गोवा में बीजेपी में शामिल होना कांग्रेसियों की भी मजबूरी:माइनिंग-लैंड बिजनेस से जुड़े हैं नेता, सत्ता के बिना बिजनेस करना मुश्किल

पणजी8 दिन पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

गोवा में कांग्रेस के 8 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए। वहां अब पार्टी के सिर्फ 3 विधायक रह गए हैं। एक्सपर्ट्स इसकी दो बड़ी वजह बता रहे हैं। पहली, 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव और दूसरी टूटने वाले नेताओं का माइनिंग और लैंड बिजनेस से जुड़े होना।

लोकसभा चुनाव पर क्या असर होगा

लोकसभा चुनाव में करीब 19 महीने बाकी हैं। सत्ता की हैट्रिक के लिए BJP ने ऐसी 120 सीटों की पहचान की है, जो वह कम मार्जिन से हारती है। पार्टी का मानना है कि अभी से मेहनत की जाए, तो इन सीटों पर जीत मिल सकती है। इन्हीं में से एक साउथ गोवा की सीट भी है।

BJP ने 2014 में यह सीट जीती थी, लेकिन 2019 में हार गई। नॉर्थ गोवा को BJP और साउथ गोवा को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। 2024 में BJP किसी भी हाल में गोवा की दोनों सीटें जीतना चाहती है। पार्टी अभी जो भी बड़े फैसले ले रही है, वह 2024 को देखते हुए ही ले रही है।

कांग्रेस के 8 विधायकों को इसलिए शामिल किया गया है, ताकि गोवा की दोनों लोकसभा सीटों को जीतने में पार्टी को कोई दिक्कत न आए। कांग्रेस के पास अब महज 3 विधायक हैं। गोवा के सीनियर जर्नलिस्ट किशोर नाइक गांवकर कहते हैं पार्टी के पास न संगठन बचा न विधायक। ऐसे में वह कैसे BJP को लोकसभा की सीटें जीतने से रोक पाएगी।

कांग्रेस में फूट के बाद 40 में से 33 विधायक BJP के पास
2022 में हुए विधानसभा चुनावों में BJP ने 40 में से 20 सीटें जीती थीं। तीन इंडिपेंडेंट और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के दो विधायकों ने BJP को सपोर्ट किया था। इसके बाद BJP के पास 25 विधायक हो गए। दो दिन पहले गोवा कांग्रेस के 8 विधायक BJP में शामिल हो चुके हैं। इससे सत्ताधारी गठबंधन में विधायकों की संख्या 33 हो गई है।

माइनिंग और जमीन का कारोबार भी टूट की वजह
कांग्रेस से BJP में गए 8 विधायकों में पूर्व CM दिगंबर कामत, माइकल लोबो, उनकी पत्नी देलिया लोबो, केदार नाइक, राजेश फलदेसाई, एलेक्सो स्काइरिया, संकल्प अमोलकर और रोडोल्फो फर्नांडीज शामिल हैं।

गोवा के सीनियर जर्नलिस्ट संदेश प्रभुदेसायी कहते हैं- दिगंबर कामत और राजेश फलदेसाई माइनिंग बिजनेस से जुड़े हैं। गोवा में 2012 से माइनिंग बंद है। अब ये शुरू होने वाली है। सत्ता के बिना माइनिंग इंटरेस्ट पूरे नहीं किए जा सकते।

एक वजह ये भी है कि कामत मौजूदा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मिनिस्टर के निशाने पर थे। कामत जब मुख्यमंत्री थे, तब गैरकानूनी तरीके से कई जमीनों के सौदे हुए। ये मामले बाहर आ रहे थे। इसलिए BJP से हाथ मिलाना उनकी मजबूरी थी और फायदे की बात भी।

