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खुद्दार कहानी:दोस्तों ने पहचान बताने के लिए यौन शोषण किया, मुंबई में मिला नव्या सिंह नाम; अब एक्टिंग में मचा रहीं धमाल

13 दिन पहलेलेखक: नीरज झा

जिस तरह से हर लड़का या लड़की अपने परिवार में पैदा होते हैं। मैंने भी एक सरदार सिख परिवार में लड़के के रूप में जन्म लिया था। मैं परिवार की पहली संतान थी। जब मैं बड़ी होने लगी तो मुझे इस बात का अनुभव होना शुरू हुआ कि मुझ में कुछ तो कमी है। आवाज से लेकर शरीर की बनावट और चाल-ढाल लड़कियों जैसी थी।

जब सड़क पर चलती थी तो आस-पड़ोस के लोग छक्का कहकर चिढ़ाते थे। स्कूल में दोस्त मेरे साथ बदतमीजी करते थे। बैग को यहां से वहां रख देते थे। यहां तक की मेरे दोस्तों ने मेरी पहचान बताने के लिए मेरा यौन शोषण किया।

हालांकि, मेरे कुछ अच्छे दोस्त भी बनें। शिक्षकों का हमेशा सपोर्ट रहा, लेकिन मुझे 12 साल की उम्र में ये महसूस हो गया था कि मैं जो दिखती हूं, मेरी आत्मा वो नहीं है। कुछ कमी है।

ये वाकया जो आपने ऊपर पढ़ा वो इंडिया ट्रांसक्वीन की ब्रांड एंबेसडर, एक्टर मॉडल नव्या सिंह बताती हैं।

अपने परिवार के साथ मॉडल-एक्ट्रेस नव्या सिंह। उनका जन्म बिहार के एक सरदार सिख फैमिली में हुआ था।
अपने परिवार के साथ मॉडल-एक्ट्रेस नव्या सिंह। उनका जन्म बिहार के एक सरदार सिख फैमिली में हुआ था।

32 साल की नव्या सिंह बिहार के कटिहार में एक सरदार सिख फैमिली में पैदा हुईं थी। जब उन्होंने जन्म लिया था तो एक लड़के के तौर पर उन्हें जाना गया। परिवार वालों ने नाम रखा परमिंदर सिंह। नव्या जब अपनी मां के साथ मार्केट या किसी पब्लिक प्लेस पर जाती थीं तो उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था। लोग पीछे से कहते थे, देखो हिजड़ा जा रहा है। वह इग्नोर करके आगे बढ़ती थी, लेकिन उन्हें भीतर-ही-भीतर घुटन महसूस होने लगी थी।

वो कहती हैं, जब मैं यौवनावस्था की दहलीज पर पहुंची और ये चीजें धीरे-धीरे सामने आने लगी तो परिवार का प्यार भी कम होता चला गया। पापा पर एक दबाव था कि मुझे घर में रखना है या नहीं, कुछ लोग कहते थे किन्नर उठाकर ले जाएंगे।

नव्या कहती हैं, मुझे भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। मैंने मां से कहा, मैं जेंडर चेंज करवाना चाहती हूं।
नव्या कहती हैं, मुझे भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। मैंने मां से कहा, मैं जेंडर चेंज करवाना चाहती हूं।

नव्या कहती हैं, उस वक्त गांव में न तो इंटरनेट की सुविधा थी और न ही हर हाथ में मोबाइल फोन। डिजिटल मीडिया जैसा भी कुछ नहीं था। उन्होंने कहा, जब मुझे ये लगने लगा कि मैं वो नहीं हूं जो सोसाइटी देख रही है, तो मैंने अपनी मां से इस बारे में चर्चा की। शुरूआत में वो चौंक गईं। पापा थोड़े सख्त मिजाज के रहे हैं।

बात साल 2003-04 की है। मुझे भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। 14 साल की हो चुकी थी। एक दिन शाम को मां रोटी बना रही थी। मैंने कहा, मां जो जीवन मैं जी रही हूं उसमें मैं कंफर्टेबल नहीं हूं। मैं लड़की बनना चाहती हूं। क्या मुझे आगे चलकर सेक्स चेंज करवाना चाहिए।

मां ने कहा, बातें करना आसान है, लेकिन इसे लागू करना उतना ही मुश्किल। नव्या कहती हैं, जद्दोजहद में 5 साल बीत गए। 2009-10 में मैं 18 साल की थी। मैं मुंबई अपनी मौसी के घर आ गई।

यहां से परविंदर सिंह से नव्या सिंह बनने का सफर शुरू हुआ।

नव्या ने पहली बार 2016 में लैक्मे के फैशन शो में पार्टिसिपेट किया था। अभी तक वो सावधान इंडिया समेत कई सीरियल में भी काम कर चुकी हैं।
नव्या ने पहली बार 2016 में लैक्मे के फैशन शो में पार्टिसिपेट किया था। अभी तक वो सावधान इंडिया समेत कई सीरियल में भी काम कर चुकी हैं।

नव्या की पढ़ाई-लिखाई कटिहार से ही हुई है। वह जब मुंबई से कटिहार जेंडर चेंज करवाने के बाद गईं तो उन्हें देख लोग चौक गए। देखने वालों की कतार लग गई। क्योंकि, अब परमिंदर, नव्या हो चुकी थी।

