मेगा एम्पायरसैमसंग, किंग ऑफ इनोवेशन:अपने नए माउस की वजह से चर्चा में, मोबाइल-टीवी से लेकर बुर्ज खलीफा तक बनाने वाला एम्पायर

7 दिन पहलेलेखक: आतिश कुमार

सैमसंग…कोरियन में इसका मतलब होता है 3 स्टार्स। अब आप सोच रहे होंगे 3 स्टार का मतलब तो एवरेज होता है फिर ऐसा नाम क्यों! दरअसल कोरियन संस्कृति में 3 को काफी बिग और पॉवरफुल नंबर माना गया है। और यही बिग और पॉवरफुल शब्द आज सैमसंग एम्पायर को डिफाइन करते हैं। सैमसंग वही कंपनी है जिसने दुनिया को पहला फोल्डेबल फोन और पहला कर्व्ड टीवी दिया। सैमसंग इनोवेशन का इतना बड़ा किंग कि एपल अपने आईफोन के लिए रेटिना डिस्प्ले उसी से लेता है। भारत में सैमसंग का एक दिलचस्प इतिहास रहा है। कंपनी की धीमी ग्रोथ से परेशान इसके मालिक ‘ली कुन ही’ ने 1993 में दुनिया का दौरा करने के बाद जर्मनी में एक ऐतिहासिक भाषण दिया। भाषण की सबसे अहम लाइन थी कि सबकुछ बदल डालो, सिवाय अपनी पत्नी और बच्चों के। उसके तीन साल बाद 1996 में सैमसंग ने नोएडा में अपना पहला प्लांट खोलकर टीवी बनाना शुरू किया। साल 2005 से उसी प्लांट में मोबाइल फोन बनना शुरू हुआ और रिपोर्ट्स की मानें तो अभी भारत में बिकनेवाले मोबाइल फोनों में 19 फीसद हिस्सा सैमसंग का है।

आज सैमसंग अपने अनोखे माउस की वजह से चर्चा में है, मेगा एम्पायर में जानिए फोन, टीवी और फ्रिज से लेकर बुर्ज खलीफा तक बनाने वाले सैमसंग के बारे में…

ड्राई फिश, ग्रोसरी और नूडल्स बेचने से शुरू हुआ था सैमसंग का सफर

सैमसंग की नींव साउथ कोरिया में 1 मार्च 1938 को ‘ली ब्यूंग चुल’ ने रखी थी। जब कंपनी की शुरुआत हुई तब इस कंपनी में सिर्फ 40 कर्मचारी काम करते थे। और ये कंपनी उस वक्त ड्राई फिश, ग्रोसरी और नूडल्स का बिजनेस करती थी । जैसे-जैसे कंपनी आगे बढ़ी तो इसने अपने आपको और क्षेत्रों में विकसित किया। 30 सालों के अंदर साउथ कोरिया के मार्केट में सैमसंग ने खुद को इंश्योरेंस, रिटेल और सिक्यूरिटी जैसे बिजनेस में स्थापित कर लिया।

1969 में सैमसंग ने टीवी लॉन्च कर इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में रखा पहला कदम

1969 में कंपनी नेक पहली बार इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कदम रखा। 1970 में पहला ब्लैक एंड व्हाइट P-3202 टेलीविजन सेट लॉन्च किया। इसके बाद सैमसंग ने फ्रिज, एयर कंडीशनर, वाशिंग मशीन, वीसीआर और कैमरा जैसी बहुत से इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स बनाए ।

सैमसंग के शुरुआती फोन असफल हुए, मोटोरोला से सीखा सबक

1983, ये वो साल था, जब सैमसंग ने टेलीकम्यूनिकेशन के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाए। फिर ठीक तीन साल बाद 1986 में पहला बिल्ट-इन-कार फोन SC-100 लॉन्च किया जो बुरी तरह से फ्लॉप रहा। इस प्रोडक्ट की असफलता के बाद कंपनी ने काफी रिसर्च के बाद 1988 में SH-100 नाम का फोन लॉन्च किया लेकिन ये भी असफल रहा। ये वो समय था, जब मार्केट में मोटोरोला ही एक ऐसा ब्रांड था, जिसके मोबाइल फोन दुनियाभर में बिकते थे। मोटोरोला से सबक सीखकर 7 जून 1993 को सैमसंग सीईओ ने 200 अधिकारियों के साथ बैठक रखी। लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अगले एक साल में मोटोरोला जैसा फोन बनाने का फैसला लिया। फिर नवंबर 1993 में SH-700 मॉडल का एक फोन आया, जिसकी लोगों ने खूब सराहना की।

पहले सफल फोन में कमियां निकली तो फोन को ही जला दिया था

SH-700 फोन सैमसंग का पहला सफल फोन था। इस फोन को बहुत बारीकी से चेककर मार्केट में उतारा गया था। मार्केट में उतारने के बाद जितने भी फोन में कमियां दिखी उसे कर्मचारिओं के सामने ही जला दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि कर्मचारियों तक सीधा संदेश पहुंचे की कोई भी कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगे SH-700 में कुछ बदलाव कर अक्टूबर 1994 को एक अपग्रेडेड वर्जन SH-770 को लॉन्च किया और इस फोन के बाद से सैमसंग एक सफल मोबाइल फोन कंपनी के रुप में स्थापित हो गई।

