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आज की पॉजिटिव खबर:नौकरी छोड़कर कैमल मिल्क का स्टार्टअप शुरू किया, अब 4 करोड़ है टर्नओवर; जानिए क्या है इसकी खासियत? कैसे कमा सकते हैं मुनाफा

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
हितेश राठी और श्रेय कुमार।

राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले हितेश राठी सिविल इंजीनियर थे। तीन साल तक उन्होंने अलग-अलग कंपनियों में कंस्ट्रक्शन के फील्ड में काम किया। बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर वे कुछ महीने म्यांमार में भी रहे। सैलरी भी अच्छी थी और काम भी बढ़िया था, लेकिन उन्हें सेल्फ सेटिस्फैक्शन नहीं मिल रहा था। वे खुद का कुछ करना चाहते थे। 2015 में वे राजस्थान वापस लौट आए और कैमल मिल्क (ऊंट का दूध) का स्टार्टअप शुरू किया। वे कैमल मिल्क से बने दो दर्जन से ज्यादा प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं। हर महीने 5 से 6 हजार ऑर्डर्स उनके पास आते हैं। पिछले साल 4 करोड़ रुपए उनका टर्नओवर रहा है।

राजस्थान की पहचान को देशभर में पहुंचाना चाहते थे

32 साल के हितेश बताते हैं कि दिल्ली में जॉब करने के दौरान अक्सर हम दोस्तों के साथ कैमल मिल्क के बिजनेस को लेकर चर्चा करते रहते थे, क्योंकि ऊंट हमारे राजस्थान की पहचान हैं। बीकानेर के इलाके तो इनका गढ़ हैं। इसलिए हम चाहते थे कि राजस्थान के प्राइड को देश के कोने-कोने तक ले जाएं, लेकिन तब हम लोग अपने-अपने प्रोजेक्ट में व्यस्त होने के चलते इसे लेकर कोई फाइनल डिसीजन नहीं ले पा रहे थे। जब मैं म्यांमार गया तो वहां मुझे इसको लेकर स्टडी करने का कुछ वक्त मिल गया। कुछ महीने मैंने इसके हेल्थ बेनिफिट्स और मार्केट को लेकर जानकारी जुटाई। इसके बाद मैं राजस्थान लौट आया।

हितेश अभी कैमल मिल्क से बने दो दर्जन से ज्यादा प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं।
हितेश अभी कैमल मिल्क से बने दो दर्जन से ज्यादा प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं।

डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने प्रोत्साहित किया

राजस्थान वापस आने के बाद हितेश ने अपने आइडिया को लेकर काम करना शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले डॉक्टरों से मुलाकात की और कैमल मिल्क के हेल्थ बेनिफिट्स को लेकर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने बीकानेर स्थित National Research Centre on Camel के वैज्ञानिकों से संपर्क किया और इसके बारे में जानकारी जुटाई। हितेश बताते हैं कि इन लोगों ने मेरी काफी मदद की और मुझे इस काम को शुरू करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

वे बताते हैं कि जब मैं लोगों से कैमल मिल्क के बारे में चर्चा करता था, तो ज्यादातर लोग इससे परिचित नहीं थे। जो लोग इसकी खूबियां जानते थे, उनके पास इसकी उपलब्धता मुश्किल थी। तब कैमल मिल्क और इससे बने ज्यादातर प्रोडक्ट दूसरे देशों से आते थे। इन लोगों ने मेरे प्लान के बारे में जानने के बाद काफी पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया और कहा कि अगर आप शुरू करें तो हम आपके प्रोडक्ट खरीदेंगे। इससे मेरा मनोबल बढ़ा और लगा कि इस काम को प्रोफेशनली शुरू किया जा सकता है।

जैसे-जैसे डिमांड बढ़ी, प्रोडक्ट की वैरायटी बढ़ाते गए

इसके बाद हितेश ने बीकानेर के कुछ किसानों से बात की, जो ऊंट रखते थे। उन्हें अपना प्लान समझाया। ये लोग ट्रांसपोर्ट के माध्यम से हितेश के पास कैमल मिल्क भेजने के लिए तैयार हो गए। फिर 2016 में उन्होंने दिल्ली में Aadvik Foods नाम से खुद की कंपनी रजिस्टर की। और इस तरह उनके स्टार्टअप की शुरुआत हुई। हितेश शुरुआत में अकेले ही मिल्क कलेक्शन, प्रोसेसिंग और डिलीवरी का काम करते थे। वे वेबसाइट, सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से ऑर्डर लेते थे। जब धीरे-धीरे उनके कैमल मिल्क की डिमांड बढ़ने लगी तो उन्होंने एक और आदमी को अपने साथ रख लिया। इससे उन्हें मिल्क कलेक्शन और डिलीवरी में थोड़ी सहूलियत हो गई। अभी उनके साथ 50 लोगों की टीम काम करती है।

