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देश के सबसे बड़े दवा मार्केट से रिपोर्ट:दिल्ली के भागीरथी प्लेस में लोगों की भीड़ लगी है, लेकिन दुकानों में ऑक्सीजन से रिलेटेड कोई प्रोडक्ट नहीं है, कोरोना की दवाइयों की भी किल्लत

नई दिल्ली5 दिन पहलेलेखक: पूनम कौशल
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दिल्ली एनसीआर और उत्तर भारत के कई जिलों में मेडिसिन और सर्जरी इक्विपमेंट सप्लाई करने वाली दिल्ली की भागीरथ प्लेस ड्रग्स मार्केट में खरीददारों की भीड़ तो है, लेकिन दुकानदारों के पास सामान नहीं। कोरोना महामारी के दौर में यहां लोग ऑक्सीजन से जुड़े इक्विपमेंट खरीदने आ रहे हैं, लेकिन अधिकतर लोगों को निराशा ही हाथ लग रही है। मेडिकल इक्विपमेंट डिस्ट्रीब्यूटर प्रवीण बताते हैं, 'ऑक्सीजन से जुड़ा कोई सामान उपलब्ध नहीं हैं। हमारे पास ना ऑक्सीमीटर हैं, ना ऑक्सी फ्लो मीटर या स्टीमर। यहां तक की डिजिटल थर्मामीटर की भी कमी है।'

प्रवीण का फोन दिन भर बजता रहता है। अधिकतर कॉल वो उठाते नहीं हैं। जिन जान-पहचान के कारोबारियों का फोन वो उठाते हैं उन्हें भी वो दिलासे ही देते हैं। प्रवीण कहते हैं, 'लोग गुहार लगाते हैं लेकिन हम कुछ कर नहीं पा रहे हैं, ऐसे में बहुत बुरा लगता है।' वे बताते हैं, 'अधिकतर सामान चीन से आता है। जो उत्पादक यहां बनाते हैं वो भी कच्चा माल चीन से ही लेते हैं। चीन से सामान आने में दिक्कत हो रही है। इसलिए सप्लाई चेन टूट गई है।' दवा और सर्जरी इक्विपमेंट के कारोबारियों के मुताबिक इस समय मांग बेतहाशा है और सामान किसी के पास है नहीं। ऐसे में कारोबारी एक-दूसरे को फोन तो खूब घुमा रहे हैं, लेकिन कुछ उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं।

मेडिकल इक्विपमेंट की शॉर्टेज की एक बड़ी वजह ये भी है कि चीन की सबसे बड़ी सरकारी एयरलाइन सिचुआन एयरलाइंस ने भारत के लिए मालवाहक उड़ानों को 15 दिनों के लिए बंद कर दिया है। इसकी वजह से जिन डिस्ट्रीब्यूटरों ने ऑर्डर दिए भी हैं उनका माल भी नहीं पहुंच पा रहा है।

लॉकडाउन की वजह से ट्रांसपोर्टेशन प्रभावित
दिल्ली ड्रग्स ट्रेडर्स एसोसिएशन (डीडीटीए) के अध्यक्ष अनिल चुग कहते हैं, 'मांग इतनी ज्यादा है कि कोई भी सामान उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। चीन के उड़ाने रोकने से भी बाजार में हाहाकार है। जिनके पास पहले का स्टॉक था वो भी खत्म हो गया है। चीन से सामान नहीं आ पा रहा है।' वे कहते हैं, 'लॉकडाउन की वजह से ट्रांसपोर्ट भी बुरी तरह प्रभावित है। दिल्ली-एनसीआर में अंदरूनी ट्रांसपोर्ट तो हो पा रहा है, लेकिन दूसरे राज्यों से आने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। यही वजह है कि कोविड से जुड़ी हर दवा की किल्लत है।

भागीरथ प्लेस मेडिकल मार्केट में पांच सौ से अधिक दवा की दुकानें हैं। इतनी ही सर्जरी इक्विपमेंट की दुकानें हैं। पहले ये बाजार दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के राज्यों को फीड करता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद से पूरे देश में यहां से दवाएं और मेडिकल सामान जाता है। डीडीटीए के अध्यक्ष अनिल चुग के मुताबिक एक तरह से ये देश का सबसे बड़ा दवा मार्केट है।​

अनिल चुग कहते हैं कि किसी को भी अंदाजा नहीं था कि कोरोना की दूसरी लहर इतनी व्यापक और विनाशकारी होगी। अनिल कहते हैं, 'कोरोना की ये लहर बहुत ही अप्रत्याशित रही है। किसी ने नहीं सोचा था कि महामारी ऐसा विकराल रूप लेगी। पहले पॉजिटिविटी रेट चार प्रतिशत के आसपास था, लेकिन अब 35 फीसदी के आसपास है। यानी दस गुणा बढ़ गया है। पहले सौ में से चार लोग पॉजिटिव हो रहे थे तो उनके लिए ही दवाएं उपलब्ध होने में दिक्कतें आ रही थीं। आप कल्पना कर सकते हैं कि अब जब दस गुना अधिक मरीज हैं तो क्या हाल होंगे।'