भारतीय बाजार में सैमसंग मोबाइल फोन की एंट्री

1996 से लेकर 1998 तक सैमसंग ने CDMA की ओर अपने कदम बढ़ा लिए थे। अपनी अच्छी सर्विसेज से सैमसंग ने दुनिया में खूब नाम कमाया और उस वक्त CDMA के मार्केट में 57% पर आपना कब्जा कर लिया था। वर्ष 2000 तक सैमसंग दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बन चुकी थी। यूं भारत में सैमसंग का सफर 1995 में शुरू हो गया था। लेकिन कंपनी ने भारत के मार्केट में अपना सबसे पहला फोन 2004 में लॉन्च किया था। हालांकि उस दौर में सैमसंग का भारतीय मार्केट में टिका रहना काफी मुश्किल था। उस वक्त भारत में नोकिया का दबदबा था। लेकिन अपने दमदार और स्टालिश मोबाइल फोन के कारण सैमसंग ने इंडियन मार्केट में अपनी जगह बनाना शुरू कर दी थी।

भारत में 2010 के बाद से सैमसंग कभी पीछे नहीं मुड़ा

भारतीय फोन मार्केट में सैमसंग का शुरूआती समय कुछ खास नहीं था, लेकिन 2010 के बाद सैमसंग ने जब गैलेक्सी एस फोन लॉन्च किया तो सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में धूम मच गई। ये फोन दुनिया में सबसे पसंदीदा और सबसे ज्यादा बिकने वाले फोन की लिस्ट में शामिल हुआ। फिर 2011 में आए गैलेक्सी नोट के साथ सैमसंग सफलता के शिखर पर पहुंच गया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। देखते ही देखते सैमसंग दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ब्रांड बन गया और एपल के बाद दूसरी सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी भी।

एपल और सैमसंग का अनोखा रिश्ता

साल 1983 से शुरू होती है सैमसंग और एपल के साथ आने की कहानी। इसी साल स्टीव जॉब्स ने टैबलेट कंप्यूटर में लगने वाले डिस्प्ले और मेमोरी चिप्स की तलाश में सैमसंग का दौरा किया। इस दौरे के बाद सैमसंग ने एपल को डिस्पले और चिप्स बनाकर देना शुरू किया। इनका उपयोग एपल ने आईफोन और आईपैड में किया। दो दशकों तक एपल-सैमसंग ने साथ मिलकर काम किया। लेकिन 2011 में दोनों के बीच पेटेंट की लड़ाई शुरू हुई। एपल ने दावा किया कि सैमसंग ने iPhone की नकल की। इसको लेकर लंबे समय तक मुकदमों और सुनवाई का दौर चला। इस दौर का अंत 2018 में हुआ, जिसमें सैमसंग द्वारा एपल को 4000 करोड़ रुपए दिए गए। वैसे आज भी दोनों कंपनियों के बीच मुकदमे-सुनवाई का दौर जारी है और बाकी दुनिया इन दोनों कंपनियों को ‘Frenemies’ नाम से संबोधित करती है। इसका अर्थ है ये आपस में दोस्त भी हैं और दुश्मन भी।

रोचक: सैमसंग का वो फोन जिसे फ्लाइट में ले जाने पर लगा था बैन

साल 2016 में सैमसंग गैलेक्सी नोट 7 स्मार्टफोन में ब्लास्ट के कई मामले सामने हुए थे। साथ ही फोन में ओवर हीटिंग की समस्या आ रही थी। ऐसे में शुरुआत में कंपनी ने फोन वापस मगाएं। लेकिन जब ब्लास्ट और हीटिंग की समस्या दूर नहीं हुई, तो सैमसंग ने फोन को हमेशा के लिए बंद कर दिया। गैलेक्सी नोट 7 ब्लास्ट का एक मामला एयरपोर्ट पर हुआ था, जिसके बाद फोन को फ्लाइट में ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस घटना के बाद गैलेक्सी नोट 7 स्मार्टफोन की बिक्री में जोरदार गिरावट दर्ज की गई थी। खराब होती इमेज को बचाने के लिए इस स्मार्टफोन को हमेशा के लिए बंद कर दिया था। इस घटना से सैमसंग कंपनी को साल 2016 की तीसरी तिमाही में करीब 15,375 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा था।

लेह में स्टोर खोलने वाली पहली मोबाइल कंपनी

सैमसंग इंडिया के आज देशभर में करीब 2000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव ब्रांड स्टोर्स हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सैमसंग का एक ब्रांड स्टोर समुद्री सतह से करीब 3500 मीटर की ऊंचाई पर बसे लेह में भी है, जिसे साल 2016 में शुरु किया गया था। यह देश में सबसे ऊंचाई पर बना पहला मोबाइल स्टोर है।

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