माइकल लोबो और देलिया लोबो भी लैंड बिजनेस से जुड़े हैं। दोनों 2012 और 2017 का चुनाव BJP के टिकट पर ही जीते थे। 2022 में जिस सीट से उन्हें टिकट मिल रहा था, वहां से जीतना मुश्किल था। इसलिए वे चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए। वे कांग्रेस में सिर्फ चुनाव जीतने गए थे, ताकि सत्ता में रह सकें। कांग्रेस सत्ता में है ही नहीं तो वे BJP में आ गए। सत्ता के बिना उनके लिए भी लैंड बिजनेस करना मुश्किल है।

एक तिहाई विधायक तोड़े, ताकि दल बदल कानून न लगे
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस तो जुलाई में ही टूट जाती। टूट ही गई थी, लेकिन तब सिर्फ इसलिए बच गई, क्योंकि विधायकों की संख्या 8 पर नहीं पहुंच पाई थी। विधानसभा में कांग्रेस के कुल 11 विधायक जीते थे। 8 BJP में आ गए, यानि दो तिहाई का आंकड़ा पूरा कर लिया। इस वजह से इन पर दल-बदल का कानून नहीं लगेगा और इनकी सदस्यता बरकरार रहेगी।

बीते दो महीनों में 8 विधायकों को BJP में शामिल होने के लिए तैयार कर लिया गया। इसके बाद यह टूट हुई है। इसमें सबसे अहम रोल माइकल लोबो और दिगंबर कामत ने निभाया। प्रभुदेसायी कहते हैं कामत और लोबो ग्रुप के अलावा, बाकि जो विधायक शामिल हुए हैं, उन्हें भी कुछ न कुछ तो दिया ही गया है। क्या डील हुई है ये सामने नहीं आया है।

कांग्रेस से कामत की राजनीति शुरू हुई, BJP से विधायक बने

दिगंबर कामत अभी मारगांव से विधायक हैं। इसी साल मार्च में हुए चुनाव में उन्होंने BJP के अजगांवकर मनोहर को हराया था। कामत ने पहली बार 1989 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और हार गए थे। 1994 में वे पहली बार BJP के टिकट से चुनाव जीते। उस समय कामत के साथ BJP के मनोहर पर्रिकर भी चुनाव जीते थे।

2005 में कामत BJP छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए और कांग्रेस के सत्ता में आने पर माइनिंग मिनिस्टर बने। 2007 से 2012 के बीच गोवा के मुख्यमंत्री बने। 2012 में BJP चुनाव जीत गई। इसके बाद कामत के खिलाफ ED की जांच शुरू हो गई थी। हालांकि, अब तक उन पर कोई आरोप साबित नहीं हो पाया है।

2022 चुनाव के पहले कांग्रेस के कई नेता BJP में शामिल हुए, लेकिन कामत 10 जनपथ के वफादार बने रहे। अब BJP में उनका नया रोल क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है। गोवा की राजनीति को समझने वाले कहते हैं कामत और लोबो को BJP मंत्री बना सकती है। इसी महीने के आखिर में मंत्रिमंडल का विस्तार होगा।

अब तक सिर्फ एक बार गोवा की दोनों सीटें जीत पाई BJP
गोवा में लोकसभा की दो सीटें नॉर्थ और साउथ गोवा हैं। BJP 1980 से ही दोनों सीटों पर कैंडिडेट उतार रही है, लेकिन पार्टी को पहली बार 1999 में कामयाबी मिली। तब दो में से एक सीट BJP ने जीत ली थी।

2014 ऐसा पहला लोकसभा इलेक्शन था, जिसमें BJP ने दोनों सीटें जीती थीं। 2019 में साउथ गोवा की सीट फिर कांग्रेस के खाते में चली गई।