अनिल चुग कहते हैं, 'ये लहर इस तेजी से आई है कि तैयारी का मौका ही नहीं मिला है। सप्लाई और स्टॉक बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। बीते एक दो-दिनों में रेमडेसिविर या दूसरी जरूरी दवाइयों की सप्लाई कुछ बेहतर हुई है।' दवा बाजार में ऑक्सीजन सिलेंडर पर लगने वाली किट भी उपलब्ध नहीं है। दरअसल अचानक मांग दस गुणा बढ़ जाने से सबकुछ डिस्टर्ब हो गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर इस लहर के लिए तैयार नहीं था। इसकी एक और वजह बताते हुए अनिल चुग कहते हैं, 'कोरोना महामारी की वजह से मैन्यूफैक्चरिंग यूनिटें भी प्रभावित हुई हैं। वहां भी स्टाफ के संक्रमित होने की वजह से प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है। समय पर सामान डिस्पैच भी नहीं हो पा रहा है।'

सर्जिकल सामान के कारोबारी संजय कहते हैं, 'ऑक्सीजन सिलेंडर किट जिसे ऑक्सी फ्लो मीटर कहते हैं कहीं भी उपलब्ध नहीं है। न इनकी मैन्यूफैक्चरिंग हो पा रही है और न ही हम इम्पोर्ट करवा पा रहे हैं। इसी वजह से ये बाजार में शॉर्ट हैं। मरीज मारे-मारे फिर रहे हैं। बीच में दलाल भी आ गए हैं जो मरीजों को लूट रहे हैं।'

संजय के मुताबिक इस समय बाजार में विश्वसनीय कंपनियों के प्रोडक्ट उपलब्ध नहीं हैं और इसी बीच कुछ लोग खराब सामान बाजार में ले आए हैं जिसे लोग खरीद तो रहे हैं लेकिन उनका कोई फायदा नहीं हो पाएगा। संजय कहते हैं, 'कालाबाजार में लोगों को किसी तरह सामान तो मिल रहा है, लेकिन उसकी वो क्वालिटी नहीं है। उसे सिर्फ पैसा कमाने के लिए बनाया गया है, उसका कोई रिजल्ट अच्छा नहीं है।

सबसे ज्यादा मांग ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की
संजय के मुताबिक इस समय बाजार में सबसे ज्यादा डिमांड ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की है, लेकिन अच्छी क्वालिटी के कंसंट्रेटर बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। वो बताते हैं, 'पहले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर ऐसे ही रखे रहते थे, महीनों भर में मुश्किल से हम दो सौ पीस बेच पाते थे। अब आप एक दिन में एक हजार बेच सकते हैं, बशर्ते आपके पास हो।'

इस भारी डिमांड की एक वजह ये भी है कि जिनके पास पैसे हैं वो बिना जरूरत के भी खरीद रहे हैं। संजय कहते हैं, 'यदि सिर्फ जरूरतमंद लोग ही बाजार से सामान खरीदें तब भी हालात कुछ बेहतर हो जाएं। पैसे वाले गैर जरूरतमंद लोग अधिक दाम पर भी खरीद रहे हैं और एक तरह से कृत्रिम मांग पैदा कर रहे हैं।' तीन पीढ़ियों से मेडिकल सप्लाई का काम करने वाले एक कारोबारी कहते हैं कि बाजार में कुछ कारोबारी इस समय लोगों की जरूरत का फायदा उठाने की फिराक में भी हैं।

अपना नाम न छापने की शर्त पर वो बताते हैं, 'दो महीने पहले मैंने चीन से अच्छी क्वालिटी के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बीस हजार रुपए प्रति पीस के दाम पर इंपोर्ट किए थे। पांच लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन देने वाले ये ऑक्सीजन कंसंट्रेटर इस दाम पर अब चीन से मिलना संभव नहीं हैं क्योंकि वहां के कारोबारी भी भारत की डिमांड को समझ गए हैं और कुछ कारोबारियों ने उनसे कम समय में हल्की क्वालिटी के प्रोडक्ट बनाने के लिए कहा है।'

