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आज की पॉजिटिव खबर:गोपाल ने 5 हजार रुपए की लागत से सूरजमुखी की खेती शुरू की, 6 महीने में 2 लाख से ज्यादा का मुनाफा

नई दिल्ली16 दिन पहले

गुजरात के राजकोट जिले के रहने वाले गोपाल नभोया पारंपरिक खेती करते थे। वे लंबे समय से मूंगफली, कपास और अरंडी जैसी फसलों की खेती कर रहे थे, लेकिन मन मुताबिक कमाई नहीं हो पा रही थी। कई बार मौसम की वजह से उन्हें नुकसान भी झेलना पड़ता था, लेकिन अब उन्होंने एक नई पहल की है। वे पारंपरिक खेती की जगह मेडिसिनल प्लांट की खेती कर रहे हैं। उन्होंने 5 बीघा जमीन में सूरजमुखी और अजवाइन की खेती की है। इससे कुछ ही महीने में 2 लाख रुपए से ज्यादा का मुनाफा उन्हें हुआ है।

गोपाल बताते हैं कि हमारे यहां खेती बड़े लेवल पर होती है, लेकिन मौसम की मार की वजह से हमें उतना ही नुकसान भी उठाना पड़ता है। पिछले कुछ सालों से मैं कुछ नया करने का प्लान कर रहा था। पारंपरिक खेती की जगह नई खेती करने की सोच रहा था, लेकिन जानकारी नहीं होने और कम बजट की वजह से काम शुरू नहीं कर पा रहा था। इसके बाद मैं कुछ किसानों से मिला जो कॉमर्शियल फार्मिंग करते थे। फिर मुझे अलग-अलग फसलों के बारे में जानकारी मिली।

5 हजार रुपए की लागत से शुरू की खेती

गोपाल कहते हैं कि किसानों को पारंपरिक से हटकर मुनाफे की खेती पर भी विचार करना चाहिए। किसान चाहें तो पारंपरिक खेती के साथ भी इन फसलों की खेती कर सकते हैं।
गोपाल कहते हैं कि किसानों को पारंपरिक से हटकर मुनाफे की खेती पर भी विचार करना चाहिए। किसान चाहें तो पारंपरिक खेती के साथ भी इन फसलों की खेती कर सकते हैं।

गोपाल कहते हैं कि मुझे बताया गया कि अधिक मुनाफे के लिए दोहरी फसलों की खेती करनी चाहिए। यानी, एक साथ दो फसलों की खेती। मैंने कई फसलों के बारे में जानकारी जुटाई, उसके बाद तय किया कि सूरजमुखी और अजवाइन की खेती करेंगे। ये दोनों ही मेडिसिनल प्लांट हैं और इसमें लागत भी कम आती है। उसके बाद मैंने मार्केट से दोनों ही फसलों के बीज लाए और 5 बीघे जमीन पर दोनों फसलों की खेती शुरू कर दी। इसमें करीब 5 हजार रुपए की लागत आई थी।

वे कहते हैं कि ये दोनों फसलें तैयार होने में ज्यादा वक्त नहीं लेती हैं। करीब 6 महीने में ये कटने के लिए तैयार हो जाती हैं। इसके बाद हमने इसकी मार्केटिंग करनी शुरू कर दी। वे बताते हैं कि जब सूरजमुखी की फसल पक जाती है, तो उसे काट दिया जाता है और बीज अलग कर दिए जाते हैं।

10 टन से ज्यादा प्रोडक्शन की उम्मीद

गोपाल कहते हैं कि दोनों ही प्लांट की डिमांड बहुत ज्यादा है। जब से वे खेती कर रहे हैं, कई लोग उनके प्रोडक्ट खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कोरोना के बाद और ज्यादा डिमांड बढ़ी है। कई बड़े व्यापारियों ने उनके प्रोडक्ट खरीदे हैं। 6 महीने के भीतर उन्हें 2 लाख रुपए से ज्यादा का मुनाफा हुआ है। अभी उनके खेत में लगी दोनों ही फसलों को मिला दिया जाए तो 10 टन से ज्यादा का प्रोडक्शन होने का अनुमान है। यानी, आने वाले दिनों में उन्हें और अधिक कमाई की उम्मीद है। इस समय बाजार में सूरजमुखी के एक गुच्छे की कीमत 1200 से 1300 रुपए है।

