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आज की पॉजिटिव खबर:कॉन्ट्रैक्ट पर स्विमिंग पूल लिया था, लॉकडाउन में पाबंदी लगी तो खेती शुरू की, पहले ही सीजन में 70 हजार रुपए का मुनाफा

बीकानेर2 वर्ष पहलेलेखक: अनुराग हर्ष

राजस्थान के श्रीगंगानगर के रहने वाले विजय शर्मा का जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा है। काम की तलाश में साल 2013 में वे बीकानेर आए। यहां इंजीनियरिंग कॉलेज के मैस को ठेके पर लिया। कुछ दिन काम किया फिर मन नहीं लगा तो छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने बीकानेर में ही सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज का स्विमिंग पूल कॉन्ट्रैक्ट पर लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि यहां अच्छी खासी संख्या में स्टूडेंट्स स्विमिंग करते हैं, तो धंधा खूब चलेगा। तीन साल तक सबकुछ बढ़िया चला भी, लेकिन पिछले साल उनका काम लॉकडाउन की भेंट चढ़ गया।

विजय का स्विमिंग पूल ऐसी जगह था, जहां कोरोना सबसे ज्यादा पसरा था। इसलिए इसे बंद करना पड़ा। विजय के लिए यह सेटबैक की तरह था। बड़ी जतन से उन्होंने स्विमिंग पूल में पैसे लगाए थे। लॉकडाउन की वजह से उन्हें कोई और काम भी नहीं मिल रहा था। इसी बीच उन्होंने अपने घर में ही खाली पड़ी जगह पर फूल के दो पौधे लगा दिए। कुछ दिनों बाद जब पौधे बड़े हो गए तो उन्होंने कुछ और प्लांट लगा दिए और उसे एक पार्क के रूप में तब्दील कर दिया। विजय को लगा कि जब वे महीने भर में इतने प्लांट्स तैयार कर सकते हैं तो खेती क्यों नहीं कर सकते?

कॉन्ट्रैक्ट पर जमीन ली और शुरू कर दी खेती

कोरोना की वजह से विजय का काम बंद हुआ तो उन्होंने घर में ही खाली पड़ी जगह में गार्डनिंग की शुरुआत की।
कोरोना की वजह से विजय का काम बंद हुआ तो उन्होंने घर में ही खाली पड़ी जगह में गार्डनिंग की शुरुआत की।

इसके बाद विजय ने बीकानेर के पास ही शोभासर में एक परिचित के खाली पड़े खेत को कॉन्ट्रैक्ट पर लिया और सरसों, काला गेहूं और चने की खेती शुरू की। विजय अकेले ही खेतों में काम करते और रात में उसकी रखवाली भी करते थे। पहले सीजन में ही अच्छी फसल हुई। विजय को ठीकठाक आमदनी हुई। इसके बाद उन्होंने अपनी खेती का दायरा बढ़ा दिया और अगले सीजन के लिए बीस बीघा जमीन कॉन्ट्रैक्ट पर ली। जिसमें सात बीघे में सरसों, चार बीघे में चना, तीन बीघे में तारामीरा और एक बीघे में गेहूं की खेती की। इससे उन्हें करीब 70 हजार रुपए का मुनाफा हुआ।

अब अनाज के साथ सब्जियों की खेती की शुरुआत
इस कामयाबी के बाद विजय ने पीछे देखना छोड़ दिया और खेती को ही करियर बना लिया। इस बार उन्होंने नग्गासर गांव में सत्तर बीघा खेत कॉन्ट्रैक्ट पर लिया है। जिसमें वे अभी अनाज के साथ सब्जियों की खेती करने का प्लान बना रहे हैं। वे कहते हैं कि इस सीजन में मैं मूली, टमाटर, ब्रोकली, पालक, धनिया, बैंगन जैसी सब्जियों की खेती करूंगा। इसके लिए उन्होंने तैयारी भी पूरी कर ली है और मार्केटिंग के लिए मंडियों में बात भी कर ली है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार वे तीन से चार लाख रुपए आसानी से मुनाफा कमाएंगे।

हाल ही में विजय ने 20 बीघे में खेती की है। जिसमें सरसों, गेहूं और चन्ने की फसल उन्होंने लगाई है।
हाल ही में विजय ने 20 बीघे में खेती की है। जिसमें सरसों, गेहूं और चन्ने की फसल उन्होंने लगाई है।

ये स्थायी काम है, बंद नहीं हो सकता
विजय कहते हैं कि स्विमिंग पूल के काम में पैसे तो बढ़िया थे, लेकिन काम स्थाई नहीं था। वह कभी भी बंद हो सकता था और बंद भी हो गया। अब मैं जो काम कर रहा हूं, वो स्थाई है। ये काम कभी बंद नहीं होगा बल्कि दिन-ब-दिन आगे ही बढ़ता जाएगा। वे कहते हैं कि अब आगे मुझे ऑर्गेनिक और साइंटिफिक तरीके से खेती करनी है। ताकि मुनाफा भी बढ़िया हो और लोगों को सही प्रोडक्ट भी खाने के लिए मिलें।

खेती में भी आमदनी है
विजय कहते हैं कि कई लोगों की ऐसी धारणा होती है कि खेती में लाभ नहीं है। अक्सर लोग अपनी खेती बाड़ी छोड़कर दूसरे शहर में कमाने के लिए निकल जाते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। अगर ठीक तरीके से खेती की जाए तो इसमें आमदनी भी है और सुकून भी। कोई भागमभाग नहीं है। खेत में जितनी फसल होती है, उससे अच्छी कीमत मंडी में मिल जाती है। वे कहते हैं कि सिंचाई के लिए भी नहर में पानी आता है, इसलिए कोई खास दिक्कत नहीं होती है।

अपने दोनों बच्चों के साथ विजय शर्मा। विजय के दोनों बच्चे भी खेती को एंज्वॉय कर रहे हैं।
अपने दोनों बच्चों के साथ विजय शर्मा। विजय के दोनों बच्चे भी खेती को एंज्वॉय कर रहे हैं।

नन्हे बच्चे भी कनेक्ट, पत्नी भी खुश
विजय का कहना है कि इस नए काम में उनकी पत्नी और बच्चे भी पूरा सहयोग करते हैं। बच्चे खेत में खूब मस्ती करते हैं। बच्चों का इससे लगाव हो गया है। घर के गार्डन को तो उन्हीं लोगों ने संवारा है। वे सुबह-शाम पानी डालते रहते हैं। वे कहते हैं कि बच्चों को खेती और प्रकृति से जोड़ना ही चाहिए।

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