वो कहते हैं, 'अभी जो बाजार में मांग है ये न कारोबारी के लिए अच्छी है न ग्राहक के लिए। कारोबारी को महंगा सामान खरीदना पड़ रहा है और ग्राहक को खराब क्वालिटी मिल रही है।' एक उदाहरण देते हुए वो बताते हैं, 'कई जगह एक लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन देने वाले कंसंट्रेटर बिक रहे हैं। इन पर एयर फ्लो 127 लिखा होता है जिसे लोग समझ लेते हैं कि ये इतनी ऑक्सीजन दे रहा है जबकि असल में ये एयरफ्लो है। एक लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन से किसी की जान नहीं बचने वाली है। हां, लोग दिल को दिलासा जरूर दे सकते हैं कि उन्होंने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर ख़रीदा।'

चीन से आयात करने वाले कई कारोबारियों ने भास्कर को बताया कि पानी के रास्ते आयात करने पर माल उन तक पहुंचने में कम से कम डेढ़ माह का समय लगता है। ऐसे में तुरंत सप्लाई संभव नहीं है। एक कारोबारी कहते हैं, 'चीन के निर्माता भी अब आसानी से ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। उन्होंने अपनी डिमांड भी बढ़ा दी है। कारोबारी पैसा भी नहीं फंसाना चाहते हैं क्योंकि अभी बाजार में मांग है, अगर दो महीने बाद नहीं हुई तो वो क्या करेंगे?'

ऑक्सीमीटर की क्वालिटी हुई डाउन
मेडिकल सप्लाई का काम करने वाले प्रवीण के मुताबिक बाजार में ऑक्सीमीटर खरीदने आने वाले अधिकतर लोग किसी कंपनी का नाम लिए बिना सिर्फ ऑक्सीमीटर ही मांगते हैं। प्रवीण कहते हैं, 'महामारी से पहले चीन से आने वाला ऑक्सीमीटर थोक में 200-250 रुपए तक का बिकता था। अभी ये 600-700 रुपए तक बिक रहा है और इस दाम पर भी आसानी से नहीं मिल रहा है।'

ऑक्सीमीटर इंपोर्ट करने वाले एक कारोबारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, 'हम पहले अच्छी क्वालिटी का ऑक्सीमीटर 550 रुपए में इंपोर्ट करते थे। यहां कारोबारी को उसे 600 रुपए में बेचते थे। लेकिन यहां के कुछ कारोबारियों ने चीन के निर्माताओं से कुछ सेंसर कम करने और कीमत घटाने के लिए कह दिया। चीन के निर्माताओं ने ऑक्सीमीटर की क्वालिटी गिरा दी। ये घटिया क्वालिटी के ऑक्सीमीटर दो सौ रुपए तक में मिल रहे थे। अब यही थोक बाजार में 600-700 में बिक रहे हैं।'

भास्कर को जानकारी देने वाले इस कारोबारी ने अब ऑक्सीमीटर इंपोर्ट करना बंद कर दिया है। वो कहते हैं, 'लोग पैसा कमाने के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। हमारे लिए अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट बेचना संभव नहीं रह गया था, क्योंकि बाजार में फर्जी ऑक्सीमीटर की भरमार हो गई थी। कारोबारियों को इस मुश्किल समय में सिर्फ पैसा कमाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि ये भी सोचना चाहिए कि जो प्रोडक्ट वो बेच रहे हैं उससे लोगों को फ़ायदा होगा या नहीं।'

मई के दूसरे सप्ताह में सामान्य हो सकते हैं हालात
भागीरथ पैलेस मार्केट के कारोबारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि मई के दूसरे सप्ताह तक बाजार में सामान उपलब्ध हो सकेगा। प्रवीण कहते हैं, 'सप्लायर ने भरोसा दिया है कि 5-6 मई तक माल मिल सकेगा। उम्मीद है कि कुछ सामान मिलेगा और ग्राहकों की डिमांड पूरी हो पाएगी।' डीडीटीए अध्यक्ष अनिल चुग का भी मानना है कि मई के पहले सप्ताह के अंत तक बाजार में सप्लाई बहाल हो पाएगी। जिन दूसरे कारोबारियों से भास्कर ने बात की उनका भी कहना था कि सप्लायरों ने उन्हें मई के दूसरे सप्ताह तक चीजें ठीक हो जाने का भरोसा दिया है।

इसी बीच चीन की सिचुआन एयरलाइन ने कहा है कि वह भारत के लिए रूट खोलने की योजना पर काम कर रही है। यदि चीन से इंपोर्ट शुरू हुआ तो जरूर हालात में कुछ सुधार आएगा। भारत में इस समय लोग एक लाख रुपए तक देकर ब्लैक मार्केट से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीद रहे हैं। कई शहरों में किसी भी कीमत पर ये उत्पाद उपलब्ध नहीं हैं। इसी बीच केंद्र सरकार पीएम केयर फंड से एक लाख ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीद रही है। ये उत्पाद अस्पतालों में पहुंचने के बाद जरूर कुछ राहत मिलेगी।

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