहिए। विदेशी निवेशकों को भी इस सेक्टर में मौका दिया जाना चाहिए।

यह सेक्टर अपनी गति को वापस पा सका तो प्रवासी और अकुशल मजदूरों को फिर से काम मिल सकेगा जो महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही पर्सनल और कॉर्पोरेट इनकम टैक्स में कटौती की जानी चाहिए। सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मदद को बढ़ाया जाना चाहिए।

3. 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' से बढ़ेगा विदेशी निवेश

सरकार के सामने इस वक्त दोहरी चुनौती है। एक ओर अर्थव्यवस्था को बढ़ाना है तो दूसरी ओर राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना है। ऐसे में विदेशी निवेश सरकार कि मुश्किलें आसान कर सकता है। चीन से आने वाली कंपनियों को बड़े पैमाने पर भारत में आकर्षित करने के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में सुधार की जरूरत है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक तरह का इंडेक्‍स है, जिससे किसी देश की कारोबार में सुगमता का पता चलता है। इसमें लेबर रेगुलेशन, ऑनलाइन सिंगल विंडो, सूचनाओं तक पहुंच, पारदर्शिता जैसे पैमाने शामिल हैं। विश्व बैंक की 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस लिस्ट' में भारत 63वें स्थान पर है।

बजट में कंपनियों के लिए टैक्स सिस्टम में सुधार किया जाए जिससे आय और निवेश के ज्यादा मौके बन सकें। श्रम और भूमि से जुड़े कानूनों को अच्छी तरह लागू किया जाए। इसके अलावा सरकारी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए IT इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल विंडो सिस्टम वगैरह में निवेश किया जाए। ऐसा हो सका तो FDI में बड़ा उछाल आ सकता है, जिससे न सिर्फ सरकार की आय बढ़ेगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

4. भारत को निर्यात बढ़ाने पर देना होगा ध्यान

केंद्रीय बजट 2021 में देश के निर्यात को बढ़ाने पर जोर देना होगा। इसके लिए उन वस्तुओं पर फोकस करना होगा, जिनका निर्माण अन्य देशों के मुकाबले भारत में ज्यादा आसानी से किया जा सकता है। सरकार को ऐसे उत्पादों पर टैक्स छूट देने और इनका निर्यात बढ़ाने के प्रबंध करने होंगे।

ऐसा ही एक सेक्टर दवाईयों का है। भारत, वियतनाम को दवाओं की सप्लाई करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। हाल ही में फिच सॉल्यूशन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा, 'वियतनाम की फार्मा इंडस्ट्री सिर्फ 53% जनसंख्या की मांग पूरी कर सकती है। ऐसे में वहां भारतीय दवाओं की भारी खरीद की संभावना है।' भारत चाहे तो यहां निर्यात बढ़ाकर वियतनाम का सबसे बड़ा दवा निर्यातक बन सकता है। भारत को ऐसे बाजारों पर फोकस करना होगा।

इस दिशा में कोरोना काल में कई प्रयास हुए हैं। इकॉनमिक सर्वे, 2021 में निर्यात बढ़ाने के कई सरकारी प्रयासों की तारीफ की गई है। ये सरकारी कदम प्रोडक्शन से जुड़े प्रोत्साहन, निर्यात पर करों में कमी, यातायात सुधारों और डिजिटलीकरण के प्रयास हैं।

5. जुगाड़ से आगे बढ़कर रिसर्च को देना होगा बढ़ावा

भारत को अपने उत्पादों के लिए वैश्विक स्तर की गुणवत्ता हासिल करनी है तो उसे रिसर्च को बढ़ावा देना होगा। इससे न सिर्फ इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारतीय कामगार भविष्य के ज्यादा टेक्नोलॉजी के यूज वाले रोजगार अवसरों के लिए भी तैयार हो सकेंगे। ऐसा हुआ तभी भारत आने वाले सालों में दुनिया की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की जरूरतों को पूरा कर सकेगा। बजट से पहले इकॉनमिक सर्वे में भी यह बात दोहराई गई है। इसमें कहा गया है कि भारत का बिजनेस सेक्टर R&D पर बहुत कम खर्च करता है।

बता दें रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर भारत कुल जीडीपी का 0.65% खर्च करता है, जो कि दुनिया की 10 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से काफी कम है। दुनिया की 10 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं R&D पर अपनी GDP का 1.5%-3% खर्च करती हैं। भारत को इस कमी को दूर करना होगा। डेलॉइट की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के अच्छे इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटीज को R&D के लिए पैकेज भी दिया जाना चाहिए और इंस्टीट्यूट को सीधे टेक्नोलॉजी कंपनियों से जोड़ा जाना चाहिए।

6. फाइनेंशियल सेक्टर में और स्थिरता लाना जरूरी

बड़े कॉरपोरेट और इंडस्ट्रियल घरानों को या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज को बैंकिंग लाइसेंस जारी किए जाने चाहिए। इससे कॉम्पटीशन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को अच्छी सेवाएं मिल सकेंगीं।

इसके अलावा विदेशी बैंकों की भारतीय शाखाओं के लिए कॉरपोरेट टैक्स में कमी की जाना चाहिए और उनपर टैक्स रेट उतना ही कर देना चाहिए, जितना भारतीय बैंकों पर है। इसी तरह लंबे समय के लिए निवेशकों को जोड़ा जा सकेगा।

इकॉनमिक सर्वे में भी स्थिरता बढ़ाने वाले कुछ उपाय बताए गए हैं, जिनसे चालू वित्त वर्ष में भारत को फायदा मिला है। ऐसा ही एक उपाय RBI का फॉरेक्स मार्केट में हस्तक्षेप है, जिससे न सिर्फ वित्तीय स्थिरता आई बल्कि रुपए के दामों को एकतरफा तरीके से प्रभावित करने वालों पर भी रोक लगी।

7. खर्च बढ़ाना और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना जरूरी

सभी को इंतजार है कि सरकार खर्च को बढ़ाए जैसा अक्सर आर्थिक मंदी के दौरान किया जाता है। लेकिन, यह खर्च कैसा होगा, तय करना जरूरी है। सरकार अगर राजस्व खर्च को कम करते हुए कैपिटल खर्च बढ़ाती है तो निवेशकों को इससे खुशी होगी, भले ही इससे अगले कुछ सालों के लिए राजकोषीय घाटा बढ़ा रहे। एक बार अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ ली तो सरकार अपने खर्चों की वसूली कर लेगी।

सरकार मूलभूत सुविधाओं में आ रही कमी को पूरा करने के लिए एक बैंक का निर्माण भी कर सकती है। इसके अलावा उधार लेना, निवेश कम करना, और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप कुछ और तरीके हैं, जिससे खर्च में बढ़ोतरी की जा सके। फिलहाल जब इक्विटी के दाम अब तक के सबसे ज्यादा स्तर पर हैं, सरकार के लिए यह निवेश से फायदा लेने का सबसे सही समय है।

इसके अलावा GST रेट में स्थिरता लाना, टैक्स बेस को बढ़ाना आदि राजस्व बढ़ाने के अन्य तरीके हो सकते हैं। सरकार लोगों को इनकम टैक्स भरने के लिए उत्साहित करके, टैक्स से बचने के रास्ते बंद करके भी राजस्व जुटा सकती है।

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