गोपाल फिलहाल 5 बीघे में खेती कर रहे हैं। इसमें सूरजमुखी के साथ ही उन्होंने अजवाइन की भी खेती की हैं।
गोपाल फिलहाल 5 बीघे में खेती कर रहे हैं। इसमें सूरजमुखी के साथ ही उन्होंने अजवाइन की भी खेती की हैं।

वे बताते हैं कि मैं इन फसलों की खेती में किसी तरह का कैमिकल या फर्टिलाइजर यूज नहीं करता हूं। गाय के गोबर को ही खाद के रूप में इस्तेमाल करता हूं। इसलिए इनकी देखभाल में भी कम खर्च आता है।

गोपाल कहते हैं कि सूरजमुखी के फूल सूख जाते हैं, तो उनकी पंखुड़ियां झड़ जाती हैं। इसके बाद फूल के बीच में बीज बच जाते हैं, जिन्हें आसानी से निकाल लिया जाता है। ये बीज दो प्रकार के होते हैं, एक जो बीज आप खा सकते हैं और दूसरे वो बीज जिनसे सूरजमुखी का तेल निकाला जाता है।

हेल्थ सेक्टर में है सूरजमुखी की डिमांड

सूरजमुखी की फसल हमारे हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसके बीज में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी के साथ-साथ घाव भरने का गुण होता है। इसमें पॉलीसैचुरेटेड फैटी एसिड और कई विटामिन मौजूद होते हैं, जो हार्ट संबंधी बीमारियों से बचाव करने का काम करते हैं। अगर आपको कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो आप सूरजमुखी के बीज का खाने में उपयोग कर सकते हैं।

इसमें ओलेइक और लिनोलिक फैटी एसिड अच्छी मात्रा में होते हैं। ये हमारे शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है। इसके बीज में आयरन, जिंक, कैल्शियम मौजूद होते हैं, जो हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा मेनोपॉज के बाद होने वाले कैंसर के खतरे को भी कम करने में सूरजमुखी की भूमिका अहम होती है।

सूरजमुखी की खेती कैसे करें?

सूरजमुखी की खेती के लिए किसी खास तरह की जमीन की जरूरत नहीं होती है। हालांकि, दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। इसकी बुआई के लिए फरवरी का महीना सबसे बढ़िया होता है। अगर किसी कारण देर हो जाए तो कभी भी इसकी बुआई की जा सकती है। बीज को बुवाई से पहले रात में लगभग 12 घंटे पहले भिगोकर रखे दें. इसके बाद 3-4 घंटे छाया में सुखाएं फिर दोपहर के बाद बुआई करें।

सूरजमुखी के बीज 6 महीने बाद तैयार हो जाते हैं। इसके बाद इनका इस्तेमाल ऑयल बनाने सहित कई कामों में किया जा सकता है।
सूरजमुखी के बीज 6 महीने बाद तैयार हो जाते हैं। इसके बाद इनका इस्तेमाल ऑयल बनाने सहित कई कामों में किया जा सकता है।

जहां तक सिंचाई की बात है, कम से कम 4-5 बार करनी होती है। ध्यान रखें कि फूल निकलते वक्त और दाना भरते वक्त भूमि में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। 6 महीने बाद फसल तैयार हो जाती है। इसके बाद इसके बीज को निकालकर सुखा लें। अब ये बीज मेडिसिन और ऑयल बनाने के लिए तैयार हैं।

अगर मेडिसिनल प्लांट में दिलचस्पी है तो यह खबर आपके काम की है

कोरोना के बाद दुनियाभर में हेल्थ सप्लीमेंट्स की डिमांड बढ़ गई है। ज्यादातर लोग इम्यूनिटी बूस्टर का इस्तेमाल करने लगे हैं। इस महामारी के बीच कई नए-नए ब्रांड्स और स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जो ऐसे प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग कर रहे हैं और उन्हें बढ़िया मुनाफा भी मिल रहा है। मुंबई की रहने वाली हिना योगेश भी उनमें से एक हैं। पिछले साल अगस्त में उन्होंने घर से ही हेल्थ सप्लीमेंट्स का स्टार्टअप शुरू किया। आज उनके पास 20 से ज्यादा प्रोडक्ट्स हैं, देशभर में मार्केटिंग कर रही हैं। हर महीने 2.5 लाख का टर्नओवर वे हासिल कर रही हैं। (पढ़िए पूरी खबर)

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