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भास्कर इंटरव्यूगुजरात में 80 सीटों पर सिमटेगी BJP:गुजरात के एक्स CM बोले, ‘आडवाणी से मिला तो वे रोने लगे, उन्हें इस्तेमाल कर फेंक दिया’

2 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

केशुभाई पटेल…शंकर सिंह वाघेला और नरेंद्र मोदी। एक दौर में ये तीनों करीबी दोस्त हुआ करते थे। तीनों का मकसद गुजरात की सत्ता में BJP को लाना था। 1995 में केशुभाई की लीडरशिप में ही पार्टी ने पहली बार गुजरात जीता।

PM मोदी तो केशुभाई को अपना राजनीतिक गुरु भी मानते रहे। जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब हर जीत के बाद केशुभाई का आशीर्वाद लेने उनके घर जाते थे। हालांकि 2020 में केशुभाई दुनिया को अलविदा कह गए।

2012 में ही उन्होंने BJP छोड़ खुद की पार्टी बना ली थी। शंकर सिंह वाघेला ने 1996 में BJP छोड़ दी थी। तब से अब तक वे राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, NCP और प्रजाशक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी का हिस्सा रह चुके हैं। इस चुनाव में वे किसी बड़े दल के साथ नहीं हैं, लेकिन BJP के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।

उन्होंने गुजरात के मौजूदा सिनेरियो से लेकर नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी तक पर भास्कर के साथ खुलकर बात की। पढ़िए और देखिए ये इंटरव्यू…

सवाल: आप दावा कर रहे हैं कि गुजरात में BJP चुनाव हार रही है, इसका आधार क्या है?
जवाब: BJP से लोगों का मोहभंग हो गया है, इसलिए पहले फेज में वोटिंग कम हुई। जो लोग बार-बार इनको वोट दे रहे थे, इस बार उन्होंने किनारा कर लिया। सेकेंड फेज में कांग्रेस ने OBC कार्ड भी खेला है।

सवाल: कांग्रेस तो पूरी ताकत से चुनाव लड़ते नजर भी नहीं आई। किस आधार पर उसकी जीत का दावा कर रहे हैं?
जवाब: 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी थी, तब इंदिरा गांधी से लेकर संजय गांधी तक सब हार गए थे। सरकार के खिलाफ माहौल होता है, तब कोई फैक्टर काम नहीं करता। कुछ ऐसा ही माहौल इस बार गुजरात में है। BJP इस चुनाव में ज्यादा से ज्यादा 80 सीटों तक पहुंच पाएगी।

सवाल: प्रधानमंत्री के रोड शो में बहुत भीड़ थी। मोदी फैक्टर तो इस बार भी चलता नजर आ रहा है?
जवाब: रोड शो में पब्लिक का आना अलग बात होती है। प्रधानमंत्री के काफिले के दौरान जानबूझकर एम्बुलेंस रोकी गई। वो पूरा इवेंट प्री-प्लांड था। ऐसे ही PM मोदी चुनाव के पहले मां का आशीर्वाद लेने पहुंच गए। चुनाव में ही मां क्यों नजर आती हैं? क्या जितनी बार गुजरात आते हैं, उतनी बार मां से मिलने जाते हैं? सब मार्केटिंग है। लोगों की भावनाओं को अपने पक्ष में करना चाहते हैं।

सवाल: आम आदमी पार्टी के चुनाव लड़ने का क्या असर देख रहे हैं?
जवाब:
अरविंद केजरीवाल मेहमान हैं और 5 दिसंबर को शाम 5 बजे मेहमान चले गए। इनका पूरा परिवार RSS की ही विचारधारा का है। कांग्रेस को हटाने के लिए केजरीवाल के साथ प्लानिंग की गई थी। वर्ना आप ही सोचिए आज तक उनकी पार्टी का लोकसभा में कोई सांसद क्यों नहीं है। पंजाब और दिल्ली में भी इन्हें जिताने में RSS ने मदद की।

सवाल: आपने PM मोदी को मौत का सौदागर कहा, क्यों?
जवाब:
वो तो मैंने सोनिया जी के बयान के रेफरेंस में कहा था। मौत का सौदागर मतलब गोधरा का 2002 का दंगा। गोधरा कांड में मारे गए लोगों की जली हुई लाशों को सफेद कपड़े में लपेटकर अहमदाबाद में शवयात्रा निकाली गई। ये कहा कि क्रिया की प्रतिक्रिया होगी। तो क्या आप हिसाब-किताब करेंगे। रक्षक ही भक्षक बन गए थे। मेरी जानकारी में तो मुसलमानों ने गोधरा का डिब्बा नहीं जलाया। उस समय हाउस में यह कहा गया कि क्रिया की प्रतिक्रिया होगी।

अमित शाह का जो बयान आया है कि 2002 में सबक सिखा दिया, वो साबित करता है कि इन लोगों ने हिंदू-मुसलमानों को मरवाया। इनके पास कोई मुद्दा नहीं है। ये BJP की फिलॉसफी नहीं थी।