कांग्रेस ने चर्च, दरगाह और मंदिर में दिलवाई थी शपथ
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 17 में से 15 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी। इनमें से ज्यादातर BJP में गए थे। इसके बाद कांग्रेस ने नए चेहरों को मैदान में उतारा। सभी 37 कैंडिडेट को मंदिर, चर्च और दरगाह ले जाकर वफादारी की शपथ दिलवाई गई। एक बार यह सब राहुल गांधी के सामने भी हुआ था। इसके बावजूद पार्टी विधायकों को टूटने से रोक नहीं पाई।

किशोर नाइक गांवकर कहते हैं कि इस काम के लिए अभी का वक्त इसलिए भी चुना गया, क्योंकि अभी राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं। ऐसे में एक राज्य में उनकी पार्टी को तोड़कर उन्हें झटका देने की कोशिश की गई है। गोवा की लीडरशिप को दिल्ली से इशारा मिलने के बाद ही फटाफट ये काम हुआ।

कांग्रेस 2017 में ज्यादा सीटें जीतकर भी सरकार नहीं बना पाई
2017 के चुनाव में BJP ने कांग्रेस से 4 सीटें कम लाकर भी सरकार बना ली थी। कांग्रेस को 17 और BJP को 13 सीटें मिली थीं। तय था कि कांग्रेस निर्दलीयों की मदद से सरकार बना लेगी, लेकिन BJP ने पहले दावा कर दिया और सत्ता हथियाने में कामयाब हो गई।

गोवा में BJP ने 1999 में पहली बार सरकार बनाई थी, तब मनोहर पर्रिकर CM बने थे। फिर वह 2002, 2012 और 2017 में सत्ता में आई। कांग्रेस यहां सबसे ज्यादा करीब 25 साल सत्ता में रही है। BJP 13 साल से ज्यादा सरकार चलाकर दूसरे नंबर पर है।

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1. गायों को केले के पेड़ में बांध बांग्लादेश भेज रहे तस्कर, ईद पर कीमत डेढ़ लाख रुपए

केले के पेड़ का मोटा हिस्सा। उसके बीच गाय का सिर। पैर रस्सी से कसकर बंधे हुए। ऊपर से सिर्फ गाय का सिर नजर आता है। बाकी हिस्सा पानी में। इसी तरह तैरते-तैरते कुछ ही मिनटों में गायें नदी पार कर जाती हैं। वहां पहले से मौजूद लोग उन्हें निकालते हैं। रस्सी खोलते हैं और बांग्लादेश ले जाते हैं। गाय-बछड़ों को इसी तरह पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भेजा जा रहा है।

ईद पर गाय-बछड़ों की कीमत डेढ़ लाख रुपए तक हो जाती है। हर चीज के लिए कोडनेम तय हैं। तस्कर बछड़े को पेप्सी बुलाते हैं। इसका मास्टरमाइंड अनुब्रत मंडल को बताया जाता है। बीरभूम के अनुब्रत TMC के नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खास हैं। CBI ने 11 अगस्त को अनुब्रत मंडल को अरेस्ट किया था।
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2. कद्दू में ड्रग्स छिपाकर बांग्लादेश पहुंचा रहे तस्कर

4096 किमी लंबे भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर कैटल से ज्यादा ड्रग्स की स्मगलिंग हो रही है। गांजा-चरस जैसी नशीली चीजें लड़कियां कपड़ों में छिपाकर ले जाती हैं। भारत में बनने वाली खांसी की दवा फेंसेडिल की बांग्लादेश में सबसे ज्यादा डिमांड है। वहां लोग नशे के लिए शराब से परहेज करते हैं। इसलिए वे फेंसेडिल पीकर नशा कर रहे हैं।

भारत में फेंसेडिल की 100 ML की बॉटल करीब 150 रुपए में मिलती है। तस्कर बांग्लादेश में इसे 1500 रुपए से लेकर 2 हजार रुपए तक में बेच रहे हैं। इसकी तस्करी में कद्दू भी इस्तेमाल किया जा रहा है। तस्कर कद्दू का एक हिस्सा काटकर उसमें सिरप की बॉटल छिपा देते हैं।
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