वे कहते हैं कि जब हमें मार्केट से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा तो हमने नए प्रोडक्ट तैयार करने शुरू किए। हमने लिक्विड मिल्क के साथ ही मिल्क पाउडर भी लॉन्च किया। इससे हमें बढ़िया ग्रोथ मिला। इसका एक फायदा ये भी हुआ कि ये जल्दी खराब नहीं होता। इस तरह एक के बाद एक हम नए प्रोडक्ट लॉन्च करते गए। अभी हितेश और उनकी टीम कैमल मिल्क से बने दो दर्जन से ज्यादा प्रोडक्ट तैयार कर रही है। इसमें मिल्क पाउडर, घी, चॉकलेट्स, फ्लेवर्ड मिल्क और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट शामिल हैं।

कैसे करते हैं काम?

हितेश बताते हैं कि उन्होंने अपनी टीम को कई डिपार्टमेंट में बांट रखा है। एक टीम राजस्थान और गुजरात के अलग-अलग हिस्सों से मिल्क कलेक्शन का काम करती है। दूसरी टीम उनकी स्टोरेज का काम करती है। तीसरी टीम उस मिल्क को प्रोसेसिंग यूनिट के पास ले जाती है, जहां अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट तैयार होते हैं। उसके बाद ट्रांसपोर्ट के माध्यम से सभी प्रोडक्ट को उनके मेन ऑफिस दिल्ली पहुंचाया जाता है। और यहां से ये प्रोडक्ट ऑर्डर्स के मुताबिक देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजे जाते हैं। हितेश बताते हैं कि औसतन हर दिन 200 तक ऑर्डर हमारे पास आ जाते हैं। दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े राज्यों के साथ ही अमेरिका और मलेशिया में भी वे अपने प्रोडक्ट की सप्लाई कर रहे हैं।

किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर करते हैं पैसे

हितेश की टीम के साथ 100 से ज्यादा किसान जुड़कर अपनी कमाई कर रहे हैं। बीकानेर के रहने वाले एक किसान बलराम बताते हैं कि पहले उनके ऊंट ऐसे ही इधर-उधर घूमते रहते थे, लेकिन जब से वे इस काम से जुड़े हैं, उन्हें अच्छी कमाई हो रही है। वे बताते हैं कि पैसे सीधे हमारे खाते में आते हैं। पहले 5-10 ऊंट थे हमारे पास, लेकिन अब 25 से 30 ऊंट हैं हमारे पास। बलराम की तरह राजस्थान और गुजरात के दूसरे किसानों को भी इससे अच्छी कमाई हो रही है।

कैसे और किन चीजों में इसका इस्तेमाल करें?

सबसे पहले एक ग्लास में गर्म पानी रख लें। इसमें दो चम्मच कैमल मिल्क पाउडर डालकर उसे अच्छी तरह से मिला लें। अब आप इसका सेवन कर सकते हैं। बच्चों के लिए 100 से 200ML दूध का सेवन आइडियल माना जाता है। इसके साथ ही इसका इस्तेमाल कॉफी, चाय, स्मूदी, सॉस, सूप, मैक एंड चीज, पैनकेक और वैफल्स बनाने में किया जा सकता है। इसके अलावा इसकी मदद से पनीर, योगर्ट और बटर भी बनाया जा सकता है।

कैमल मिल्क के साथ दिक्कतें

कैमल मिल्क के साथ सबसे बड़ी परेशानी यह है कि यह बाकी मिल्क की तुलना में महंगा होता है। 200ML के पाउडर की कीमत करीब 500-600 रुपए के बीच होती है। अगर क्वालिटी अच्छी हो तो 1000 रुपए तक कीमत हो सकती है। दूसरी परेशानी यह है कि इसे स्टोर करना भी मुश्किल टास्क होता है, क्योंकि यह बहुत जल्द खराब होता है। हालांकि अब प्रोसेसिंग के बाद काफी हद तक ये परेशानी कम हुई है।

स्टार्टअप के लिए उभरता हुआ सेक्टर है ये

कैमल मिल्क के बिजनेस से अच्छी कमाई हो सकती है। देश में इस तरह के कई स्टार्टअप चल रहे हैं। हालांकि भारत में अभी इसका मार्केट ज्यादा डेवलप नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल ग्लोबल कैमल इंडस्ट्री की वैल्यू 2.3 बिलियन डॉलर थी। आने वाले सालों में इसमें और अधिक इजाफा होगा। भारत में राजस्थान और गुजरात में सबसे ज्यादा ऊंट पाए जाते हैं। कैमल मिल्क से अभी हेल्थ, ब्यूटी और कॉस्मेटिक, आइसक्रीम, कॉफी सहित कई प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं।

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