सवाल: आप और PM मोदी कभी दोस्त हुआ करते थे, ऐसा क्या हुआ कि दुश्मनी हो गई? वजह क्या थी?
जवाब:
किसने कहा दुश्मनी हो गई। न कल थी न आज है और न कल होगी। जब कॉमन मैन को तकलीफ होगी तो मैं अपने पिताजी और बेटे के खिलाफ भी खड़ा रहूंगा। मेरी 25 साल में नरेंद्र मोदी से पांच बार बात हुई होगी। आखिरी बार दो-तीन साल पहले हुई थी। हमारी बात का मतलब यही है कि माताजी, पिताजी कैसे हैं। बच्चे कैसे हैं। बस यहीं तक। मैंने जिस दिन से BJP छोड़ी है, उस दिन से आज तक किसी से कोई कॉन्टैक्ट नहीं किया।

सवाल: ऐसा कहा जाता है कि आपके विरोध के कारण नरेंद्र मोदी को गुजरात छोड़ना पड़ा था?
जवाब:
BJP में जब हिसाब-किताब होता है तो वो सेंट्रल लीडरशिप और RSS के लोग ही करते हैं। मैंने कहा था कि इनके गुजरात में होने से प्रॉब्लम है। लीडरशिप को भी वो बात सही लगी होगी, इसलिए इन्हें दूसरे राज्यों में प्रचार का जिम्मा सौंपा गया।

सवाल: आप आडवाणी जी से कब मिले थे, उनसे क्या बात हुई थी ?
जवाब: 2016 में उनकी पत्नी कमला जी का निधन हो गया था, उसके बाद मैं उनसे मुलाकात करने गया था, क्योंकि मैंने उनके घर की रोटी खाई है। मैंने तब उन्हें कहा कि अभी मैं सिर्फ दुख में शामिल होने आया हूं, आप जो भुगत रहे हैं, उसकी कथा करने बाद में आऊंगा। ये सुनकर वे रोने लगे। उन्हें मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया।

मैं प्रधानमंत्री बनता तो उन्हें 6 महीने के लिए PM बनाता और 6 महीने के लिए राष्ट्रपति। उन्होंने पूरी जवानी और पूरी जिंदगी पार्टी को दे दी। वाजपेयी का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया, क्योंकि वाजपेयी का कद बहुत ऊंचा था। आडवाणी ने कभी RSS को ओवरटेक करने की कोशिश नहीं की। वाजपेयी तो RSS के खिलाफ भी लिख चुके थे।

सवाल: आडवाणी हमेशा चुप क्यों रहते हैं, मीडिया से भी कभी बात नहीं करते?
जवाब:
आप RSS को नहीं जानते। RSS के प्रचारक मर जाएंगे, तब भी कभी उसके खिलाफ नहीं बोलेंगे। इतनी ताकत सिर्फ अटलजी में थी। जोशी, गडकरी, राजनाथ सिंह किसी में हिम्मत नहीं है कि कोई RSS के खिलाफ बोल दे। आडवाणी जी से जब मैं इस बारे में बात कर रहा था तो वो हाथ मसलकर रोने लगे। बहुत दुखी हैं। उन्हें इस्तेमाल करके फेंका गया। उन्हें देखकर पीड़ा होती है।

82 साल के शंकर सिंह वाघेला करीब 45 साल से राजनीति में हैं। इस दौरान वे BJP, कांग्रेस और NCP में बड़े पदों पर रहे। विधायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री भी बने। अभी प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी के मुखिया हैं।

गुजरात और हिमाचल के एग्जिट पोल आ गए हैं, जानिए दोनों राज्यों में किसकी सरकार बन सकती है...
1. एग्जिट पोल में दावा- गुजरात में 7वीं बार BJP सरकार, AAP की झाड़ू नहीं दिखा पाई कमाल

गुजरात विधानसभा के दूसरे फेज की वोटिंग सोमवार को खत्म हो गई। 8 दिसंबर को गुजरात के साथ हिमाचल प्रदेश के चुनावी नतीजे आएंगे। सोमवार को आए एग्जिट पोल में गुजरात में 27 साल से सत्ता पर काबिज BJP रिकॉर्ड 7वीं बार सरकार बनाती दिख रही है। हिमाचल प्रदेश में BJP और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला है। आप दावों के मुताबिक कमाल करती नहीं दिखी।
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2. गुजरात में इस बार 5% कम वोटिंग, 5 विधानसभा चुनावों में 3 बार वोट प्रतिशत गिरा तो BJP की सीटें घटीं
गुजरात में इस बार फर्स्ट फेज में 60.86% और सेकेंड फेज में करीब 64% वोटिंग हुई है। पिछली बार गुजरात में 69.2% वोट पड़े थे। इस बार वोटिंग में करीब 5% गिरावट दिख रही है। बीते 5 में से 3 चुनावों में वोट प्रतिशत गिरने पर BJP को नुकसान और कांग्रेस को फायदा हुआ है। 2012 के चुनाव में वोट प्रतिशत 13% बढ़ा था इसके बावजूद BJP को दो सीटों का घाटा हुआ था।
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