नव्या कहती हैं, अब वो जब गांव जाती हैं तो लोग उन्हें एक सेलिब्रिटी के तौर पर देखते हैं। उनसे मिलने के लिए आते हैं। नव्या की क्लोज फ्रेंड माही गुप्ता हैं। उन्होंने बताया, माही भी ट्रांस जेंडर वुमन हैं। हम दोनों ने साथ में अपनी जर्नी शुरू की थी।

हिजड़ा शब्द के मायने बताते हुए नव्या कहती हैं। यह हम ट्रांस महिलाओं को एक गाली की तरह दिया जाता है, लेकिन इसका मतलब अलग है। हिज्र मतलब कोई इंसान यात्रा कर आ रहा है। खुद को खोज रहा है।

नव्या जब छोटी थी तो गांव में लोग उन्हें हिजड़ा-छक्का कहकर बुलाते थे। मुंबई आकर नव्या ने अपना जेंडर चेंज करवाया।
नव्या जब छोटी थी तो गांव में लोग उन्हें हिजड़ा-छक्का कहकर बुलाते थे। मुंबई आकर नव्या ने अपना जेंडर चेंज करवाया।

नव्या ट्रांस कम्युनिटी के साथ-साथ किन्नर समुदाय की भी सदस्य
नव्या ट्रांस कम्युनिटी के साथ-साथ किन्नर समुदाय की भी सदस्य हैं। वो कहती हैं, हमारा आज का ये समाज नॉर्मल लड़का-लड़की को भी नहीं छोड़ता है। वहीं, ट्रांस समुदाय अब अपने पैरों पर खड़ा हो रहा है। किन्नर अखाड़ा की समेत कई लोग मिलकर इस पर काम कर रहे हैं।

वो कहती हैं, लोगों की एक अवधारणा बन चुकी थी कि यदि कोई ट्रांस है तो सेक्स वर्कर होगी। सड़क पर भीख मांगती होगी, लेकिन अब चीजें बदल चुकी हैं।

नव्या को बचपन से मॉडलिंग का शौक था। वो कहती हैं, मैं सीरियल काफी देखा करती थी। फैशन में भी काफी दिलचस्पी थी। जब ट्रांजिशन हुआ और मैं मुंबई आ गई तो मुझे बड़े फैशन शोज में जाने का मौका मिलने लगा।

नव्या को बचपन से मॉडलिंग का शौक था। वे कई मैगजीन्स के कवर पर भी आ चुकी हैं।
नव्या को बचपन से मॉडलिंग का शौक था। वे कई मैगजीन्स के कवर पर भी आ चुकी हैं।

पहली बार 2016 में मैंने लैक्मे के फैशन शो में पार्टिसिपेट किया। ऐसा इंडिया में पहली बार हुआ था जब लैक्मे फैशन शो में ट्रांस महिलाओं ने वॉक किया था। इसके बाद मुझे लगा कि मैं अपना करियर मॉडलिंग, एक्टिंग में बना सकती हूं।

नव्या कई मैगजीन्स के कवर पर आ चुकी हैं। उन्होंने सावधान इंडिया शो में भी काम किया है। वो कहती हैं कि इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वहीं, नव्या का एक गाना ‘तोड़े बिना’ भी रिलीज हुआ है। साथ ही नव्या अभी मुंबई में कुछ फिल्मों को लेकर भी काम कर रही हैं। नव्या अभी सिंगल हैं। सवाल पूछने पर वो मुस्कुराते हुए कहती हैं, अभी करियर पर ध्यान दे रही हूं।

नव्या का एक गाना ‘तोड़े बिना’ भी रिलीज हुआ है। साथ ही नव्या अभी मुंबई में कुछ फिल्मों को लेकर भी काम कर रही हैं।
नव्या का एक गाना ‘तोड़े बिना’ भी रिलीज हुआ है। साथ ही नव्या अभी मुंबई में कुछ फिल्मों को लेकर भी काम कर रही हैं।

नव्या चाहती हैं कि उन्हें बॉलीवुड में लीड कैरेक्टर करने को मिले। उन्होंने कहा, बॉलीवुड में ट्रांस जेंडर महिलाओं का रोल हम ट्रांस मॉडल-एक्टर को मिलना चाहिए। यदि हमें इसमें काम नहीं मिलेगा तो हम कहां जाएंगे। किस रोल को करेंगे। वो लगातार इसके खिलाफ आवाज उठा रही हैं।

नव्या कहती हैं कि यदि वो कटिहार से मुंबई नहीं आई होतीं। खुद को पहचाना नहीं होता तो शायद वो भी आज वैसी ही होती जैसी अमूमन ट्रेनों में, रेड लाइट पर ट्रांस महिलाएं भीख मांगती हुई दिखती हैं। सेक्स वर्कर के तौर पर जानी जाती हैं। वो कहती हैं, जो काम आज भी कई ट्रांस महिलाएं कर रही हैं, अगर मैं यह काम कर रही होती तो सुसाइड कर लेती।

नव्या कहती हैं, यदि कटिहार से मुंबई नहीं आई होतीं। खुद को पहचाना नहीं होता तो शायद मुझे ये पहचान नहीं मिलती।
नव्या कहती हैं, यदि कटिहार से मुंबई नहीं आई होतीं। खुद को पहचाना नहीं होता तो शायद मुझे ये पहचान नहीं मिलती।

हालांकि, नव्या का कहना है कि आर्टिकल 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बहुत कुछ बदला है। उन्हें लगातार अपनी बातों को रखने और खुलकर मुख्यधारा में आने का मौका मिल रहा है। वो कहती हैं, जब कोई परिवार लड़का, लड़की स्वीकार कर सकता है तो एक ट्रांस बच्चा क्यों नहीं ?